कोरोना की पहुंच पेट के बाहर तक ही नहीं रही, पैठ अंदर तक हो गई है। कोरोना साथ लिए आ रहे हैं शिशु। ऐसे में सहज सवाल- कौन है कोरोना से सुरक्षित? पढ़िए, कोरोना डायरी की इक्कीसवीं किस्त वरिष्ठ पत्रकार डॉ. संतोष मानव की कलम से।

कोरोना की माया: कहीं चिराग जलाए, कहीं बुझाए………             ...

कोरोना की माया ही है कि इस वायरस ने मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार के अनेक गांवों को रौशन किया है, वहीं अनेक घरों...
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा (फाइल फोटो)

अमेरिका के राष्ट्रपति पद से हटने के बाद क्या कर रहे हैं ओबामा, जानिए

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अमेरिका के राष्ट्रपति पद से हटने के बाद क्या कर रहे हैं बराक ओबामा, यह जानने की जिज्ञासा शायद सबकी होगी। विकसित बड़े देश...
सुषमा स्वराज 1977 में हरियाणा सरकार में मंत्री पद का कामकाज संभालने से पहले जेपी (जयप्रकाश नारायण) का आशीर्वाद लेने पटना आई थीं।

सुषमा स्वराज जेपी का आशीर्वाद लेने जब पटना पहुंची थीं

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सुषमा स्वराज 1977 में हरियाणा सरकार में मंत्री पद का कामकाज संभालने से पहले जेपी (जयप्रकाश नारायण) का आशीर्वाद लेने पटना आई थीं। उस...
अभिनेत्री रेखा

बॉलीवुड की सदाबहार एक्ट्रेस रेखा 65 साल की हुईं

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बॉलीवुड की सदाबहार एक्ट्रेस रेखा आज अपना 65वां जन्मदिन मना रही हैं। अमिताभ बच्चन के साथ रिश्तों को लेकर चर्चित रेखा की उम्र का...
फणीश्वरनाथ रेणु का कथा संसार दो भिन्न भारतीय स्‍वरूपों के बीच खड़ा है। प्रेमचंद के बाद फणीश्‍वर नाथ रेणु को आंचलिक कथाकार माना गया है।

मैला आँचल का रूसी अनुवाद और फणीश्वर नाथ रेणु का संकट

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मैला आँचल का जब रूसी अनुवाद हो गया, तो उसकी लोकप्रियता इतनी बढ़ गयी कि यह इसके लेखक फणीश्वर नाथ रेणु का के लिए...
वर्ष 1974 की तारीख 5 जून. यही वह दिन था, जब जयप्रकाश नारायण (जेपी) ने पटना के गांधी मैदान में दो शब्दों- संपूर्ण क्रांति का नारा दिया था.

जयप्रकाश नारायण ने जब इंटरव्यू में कहा- मुझे कौन पूछता है!

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जयप्रकाश नारायण (जेपी) अपने आखिरी दिनों में काफी उदास थे। केंद्र व राज्य में जनता पार्टी की सरकारें बनने के बाद अपने साक्षात्कार में...
नेहरू ने जम्मू-कश्मीर को पटेल के नियंत्रण से निकालकर इसे गोपाल स्वामी अयंगर के नियंत्रणाधीन दे दिया। इससे पटेल की भावनाएं गहराई से आहत हुईं।

सरदार पटेल न होते तो भारत का विभाजन रोकना कठिन था

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पुण्यतिथि पर विशेष नवीन शर्मा आज हम भारत का जो राजनीतिक मानचित्र देखते हैं, उसे इस रूप में ढालने में सबसे अधिक योगदान सरदार वल्लभ...
इमरजेंसी के दौर को समझने के लिए कविताएं, गजल आदि तो अहम दस्तावेज हैं हीं, उस दौर में जेल में लिखी गयीं डायरियां सबसे प्रामाणिक स्रोत हैं।

इमरजेंसी के दौर को समझने के लिए जेल डायरियां प्रामाणिक स्रोत हैं

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हरिवंश इमरजेंसी के दौर को समझने के लिए कविताएं, गजल आदि तो अहम दस्तावेज हैं हीं, उस दौर में जेल में लिखी गयीं डायरियां...
मलिकाइन के पाती

अपने ही घर में बेगाने हो जाने की मजबूरी का नाम है घुसपैठ

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सुरेंद्र किशोर सन 1979-1985 के असम आंदोलन के दौरान 855 आंदोलनकारियों की जानें गयी थीं। इतनी कुर्बानियां देने के बाद  1985 में प्रधानमंत्री राजीव...

राहुल वर्माः नवादा का लाल मचा रहा फिल्मी दुनिया में धमाल

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पटना (अनूप नारायण सिंह)। नवादा जैसे छोटे शहर का छोरा राहुल वर्मा इन दिनों फिल्मी दुनिया में धमाल मचा रहा है। गरीब पृष्ठभूमि से...