ट्रेन के भीतर का दृश्य

पत्रकार संजय कुमार सिंह ने बताई अपनी रेल यात्रा की पीड़ा 

पत्रकार संजय कुमार सिंह ने बतायी अपनी रेल यात्रा की पीड़ा। उनका कहना है कि रेल तो भारतीय है, लेकिन कायदे अब भी अंग्रेजों...
कोरोना काल में शहादत, शराब और शर्म को शिद्दत से सुनने-समझने और तस्वीरों में देखने का मौका मिला। कहीं भावनाओं के भंवर में उलझा तो कई बार हालात पर हंसी भी आई। पढ़ें, कोरोना डायरी की 11वीं कड़ीः

कोरोना काल में शहादत, शराब और शर्म का आलम !

कोरोना काल में शहादत, शराब और शर्म को शिद्दत से सुनने-समझने और तस्वीरों में देखने का मौका मिला। कहीं भावनाओं के भंवर में उलझा...
तेजस्वी यादव

RJD सवर्णों को साधने में जुटा, भूराबाल से किया किनारा

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पटना। बिहार फिलहाल दलित-पिछड़े और सवर्ण राजनीति के घनचक्कर में फंसा है। दलितों के प्रति लगभग सभी दलों का झुकाव हाल के दिनों में...
लोक का सांस्कृतिक पक्ष हमेशा से संवादधर्मी रहा है। भारतीय समाज के परिप्रेक्ष्य में देखें तो तीन संस्कृतियाँ मूलतः देखने को मिलती हैं।

चैती छठ की तैयारी में जुटे व्रती, त्योहार 9 से 12 अप्रैल तक

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चैती छठ 9 अप्रैल से शुरू है। यह पर्व चार दिनों तक चलेगा। छठ प्राचीन हिंदू त्यौहार है, जो भगवान सूर्य और छठ मैया...
नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)

नरेंद्र मोदी पर नाराजगी का कारण अब जाकर समझ में आया

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सुरेंद्र किशोर नरेंद्र मोदी से अलप्संख्यक तबके की नाराजगी का पता अब जाकर चल रहा है। अल्पसंख्यकों का जेहादी तबका नरेंद्र मोदी पर ही...
गांव की संस्मरण कथा की शृंखला शुरू की है वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार अरविंद चतुर्वेद ने। गांव की संस्मरण कथा की एक कड़ी आप पढ़ चुके हैं।

गांव की संस्मरण कथा- बगुलघट्टा के बगुले उर्फ रामनरेश का घलुस्कू फार्मूला

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गांव की संस्मरण कथा की शृंखला शुरू की है वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार अरविंद चतुर्वेद ने। गांव की संस्मरण कथा की एक कड़ी आप...
विनोद खन्ना

विनोद खन्ना कद-काठी से अमिताभ बच्चन पर भारी पड़ते थे

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नवीन शर्मा विनोद खन्ना अपने दौर के सबसे स्मार्ट और हैंडसम अभिनेता रहे हैं। अभिनय में भले ही अमिताभ उन पर भारी पड़ते हों,...
उपेंद्रनाथ अश्क न सिर्फ सशक्त साहित्यकार थे, बल्कि एक सही संपादक भी थे। संपादन भी सिखाते थे उपेंद्रनाथ अश्क। प्रो. कृपाशंकर चौबे को उन्होंने कई पत्र लिखे थे। (दायें प्रो. कृपाशंकर चौबे और बायें उपेंद्रनाथ अश्क)

उपेंद्रनाथ अश्क न सिर्फ साहित्यकार थे, बल्कि एक संपादक भी थे

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उपेंद्रनाथ अश्क न सिर्फ सशक्त साहित्यकार थे, बल्कि एक सही संपादक भी थे। संपादन भी सिखाते थे उपेंद्रनाथ अश्क। प्रो. कृपाशंकर चौबे को उन्होंने...
इमर्जेंसी की 44 वीं सालगिरह पर जय प्रकाश नारायण के नेतृत्व में शुरू हुए आंदोलन की याद स्वाभाविक है। इसलिए कि इमर्जेंसी का आधार जय प्रकाश का आंदोलन ही माना गया।

इमर्जेंसी की 44 वीं सालगिरह पर जय प्रकाश आंदोलन का स्मरण

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शिवानंद तिवारी इमर्जेंसी की 44 वीं सालगिरह पर जय प्रकाश नारायण के नेतृत्व में शुरू हुए आंदोलन की याद स्वाभाविक है। इसलिए कि इमर्जेंसी...
सरकारी सेवाओं से मातृभाषाओं खासकर हिन्दी की विदाई होने लगी है। जाहिर है कि ऐसी स्थिति में हिन्दी के प्रति छात्रों का आकर्षण घटेगा। नौकरी न मिले तो फिर हिन्दी कोई पढ़े क्यों।

सरकारी सेवाओं से आहिस्ता-आहिस्ता होती जा रही हिन्दी की विदाई

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अमरनाथ सरकारी सेवाओं से मातृभाषाओं खासकर हिन्दी की विदाई होने लगी है। जाहिर है कि ऐसी स्थिति में हिन्दी के प्रति छात्रों का आकर्षण...