लेखक या कवि क्यों और किसलिए लिखता है, जानने के लिए इस लेख को पढ़ लें। सबके लेखन की अपनी सोच है। कोई नाम के लिए लिखता है तो कुछ दाम के लिए लिखते हैं।

लेखक या कवि क्यों और किसलिए लिखता है, जानने के लिए इसे पढ़ें

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लेखक या कवि क्यों और किसलिए लिखता है, जानने के लिए इस लेख को पढ़ लें। सबके लेखन की अपनी सोच है। कोई नाम...

NITISH के संग नाश्ते पर बैठे SHAH, रात का खाना भी साथ

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पटना। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह एक दिन के बिहार दौरे पर गुरुवार को पटना पहुंचे। कल वह रांची में थे। वहां से चार्टर्ड...

शरद पूर्णिमा 13 अक्टूबर को, मनोकामना पूर्ति के लिए करें ये उपाय

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शरद पूर्णिमा इस साल 13 अक्टूबर को है। मनोकामना की पूर्ति के लिए जातक राशि के अनुरूप उपाय करने से मनोकामना सिद्धि हो सकती...
जयपाल सिंह मुंडा को भारतीय जनजातियों और झारखंड आंदोलन की पहली ईंट और आदिवासी नायकों के तौर पर देखा जाता है। उन्हें मरङ गोमके के तौर पर जाना जाता है।

जयपाल सिंह मुंडा के बारे में जानें, आदिवासी नायकों की मजबूत कड़ी थे

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विशद कुमार जयपाल सिंह मुंडा को भारतीय जनजातियों और झारखंड आंदोलन की पहली ईंट और आदिवासी नायकों के तौर पर देखा जाता है। उन्हें...

अचानक और इतना बड़ा फैसला क्या नागपुर के इशारे पर लिया गया

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यह सही से जांच का विषय है कि कश्मीर में समर्थन वापसी की "मास्टर की" किसके पास थी? नागपुर के पास, या फिर "7 लोक कल्याण मार्ग " के पास? खबर...

ट्रेनों की लेटलतीफी पर रेल मंत्री का नया शिगूफा

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बैलगाड़ियों के भारी लेट चलने और उससे सरकार को फजीहत से बचाने के लिए अब रेल मंत्री पीयूष गोयल ने नया पैंतरा चला है कि मरम्मत...
आपातकाल-पीड़ित लोगबाग हर साल इमरजेंसी की वर्षगांठ मनाते हैं। मनाना जरूरी भी है। क्योंकि 25 जून  1975 को इमरजेंसी लगाकर पूरे देश को एक बड़े जेलखाना में बदल दिया गया था। 23 मार्च 1977 को ही इसे समाप्त किया जा सका था, जब लोकसभा के आम चुनाव के बाद मोरारजी देसाई की सरकार बनी।

इसलिए जरूरी है आपातकाल के दिनों को याद रखना !

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सुरेंद्र किशोर  आपातकाल-पीड़ित लोगबाग हर साल इमरजेंसी की वर्षगांठ मनाते हैं। मनाना जरूरी भी है। क्योंकि 25 जून  1975 को इमरजेंसी लगाकर पूरे देश...

विश्वनाथ प्रताप सिंह वही नहीं थे, जैसे अब दिखते हैं

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वीपी सिंह वही नहीं थे, जैसे अब दिखते हैं...लेकिन इस बदलाव में एक अच्छाई है...एक राजनीतिक सूत्र है... पिछले दिनों योगी आदित्यनाथ सरकार पर इधर...
राम मनोहर लोहिया गैर कांग्रेसवाद के आधारस्तंभ थे। स्वतंत्र भारत की राजनीति और चिंतन धारा पर उनका गहरा असर था।

डा. लोहिया का जब पूरे सदन ने खड़े होकर स्वागत किया था

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डा. लोहिया का जब पूरे सदन ने खड़े होकर का स्वागत किया था। यह सुन कर आश्चर्य हो सकता है कि तब के प्रधान...
महात्मा गांधी राजनीतिक आजादी के बाद कांग्रेस को समाप्त कर देना चाहते थे। राजकाज के लिए नया संगठन चाहते थे।

महात्मा गांधी  आजादी के बाद कांग्रेस को समाप्त कर देना चाहते थे

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शेष नारायण सिंह महात्मा गांधी राजनीतिक आजादी के बाद कांग्रेस को समाप्त कर देना चाहते थे। राजकाज के लिए नया संगठन चाहते थे। राजनीतिक...