एक स्वामी जो मेरा कभी संपादक हुआ करता था यानी माधवकांत मिश्र
नागेंद्र प्रताप
एक ऐसा स्वामी जो मेरा कभी सम्पादक हुआ करता था यानी माधवकांत मिश्र। वह कोई और नहीं, बल्कि अपने जमाने के मशहूर...
आलोक तोमर को कुछ इस तरह याद किया हरीश पाठक ने
आलोक तोमर का जन्मदिन 27 दिसंबर को था। उनके जन्मदिन पर वरिष्ठ कहानीकार हरीश पाठक ने टिप्पणी लिखी। आलोक तोमर अब नहीं रहे। लेकिन...
हिंदी पत्रकारिता के पितामह गणेश शंकर विद्यार्थी ने दी थी सीख
प्रवीण बागी
हिंदी पत्रकारिता के पितामह गणेश शंकर विद्यार्थी ने अपने अखबार प्रताप के पहले अंक में पत्रकारिता की अवधारणा प्रस्तुत की थी। वह...
मुझे रात-दिन ये ख्याल है, वो नजर से मुझको गिरा न दे…
वीर विनोद छाबड़ा
मुझे रात-दिन ये ख्याल है, वो नजर से मुझको गिरा न दे...अभिनेत्री नाजिमा का यह गीत जिसने भी सुना होगा, उसे...
प्रवासियों के प्रति अस्पृश्यता को याद रखेगा इतिहास…..
सुशील मिश्रा
प्रवासियों के प्रति अस्पृश्यता को इतिहास भी याद रखेगा। सड़कों पर प्रवासियों के प्रति जो अस्पृश्यता दिख रही, उसकी कल्पना प्रवासियों ने...
महिलाएं कुम्हड़ा क्यों नहीं काटतीं, क्या आप यह जानते हैं?
कुम्हड़ा आमतौौर पर पुरुष ही काटते हैं। साबूत कुम्हड़ा औरतें नहीं कभी नहीं काटतीं। आइए, जानते हैं ऐसा क्यों होता है।
रामधनी द्विवेदी
इस बार...
सोशल मीडिया पर घूम रहीं ऐसी खबरें चकित करती हैं!
गोपेश्वर सिंह
सोशल मीडिया पर अखबारों की यह खबर घूम रही है कि बिहार के पूर्व डीजीपी अभयानंद भूमिहार जाति के 100 निर्धन बच्चों...
बंदूक व कलम की जुगलबंदी का नाम है मन्मथनाथ गुप्त
जयंती पर विशेष
नवीन शर्मा
आमतौर पर बंदूक व कलम को दो विपरीत ध्रुव मानी जाती हैं। इन दोनों से ही तालमेल बना कर जिस...
रामदेव शुक्लः व्याख्यात्मक आलोचना के अंतिम स्तंभ
रामदेव शुक्ल व्याख्यात्मक आलोचना के अंतिम स्तंभ हैं। ‘बिहारी- सतसई का पुनर्पाठ’ उनकी नवीनतम प्रकाशित आलोचना-कृति है। वे अच्छे कथाकार भी हैं। ‘बिहारी- सतसई...
मोतिहारी में पैदा हुए थे मशहूर विदेशी लेखक जार्ज ओरवेल
21 जनवरी पुण्यतिथि पर विशेष
नवीन शर्मा
विश्व साहित्य में अंग्रेजी के प्रसिद्ध उपन्यास 1984 व एनिमल फार्म विशिष्ट स्थान रखते हैं। इन कालजयी किताबों...




















