जन्मदिन पर विशेषः संभावनाओं से भरपूर अभिनेत्री कोंकणा सेन शर्मा

0
नवीन शर्मा कोंकणा सेन शर्मा नैन नक्श से भले ही साधारण दिखती हों पर वे असाधारण क्षमताओं से भरपूर अभिनेत्री हैं। उन्हें दो...
ओशो ने कहा था- निंदा रस का धंधा है तुम्हारी पत्रकारिता। पत्रकारों की दृष्टि ही मिथ्या हो जाती है। उनके धंधे का मतलब ही यह है कि जनता जो चाहती है, वह लाओ खोजबीन कर।

पुण्यतिथिः आधुनिक युग के  विद्रोही संन्यासी का नाम है ओशो

0
नवीन शर्मा रजनीश, जो बाद में ओशो के नाम से जाने गये, वे आधुनिक भारत के सबसे चर्चित और और विवादास्पद आध्यात्मिक गुरु रहे...
अंधभक्ति में उड़ेले गये विचार को लिबरल लोग कंगना राणावत का ज्ञान मानने का हठ कर रहे हैं। वह 1947 को इग्नोर कहां कर रही। वह तो आजादी की व्याख्या कर रही है। जैसे टुकड़े-टुकड़े गैंग को इस देश से आजादी चाहिए।

कंगना राणावत के बयान को उसका ज्ञान समझने की भूल न करें  

0
अंधभक्ति में उड़ेले गये विचार को लिबरल लोग कंगना राणावत का ज्ञान मानने का हठ कर रहे हैं। वह 1947 को इग्नोर कहां कर...
कोरोना के इस दौर में जहां बहुत कुछ थम-सा गया है, वहीं राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित फिल्म 'बसंत का वज्रनाद' जल्दी ही आ रहे हैं।

कोरोना के दौर में श्रीराम डाल्टन की फिल्म ‘बसंत का वज्रनाद’

0
कोरोना के इस दौर में जहां बहुत कुछ थम-सा गया है, वहीं राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित श्रीराम डाल्टन अपनी फिल्म 'बसंत का वज्रनाद' लेकर...
आपातकाल-पीड़ित लोगबाग हर साल इमरजेंसी की वर्षगांठ मनाते हैं। मनाना जरूरी भी है। क्योंकि 25 जून  1975 को इमरजेंसी लगाकर पूरे देश को एक बड़े जेलखाना में बदल दिया गया था।

इमरजेंसी के इस दौर को कवियों ने भी अपने नजरिये से देखा, खूब रचा

0
इमरजेंसी 25 जून 1975 को लागू हुई। 21 माह (1975-1977) तक रही। इमरजेंसी के इस दौर को कवियों ने भी अपने नजरिये से देखा...

अनुसंधानपरक आलोचना-दृष्टि का मार्क्सवादी चेहरा : वीर भारत तलवार

0
अमरनाथ वीरभारत तलवार ( 20.9.1947 ) हिन्दी के गंभीर अध्येता, शोधार्थी और आलोचक हैं.  वे चुपचाप अपना काम करने में विश्वास करते हैं. प्रचार...
एक झोपड़ी में आग सेंकती देवघर की डीसी नैंसी सहाय की मां

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर एक यात्रा प्रसंग और 4 महिला पात्र

0
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर यह निजी यह यात्रा प्रसंग बरबस याद आ गया। इसलिए कि इस कहानी में चार महिला पात्रों का जिक्र है।...

अच्छे शिक्षकः बैकुण्ठ बाबू के कारण एकमा स्कूल का बड़ा नाम था

0
सुरेंद्र किशोर सन् 1963 में बिहार के सारण जिले के एकमा स्थित अलख नारायण सिंह उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य बैकुण्ठ नाथ सिंह को ...

मलिकाइन के पाती- घर के लात नीमन, बाहर के सतावल बाउर

0
पावं लागीं मलिकार। एने तनी अझुरा गइनी हां मलिकार, लड़िकन के बर-बेमारी में, एही से टाइम पर पाती ना लिखवा पवनी। अब नन्हका ठीक...

वीपी सिंह को याद करते हुएः राजा नहीं, फकीर है

0
वीपी सिंह एक ऐसे प्रधानमंत्री और नेता थे, जिनके लिए लोगों ने ये नारा लगाया- राजा नहीं फ़क़ीर है- भारत की तक़दीर है! वर्तमान...