कोरोना काल में ऐसी खबरें, जो भारत की ताकत का एहसास कराती हैं

कोरोना काल में ऐसी खबरें, जो भारत की ताकत का एहसास कराती हैं

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कोरोना काल में ऐसी अनेक खबरें आईं हैं,  जिसमें बताया गया कि घर में मौत हो गई, और फलां अधिकारी-कर्मचारी दूसरे दिन काम पर...
लेखक गुंजन ज्ञानेंद्र सिन्हा लंबे समय तक एसआर रामनुजन के साथ काम कर चुके हैं

ईनाडू मीडिया के डायरेक्टर रहे एसआर रामानुजन के बारे में जानिए

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ईनाडू मीडिया समूह के डायरेक्टर रहे एसआर रामानुजन के की कार्यशैली के बारे में उनके साथ काम कर चुके गुंजन ज्ञानेंद्र सिन्हा ने फेसबुक...

राहुल वर्माः नवादा का लाल मचा रहा फिल्मी दुनिया में धमाल

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पटना (अनूप नारायण सिंह)। नवादा जैसे छोटे शहर का छोरा राहुल वर्मा इन दिनों फिल्मी दुनिया में धमाल मचा रहा है। गरीब पृष्ठभूमि से...

जहां महज 11 रुपये की गुरु दक्षिणा से बन जाते हैं क्लर्क से कलेक्टर...

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वेद और पुराण की ज्ञाता तथा पटना में महज ₹11 के गुरु दक्षिणा में क्लर्क से लेकर कलेक्टर तैयार करने वाले अदम्या अदिति गुरुकुल...

झारखंड में तेजी से विकसित हो रही है नयी शैली की बैद्यनाथ पेंटिंग

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डॉ आरके नीरद वरिष्ठ पत्रकार अौर जनजातीय जीवन-संस्कृति के गहरे जानकार हैं। झारखंड की कला-संस्कृति पर प्रायः ढाई दशकों से काम कर रहे हैं।...
कोरोना की पहुंच पेट के बाहर तक ही नहीं रही, पैठ अंदर तक हो गई है। कोरोना साथ लिए आ रहे हैं शिशु। ऐसे में सहज सवाल- कौन है कोरोना से सुरक्षित? पढ़िए, कोरोना डायरी की इक्कीसवीं किस्त वरिष्ठ पत्रकार डॉ. संतोष मानव की कलम से।

कोरोना कहर के इस दौर में अब पहली चिंता मौत नहीं, पेट है

कोरोना कहर के इस दौर में अब पहली चिंता मौत नहीं पेट है। करोड़ों सड़क पर आ चुके हैं, लाखों आने वाले हैं। जैसे-जैसे...
मातृभाषाओं को रोजगार से जोड़ने वाले पहले शिक्षाविद हैं प्रो. दौलत सिंह कोठारी। दौलत सिंह कोठारी के नाम पर ही कोठारी आयोग बना था।

डी.एस. कोठारीः मातृभाषाओं को रोजगार से जोड़ने वाले शिक्षाविद

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अमरनाथ डी.एस. कोठारी मातृभाषाओं को रोजगार से जोड़ने वाले पहले शिक्षाविद हैं। दौलत सिंह कोठारी के नाम पर ही कोठारी आयोग बना था। आजादी...
लॉक डाउन- 4 को जारी रखने का फैसला केंद्र सरकार ने किया है। राज्य अपने हिसाब से रेड, आरेंज व ग्रीन जोन का निर्धारण कर सकेंगे।

कोरोना डायरी- हर रोज एक नया अनुभव, आती है नयी समझ

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कोरोना डायरी- हर रोज एक नया अनुभव, नयी समझ। वरिष्ठ पत्रकार डॉ. संतोष मानव इस कोरोना काल में हर रोज के अनुभव डायरी के...

मलिकाइन के पातीः ना रही बांस, ना बाजी बंसुरी

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पावं लागीं मलिकार! काली माई के किरपा से सब केहू इहवां ठीक बा, बरम बाबा से निहोरा बा जे रउरो ठीक रहीं। ए मलिकार, ई...

बेरोजगारी की मार से त्रस्त हैं देशभर के पत्रकार

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लोकनाथ तिवारी की रे किछू काजेर संधान पेली, छ मास धोरे घोरे बंदी होये पोड़े आची। (क्या रे कोई काम काज खोजा, छह महीने...