आपातकाल में जार्ज महज कूद-फांद कर रहे थे

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आपातकाल के दरम्यान जार्ज फ़र्नान्डिस की गतिविधि का कोई अर्थ नहीं था। जैसे कोई युवा बगैर आगे-पीछे सोचे ‘थ्रील’ महसूस करने के लिए कुद-फाँद...
गांव की संस्मरण कथा की शृंखला शुरू की है वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार अरविंद चतुर्वेद ने। गांव की संस्मरण कथा की एक कड़ी आप पढ़ चुके हैं।

गांव की संस्मरण कथा- सूरजमुखी के पीछे तितली और टोकरी में इन्द्रधनुष

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गांव की संस्मरण कथा की शृंखला शुरू की है वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार अरविंद चतुर्वेद ने। गांव की संस्मरण कथा की एक कड़ी आप...

संपूर्ण क्रांति की याद दिलाता इंदिरा गांधी का आपातकाल

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आपातकाल जिन परिस्थितियों में लगा या इंदिरा गांधी ने लगाया, उसकी बड़ी वजह जयप्रकाश नारायण की अगुआई में छिड़ा छात्र आंदोलन था। उस आंदोलन...

राहुल वर्माः नवादा का लाल मचा रहा फिल्मी दुनिया में धमाल

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पटना (अनूप नारायण सिंह)। नवादा जैसे छोटे शहर का छोरा राहुल वर्मा इन दिनों फिल्मी दुनिया में धमाल मचा रहा है। गरीब पृष्ठभूमि से...
डॉ. अंबेडकर के संपादन में निकले पाक्षिक ‘समता’ में सावरकर के उस पक्ष को तरजीह दी गयी है, जिसमें उन्होंने रोटी-बेटी के संबंध का समर्थन किया है।

बाबा साहब ने भांप लिया था कि भावी भारत का स्वरूप कैसा होगा

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बाबा साहब भीमराव अंबेदकर ने भांप लिया था कि भावी भारत का स्वरूप कैसा होगा। तभी तो उन्होंने कहा था- जातिभेद और धर्मभेद तो...
ओमप्रकाश अश्क

और अविनाश जी की हो गई विदाई, अश्क को मिली पटना की कमान

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वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश अश्क का पटना आगमन 1997 के मध्य में हुआ और अगले पड़ाव की ओर वह जून 1999 में प्रस्थान कर गये।...
भारत यायावर

कसम से तीसरी कसम तक के मायने समझने के लिए इसे पढ़ें

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भारत यायावर कसम क्या है? एक प्रण,एक संकल्प, एक प्रतिज्ञा, एक वचन, एक आत्मसंयम की उद्घोषणा! कुछ लोग बात-बात पर कसम खाते हैं। कुछ...
निर्भया रेप कांड की वकील सीमा कुशवाहा

निर्भया रेप कांड की वकील सीमा कुशवाहा को सलाम!

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निर्भया रेप कांड में सीमा कुशवाहा जीवन में पहला मुकदमा बिना फीस लड़ कर आज सबके दिलों में जगह बना ली है। उन्होंने निर्भया...
वर्ष 1974 की तारीख 5 जून. यही वह दिन था, जब जयप्रकाश नारायण (जेपी) ने पटना के गांधी मैदान में दो शब्दों- संपूर्ण क्रांति का नारा दिया था.

जयप्रकाश नारायण ने जब इंटरव्यू में कहा- मुझे कौन पूछता है!

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जयप्रकाश नारायण (जेपी) अपने आखिरी दिनों में काफी उदास थे। केंद्र व राज्य में जनता पार्टी की सरकारें बनने के बाद अपने साक्षात्कार में...
फणीश्वरनाथ रेणु मानवीयता को स्थापित करने के लिए संघर्ष करने वाले लेखक हैं। वे भारतीयता का एक चेहरा हैं। एक अकेली आवाज हैं।

रेणु से मैंने सवाल किया, “आपने पालिटिक्स क्यों छोड़ दी?”

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रेणु मानवीयता को स्थापित करने के लिए संघर्ष करने वाले लेखक हैं। वे भारतीयता का एक चेहरा हैं। एक अकेली आवाज हैं। दुनिया को...