अरुण कमल गहरे अर्थ में प्रतिबद्ध कवि, बेहतर जीवन की आकुलता
कृपाशंकर चौबे
अरुण कमल गहरे अर्थ में प्रतिबद्ध कवि हैं और उनकी प्रतिबद्धता की जड़ें ठेठ भारतीय आबोहवा और जमीन में हैं। जो सामने...
अनय यानी प्रो. कृष्ण चन्द्र पाण्डेय को जानिए, कौन थे
अनय यानी प्रो. कृष्ण चन्द्र पाण्डेय। हिन्दी के एक प्रतिष्ठित व्यंग्य-लेखक, साहित्यकार और पत्रकार, जो पाठकों के बीच अनय नाम से परिचित थे। ‘तीसरा विभाजन’...
राष्ट्रद्रोह पर 1962 में सुप्रीम कोर्ट का एक महत्वपूर्ण निर्णय
राष्ट्रद्रोह पर 1962 में सुप्रीम कोर्ट का एक महत्पूर्ण निर्णय आया था, जिसमें कहा गया कि राष्ट्रद्रोह उसे माना जाएगा, जिससे समाज में हिंसा...
मोरारजी देसाई खुद का बैठकखाना यानी घर नहीं बनवा सके थे
मोरारजी देसाई की पुण्यतिथि पर
सुरेंद्र किशोर
मोरारजी देसाई खुद का बैठकखाना यानी घर नहीं बनवा सके थे, क्योंकि वेतन के पैसों से घर बनाना...
‘अहवा’ भगाने की लुकाठी से असमय दीपावली के टोटके तक
'अहवा' भगाने की लुकाठी से असमय दीपावली के टोटके तक की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर डीयू के प्रोफेसर गोपेश्वर सिंह ने एक...
हरिवंश ने अपने दायित्वों का निर्वाह किया, शोध रिपोर्ट में दावा
हरिवंश ने राज्यसभा के उपासभापति की हैसियत से कृषि विधेयक पारित करने के दौरान जो कदम उठाया, उसे एक शोध रिपोर्ट में उचित ठहराया...
हिंदी साउथ वाले भी सीखना चाहते हैं, विरोध राजनीतिक है
उमेश चतुर्वेदी
हिंदी साउथ वाले भी सीखना चाहते हैं, विरोध राजनीतिक है। जिस तमिलनाडु में इसका विरोध हो रहा, वहां के नेता भी हिंदी...
क्या आप जानते हैं कि चर्चित साहित्यकार मुद्राराक्षस भी चुनाव लड़े थे
नागेन्द्र
क्या आप जानते हैं कि चर्चित साहित्यकार मुद्राराक्षस भी चुनाव लड़े थे और तमाम लहर और सहयोग के बावजूद 1200 वोटों से संतोष करना पड़ा।...
गांधी जी ने पत्रकार के रूप में भी कुछ अलग प्रयोग किये
शेष नारायण सिंह
गांधी जी को पत्रकार के रूप में तो पूरी दुनिया जानती है, उस विषय पर बातें भी बहुत हुई हैं। गांधी...
पाहन ला देवहु दस रुपया, नहीं दिया तो जान पर आफत आ गयी
मंगलेश तिवारी मुफलिस
पाहन ला देवहु, दस रूपया। नहीं दिया तो जान पर आफत आ गयी। किसी तरह 50 रुपये दंड और 100 रुपये...




















