हाकी खिलाड़ी ध्यानचंद ने जब हिटलर को करारा जवाब दिया, उसे काफी रोमांचकारी है। संवाद पढ़कर आप भी बोल उठेंगे वाह, क्या करारा जवाब दिया !

हाकी खिलाड़ी ध्यानचंद ने जब हिटलर को करारा जवाब दिया

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हाकी खिलाड़ी ध्यानचंद ने जब हिटलर को करारा जवाब दिया, वह काफी रोमांचकारी है। संवाद पढ़कर आप भी बोल उठेंगे वाह, क्या करारा जवाब...

ट्रेनों की लेटलतीफी पर रेल मंत्री का नया शिगूफा

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बैलगाड़ियों के भारी लेट चलने और उससे सरकार को फजीहत से बचाने के लिए अब रेल मंत्री पीयूष गोयल ने नया पैंतरा चला है कि मरम्मत...
वर्ष 1974 की तारीख 5 जून. यही वह दिन था, जब जयप्रकाश नारायण (जेपी) ने पटना के गांधी मैदान में दो शब्दों- संपूर्ण क्रांति का नारा दिया था.

संपूर्ण क्रांति- जेपी के दो शब्दों से बदल गयी थी देश की सियासी तस्वीर

ओमप्रकाश अश्क वर्ष 1974 की तारीख 5 जून. यही वह दिन था, जब जयप्रकाश नारायण (जेपी) ने पटना के गांधी मैदान में दो शब्दों-...
भारतीय भाषाओं को प्रतिष्ठा दिलाने के अथक सेनानी रहे हैं बलदेव बंशी। यूपीएससी की परीक्षाओं में भारतीय भाषाओं को उन्होंने हक दिलाया।

भारतीय भाषाओं की प्रतिष्ठा के अथक सेनानी थे बलदेव बंशी

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भारतीय भाषाओं को प्रतिष्ठा दिलाने के अथक सेनानी रहे हैं बलदेव बंशी। यूपीएससी की परीक्षाओं में भारतीय भाषाओं को उन्होंने हक दिलाया। आइए, जानते...
कोरोना काल में न सिर्फ जरूरी कामकाज छप पड़ गये हैं, बल्कि शादी-विवाह और प्रणय संबंधों पर इसने चोट पहुंचायी है।

कोरोना के बहाने बिदेेसिया की याद- अंखियां से दिन भर गिरे लोर ढर-ढर

कोरोना के बहाने बिदेसिया और इसके रचनाकार भिखारी ठाकुर को लेखक ने कुछ इस तरह याद किया है- अंखियां से दिन भर गिरे लोर...
बिरसा मुंडा को भारतीय इतिहास में स्थान मिलना ही चाहिए। वह स्थान सम्मानजनक होगा या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि 70 लाख आदिवासियों के साथ आप किस तरह से पेश आते हैं।

बिरसा मुंडा को भारतीय इतिहास में स्थान मिलना ही चाहिए

बिरसा मुंडा को भारतीय इतिहास में स्थान मिलना ही चाहिए। वह स्थान सम्मानजनक होगा या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि 70...

अटल बिहारी वाजपेयी जी के 1942 में रोल की सत्यता 

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के विक्रम राव जब तक अटल बिहारी वाजपेयी चुनावी राजनीति से रिटायर नहीं हुये थे,  उन पर हर लोकसभाई निर्वाचन के दौरान आरोप लगाया...
गुलाम अली खां साहब की गाई कुछ ठुमरियां- याद पिया की आये, आये न बालम का करूं सजनी, नैना मोरे तरस गये जैसी ठुमरी लोग नहीं भूलते।

गुलाम अली खां साहब की ठुमरी- याद पिया की आये, आये न बालम !

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गुलाम अली खां साहब की गाई कुछ ठुमरियां- याद पिया की आये, आये न बालम का करूं सजनी, नैना मोरे तरस गये जैसी ठुमरी...
भारत में पत्रकारिता के जनक थे अंग्रेज जेम्स आगस्टस हिकी। भारत में पत्रकारिता का जन्म 240 साल पहले 29 जनवरी 1780 को हुआ था।

भारत में पत्रकारिता के जनक थे अंग्रेज जेम्स आगस्टस हिकी

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कृपाशंकर चौबे भारत में पत्रकारिता के जनक थे अंग्रेज जेम्स आगस्टस हिकी। भारत में पत्रकारिता का जन्म 240 साल पहले 29 जनवरी 1780 को...
बेरोजगारी पर बहस नयी नहीं, लेकिन सेन्टर फ़ॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी (सीएमआईई) की ताजा रिपोर्ट ने बहस को नया जीवन दे दिया है।

टीवी चैनल कभी अखबारों के लिए चुनौती नहीं बन पाये

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टीवी चैनल की दुनिया कभी अखबारों के लिए चुनौती बन कर उभरी थी। कयास लगाये गये कि अखबार खत्म हो जाएंगे, लेकिन टीवी चैनल...