अशोक वाजपेयी ने न सिर्फ संस्थाएं खड़ी कीं, बल्कि खुद में एक संस्था थे
अशोक वाजपेयी ने न सिर्फ संस्थाएं खड़ी कीं, बल्कि वे खुद में एक संस्था थे। बहुलता को बचाने और बढ़ाने का निरंतर यत्न किया।...
फिल्म समीक्षाः बाला साहेब की तरह ही बेबाक है ठाकरे
नवीन शर्मा
आजकल हिंदी सिनेमा में बायोपिक का दौर चल रहा है। इसकी लेटेस्ट फिल्म है ठाकरे। इसके कुछ हफ्ते पहले ही मनमोहन सिंह...
अमेरिका में साफ-सफाई और कड़े अनुशासन के बावजूद कोरोना का कहर
अमेरिका में साफ-सफाई और कड़े अनुशासन के बावजूद कोरोना का कहर बरपा है। कोरोना से दुनिया के सर्वाधिक तबाह देशों में अमेरिका की गिनती...
ट्रेजडी क्वीन मीना कुमारी की पाकीजा के पीछे की दास्तान
वीर विनोद छाबड़ा
दो राय नहीं कि 'पाकीजा' ट्रेजडी क्वीन मीना कुमारी की फिल्म है। जाहिर है कि इसकी कामयाबी का क्रेडिट भी मीना...
यह वही रांची हैं, जहां एक ईसाई संत ने रामकथा लिखी
संजय कृष्ण
यह वही रांची हैं, जहां एक ईसाई संत फादर कामिल बुल्के ने रामकथा लिखी। यह वही रांची है, जहां राष्ट्रकवि दिनकर ने...
भारतीय भाषाओं की प्रतिष्ठा के अथक सेनानी थे बलदेव बंशी
भारतीय भाषाओं को प्रतिष्ठा दिलाने के अथक सेनानी रहे हैं बलदेव बंशी। यूपीएससी की परीक्षाओं में भारतीय भाषाओं को उन्होंने हक दिलाया। आइए, जानते...
हाकी खिलाड़ी ध्यानचंद ने जब हिटलर को करारा जवाब दिया
हाकी खिलाड़ी ध्यानचंद ने जब हिटलर को करारा जवाब दिया, वह काफी रोमांचकारी है। संवाद पढ़कर आप भी बोल उठेंगे वाह, क्या करारा जवाब...
उच्चारण सही हो तो हिन्दी में लेखन भी शुद्ध हो जाता है
उच्चारण सही हो तो हिन्दी में लेखन भी शुद्ध हो जाता है। अपने अध्ययन काल में जवरी मल पारख और उनके साथ पढ़ने वाले...
आर्टिस्टिक फैशन वीक में बिहारी डिजाइनर कपड़ों की मचेगी धूम
पटना। बिहार हमेशा से कुछ नया, कुछ उम्दा और कुछ अलग करने के लिए जाना जाता है। बिहार की कला-संस्कृति जितनी समृद्ध है, उतने...
मुगल-ए-आजम भारतीय सिनेमा की पेशानी पर लिखी गई इबारत
मृत्युंजय
मुगल-ए-आजम वह फिल्म थी, जो सबके सर चढ़ कर बोली थी। साठ साल पहले। सन साठ में। महीना था अगस्त। तारीख थी पांच।...



















