नहीं भूलती इमरजेंसी में विपक्षी नेताओं पर पुलिस की पहरेदारी

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25 जून, 1975 को जब देश में आपातकाल लगा तो उस समय जार्ज फर्नांडीस ओडिशा में थे। अपनी पोशाक बदल कर जुलाई में जार्ज...

मलिकाइन के पाती- जइसन देवता, ओइसन पूजा

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पावं लागीं मलिकार। हम एतना जल्दी पाती पठावे ना चाहत रहनी हां, बाकिर मन खौंजिया गइल रहल हा। एही से तीने दिन बाद पाती...

जयंती पर नमनः अदभुत अविस्मरणीय अब्दुल कलाम

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नवीन शर्मा एपीजे अब्दुल कलाम सबसे यूनिक किस्म के राष्ट्रपति थे। रामेश्वर के छोटे से शहर के एक साधारण से मुस्लिम परिवार में जन्में...

भगवान शिव सबको इतने नीक क्यों लगते हैं?

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शिव क्यों नीक लगते हैं? सोचा कभी कि शिव-भक्त क्यों विष्णु-द्रोही होते हैं? सारे असुर, रावण से लेकर! युगों पूर्व शैव तथा वैष्णव झगड़ते...

अच्छे शिक्षकः बैकुण्ठ बाबू के कारण एकमा स्कूल का बड़ा नाम था

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सुरेंद्र किशोर सन् 1963 में बिहार के सारण जिले के एकमा स्थित अलख नारायण सिंह उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य बैकुण्ठ नाथ सिंह को ...
कांधार कांड

कांधार कांड को ले भाजपा पर लांछन लगा रहे राहुल गांधी

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के. विक्रम राव, वरिष्ठ पत्रकार पुलवामा के खलनायक क्रूर आतंकी मोहम्मद अजहर मसूद को सुरक्षित कंधार तक पहुँचाने का राष्ट्रघातक गुनाह तो अटल-नीत भाजपा...
इमरजेंसी के दौर को समझने के लिए कविताएं, गजल आदि तो अहम दस्तावेज हैं हीं, उस दौर में जेल में लिखी गयीं डायरियां सबसे प्रामाणिक स्रोत हैं।

इमरजेंसी के दौर को समझने के लिए जेल डायरियां प्रामाणिक स्रोत हैं

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हरिवंश इमरजेंसी के दौर को समझने के लिए कविताएं, गजल आदि तो अहम दस्तावेज हैं हीं, उस दौर में जेल में लिखी गयीं डायरियां...
मोरारजी देसाई सीएम से पीएम तक रहे, पर अपने लिए कोई मकान तक नहीं बनवाया। अंतिम दिनों में वे किराए के मकान में थे। कोई संपत्ति खड़ी नहीं की।

मोरारजी देसाई खुद का बैठकखाना यानी घर नहीं बनवा सके थे

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मोरारजी देसाई की पुण्यतिथि पर सुरेंद्र किशोर मोरारजी देसाई खुद का बैठकखाना यानी घर नहीं बनवा सके थे, क्योंकि वेतन के पैसों से घर बनाना...
वर्ष 1974 की तारीख 5 जून. यही वह दिन था, जब जयप्रकाश नारायण (जेपी) ने पटना के गांधी मैदान में दो शब्दों- संपूर्ण क्रांति का नारा दिया था.

जयप्रकाश नारायण ने जब रेणु से साहित्यिक सहयोग मांगा

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प्रस्तुतिः गोपेश्वर सिंह जयप्रकाश नारायण (जेपी) ने फणीश्वर नाथ रेणु से एक बार साहित्यिक सहयोग मांगा था। इसके लिए जयप्रकाश जी ने रेणु को...
आर्थिक उदारीकरण ने आपको वेतन-पैकेज लाख-करोड़ रुपये तो दिये, लेकिन ये पैसे बाजार के रास्ते फिर पूंजीपतियों के पास ही पहुंच गये। इसे कोई नहीं समझा।

आर्थिक उदारीकरण ने पैकेज तो दिये, पर बाजार के रास्ते ले लिये

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आर्थिक उदारीकरण ने आपको वेतन-पैकेज लाख-करोड़ रुपये तो दिये, लेकिन ये पैसे बाजार के रास्ते फिर पूंजीपतियों के पास ही पहुंच गये। इसे कोई...