आधुनिक राजनीति इसे ही कहते हैं, जिसमें देश कहीं नहीं है
आधुनिक राजनीति इसे ही कहते हैं, जिसमें देश कहीं नहीं है। बांग्लादेशी घुसैठ की समस्या आज नासूर बनी है और इसके निदान की कोशिश...
आलोक तोमर को कुछ इस तरह याद किया हरीश पाठक ने
आलोक तोमर का जन्मदिन 27 दिसंबर को था। उनके जन्मदिन पर वरिष्ठ कहानीकार हरीश पाठक ने टिप्पणी लिखी। आलोक तोमर अब नहीं रहे। लेकिन...
राहत पैकेज में कोरोना से बाहर निकलकर आगे की सोच दिखती है
श्याम किशोर चौबे
राहत पैकेज में कोरोना संक्रमण काल के दौरान उत्पन्न अप्रत्याशित आर्थिक संकट से उबरने के लिए दूरगामी सोच का स्पष्ट दर्शन...
जुगनू शारदेय नहीं रहे, सोशल मीडिया पर छायी निधन की सूचना
जुगनू शारदेय चले गये। अपने जमाने के नामी पत्रकार। स्वाभीमानी और संयत. अंतिम दिनों में उनका अकेलापन, उनके जाने से दुखी नहीं करता। इसलिए...
मीडिया हाउस प्रधानमंत्री की अपील के बाद भी संवेदना नहीं दिखा रहे !
जरूरी संसाधन तक नहीं दिए रिपोर्टर-कैमरामैन को
ट्रांसफर कर नौकरी छोड़ने का बना रहे हैं ये दबाव
मीडिया हाउस प्रधानमंत्री की अपील के बाद...
फाइटर संदीप सिंह के जज्बे की दास्तान सुनाती है सूरमा
आज भले ही क्रिकेट हमारे देश का सबसे लोकप्रिय खेल बन गया है, लेकिन हमारा राष्ट्रीय खेल तो हॉकी ही है। हॉकी में भारत...
पी.एफ.आई. पर अब इस देश को अपना रुख तय करना होगा
सुरेंद्र किशोर
पी.एफ.आई. (पापुलर फ्रंट आफ इंडिया) पर नजर रखिए। उसके प्रकट और छिपे इरादों को समझिए। इसकी वजह समझा रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार...
मुझे रात-दिन ये ख्याल है, वो नजर से मुझको गिरा न दे…
वीर विनोद छाबड़ा
मुझे रात-दिन ये ख्याल है, वो नजर से मुझको गिरा न दे...अभिनेत्री नाजिमा का यह गीत जिसने भी सुना होगा, उसे...
ट्रेनों की लेटलतीफी पर रेल मंत्री का नया शिगूफा
बैलगाड़ियों के भारी लेट चलने और उससे सरकार को फजीहत से बचाने के
लिए अब रेल मंत्री पीयूष गोयल ने नया पैंतरा चला है कि मरम्मत...
विनोद खन्ना कद-काठी से अमिताभ बच्चन पर भारी पड़ते थे
नवीन शर्मा
विनोद खन्ना अपने दौर के सबसे स्मार्ट और हैंडसम अभिनेता रहे हैं। अभिनय में भले ही अमिताभ उन पर भारी पड़ते हों,...




















