एक वैज्ञानिक, जिसने बताया कि पौधों को भी दर्द होता है

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जयंती पर विशेषः पेड़-पौधों में जीवन का राज बताने वाले जगदीश चंद्र बोस नवीन शर्मा आधुनिक भारत में जिस भारतीय वैज्ञानिक ने सबसे पहले विश्व...

प्रलेक प्रकाशन की शिनाख्त सीरिज में- ‘कृपाशंकर चौबे एक शिनाख्त’

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ओमप्रकाश अश्क प्रलेक प्रकाशन, मुंबई ने पत्रकार, स्तंभकार, टिप्पणीकार, निबंधकार, साहित्य समालोचक कृपाशंकर चौबे के सृजन और शोध पर 464 पृष्ठों का ग्रंथ अभी-अभी...
रामविलास पासवान आज पंचतत्व में विलीन हो गये, लेकिन कई लोगों के लिए कई यादें छोड़ गये हैं। लोग उनकी  खूबी-खामी पर खूब बोल रहे।

रामविलास पासवान का नहीं होना, उनके चहेतों को काफी खलेगा

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रामविलास पासवान आज पंचतत्व में विलीन हो गये, लेकिन कई लोगों के लिए कई यादें छोड़ गये हैं। लोग उनकी  खूबी-खामी पर खूब बोल...
लार्ड मेकाले के भाषण का वह अंश, जो उन्होंने भारत के बारे में ब्रिटिश संसद में दिया था

मेकाले-वाद का खतरा क्या एक बार फिर भारत पर मंडरा रहा है?

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मेकाले-वाद का खतरा क्या एक बार फिर भारत पर मंडरा रहा है। यह सवाल कई कारणों से मौजू हो गया है। लार्ड मेकाले ने...

और जब बटुकेश्वर दत्त ने पटना में बस के लिए परमिट मांगा

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अनूप नारायण सिंह पटना। जी, उसी बटुकेश्वर दत्त की बात कर रहे हैं, जिन्होंने भगत सिंह के साथ दिल्ली असेंबली में बम फेंका था...
एनएन वोहरा के नेतृत्कव वाली कमिटी ने नेता-अपराधी-अफसर गंठजोड़ पर रिपोर्ट सौंपी थी

वोहरा कमिटी की रिपोर्ट पर अमल होता तो हालात नहीं बिगड़ते

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सुरेंद्र किशोर 1993 में मुम्बई में भीषण बम विस्फोट हुए थे। उस घटना के बाद वोहरा कमेटी बनी। उसने बहुत जल्द ही अपनी रपट सरकार...
फणीश्वरनाथ रेणु मानवीयता को स्थापित करने के लिए संघर्ष करने वाले लेखक हैं। वे भारतीयता का एक चेहरा हैं। एक अकेली आवाज हैं।

रेणु से मैंने सवाल किया, “आपने पालिटिक्स क्यों छोड़ दी?”

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रेणु मानवीयता को स्थापित करने के लिए संघर्ष करने वाले लेखक हैं। वे भारतीयता का एक चेहरा हैं। एक अकेली आवाज हैं। दुनिया को...

मलिकाइन के पाती- घर के लात नीमन, बाहर के सतावल बाउर

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पावं लागीं मलिकार। एने तनी अझुरा गइनी हां मलिकार, लड़िकन के बर-बेमारी में, एही से टाइम पर पाती ना लिखवा पवनी। अब नन्हका ठीक...

मलिकाइन के पाती ः पलिहर के बानर बनले बराती

मलिकाइन रोजे पाती पठावे के कहले रहली। कई दिन बात आज उनकर पाती पहुंचल बा। लीं, पढ़ीं अपना सभे- पांव लागीं मलिकार! रउरा त रिसियात-खिसियात...

पुण्य तिथि पर विशेषः राम मनोहर लोहिया एक फ़कीर

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के. विक्रम राव दौर अभी बाकी था, मकता अभी अधूरा रह गया। कहते कहते वह सो गया, तो सुनने वालों को सन्नाटे ने चौंका...