भाजपा ने पीडीपी का साथ छोड़ अच्छा काम किया है

0
जम्मू-कश्मीर में आखिरकार भाजपा और पीडीपी का बेमेल गठबंधन खत्म हो गया। बिना विचारे जो करै, सो पाछे पछताय- वाली कहावत चरितार्थ हुई। अव्वल तो...
सुषमा स्वराज 1977 में हरियाणा सरकार में मंत्री पद का कामकाज संभालने से पहले जेपी (जयप्रकाश नारायण) का आशीर्वाद लेने पटना आई थीं।

सुषमा स्वराज जी का 1996 का वह भाषण भुलाये नहीं भूलता

0
सुषमा स्वराज ने यह भाषण संसद में तब दिया था, जब 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार गिरी और प्रधानमंत्री पद से उन्हें...

भोजपुरी फिल्‍म ‘काहें पिरीतिया लगवल’  की शूटिंग शुरू

0
पटना। ऋद्धि फिल्‍म्‍स इंटरटेंमेंट प्रस्‍तुत भोजपुरी फिल्‍म ‘काहे पिरीतिया लगवल’ की शूटिंग आज से मुंबई में शुरू हो चुकी है। सामाजिक प्रेम कथा पर...
चीन ने सोवियत संघ की सहमति के बाद ही 1962 में भारत पर हमला किया था। अगर जवाहरलाल नेहरू लंबी जिंदगी जीते तो भारत की विदेश नीति ही बदल जाती।

चीन से युद्ध के बाद नेहरू लंबी जिंदगी जीते तो विदेश नीति बदल जाती

सुरेंद्र किशोर चीन ने सोवियत संघ की सहमति के बाद ही 1962 में भारत पर हमला किया था। अगर जवाहरलाल नेहरू लंबी जिंदगी जीते...
मुंबई में हरे वृक्षों का संहार रुक गया, उच्चतम न्यायालय की पहल से

मुंबई में हरे वृक्षों का संहार रुक गया, आभार उच्चतम न्यायालय का

0
के. विक्रम राव  मुंबई में हरे वृक्षों का संहार रुक गया, आभार उच्चतम न्यायालय का। वर्ना छब्बीस हजार जानों पर आरे कालोनी में आरी...
फणीश्वरनाथ रेणु मानवीयता को स्थापित करने के लिए संघर्ष करने वाले लेखक हैं। वे भारतीयता का एक चेहरा हैं। एक अकेली आवाज हैं।

रेणु से मैंने सवाल किया, “आपने पालिटिक्स क्यों छोड़ दी?”

0
रेणु मानवीयता को स्थापित करने के लिए संघर्ष करने वाले लेखक हैं। वे भारतीयता का एक चेहरा हैं। एक अकेली आवाज हैं। दुनिया को...

डेढ़ सौ साल बाद दलित टोले में मैट्रिक पास हुई कोमल

0
घोघा। मैट्रिक की परीक्षा का परिणाम आते ही घोघा स्थित महादलित टोला के लोग झूम उठे। डेढ़ सौ साल बाद टोला की बिटिया कोमल...

शून्य की ओर बढ़ते बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार

वैसे राजनीति में किसी के बारे में अगर कह दिया जाए की फलां शून्य की ओर बढ़ रहा है तो लोग अनायास ही उसके...
सरकारी सेवाओं से मातृभाषाओं खासकर हिन्दी की विदाई होने लगी है। जाहिर है कि ऐसी स्थिति में हिन्दी के प्रति छात्रों का आकर्षण घटेगा। नौकरी न मिले तो फिर हिन्दी कोई पढ़े क्यों।

सरकारी सेवाओं से आहिस्ता-आहिस्ता होती जा रही हिन्दी की विदाई

0
अमरनाथ सरकारी सेवाओं से मातृभाषाओं खासकर हिन्दी की विदाई होने लगी है। जाहिर है कि ऐसी स्थिति में हिन्दी के प्रति छात्रों का आकर्षण...

दू आंख से सरकार ना चलेले ए सुशासन बाबू!

0
पावं लागी मलिकार। रउरा त मने मन रिसियाइल-खिसियाइल होखेब कि केतना दिन से हम रउरा के पाती ना पठवनी। सांच के आंच कइसन। रउरा...