महात्मा गांधी

महात्मा गांधी हमेशा प्रयोगधर्मी रहे, तरह-तरह के प्रयोग किये

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शेष नारायण सिंह महात्मा गांधी हमेशा प्रयोगधर्मी रहे। तरह-तरह के प्रयोग उन्होंने किये। संवाद स्थापित करने की दिशा में तरह-तरह के प्रयोग महात्मा गांधी...
इमरजेंसी के दौर को समझने के लिए कविताएं, गजल आदि तो अहम दस्तावेज हैं हीं, उस दौर में जेल में लिखी गयीं डायरियां सबसे प्रामाणिक स्रोत हैं।

इमरजेंसी के दौर को समझने के लिए जेल डायरियां प्रामाणिक स्रोत हैं

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हरिवंश इमरजेंसी के दौर को समझने के लिए कविताएं, गजल आदि तो अहम दस्तावेज हैं हीं, उस दौर में जेल में लिखी गयीं डायरियां...
अग्रेजी हुकूमत खत्म हो गयी। भारत को अपने ढंगा से सजने-संवरने और अपने नियम-कानून से देश चलाने का अवसर मिल गया। लेकिन हम उसी लीक पर चलते रहे।

महात्मा गांधी की हत्या पर कपूर कमीशन की रिपोर्ट कहां गई!

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महात्मा गांधी की शहादत दिवस (30 जनवरी) पर वरिष्ठ IPS अरविन्द पाण्डेय ने हत्या के कारणों की जांच के लिए गठित कपूर कमीशन की...
कृषि कानून ठीक है, पर उसमें कुछ खामियां भी हैं। उनको ठीक किया जाना चाहिए, नहीं तो वे नतीजे नहीं निकलेंगे, जो निकलना चाहिए।

कृषि कानून का विरोध और पश्चिम बंगाल का अकाल

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अमरनाथ कृषि कानून के विरोध को पश्चिम बंगाल के अकाल के परिप्रेक्ष्य में देखने की जरूरत है। अकाल में भूख से 30 लाख लोगों...
मथाई की पुस्तकों पर से प्रतिबंध हटाने का माकूल समय है। मथाई के संस्मरणात्मक पुस्तक में कई बातें हैं, जिन्हें नई पीढ़ी को जानना चाहिए।

मथाई की पुस्तकों पर से प्रतिबंध हटाने का यह माकूल समय है

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मथाई की पुस्तकों पर से प्रतिबंध हटाने का माकूल समय है। मथाई के संस्मरणात्मक पुस्तक में कई बातें हैं, जिन्हें नई पीढ़ी को जानना चाहिए।...

25 जून 1975 की आधी रात हुई थी आपातकाल की घोषणा

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लगभग 43 साल पहले देश में 25 जून 1975 की आधी रात को आपातकाल की घोषणा की गई थी। । जो 21 मार्च 1977...

अटल बिहारी वाजपेयी जी के 1942 में रोल की सत्यता 

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के विक्रम राव जब तक अटल बिहारी वाजपेयी चुनावी राजनीति से रिटायर नहीं हुये थे,  उन पर हर लोकसभाई निर्वाचन के दौरान आरोप लगाया...
महेंदर मिसिर

अंग्रेजी अर्थव्यवस्था को तबाह करने वाले थे महेंद्र मिसिर

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अनूप नारायण सिंह पटना। अंग्रेजी अर्थव्यवस्था को तबाह करने वाले थे छपरा के महेंद्र मिसिर। उनका जीवन किसी बेहतरीन कहानी की तरह है। एक...
महात्मा गांधी

महात्मा गांधी के जितने प्रशंसक हैं, उससे कम आलोचक भी नहीं

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महात्मा गांधी के जितने प्रशंसक हैं, उससे कम आलोचक भी नहीं। कल तक बड़ी तादाद वैसे लोगों की थी, जो महात्मा गांधी के हत्यारे...
फणीश्वरनाथ रेणु का कथा संसार दो भिन्न भारतीय स्‍वरूपों के बीच खड़ा है। प्रेमचंद के बाद फणीश्‍वर नाथ रेणु को आंचलिक कथाकार माना गया है।

साहित्य अकादेमी पर फणीश्वरनाथ रेणु के विचार जानिए! 

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भारत यायावर  साहित्य अकादेमी पर फणीश्वरनाथ रेणु के स्पष्ट विचार थे। 1973 में साहित्य अकादेमी का उन्हें सदस्य बनाया गया था। उन्होंने अनुभव के...