बिरसा मुंडा को भारतीय इतिहास में स्थान मिलना ही चाहिए। वह स्थान सम्मानजनक होगा या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि 70 लाख आदिवासियों के साथ आप किस तरह से पेश आते हैं।

बिरसा मुंडा को भारतीय इतिहास में स्थान मिलना ही चाहिए

बिरसा मुंडा को भारतीय इतिहास में स्थान मिलना ही चाहिए। वह स्थान सम्मानजनक होगा या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि 70...
भारत यायावर

रेणु का है अंदाज-ए-बयां और के रचनाकार हैं भारत यायावर 

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गौरीशंकर सिंह "रेणु का है अंदाज-ए-बयाँ और" पूर्णिया में आरएन शॉ चौक से सटे लालमणि पुस्तक भंडार में दिखी। मेरी नजर एक पुस्तक पर...
पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर को याद करते हुए। बलिया से उठा, बुलन्दी छू गया। ठेठ, खुद्दार, गंवई अक्स, खादी की सादगी में मुस्कुराता चेहरा। अब नही दिखेगा।

पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर को उनकी पुण्यतिथि पर याद करते हुए

Chanchal Bhu पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर को याद करते हुए। बलिया से उठा, बुलन्दी छू गया। ठेठ, खुद्दार, गंवई अक्स, खादी की सादगी में मुस्कुराता...

जयंती पर विशेषः कैप्टन से कामरेड बनीं लक्ष्मी सहगल को सलाम

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नवीन शर्मा आजाद हिंद फौज की कैप्टन लक्ष्मी सहगल उन बेमिसाल क्रांतिकारी महिलाओं में शामिल थीं, जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया।...

बर्थ डे स्पेशलः मैं पल दो पल का शायर हूं के कलमकार साहिर

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नवीन शर्मा अमिताभ बच्चन की फिल्म कभी-कभी का गीत मैं पल दो पल का शायर हूं हम में से कई लोग गुनगुनाते हैं। यह...
कृपाशंकर चौबे डॉ. अम्बेडकर ने चार फरवरी 1956 को साप्ताहिक ‘प्रबुद्ध भारत’ निकाला। हर अंक में पत्रिका के शीर्ष की दूसरी पंक्ति में लिखा होता था- डा. अम्बेडकर द्वारा प्रस्थापित।

डॉ. अम्बेडकर ने ‘प्रबुद्ध भारत’ निकाला और समाज में एकता पर दिया जोर

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कृपाशंकर चौबे डॉ. अम्बेडकर ने चार फरवरी 1956 को साप्ताहिक ‘प्रबुद्ध भारत’ निकाला। हर अंक में पत्रिका के शीर्ष की दूसरी पंक्ति में लिखा...
फिल्म अभिनेत्री माला सिन्हा

कभी परदे पर धूम मचाने वाली अभिनेत्रियों में शुमार थीं माला सिन्हा

वीर विनोद छाबड़ा  कभी परदे पर धूम मचाने वाली अभिनेत्रियों में माला सिन्हा का नाम बड़े चाव से लिया जाता था। उन्होंने खुद को...
सुरेंद्र किशोर, वरिष्ठ पत्रकार

हिंसा के कारण हर साल 80 लाख करोड़ का नुकसान

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एक बात की कल्पना कीजिए। यदि केंद्र सरकार अपने प्रत्येक कर्मचारी के वेतन में से हर साल चार हजार रुपए की भी कटौती करने...
आपातकाल-पीड़ित लोगबाग हर साल इमरजेंसी की वर्षगांठ मनाते हैं। मनाना जरूरी भी है। क्योंकि 25 जून  1975 को इमरजेंसी लगाकर पूरे देश को एक बड़े जेलखाना में बदल दिया गया था।

इमरजेंसी के इस दौर को कवियों ने भी अपने नजरिये से देखा, खूब रचा

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इमरजेंसी 25 जून 1975 को लागू हुई। 21 माह (1975-1977) तक रही। इमरजेंसी के इस दौर को कवियों ने भी अपने नजरिये से देखा...
जवाहर लाल नेहरू के आखिरी कुछ दिन काफी द्वंद्व के रहे। नास्तिक नेहरू अंतिम महीनों में आस्था और अनास्था के दरम्यान डोल रहे थे।

पंडित जवाहर लाल नेहरू को मैंने कभी नहीं देखा!

शंभूनाथ शुक्ल  पंडित जवाहर लाल नेहरू को मैंने कभी नहीं देखा! नेहरू जी जिस दिन मरे, उसी दिन मेरा रिजल्ट आया था। मैं पाँचवीं...