विपक्ष की भूमिका अब पहले जैसी नहीं। पूरी तरह बदल गयी है। सत्ता पक्ष के हर फैसले की आलोचना करना विपक्ष की भूमिका में शामिल हो गया है।

विपक्ष की भूमिका बदल गयी है, अच्छे की भी आलोचना

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विपक्ष की भूमिका अब पहले जैसी नहीं। पूरी तरह बदल गयी है। सत्ता पक्ष के हर फैसले की आलोचना करना विपक्ष की भूमिका में...
अयोध्या में राम मंदिर के लिए ट्रस्ट का एलान

सवाल राम का नहीं, राम की कथा का सवाल है

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नरेंद्र अनिकेत अयोध्‍या में राम मंदिर के सवाल पर कई बार उबाल आ चुका है। अदालत भी इस सवाल में उलझी हुई है। लेकिन...
जश्न मनाइए कि आप कोरोना काल के साक्षात गवाह हैं। जश्न मनाइए कि शराब की बोतलें लूटने नहीं, किसी भी कीमत में खरीदने के लिए आप पुलिस की गालियां-लाठियां खाने को भी तैयार-तत्पर हैं।

जश्न मनाइए कि आप कोरोना काल के साक्षात गवाह हैं

श्याम किशोर  चौबे जश्न मनाइए कि आप कोरोना काल के साक्षात गवाह हैं। जश्न मनाइए कि शराब की बोतलें लूटने नहीं, किसी भी कीमत में...

जब हालैंड में अनिल जनविजय किताबें चुराते पकड़े गये

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जब अमस्टर्डम में अनिल जनविजय किताबें चुराते पकड़े गये। यह रोचक प्रसंग अनिल जनविजय ने अपने फेसबुक वाल पर लिखा है। दुकानदार ने चोरी...
गुलाम अली खां साहब की गाई कुछ ठुमरियां- याद पिया की आये, आये न बालम का करूं सजनी, नैना मोरे तरस गये जैसी ठुमरी लोग नहीं भूलते।

गुलाम अली खां साहब की ठुमरी- याद पिया की आये, आये न बालम !

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गुलाम अली खां साहब की गाई कुछ ठुमरियां- याद पिया की आये, आये न बालम का करूं सजनी, नैना मोरे तरस गये जैसी ठुमरी...
वक्त-वक्त की बात है- 2015 की दोस्ती

लालू यादव तो भ्रष्ट साबित हो चुके हैं, फिर भी उनके इतने दीवाने क्यों...

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जे.एन. ठाकुर लालू यादव के लिए पिछड़ी जाति के लोग काफी मायने रखते हैं। पिछड़ी जाति के लोगों के लिए उन्होंने सामाजिक न्याय का...

बिहार NDA में हो गया सीट बंटवारा, JDU 14 और BJP 20 पर लड़ेंगे

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पटना। जदयू की कार्यकारिणी की बैठक के दिन नीतीश कुमार ने बताया था कि सीटों का बंटवारा हो चुका है, समय आने पर इसकी...

जयंती पर नमनः अदभुत अविस्मरणीय अब्दुल कलाम

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नवीन शर्मा एपीजे अब्दुल कलाम सबसे यूनिक किस्म के राष्ट्रपति थे। रामेश्वर के छोटे से शहर के एक साधारण से मुस्लिम परिवार में जन्में...
डॉ. अम्बेडकर का मानना था कि दलितों को जागरूक बनाने और उन्हें संगठित करने के लिए उनका स्वयं का मीडिया अनिवार्य है। उन्होंने ‘मूकनायक’ प्रकाशित किया।

डॉ. अम्बेडकर का मानना था, दलितों के लिए स्वयं का मीडिया जरूरी है

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कृपाशंकर चौबे डॉ. अम्बेडकर का मानना था कि दलितों को जागरूक बनाने और उन्हें संगठित करने के लिए उनका स्वयं का मीडिया अनिवार्य है।...
जवाहर लाल नेहरू के आखिरी कुछ दिन काफी द्वंद्व के रहे। नास्तिक नेहरू अंतिम महीनों में आस्था और अनास्था के दरम्यान डोल रहे थे।

पंडित जवाहर लाल नेहरू को मैंने कभी नहीं देखा!

शंभूनाथ शुक्ल  पंडित जवाहर लाल नेहरू को मैंने कभी नहीं देखा! नेहरू जी जिस दिन मरे, उसी दिन मेरा रिजल्ट आया था। मैं पाँचवीं...