कोरोना की पहुंच पेट के बाहर तक ही नहीं रही, पैठ अंदर तक हो गई है। कोरोना साथ लिए आ रहे हैं शिशु। ऐसे में सहज सवाल- कौन है कोरोना से सुरक्षित? पढ़िए, कोरोना डायरी की इक्कीसवीं किस्त वरिष्ठ पत्रकार डॉ. संतोष मानव की कलम से।

कोरोना संक्रमण शहरों से बढ़ा अब गांवों की ओर……

डॉ. संतोष मानव कोरोना संक्रमण शहरों से अगर गांवों तक पहुंच गया, तो क्या होगा? हाहाकार और क्या? इस हाहाकार के लक्ष्ण दिखने भी...
साहित्यकारों में आपसी सौहार्द का प्रतीक है, फणीश्वर नाथ रेणु व सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय का संबंध

साहित्यकारों में आपसी सौहार्द का प्रतीक है, अज्ञेय व रेणु का संबंध

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साहित्यकारों में आपसी सौहार्द्र का प्रतीक है, अज्ञेय और रेणु का यह संबंध। फणीश्वर नाथ रेणु के प्रति अज्ञेय के मन में काफी सम्मान...

बिहार में तन गईं हैं सियासी तलवारें, बस अब वार का है इंतजार

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बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के अंदर सब कुछ ठीकठाक नहीं है। हाल के दिनों में कई ऐसे संकेत मिले हैं, जिससे यह...
जश्न मनाइए कि आप कोरोना काल के साक्षात गवाह हैं। जश्न मनाइए कि शराब की बोतलें लूटने नहीं, किसी भी कीमत में खरीदने के लिए आप पुलिस की गालियां-लाठियां खाने को भी तैयार-तत्पर हैं।

जश्न मनाइए कि आप कोरोना काल के साक्षात गवाह हैं

श्याम किशोर  चौबे जश्न मनाइए कि आप कोरोना काल के साक्षात गवाह हैं। जश्न मनाइए कि शराब की बोतलें लूटने नहीं, किसी भी कीमत में...
फिल्म अभिनेत्री माला सिन्हा

कभी परदे पर धूम मचाने वाली अभिनेत्रियों में शुमार थीं माला सिन्हा

वीर विनोद छाबड़ा  कभी परदे पर धूम मचाने वाली अभिनेत्रियों में माला सिन्हा का नाम बड़े चाव से लिया जाता था। उन्होंने खुद को...
आलोक तोमर अपनी पत्नी को बेहद प्यार करते थे। शादी से पहले सुप्रिया के प्रति उनके प्रेम के कई किस्से हैं। आलोक तोमर के ऐसे किस्से सामने आये हैं।

आलोक तोमर की याद: अब यहॉं कोई नहीं है, सिर्फ पत्ते डोलते हैं

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आलोक तोमर ने इंडियन एक्सप्रेस घराने के अखबार जनसत्ता के शुरुआती दिनों में अपनी रिपोर्ट से धमाल मचा दिया था। खासकर सिख दंगों की...
फणीश्वरनाथ रेणु का कथा संसार दो भिन्न भारतीय स्‍वरूपों के बीच खड़ा है। प्रेमचंद के बाद फणीश्‍वर नाथ रेणु को आंचलिक कथाकार माना गया है।

साहित्य अकादेमी पर फणीश्वरनाथ रेणु के विचार जानिए! 

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भारत यायावर  साहित्य अकादेमी पर फणीश्वरनाथ रेणु के स्पष्ट विचार थे। 1973 में साहित्य अकादेमी का उन्हें सदस्य बनाया गया था। उन्होंने अनुभव के...
जुगनू शारदेय चले गये। अपने जमाने के नामी पत्रकार। स्वाभीमानी और संयत. अंतिम दिनों में उनका अकेलापन, उनके जाने से दुखी नहीं करता।

जुगनू शारदेय नहीं रहे, सोशल मीडिया पर छायी निधन की सूचना

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जुगनू शारदेय चले गये। अपने जमाने के नामी पत्रकार। स्वाभीमानी और संयत. अंतिम दिनों में उनका अकेलापन, उनके जाने से दुखी नहीं करता। इसलिए...
हामिद अली खान उर्फ अजीत

देख तेरे संसार की हालत क्या हो गयी भगवान…गीत और हामिद

वीर विनोद छाबड़ा  देख तेरे संसार की हालत क्या हो गयी भगवान कितना बदल गया इंसान...! आपने 'नास्तिक' (1954) का ये गाना ज़रूर सुना...
जायरा वसीम

हिन्दी फिल्मों की अभिनेत्री जायरा वसीम का डर!

ध्रुव गुप्त कश्मीर से आने वाली हिन्दी फिल्मों की अभिनेत्री जायरा वसीम का फिल्म छोड़ने का फैसला उनका व्यक्तिगत फैसला है, जिसका सम्मान किया...