आलोक तोमर अपनी पत्नी को बेहद प्यार करते थे। शादी से पहले सुप्रिया के प्रति उनके प्रेम के कई किस्से हैं। आलोक तोमर के ऐसे किस्से सामने आये हैं।

आलोक तोमर की यादः अगर मैंने किसी के होंठ के पाटल कभी चूमे

0
आलोक तोमर पत्रकारिता के उन पात्रों में शुमार हैं, जिनका जिक्र वरिष्ठ पत्रकार-साहित्यकार हरीश पाठक की संस्मरणों पर आधारित पुस्तक में है। पुस्तक शीघ्र...

रक्षा बंधन के बाद इन राशियों के जातकों को होगा धनलाभ

0
पटना। पंडित राकेश झा शास्त्री के मुताबिक रक्षाबंधन (26 अगस्त) के बाद 27 अगस्त दिन सोमवार को भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि...

द स्लीपिंग ब्यूटीः दो साल की बच्ची की सौ साल पुरानी लाश

0
आज गूगल पर सर्च के दौरान एक ऐसी तस्वीर मिली जिसे देखकर देर तक ठिठका रह गया। तस्वीर सोई हुई एक छोटी बच्ची की...

केंद्र सरकार ने सरकारी कर्मियों-पेंशनरों का 2 प्रतिशत DA बढ़ाया

0
केंद्रीय कर्मचारियों को अब 9 फीसदी महंगाई भत्ता, 48 लाख कर्मचारी और 61 लाख पेंशनर्स को फायदा  नयी दिल्ली। लोकसभा का आसन्न चुनाव ज्यादातर आम लोगों...
महात्मा गांधी

महात्मा गांधी हमेशा प्रयोगधर्मी रहे, तरह-तरह के प्रयोग किये

0
शेष नारायण सिंह महात्मा गांधी हमेशा प्रयोगधर्मी रहे। तरह-तरह के प्रयोग उन्होंने किये। संवाद स्थापित करने की दिशा में तरह-तरह के प्रयोग महात्मा गांधी...

रघुवर दास का दावा, झारखंड में चल रही विकास की आंधी

0
जामताड़ा। सरकार की नीयत और नीति साफ है। सरकार जनभागीदारी से विकास की हिमायती है। यही वजह है कि विकास मेला का आयोजन कर...
रामदेव शुक्ल व्याख्यात्मक आलोचना के अंतिम स्तंभ हैं। ‘बिहारी- सतसई का पुनर्पाठ’ उनकी नवीनतम प्रकाशित आलोचना-कृति है। वे अच्छे कथाकार भी हैं।

रामदेव शुक्लः व्याख्यात्मक आलोचना के अंतिम स्तंभ

0
रामदेव शुक्ल व्याख्यात्मक आलोचना के अंतिम स्तंभ हैं। ‘बिहारी- सतसई का पुनर्पाठ’ उनकी नवीनतम प्रकाशित आलोचना-कृति है। वे अच्छे कथाकार भी हैं। ‘बिहारी- सतसई...

बुद्धिजीवियों के दिलों में अब भी बसते हैं कार्ल मार्क्स

0
विगत 16 से 20 जून तक ,पटना में , कार्ल मार्क्स (5 . 5 . 1818 - 14 .3 . 1883 ) के दो...

अभिनय की दुनिया में अपने दम पर पहचान बनाई संजय पांडेय ने

0
पटना (अनूप नारायण सिंह)। जिनके रग-रग में अभिनय है। जिन्होंने रंगमंच की मिट्टी को अपने मस्तक पर लगाकर अभिनय की दुनिया में खुद के...
कोरोना की पहुंच पेट के बाहर तक ही नहीं रही, पैठ अंदर तक हो गई है। कोरोना साथ लिए आ रहे हैं शिशु। ऐसे में सहज सवाल- कौन है कोरोना से सुरक्षित? पढ़िए, कोरोना डायरी की इक्कीसवीं किस्त वरिष्ठ पत्रकार डॉ. संतोष मानव की कलम से।

कोरोना डायरीः इन्हें डायन कोरोना ने नहीं, नियति ने मारा है !

शुक्रवार को रेल की पटरियों पर सोये जो 16 मजदूर कट-मर गए, उन्हें कोरोना ने नहीं नियति ने मारा है। ये इसलिए मरे, क्योंकि...