राहत पैकेज में कितनी राहत! लाक डाउन-3 के अंत समय में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 5.94 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज-2 का ब्यौरा पेश किया। इसे विस्तार से समझा रहे वरिष्ठ पत्रकार श्याम किशोर चौबे

कोरोना का खतरा- कहीं श्रम सस्ता होगा तो कहीं श्रमिक बंधक बनेंगे

कोरोना का खतरा दिख रहा है। इससे कहीं श्रम सस्ता होगा तो कहीं श्रमिक बंधक बनने को विवश होंगे। कोरोना के कारण लाक डाउन...

मिसेज इंडिया यूनिवर्स में मिसेज हम्बल बनीं बिहार की सपना

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पटना। बुरा वक्त तो सबका आता हैं। कोई बिखर जाता है, कोई निखर जाता है। वक्त सबको मिलता है जिंदगी बदलने के लिये। जिंदगी...

मलिकाइन के पाती- भइल बियाह मोर, कर ब का

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पावं लागीं मलिकार। दसईं (दशहरा) बीतल, बीस दिन बाद देवराई (दीपावली) आ ओकरा बाद छठ के संगे तेवहार के सीजन ओरा जाई। ए मलिकार,...
कोरोना की पहुंच पेट के बाहर तक ही नहीं रही, पैठ अंदर तक हो गई है। कोरोना साथ लिए आ रहे हैं शिशु। ऐसे में सहज सवाल- कौन है कोरोना से सुरक्षित? पढ़िए, कोरोना डायरी की इक्कीसवीं किस्त वरिष्ठ पत्रकार डॉ. संतोष मानव की कलम से।

कोरोना डायरीः इन्हें डायन कोरोना ने नहीं, नियति ने मारा है !

शुक्रवार को रेल की पटरियों पर सोये जो 16 मजदूर कट-मर गए, उन्हें कोरोना ने नहीं नियति ने मारा है। ये इसलिए मरे, क्योंकि...

कुमार कालिका सिंह ने जलाई थी स्वतंत्रता संग्राम की मशाल

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राज घराने से ताल्लुक रखने वाले कालिका हीरा जी के नाम से रहे मशहूर पकड़े जाने पर कुमार कालिका ने न्यायालय में ऐसा...
टीवी चैनेल और अखबार से लोग अब परहेज क्यों करने लगे हैं। सच तो यह है कि क्यों कोई टीवी खोले और प्रायोजित खबरें-तस्वीरें देखे। यही मूल वजह है।

टीवी चैनेल और अखबार से लोग अब परहेज क्यों करने लगे हैं !

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अमित प्रकाश सिंह टीवी चैनेल और अखबार से लोग अब परहेज क्यों करने लगे हैं। सच तो यह है कि क्यों कोई टीवी खोले...

संगीतकारों की पहली पसंद होती थीं श्यामा, हर रोल में फिट रहीं

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वीर विनोद छाबड़ा  आज की पीढ़ी ने यक़ीनन गुज़रे दौर की नेत्री श्यामा को नहीं देखा होगा। वो संगीतकारों की पहली पसंद होती...
केंद्र सरकार के हालिया एक फैसले से निजी क्षेत्र के कामगारों पर ‘कोरोना’ संकट का खतरा मंडरा रहा है। केंद्र सरकार ने डीए की किश्तें रोकने का फैसला किया है।

केंद्र के डीए रोकने के फैसले से निजी क्षेत्र के कामगारों पर मंडराता खतरा

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केंद्र सरकार के हालिया एक फैसले से निजी क्षेत्र के कामगारों पर ‘कोरोना’ संकट का खतरा मंडरा रहा है। केंद्र सरकार ने डीए की...
आपातकाल-पीड़ित लोगबाग हर साल इमरजेंसी की वर्षगांठ मनाते हैं। मनाना जरूरी भी है। क्योंकि 25 जून  1975 को इमरजेंसी लगाकर पूरे देश को एक बड़े जेलखाना में बदल दिया गया था। 23 मार्च 1977 को ही इसे समाप्त किया जा सका था, जब लोकसभा के आम चुनाव के बाद मोरारजी देसाई की सरकार बनी।

इमरजेंसी में बड़े नेताओं, साहित्यकारों, पत्रकारों को यातनाएं भी दी गयीं

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इमरजेंसी के दौरान बड़े नेताओं, साहित्यकारों, पत्रकारों को जेलों में ठूंस दिया गया। उन्हें कई तरह की शारीरिक और मानसिक यातनाएं दी गयीं। यह...
तेजस्वी यादव

RJD सवर्णों को साधने में जुटा, भूराबाल से किया किनारा

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पटना। बिहार फिलहाल दलित-पिछड़े और सवर्ण राजनीति के घनचक्कर में फंसा है। दलितों के प्रति लगभग सभी दलों का झुकाव हाल के दिनों में...