हिन्दी ग्रेजुएट को हरिवंश जी ने बिजनेस अखबार का प्रभारी बना दिया

0
पत्रकार ओमप्रकाश अश्क की प्रस्तावित पुस्तक- मुन्ना मास्टर बने एडिटर- की अगली कड़ी पढ़ें। कल आपने पढ़ा कि वह जनसत्ता छोड़ प्रभात खबर समूह...
चीन के हमले के वक्त भारतीय कम्युनिस्टों की बड़ी जमात चीन के साथ थी और शाहीन बाग आंदोलन में भी एक पड़ी जमात आंदोलकारियों के साथ है

भारतीय कम्युनिस्टों की बड़ी जमात हमले के वक्त चीन के साथ थी

0
सुरेंद्र किशोर भारतीय कम्युनिस्टों की एक बड़ी जमात ने 1962 में इस देश (भारत) पर जब चीन ने हमला हुआ तो चीन का साथ...

जयंती पर विशेषः साहित्य की अप्रतिम शख्यियत अमृता प्रीतम 

0
नवीन शर्मा वैसे तो अमृता प्रीतम पंजाबी लेखिका हैं, लेकिन हिंदी भाषा के पाठकों में भी वे खासा लोकप्रिय  हैं। वे हिंदी फिल्मों की...

भोजपुरी फिल्म ‘बलमुआ तोहरे खातिर’ 31 को रिलीज होगी

0
पटना। अगर आप भोजपुरी में साफ-सुथरी पारिवारिक तथा सामाजिक विषय वस्तु पर आधारित फिल्म देखने के शौकीन हैं तो जल्द ही आपको एक बेहतरीन...
‘हिन्दोस्थान’ अखबार में हिन्दी, उर्दू और अंग्रेजी खबरें साथ छपती थीं। यह अभिनव प्रयोग था। हिन्दी से शुरू होकर बाद में यह बदलाव देखने को मिला।

‘हिन्दोस्थान’ अखबार में हिन्दी, उर्दू और अंग्रेजी खबरें एक साथ

0
‘हिन्दोस्थान’ अखबार में हिन्दी, उर्दू और अंग्रेजी खबरें साथ छपती थीं। यह अभिनव प्रयोग था। हिन्दी से शुरू होकर बाद में यह बदलाव देखने...

इंटर फेल भी अब कर सकेंगे ग्रेज्युएशन, इग्नू दे रहा मौका

पटना। ग्रेज्युएशन तक की पढ़ाई हर छात्र की इच्छा होती है। कई बार इंटर पास नहीं करने के कारण ऐसे छात्रों की मनोकामना पूरी नहीं...
पटना के सिन्हा लाइब्रेरी वाले सच्चिदानंद सिन्हा का नाम क्या आपने सुना है ? मुझे बिहार की कुछ चुनिंदा विभूतियों के प्रति अतीव सम्मान है। उनमें एक हैं सच्चिदानंद सिन्हा।

सिन्हा लाइब्रेरी वाले सच्चिदानंद सिन्हा का नाम क्या आपने सुना है ?

0
प्रेमकुमार मणि  पटना के सिन्हा लाइब्रेरी वाले सच्चिदानंद सिन्हा का नाम क्या आपने सुना है ? मुझे बिहार की कुछ चुनिंदा विभूतियों के प्रति...

विश्वनाथ प्रताप सिंह वही नहीं थे, जैसे अब दिखते हैं

0
वीपी सिंह वही नहीं थे, जैसे अब दिखते हैं...लेकिन इस बदलाव में एक अच्छाई है...एक राजनीतिक सूत्र है... पिछले दिनों योगी आदित्यनाथ सरकार पर इधर...
चंद्रशेखर की जेल डायरी में अनेक प्रसंग दर्ज हैं। इमरजेंसी के दौर की शासन व्यवस्था, राजनीतिक गतिविधियों को समझने के लिए यह अहम दस्तावेज है।

चंद्रशेखर की जेल डायरी इमरजेंसी के दौर को समझने का अहम दस्तावेज है

चंद्रशेखर की जेल डायरी में अनेक प्रसंग दर्ज हैं। इमरजेंसी के दौर की शासन व्यवस्था, राजनीतिक गतिविधियों को समझने के लिए यह अहम दस्तावेज...
रामदेव शुक्ल व्याख्यात्मक आलोचना के अंतिम स्तंभ हैं। ‘बिहारी- सतसई का पुनर्पाठ’ उनकी नवीनतम प्रकाशित आलोचना-कृति है। वे अच्छे कथाकार भी हैं।

रामदेव शुक्लः व्याख्यात्मक आलोचना के अंतिम स्तंभ

0
रामदेव शुक्ल व्याख्यात्मक आलोचना के अंतिम स्तंभ हैं। ‘बिहारी- सतसई का पुनर्पाठ’ उनकी नवीनतम प्रकाशित आलोचना-कृति है। वे अच्छे कथाकार भी हैं। ‘बिहारी- सतसई...