आपातकाल में जार्ज महज कूद-फांद कर रहे थे

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आपातकाल के दरम्यान जार्ज फ़र्नान्डिस की गतिविधि का कोई अर्थ नहीं था। जैसे कोई युवा बगैर आगे-पीछे सोचे ‘थ्रील’ महसूस करने के लिए कुद-फाँद...

BJP से सीटों के बारगेन की तैयारी में है पासवान की लोजपा

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समस्तीपुर। राम विलास पासवान की पार्टी लोजपा ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिये हैं। एससी-एसटी ऐक्ट के बहाने लोजपा एनडीए के बड़े घटक दल...
सुप्रीम कोर्ट ने 2 जनवरी, 2011 को यह स्वीकार किया कि देश में आपातकाल के दौरान इस कोर्ट से भी नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन हुआ था।

सुप्रीम कोर्ट ने भी माना था- आपातकाल में मौलिक अधिकारों का हनन हुआ

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सुप्रीम कोर्ट ने 2 जनवरी, 2011 को यह स्वीकार किया कि देश में आपातकाल के दौरान इस कोर्ट से भी नागरिकों के मौलिक अधिकारों...

सात्विक बंधन ही सही अर्थ में रक्षा बंधन हैः श्रीश्री रविशंकर

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रक्षाबंधन एक ऐसा बंधन है, जो आपको बचाता है। कुछ उच्चतम के साथ आपका बंधन होने की वजह से आप बच जाते हो। जीवन...

मलिकाइन के पातीः जइसन करनी, ओइसन भरनी

पांव लागीं, मलिकार! विसवास बा कि रउरा नीक-निरोग होखेब। काली माई के रोजे सांझ-सबेरे गोहराइले रउरा खातिर। ए मलिकार, रउरा से एगो बात जाने...
पाकिस्तानी सेना के जनरल एके नियाजी जब बांग्लादेश युद्ध में हार के बाद सरेंडर कर रहे थे तो वहां मौजूद भीड़ उन्हें मारने पर उतारू थी. भीड़ से बचाने के लिए भारतीय जवानों ने मानव  प्राचीर बना दी.

पाकिस्तानी सेना के जनरल को जब हमारे जवानों ने बचा लिया 

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पाकिस्तानी सेना के जनरल एके नियाजी जब बांग्लादेश युद्ध में हार के बाद सरेंडर कर रहे थे तो वहां मौजूद भीड़ उन्हें मारने पर...

अद्भुत प्रतिभा के धनी गणितज्ञ डा. वशिष्ठ नारायण सिंहः  

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जन्मदिन पर विशेष सुरेंद्र किशोर गणितज्ञ वशिष्ठ बाबू यानी वशिष्ठ नारायण सिंह अद्भूुत प्रतिभा के धनी थे। उनके लिए पटना विश्वविद्यालय ने पहली बार नियम...
बिहार में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या 5,175 हो गयी है। पिछले 24 घंटे में कोरोना के 203 नये पॉजिटिव मामले सामने आये हैं।

कोरोना डायरी- (4) कोरोना काल नहीं, इसे द्रोहकाल कहिए जनाब !

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डा. संतोष मानव कोरोना डायरी का चौथा भाग पढ़ेः यह सिर्फ कोरोना काल नहीं है। यह द्रोहकाल भी है। ध्यान से देखिए, हर घर...
25 जून भारतीय राजनीति में एक उल्लेखनीय तारीख है। इसी रोज 1975 में, तत्कालीन इंदिरा सरकार ने इमरजेंसी लगाई थी। दरअसल वह आपातकाल नहीं, आतंककाल था।

राजनीति का नाम सुनते ही अब घिन्न क्यों आती है

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राजनीति का नाम सुनते ही अब घिन्न आती है। लेकिन नयी पीढ़ी भले अनजान हो, सच यह है कि राजनीति में पहले ऐसे लोग भी हुए...
‘बहुत हुई मंहगाई की मार, अबकी बार मोदी सरकार।।’ नारे पर रीझे भारतीय जनमानस को शायद अब पेट्रोल-डीजल सहित अन्य उपभोक्ता सामग्री में मंहगाई नहीं सताती। इसलिए अभी और मंहगाई के लिए तैयार ही रहें श्रीमान ! यह कह रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार श्याम किशोर चौबे

केंद्रीय राहत पैकेज का सचः पैकेज गया ‘वन’ में, सोचें अपने मन में

श्याम किशोर चौबे केंद्रीय राहत पैकेज गया ‘वन’ में, सोचें अपने मन में। दादी-नानी की कहानियों की तर्ज पर मोदी सरकार द्वारा घोषित कोविड...