कृषि कानून ठीक है, पर उसमें कुछ खामियां भी हैं। उनको ठीक किया जाना चाहिए, नहीं तो वे नतीजे नहीं निकलेंगे, जो निकलना चाहिए।

कृषि कानून का विरोध और पश्चिम बंगाल का अकाल

0
अमरनाथ कृषि कानून के विरोध को पश्चिम बंगाल के अकाल के परिप्रेक्ष्य में देखने की जरूरत है। अकाल में भूख से 30 लाख लोगों...
मुक्तिबोध ने 1950 में ही इस बात को अच्छी तरह ताड़ लिया था कि भारत की सामाजिक रूढ़िवादी ताकतें आने वाले समय में राम की राजनीति कर सकती हैं।

मुक्तिबोध को पता था कि रूढ़िवादी राम की राजनीति कर सकते हैं

0
मुक्तिबोध ने 1950 में ही इस बात को अच्छी तरह ताड़ लिया था कि भारत की सामाजिक रूढ़िवादी ताकतें आने वाले समय में राम...

मध्यप्रदेशः भाजपा की जीत के दावे में लोचे भी कम नहीं हैं

0
भोपाल से बब्बन सिंह खेती-किसानी के मोर्चे पर मिली शुरुआती बढ़त ही शिवराज के लिए अंतिम दो साल से काल बन रही है। राज्य...
राजेंद्र माथुर

राजेंद्र माथुरः हिन्दी पत्रकारिता को नई धार देनेवाले व्यक्ति

0
प्रवीण बागी राजेंद्र माथुर, हिन्दी पत्रकारिता को नई धार देनेवाले व्यक्ति की आज जयंती है। वे पत्रकारिता के मेरे गुरु रहे हैं। उनकी छत्रछाया...
कोरोना की पहुंच पेट के बाहर तक ही नहीं रही, पैठ अंदर तक हो गई है। कोरोना साथ लिए आ रहे हैं शिशु। ऐसे में सहज सवाल- कौन है कोरोना से सुरक्षित? पढ़िए, कोरोना डायरी की इक्कीसवीं किस्त वरिष्ठ पत्रकार डॉ. संतोष मानव की कलम से।

कोरोना तो जाएगा, चाहे जब जाए, अभी तो इसने तबाही मचा रखी है

कोरोना तो जाएगा, चाहे जब जाए, मगर अभी तो इसने तबाही मचा रखी है। न्यूयार्क से खबर है, मुर्दों के लिए कब्र नहीं हैं।...
राहत पैकेज में कितनी राहत! लाक डाउन-3 के अंत समय में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 5.94 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज-2 का ब्यौरा पेश किया। इसे विस्तार से समझा रहे वरिष्ठ पत्रकार श्याम किशोर चौबे

राहत पैकेज में कितनी राहत! समझने के लिए इसे पढ़ लीजिए

श्याम किशोर चौबे राहत पैकेज में कितनी राहत! लाक डाउन-3 के अंत समय में 13 मई को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 5.94...
गणेश शंकर विद्यार्थी ने कबीरी ढंग से लिखा था, "अजां देने, शंख बजाने, नाक दबाने और नमाज पढ़ने का नाम धर्म नहीं है।

हिंदी पत्रकारिता के पितामह गणेश शंकर विद्यार्थी ने दी थी सीख

0
प्रवीण बागी हिंदी पत्रकारिता के पितामह गणेश शंकर विद्यार्थी ने अपने अखबार प्रताप के पहले अंक में पत्रकारिता की अवधारणा प्रस्तुत की थी। वह...
भगवा वस्त्रधारी माधवकांत मिश्र के साथ नागेंद्र प्रताप

एक स्वामी जो मेरा कभी संपादक हुआ करता था यानी माधवकांत मिश्र

नागेंद्र प्रताप एक ऐसा स्वामी जो मेरा कभी सम्पादक हुआ करता था यानी माधवकांत मिश्र। वह कोई और नहीं, बल्कि अपने जमाने के मशहूर...
रामविलास पासवान आज पंचतत्व में निलीन हो गये, लेकिन कई लोगों के लिए कई यादें छोड़ गये हैं। कोई उनकी सज्जनता तो कई लोग उनकी कार्य प्रणाली की चर्चा करते हैं।

रामविलास पासवान ने मेरी एक चिट्ठी के जवाब में लिखी थीं 6 चिट्ठियां

0
रामविलास पासवान आज पंचतत्व में विलीन हो गये, लेकिन कई लोगों के लिए कई यादें छोड़ गये हैं। कोई उनकी सज्जनता तो कई लोग...

भाजपा को मिल गया एक और भावनात्मक मुद्दा

0
जम्मू-कश्मीर में भाजपा का पीडीपी से गठबंधन तोड़ना उचित फैसला है। इसके पीछे 2019 का चुनाव वजह हो या बेकाबू सिरफिरों के साथ सख्ती...