25 जून 1975 की आधी रात हुई थी आपातकाल की घोषणा

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लगभग 43 साल पहले देश में 25 जून 1975 की आधी रात को आपातकाल की घोषणा की गई थी। । जो 21 मार्च 1977...
घुसपैठ पर ममता बनर्जी का 2005 में जो स्टैंड था, वह ममता 2021 में भूल गयी हैं। किंतु संकेत हैं कि मतदाता उन्हें इस बार याद दिला देंगे!

घुसपैठ पर ममता बनर्जी 2005 का स्टैंड 2021 में भूल गयी हैं

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सुरेंद्र किशोर घुसपैठ पर ममता बनर्जी का 2005 में जो स्टैंड था, वह ममता 2021 में भूल गयी हैं। किंतु संकेत हैं कि मतदाता...

कहां गइल मोर गांव रे, बता रहे वरिष्ठ पत्रकार शेषनारायण सिंह

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 शेष नारायण सिंह  1975 में जब मैंने संत तुलसीदास डिग्री  कालेज, कादीपुर (सुल्तानपुर) की प्राध्यापक की नौकरी छोडी थी तो एक महत्वपूर्ण फैक्टर यह...
चन्द्रशेखर जी की दाढ़ी का राज, आप नहीं जानते तो जान लीजिए

चन्द्रशेखर जी की दाढ़ी का राज, आप नहीं जानते तो जान लीजिए

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चन्द्रशेखर जी की दाढ़ी का राज, आप नहीं जानते तो जान लीजिए। रोज दाढ़ी बनवाने के शौकीन चन्द्रशेखर ने दाढ़ी रखनी क्यों शुरू कर...
मध्यप्रदेश के सीएम पद से कमल नाथ का इस्तीफा

नरेंद्र मोदी ने मध्य प्रदेश में इतिहास दोहराने से खुद को बचाया

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नरेंद्र मोदी ने मध्य प्रदेश में इतिहास दोहराने से खुद को बचाया। वैसे आम मान्यता है कि इतिहास खुद को दोहराता है।  लेकिन मध्यप्रदेश...
लारेंस फरलेंग्टी ने 101 साल की उम्र में भी कविता लिखी। उन्हें युद्ध से नफरत थी। मानवता से मुहब्बत के आदी थी। बुढ़ापे में बेहद रूमानी।

लारेंस फरलेंग्टी की की मौत पर शहर में मातम मना…

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लारेंस फरलेंग्टी ने 101 साल की उम्र में भी कविता लिखी। उन्हें युद्ध से नफरत थी। मानवता से मुहब्बत के आदी थी। बुढ़ापे में...
जननायक कर्पूरी ठाकुर का आज जन्मदिन है। कर्पूरी ठाकुर सही मायने में जननायक थे। गरीबों-दलितों के उत्थान के लिए उन्होंने जो किया, वह नहीं भूलेगा।

जननायक का जन्मदिनः कर्पूरी ठाकुर सही मायने में जननायक थे

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जननायक कर्पूरी ठाकुर का आज जन्मदिन है। कर्पूरी ठाकुर सही मायने में जननायक थे। गरीबों-दलितों के उत्थान के लिए उन्होंने जो किया, वह नहीं...
डॉ. अंबेडकर के संपादन में निकले पाक्षिक ‘समता’ में सावरकर के उस पक्ष को तरजीह दी गयी है, जिसमें उन्होंने रोटी-बेटी के संबंध का समर्थन किया है।

बाबा साहब ने भांप लिया था कि भावी भारत का स्वरूप कैसा होगा

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बाबा साहब भीमराव अंबेदकर ने भांप लिया था कि भावी भारत का स्वरूप कैसा होगा। तभी तो उन्होंने कहा था- जातिभेद और धर्मभेद तो...

प्रवासियों के प्रति अस्पृश्यता को याद रखेगा इतिहास…..

सुशील मिश्रा प्रवासियों के प्रति अस्पृश्यता को इतिहास भी याद रखेगा। सड़कों पर प्रवासियों के प्रति जो अस्पृश्यता दिख रही, उसकी कल्पना प्रवासियों ने...
फणीश्वरनाथ रेणु मानवीयता को स्थापित करने के लिए संघर्ष करने वाले लेखक हैं। वे भारतीयता का एक चेहरा हैं। एक अकेली आवाज हैं।

फणीश्वरनाथ रेणु के व्यक्तित्व में विनम्रता स्वाभाविक छंद था

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भारत यायावर  फणीश्वरनाथ रेणु के व्यक्तित्व में विनम्रता और सहजता स्वाभाविक छंद था। उन्हें आक्रोश और गुस्से में देखना दुर्लभ संयोग था। वे मुश्किलों...