गांव में देवता तो गिनती के थे, पर बचपन में भूतों की भरमार थी
अरविंद चतुर्वेद
गांव में देवता तो गिनती के थे जो आज भी हैं, लेकिन हमारे बचपन में भूतों की भरमार थी। ऐसे में जान...
रेणु से मैंने सवाल किया, “आपने पालिटिक्स क्यों छोड़ दी?”
रेणु मानवीयता को स्थापित करने के लिए संघर्ष करने वाले लेखक हैं। वे भारतीयता का एक चेहरा हैं। एक अकेली आवाज हैं। दुनिया को...
आपातकाल में जार्ज महज कूद-फांद कर रहे थे
आपातकाल के दरम्यान जार्ज फ़र्नान्डिस की गतिविधि का कोई अर्थ नहीं था। जैसे कोई युवा बगैर आगे-पीछे सोचे ‘थ्रील’ महसूस करने के लिए कुद-फाँद...
डॉ. अम्बेडकर मानते थे- लोकतंत्र के लिए बुद्ध का उपयोग ही उपयुक्त है
डॉ. अंबेडकर मानते थे कि लोकतंत्र की स्थापना के लिए बुद्ध का उपयोग हो सकता है। राम, कृष्ण और गांधी ब्राह्मण धर्म के पक्षपोषक...
ओशो ने प्रवचन में कहा था- निंदा रस का धंधा है तुम्हारी पत्रकारिता
ओशो ने प्रवचन में कहा था- निंदा रस का धंधा है तुम्हारी पत्रकारिता। पत्रकारों की दृष्टि ही मिथ्या हो जाती है। उनके धंधे का...
संपूर्ण क्रांति की याद दिलाता इंदिरा गांधी का आपातकाल
आपातकाल जिन परिस्थितियों में लगा या इंदिरा गांधी ने लगाया, उसकी बड़ी वजह जयप्रकाश नारायण की अगुआई में छिड़ा छात्र आंदोलन था। उस आंदोलन...
जाति-व्यवस्था की भारत से समाप्ति असंभव है, इसकी वजह जानिए
जाति-व्यवस्था की भारत से समाप्ति असंभव है, क्योंकि हमारा धर्म राम, कृष्ण और अन्य असंख्य देवताओं पर टिका हुआ है। जाति रहेगी और इस पर चर्चा...
प्रलेक प्रकाशन की शिनाख्त सीरिज में- ‘कृपाशंकर चौबे एक शिनाख्त’
ओमप्रकाश अश्क
प्रलेक प्रकाशन, मुंबई ने पत्रकार, स्तंभकार, टिप्पणीकार, निबंधकार, साहित्य समालोचक कृपाशंकर चौबे के सृजन और शोध पर 464 पृष्ठों का ग्रंथ अभी-अभी...
कांधार कांड को ले भाजपा पर लांछन लगा रहे राहुल गांधी
के. विक्रम राव, वरिष्ठ पत्रकार
पुलवामा के खलनायक क्रूर आतंकी मोहम्मद अजहर मसूद को सुरक्षित कंधार तक पहुँचाने का राष्ट्रघातक गुनाह तो अटल-नीत भाजपा...
अटल बिहारी वाजपेयी ने नेहरू को देशभक्त कह कर श्रदांजलि दी थी
अटल बिहारी वाजपेयी ने पंडित जवाहर लाल नेहरू के निधन पर उन्हें देशभक्त कहा था। अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा- उनकी देशभक्ति के प्रति...




















