चंद्रा पांडेय के नाम से मशहूर डॉ. चंद्रकला पांडेय के व्यक्तित्व के एक नहीं, अनेक रूप हैं। कइयों के लिए वे कवयित्री हैं तो कुछ के लिए अनुवादक।

चंद्रा पांडेय के बारे में विष्णुकांत शास्त्री ने क्या कहा था, इसे जान लीजिए

कृपाशंकर चौबे चंद्रा पांडेय के नाम से मशहूर डॉ. चंद्रकला पांडेय के व्यक्तित्व के एक नहीं, अनेक रूप हैं। कइयों के लिए वे कवयित्री...

प्रलेक प्रकाशन की शिनाख्त सीरिज में- ‘कृपाशंकर चौबे एक शिनाख्त’

0
ओमप्रकाश अश्क प्रलेक प्रकाशन, मुंबई ने पत्रकार, स्तंभकार, टिप्पणीकार, निबंधकार, साहित्य समालोचक कृपाशंकर चौबे के सृजन और शोध पर 464 पृष्ठों का ग्रंथ अभी-अभी...
भारत-चीन सैनिक झड़प: अतीत के आईने और भविष्य के मायने, समझा रहे हैं कमलेश पांडेय

भारत-चीन सैन्य झड़प: अतीत के आईने और भविष्य के मायने

भारत-चीन सैन्य झड़प की घटना पर हम खामोश रहते हैं। पाकिस्तान के साथ मामूली तनाव पर हम ताव में आते हैं, पर चीन के...

जयंती पर विशेषः फिल्मों के आलराउंडर खिलाड़ी विजय आनंद

0
नवीन शर्मा विजय आनंद को हिंदी सिनेमा का हरफनमौला खिलाड़ी कहना ज्यादा सही रहेगा। वे बेहतरीन निर्देशक थे, संवेदनशील अभिनेता भी थे। इसके साथ-साथ वे लेखक और अच्छे...
राम मनोहर लोहिया गैर कांग्रेसवाद के आधारस्तंभ थे। स्वतंत्र भारत की राजनीति और चिंतन धारा पर उनका गहरा असर था।

राम मनोहर लोहियाः गैर कांग्रेसवाद के आधारस्तंभ

0
नवीन शर्मा  राम मनोहर लोहिया गैर कांग्रेसवाद के आधारस्तंभ थे। स्वतंत्र भारत की राजनीति और चिंतन धारा पर उनका गहरा असर था। इस मामले...

ट्रेनों की लेटलतीफी पर रेल मंत्री का नया शिगूफा

0
बैलगाड़ियों के भारी लेट चलने और उससे सरकार को फजीहत से बचाने के लिए अब रेल मंत्री पीयूष गोयल ने नया पैंतरा चला है कि मरम्मत...
के. विक्रम राव, वरिष्ठ पत्रकार

पुलिस की छवि अभी भी सामान्यतः जनमित्र वाली बनी नहीं

0
के विक्रम राव  पुलिस की छवि अभी भी सामान्यतः जनमित्र वाली बनी नहीं। हालांकि ब्रिटिश राज के खात्मे के सात दशक बीत गये। फिर...
कोरोना की पहुंच पेट के बाहर तक ही नहीं रही, पैठ अंदर तक हो गई है। कोरोना साथ लिए आ रहे हैं शिशु। ऐसे में सहज सवाल- कौन है कोरोना से सुरक्षित? पढ़िए, कोरोना डायरी की इक्कीसवीं किस्त वरिष्ठ पत्रकार डॉ. संतोष मानव की कलम से।

कोरोना तो जाएगा, चाहे जब जाए, अभी तो इसने तबाही मचा रखी है

कोरोना तो जाएगा, चाहे जब जाए, मगर अभी तो इसने तबाही मचा रखी है। न्यूयार्क से खबर है, मुर्दों के लिए कब्र नहीं हैं।...
उपेंद्रनाथ अश्क न सिर्फ सशक्त साहित्यकार थे, बल्कि एक सही संपादक भी थे। संपादन भी सिखाते थे उपेंद्रनाथ अश्क। प्रो. कृपाशंकर चौबे को उन्होंने कई पत्र लिखे थे। (दायें प्रो. कृपाशंकर चौबे और बायें उपेंद्रनाथ अश्क)

उपेंद्रनाथ अश्क न सिर्फ साहित्यकार थे, बल्कि एक संपादक भी थे

0
उपेंद्रनाथ अश्क न सिर्फ सशक्त साहित्यकार थे, बल्कि एक सही संपादक भी थे। संपादन भी सिखाते थे उपेंद्रनाथ अश्क। प्रो. कृपाशंकर चौबे को उन्होंने...
शिक्षा नीति- 2020

शिक्षा की बुनियाद में भाषा के अस्तित्व को सदैव स्वीकार किया जाता है

0
प्रो. ज्ञानदेव मणि त्रिपाठी शिक्षा की बुनियाद में भाषा के अस्तित्व को सदैव स्वीकार किया जाता है। भारतीय शिक्षा में भाषा की भूमिका उसके...