सुषमा स्वराज 1977 में हरियाणा सरकार में मंत्री पद का कामकाज संभालने से पहले जेपी (जयप्रकाश नारायण) का आशीर्वाद लेने पटना आई थीं।

सुषमा स्वराज जी का 1996 का वह भाषण भुलाये नहीं भूलता

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सुषमा स्वराज ने यह भाषण संसद में तब दिया था, जब 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार गिरी और प्रधानमंत्री पद से उन्हें...

NITISH के संग नाश्ते पर बैठे SHAH, रात का खाना भी साथ

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पटना। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह एक दिन के बिहार दौरे पर गुरुवार को पटना पहुंचे। कल वह रांची में थे। वहां से चार्टर्ड...

प्राण की बलि भले न हो, पर मानसिक बलि ले रहा ME TOO अभियान

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आयातित विदेशी सामान आदमी के पास रहे तो वह इतराता-इठलाता है। समाज में रौब दिखाता है। लेकिन विदेश में जन्म लेकर जब MEE TOO...

अमेरिका के ओहायो में मनाया जाता है श्रेया घोषाल डे

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नवीन शर्मा  श्रेया घोषाल हिंदी सिनेमा की सबसे मादक आवाज वाली गायिकाओं में शुमार हैं। वे आशा भोंसले की परंपरा की अगली कड़ी हैं।...

उत्तराखंड में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने किया योग

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मां गंगा की इस भूमि पर, जहां चारधाम स्थित हैं, जहां आदि शंकराचार्य आए, जहां स्वामी विवेकानंद कई बार आए, वहां योग दिवस पर...
इसी अखबार में एम. चेलापति राव 30 साल तक संपादक रहे

एक संपादक ऐसा भी, जिसके लिए पद्म भूषण निरर्थक था

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एक संपादक ऐसा भी, जिसके लिए पद्म भूषण निरर्थक था। यह सुन कर लोगों को आश्चर्य होगा, लेकिन ऐसा एम. चेलापति राव (दिवंगत) ने...
जननायक कर्पूरी ठाकुर का आज जन्मदिन है। कर्पूरी ठाकुर सही मायने में जननायक थे। गरीबों-दलितों के उत्थान के लिए उन्होंने जो किया, वह नहीं भूलेगा।

बंगाल के नेताओं से सीखें कैसे सादगी से जीया जाता है

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बंगाल के नेताओं से सीखें कैसे सादगी से जीया जाता है। किसी को सादगी सीखनी हो तो बंगाल के नेताओं से सीखे। हाल में...
भारत यायावर

कसम से तीसरी कसम तक के मायने समझने के लिए इसे पढ़ें

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भारत यायावर कसम क्या है? एक प्रण,एक संकल्प, एक प्रतिज्ञा, एक वचन, एक आत्मसंयम की उद्घोषणा! कुछ लोग बात-बात पर कसम खाते हैं। कुछ...
ओमप्रकाश अश्क

और अब प्रभात खबर का पटना संस्करण बना अगला पड़ाव

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मुन्ना मास्टर बने एडिटर- पत्रकार ओमप्रकाश अश्क की प्रस्तावित पुस्तक हैं। इसे हम लगातार क्रमिक रूप से प्रकाशित कर रहे हैं। गुवाहाटी, रांची, कोलकाता...

बेरोजगारी की मार से त्रस्त हैं देशभर के पत्रकार

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लोकनाथ तिवारी की रे किछू काजेर संधान पेली, छ मास धोरे घोरे बंदी होये पोड़े आची। (क्या रे कोई काम काज खोजा, छह महीने...