प्रभाष जोशी के जन्मदिन पर विशेषः हां, मिला था आपसे मुझे याद है

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देशज और दैनिक जीवन के शब्दों को वाक्यों में पिरोकर मॉडर्न पत्रकारिता को एक नया रूप देने वाले स्व. प्रभाष जोशी का आज जन्मदिन...
गांव में देवता तो गिनती के थे जो आज भी हैं, लेकिन हमारे बचपन में भूतों की भरमार थी। ऐसे में जान सकते हैं कि देवताओं पर कितना लोड रहा होगा।

गांव में देवता तो गिनती के थे, पर बचपन में भूतों की भरमार थी

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अरविंद चतुर्वेद गांव में देवता तो गिनती के थे जो आज भी हैं, लेकिन हमारे बचपन में भूतों की भरमार थी। ऐसे में जान...
फणीश्वरनाथ रेणु मानवीयता को स्थापित करने के लिए संघर्ष करने वाले लेखक हैं। वे भारतीयता का एक चेहरा हैं। एक अकेली आवाज हैं।

रेणु से मैंने सवाल किया, “आपने पालिटिक्स क्यों छोड़ दी?”

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रेणु मानवीयता को स्थापित करने के लिए संघर्ष करने वाले लेखक हैं। वे भारतीयता का एक चेहरा हैं। एक अकेली आवाज हैं। दुनिया को...

शून्य की ओर बढ़ते बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार

वैसे राजनीति में किसी के बारे में अगर कह दिया जाए की फलां शून्य की ओर बढ़ रहा है तो लोग अनायास ही उसके...
महात्मा गांधी राजनीतिक आजादी के बाद कांग्रेस को समाप्त कर देना चाहते थे। राजकाज के लिए नया संगठन चाहते थे।

महात्मा गांधी  आजादी के बाद कांग्रेस को समाप्त कर देना चाहते थे

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शेष नारायण सिंह महात्मा गांधी राजनीतिक आजादी के बाद कांग्रेस को समाप्त कर देना चाहते थे। राजकाज के लिए नया संगठन चाहते थे। राजनीतिक...
सूरज पालीवाल ने अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में रहते कृपाशंकर चौबे को तत्कालीन कुलपति विभूति नारायण राव से गलतफहमी दूर करायी थी।

सूरज पालीवाल के आलोचना-लोक का विराट है आलोक वृत्त

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सूरज पालीवाल ने अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में रहते कृपाशंकर चौबे को तत्कालीन कुलपति विभूति नारायण राव से गलतफहमी दूर करायी थी। इस रोचक...

फिल्मी गमशपः रामायण की सीता फिर दिखेंगी सिल्वर स्क्रीन पर

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रामानंद सागर के कालजयी धारावाहिक रामायण की सीता यानी दीपिका चिखलिया फिर से सिल्वर स्क्रीन पर नजर आयेंगी। वह न्यूज़ आई कि हिंदी फ़िल्म...

शहर बदलते ही क्यों बदल जाती है हमारी तमीज और तहजीब

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नागेन्द्र प्रताप शहर या मुल्क बदलते ही हमारे तहजीब और तमीज बदल जाती है। ऐसा क्यों होता है, बता रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार नागेंद्र...
फिल्म अभिनेत्री राजदुलारी

आना मेरी जान संडे के संडे…गाना सुनें तो दुलारी जरूर दिख जाएंगी

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वीर विनोद छाबड़ा  आना मेरी जान संडे के संडे सुनें तो दुलारी दिख जाएंगी। दुलारी, कभी नाम सुना होगा या चेहरा याद होगा। कभी...
नेताजी सुभाष चंद्र बोस पत्रकार भी थे। यह बात नयी पीढ़ी के पत्रकारों को शायद मालूम न हो। नेताजी ने साप्ताहिक ‘फारवर्ड ब्लाक’  का संपादन किया।

जयंती पर विशेषः आज़ाद हिन्द फौज वाले नेताजी को सलाम!

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नवीन शर्मा नेताजी सुभाष बोस स्वतंत्रता संग्राम के सबसे लाजवाब हीरो हैं, लेकिन हमारे देश की सरकारों ने उन्हें उतना सम्मान नहीं दिया, जिसके...