जयंती पर विशेषः साहित्य की अप्रतिम शख्यियत अमृता प्रीतम 

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नवीन शर्मा वैसे तो अमृता प्रीतम पंजाबी लेखिका हैं, लेकिन हिंदी भाषा के पाठकों में भी वे खासा लोकप्रिय  हैं। वे हिंदी फिल्मों की...

फिल्म समीक्षाः बैंडिट क्वीन की याद दिलाती है पान सिंह तोमर

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नवीन शर्मा पान सिंह तोमर फिल्म कई मायनों में देखने योग्य है। सबसे पहली बात तो यह एक सच्ची घटना पर आधारित है। उसके...

जन्मदिन पर खास- महेश भट्ट एक संवेदनशील निर्देशक

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नवीन शर्मा महेश भट्ट हिंदी सिनेमा के  बेहतरीन निर्देशकों में से एक हैं। वे निर्माता और स्‍क्रिप्ट राइटर भी हैं। उन्होंने शुरूआती निर्देशन करियर...

बंदूक व कलम की जुगलबंदी का नाम है मन्मथनाथ गुप्त

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जयंती पर विशेष नवीन शर्मा आमतौर पर बंदूक व कलम को दो विपरीत ध्रुव मानी जाती हैं। इन दोनों से ही तालमेल बना कर जिस...
मृणाल सेन पर कृपाशंकर चौबे की किताब- ‘मृणाल सेन का छाया लोक’ आधार प्रकाशन, पंचकूला से प्रकाशित है। लोकार्पण स्वयं मृणाल सेन ने किया था।

मृणाल सेन पर कृपाशंकर चौबे की किताब- मृणाल सेन का छाया लोक

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मृणाल सेन पर कृपाशंकर चौबे की किताब- ‘मृणाल सेन का छाया लोक’ आधार प्रकाशन, पंचकूला से प्रकाशित है। लोकार्पण स्वयं मृणाल सेन ने किया...

रेखा के जन्मदिन 10 अक्तूबर पर विशेष- इन आँखों की मस्ती के…

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नवीन शर्मा उमराव जान फिल्म में रेखा पर फिल्माया गया यह गीत उन पर एकदम फिट बैठता है। वे हिंदी सिनेमा की उन चंद...
‘बहुत हुई मंहगाई की मार, अबकी बार मोदी सरकार।।’ नारे पर रीझे भारतीय जनमानस को शायद अब पेट्रोल-डीजल सहित अन्य उपभोक्ता सामग्री में मंहगाई नहीं सताती। इसलिए अभी और मंहगाई के लिए तैयार ही रहें श्रीमान ! यह कह रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार श्याम किशोर चौबे

राहत पैकेज में कोरोना से बाहर निकलकर आगे की सोच दिखती है

श्याम किशोर चौबे राहत पैकेज में कोरोना संक्रमण काल के दौरान उत्पन्न अप्रत्याशित आर्थिक संकट से उबरने के लिए दूरगामी सोच का स्पष्ट दर्शन...
राजद्रोह पर पुलिस को 1962 में आये एक फैसले को पढ़ लेना चाहिए। अफजल की फांसी की बरसी पर जेएनयू में राष्ट्र विरोधी नारे लगे तो यह चर्चा में आया

राजद्रोह पर 1962 का सुप्रीम कोर्ट का निर्णय पुलिस अफसर पढ़ लें

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राजद्रोह पर पुलिस को 1962 में आये एक फैसले को पढ़ लेना चाहिए। अफजल गुरु को फांसी होने के बाद जेएनयू में उसकी बरसी...
बिहार

बिहार की पॉलिटिक्स पर प्रेमकुमार मणि की बेबाक टिप्पणी

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लोकसभा चुनावों के अब कुछ ही महीने शेष हैं। स्वाभाविक है राजनीतिक चर्चाएं तेज होंगी। हो भी रही हैं। चौक-चौराहों, दफ्तरों से लेकर घरेलू...
लारेंस फरलेंग्टी ने 101 साल की उम्र में भी कविता लिखी। उन्हें युद्ध से नफरत थी। मानवता से मुहब्बत के आदी थी। बुढ़ापे में बेहद रूमानी।

लारेंस फरलेंग्टी की की मौत पर शहर में मातम मना…

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लारेंस फरलेंग्टी ने 101 साल की उम्र में भी कविता लिखी। उन्हें युद्ध से नफरत थी। मानवता से मुहब्बत के आदी थी। बुढ़ापे में...