भीष्म साहनी

जयंती पर विशेषः तमस में उजियारे का नाम भीष्म साहनी

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नवीन शर्मा भीष्म साहनी हिंदी साहित्यकारों में विशिष्ट स्थानीय रखते हैं। सात अगस्त 1915 को रावलपिंडी में इनका जन्म हुआ था। अपने उपन्यास तमस...
आरएसएस के नए सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले हैं तो बड़े दिल वाले, लेकिन संघ के सरकार्यवाह के रूप में उनके सामने हैं चुनौतियां भी हैं।

आरएसएस के नए सरकार्यवाह होसबाले के सामने हैं कई चुनौतियां

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प्रो. संजय द्विवेदी आरएसएस के नए सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले हैं तो बड़े दिल वाले, लेकिन संघ के सरकार्यवाह के रूप में उनके सामने हैं...

उत्तराखंड में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने किया योग

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मां गंगा की इस भूमि पर, जहां चारधाम स्थित हैं, जहां आदि शंकराचार्य आए, जहां स्वामी विवेकानंद कई बार आए, वहां योग दिवस पर...

योग मानव स्वास्थ्य की दिशा में सकारात्मक नजरिया है

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21 जून को ‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’ के रूप में घोषित है। 11 दिसंबर 2014 - यूनाइटेड नेशंस की आम सभा ने भारत द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए 21 जून...
महात्मा गांधी

महात्मा गांधी के धुर विरोधी सी आर दास कैसे उनके मुरीद बन गये

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महात्मा गांधी के धुर विरोधी सी आर दास कैसे उनके मुरीद बन गये, बता रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार शेष नारायण सिंह। गांधी में अपनी...
अमिताभ बच्चन

अमिताभ बच्चनः मोस्ट एनर्जेटिक, डेडिकेटेड, डिसिप्लिन्ड एक्टर

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नवीन शर्मा अमिताभ बच्चन मेरे ही नहीं, मेरी पीढ़ी सहित कई पीढियों के सुपर स्टार हैं। उनको यह सफलता यूं ही नहीं मिली है।...
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चुनाव के खेल को समझना चाहते हैं तो पढ़ लें यह किताब

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चुनाव के खेल को समझना है तो यह किताब एक बार जरूर पढ़ें। शिवम शंकर सिंह की चुनाव जीतने के तरीकों पर आयी किताब...

उच्चारण सही हो तो हिन्दी में लेखन भी शुद्ध हो जाता है

उच्चारण सही हो तो हिन्दी में लेखन भी शुद्ध हो जाता है। अपने अध्ययन काल में जवरी मल पारख और उनके साथ पढ़ने वाले...
आपातकाल-पीड़ित लोगबाग हर साल इमरजेंसी की वर्षगांठ मनाते हैं। मनाना जरूरी भी है। क्योंकि 25 जून  1975 को इमरजेंसी लगाकर पूरे देश को एक बड़े जेलखाना में बदल दिया गया था। 23 मार्च 1977 को ही इसे समाप्त किया जा सका था, जब लोकसभा के आम चुनाव के बाद मोरारजी देसाई की सरकार बनी।

इसलिए जरूरी है आपातकाल के दिनों को याद रखना !

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सुरेंद्र किशोर  आपातकाल-पीड़ित लोगबाग हर साल इमरजेंसी की वर्षगांठ मनाते हैं। मनाना जरूरी भी है। क्योंकि 25 जून  1975 को इमरजेंसी लगाकर पूरे देश...
मथाई की पुस्तकों पर से प्रतिबंध हटाने का माकूल समय है। मथाई के संस्मरणात्मक पुस्तक में कई बातें हैं, जिन्हें नई पीढ़ी को जानना चाहिए।

मथाई की पुस्तकों पर से प्रतिबंध हटाने का यह माकूल समय है

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मथाई की पुस्तकों पर से प्रतिबंध हटाने का माकूल समय है। मथाई के संस्मरणात्मक पुस्तक में कई बातें हैं, जिन्हें नई पीढ़ी को जानना चाहिए।...