देशबंधु के संपादक ललित सुरजन नहीं रहे। ललित सुरजन पत्रकारिता और सर्वोच्च इंसानी मान्यताओं के अजातशत्रु थे। ललित सुरजन जी  चले गए।

देशबंधु के संपादक ललित सुरजन नहीं रहे, एक अजात शत्रु का जाना

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शेष नारायण सिंह देशबंधु के संपादक ललित सुरजन नहीं रहे। ललित सुरजन पत्रकारिता और सर्वोच्च इंसानी मान्यताओं के अजातशत्रु थे। वे पत्रकारिता के अजातशत्रु...

इदिरा गांधी को टिकट देने के विरोध में जब एंटोनी ने सीएम पद छोड़ा

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सुरेंद्र किशोर इंदिरा गांधी को टिकट देने के फैसले के विरोध में केरल के मुख्यमंत्री रहे ए.के. एंटोनी ने अपने पद से इस्तीफ दे...

हार नहीं मानूंगा…कहने वाले अटल जी आखिरकार मौत से हार गये

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नयी दिल्ली। हार नहीं मानूंगा...कहने वाले अटल जी लड़ते-लड़ते मौत से हार गये। एम्स ताजा बुलेटिन के मुताबिक उनकी मौत की आज पुष्टि कर...
कोरोना काल में न सिर्फ जरूरी कामकाज छप पड़ गये हैं, बल्कि शादी-विवाह और प्रणय संबंधों पर इसने चोट पहुंचायी है।

कोरोना के बहाने बिदेेसिया की याद- अंखियां से दिन भर गिरे लोर ढर-ढर

कोरोना के बहाने बिदेसिया और इसके रचनाकार भिखारी ठाकुर को लेखक ने कुछ इस तरह याद किया है- अंखियां से दिन भर गिरे लोर...
चीन को सीमा से ही नहीं, सीने से भी बाहर करना होगा। अभी समय है। यह नहीं हुआ तो ईस्ट इंडिया कम्पनी की तरह चीन की कंपनियां भी धीरे-धीरे भारत को कब्जे में ले लेंगी।

चीन को सीमा से ही नहीं, सीने से भी बाहर करना होगा भारत को

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चीन को सीमा से ही नहीं, सीने से भी बाहर करना होगा। अभी समय है। यह नहीं हुआ तो ईस्ट इंडिया कम्पनी की तरह...
एकांत प्रेम के रहस्यमय स्मारक के बारे में जानिए, कहां है यह। यह अमेरिका के फ्लोरिडा में है। वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण है।

एकांत प्रेम के रहस्यमय स्मारक के बारे में जानिए, कहां है यह

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एकांत प्रेम के रहस्यमय स्मारक के बारे में जानिए, कहां है यह। यह अमेरिका के फ्लोरिडा में है। वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण है। इसके...
नेताजी सुभाष चंद्र बोस पत्रकार भी थे। यह बात नयी पीढ़ी के पत्रकारों को शायद मालूम न हो। नेताजी ने साप्ताहिक ‘फारवर्ड ब्लाक’  का संपादन किया।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस बंगाल में सियासत के हाट केक बन गये हैं

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सोना देव नेताजी सुभाष चंद्र बोस बंगाल में इनदिनों सियासत के हाट केक बन गये हैं। आज नेता जी जयंती पर नरेंद्र मोदी व...

भोजपुरी फिल्म ‘बलमुआ तोहरे खातिर’ 31 को रिलीज होगी

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पटना। अगर आप भोजपुरी में साफ-सुथरी पारिवारिक तथा सामाजिक विषय वस्तु पर आधारित फिल्म देखने के शौकीन हैं तो जल्द ही आपको एक बेहतरीन...
25 जून भारतीय राजनीति में एक उल्लेखनीय तारीख है। इसी रोज 1975 में, तत्कालीन इंदिरा सरकार ने इमरजेंसी लगाई थी। दरअसल वह आपातकाल नहीं, आतंककाल था।

राजनीति का नाम सुनते ही अब घिन्न क्यों आती है

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राजनीति का नाम सुनते ही अब घिन्न आती है। लेकिन नयी पीढ़ी भले अनजान हो, सच यह है कि राजनीति में पहले ऐसे लोग भी हुए...
कोरोना की पहुंच पेट के बाहर तक ही नहीं रही, पैठ अंदर तक हो गई है। कोरोना साथ लिए आ रहे हैं शिशु। ऐसे में सहज सवाल- कौन है कोरोना से सुरक्षित? पढ़िए, कोरोना डायरी की इक्कीसवीं किस्त वरिष्ठ पत्रकार डॉ. संतोष मानव की कलम से।

कोरोना तो जाएगा, चाहे जब जाए, अभी तो इसने तबाही मचा रखी है

कोरोना तो जाएगा, चाहे जब जाए, मगर अभी तो इसने तबाही मचा रखी है। न्यूयार्क से खबर है, मुर्दों के लिए कब्र नहीं हैं।...