डॉ. भीमराव अम्बेडकर का ‘बहिष्कृत भारत’ और उनकी पत्रकारिता
कृपाशंकर चौबे
डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने 3 अप्रैल 1927 को मराठी पाक्षिक ‘बहिष्कृत भारत’ निकाला। वह पाक्षिक वर्ष 1929 तक यानी दो साल तक...
आत्महत्या क्यों नहीं करनी चाहिए, जरा पढ़ लें ओशो के विचार
मुझे पता है कि तुम जीवन से ऊब गये हो। यदि तुम सचमुच ऊब गये हो तो आत्महत्या नहीं करो, क्योंकि आत्महत्या तुम्हें फिर...
शैबाल गुप्ता का जाना बिहार के लिए अपूरणीय क्षति !
प्रेमकुमार मणि
शैबाल गुप्ता का जाना बिहार के लिए अपूरणीय क्षति है! यह स्वीकार करना कि शैबाल गुप्ता नहीं रहे, मेरे लिए कितना दुखद...
आलोक तोमर की यादः जब प्रभाष जोशी ने इस्तीफा मांग लिया
आलोक तोमर को जनसत्ता के प्रधान संपादक प्रभाष जोशी बेहद मानते थे, फिर भी एक मौका ऐसा आया, जब उन्होंने आलोक तोमर से इस्तीफा...
राम दहिन ओझा ने अहिंसावादी आंदोलन में पहली शहादत दी थी
कृपाशंकर चौबे
राम दहिन ओझा ने एक पत्रकार के रूप में अहिंसावादी आंदोलन में पहली शहादत दी थी, जैसे सशस्त्र संग्राम में पहली शहादत...
वोहरा कमिटी की रिपोर्ट पर अमल होता तो हालात नहीं बिगड़ते
सुरेंद्र किशोर
1993 में मुम्बई में भीषण बम विस्फोट हुए थे। उस घटना के बाद वोहरा कमेटी बनी। उसने बहुत जल्द ही अपनी रपट सरकार...
अरुण कमल गहरे अर्थ में प्रतिबद्ध कवि, बेहतर जीवन की आकुलता
कृपाशंकर चौबे
अरुण कमल गहरे अर्थ में प्रतिबद्ध कवि हैं और उनकी प्रतिबद्धता की जड़ें ठेठ भारतीय आबोहवा और जमीन में हैं। जो सामने...
डॉ. अम्बेडकर मानते थे- लोकतंत्र के लिए बुद्ध का उपयोग ही उपयुक्त है
डॉ. अंबेडकर मानते थे कि लोकतंत्र की स्थापना के लिए बुद्ध का उपयोग हो सकता है। राम, कृष्ण और गांधी ब्राह्मण धर्म के पक्षपोषक...
कृषि कानून अच्छा तो है, पर उसमें कुछ खामियां भी हैं
कृषि कानून ठीक है, पर उसमें कुछ खामियां भी हैं। उनको ठीक किया जाना चाहिए, नहीं तो वे नतीजे नहीं निकलेंगे, जो निकलना चाहिए।...
चीन को सीमा से ही नहीं, सीने से भी बाहर करना होगा भारत को
चीन को सीमा से ही नहीं, सीने से भी बाहर करना होगा। अभी समय है। यह नहीं हुआ तो ईस्ट इंडिया कम्पनी की तरह...




















