जयंती पर विशेषः पंचम दा शानदार संगीत के लिए शुक्रिया!

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नवीन शर्मा राहुल देव बर्मन मशहूर संगीत निर्देशक एसडी बर्मन की इकलौती संतान थे। जब पिता किसी क्षेत्र में काफी शोहरत हासिल कर लेता...
राष्ट्रद्रोह पर 1962 में सुप्रीम कोर्ट का एक महत्पूर्ण निर्णय आया था, जिसमें कहा गया कि राष्ट्रद्रोह उसे माना जाएगा, जिससे समाज में हिंसा फैले।

राष्ट्रद्रोह पर 1962 में सुप्रीम कोर्ट का एक महत्वपूर्ण निर्णय

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राष्ट्रद्रोह पर 1962 में सुप्रीम कोर्ट का एक महत्पूर्ण निर्णय आया था, जिसमें कहा गया कि राष्ट्रद्रोह उसे माना जाएगा, जिससे समाज में हिंसा...
नीतीश कुमार पर उनकी ही सरकार के साझीदार दल बीजेपी का दबाव बढ़ने लगा है कि वे कोटा में फंसे बिह7ार के बच्चों को लाने की पहल करें।

बिहार में वंचितों के विकास के लिए कई योजनाएं चला रही सरकार

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पटना। राज्य का समुचित और वास्तविक विकास तभी संभव है, जब इसमें रहने वाले पिछड़े, वंचित संसाधन विहीन वर्ग के लोगों तक भी सरकारी...

उच्चारण सही हो तो हिन्दी में लेखन भी शुद्ध हो जाता है

उच्चारण सही हो तो हिन्दी में लेखन भी शुद्ध हो जाता है। अपने अध्ययन काल में जवरी मल पारख और उनके साथ पढ़ने वाले...

संपूर्ण क्रांति की याद दिलाता इंदिरा गांधी का आपातकाल

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आपातकाल जिन परिस्थितियों में लगा या इंदिरा गांधी ने लगाया, उसकी बड़ी वजह जयप्रकाश नारायण की अगुआई में छिड़ा छात्र आंदोलन था। उस आंदोलन...

अच्छे शिक्षकः बैकुण्ठ बाबू के कारण एकमा स्कूल का बड़ा नाम था

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सुरेंद्र किशोर सन् 1963 में बिहार के सारण जिले के एकमा स्थित अलख नारायण सिंह उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य बैकुण्ठ नाथ सिंह को ...
ओमप्रकाश अश्क

और अविनाश जी की हो गई विदाई, अश्क को मिली पटना की कमान

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वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश अश्क का पटना आगमन 1997 के मध्य में हुआ और अगले पड़ाव की ओर वह जून 1999 में प्रस्थान कर गये।...

ट्रेनों की लेटलतीफी पर रेल मंत्री का नया शिगूफा

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बैलगाड़ियों के भारी लेट चलने और उससे सरकार को फजीहत से बचाने के लिए अब रेल मंत्री पीयूष गोयल ने नया पैंतरा चला है कि मरम्मत...
रांची की पतरातू घाटी

यह वही रांची हैं, जहां एक ईसाई संत ने रामकथा लिखी

संजय कृष्ण यह वही रांची हैं, जहां एक ईसाई संत फादर कामिल बुल्के ने रामकथा लिखी। यह वही रांची है, जहां राष्ट्रकवि दिनकर ने...
और कितने दशक लगेंगे? कब तक बिहार विधानसभा की सभी 243 सीटों पर वंशवादी-परिवारवादी नेताओं के वंशज काबिज हो जाएंगे?

कल्पना कीजिए उस दिन की, जब विधायिकाएं परिजनों से भर जाएंगी 

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आज के लोकतंत्र का कोई ‘महाराजा’ प्रधानमंत्री और ‘राजा’ मुख्य मंत्री बन जाएगा! सुरेंद्र किशोर और कितने दशक लगेंगे? कब तक बिहार विधानसभा की सभी...