अनय यानी प्रो. कृष्ण चन्द्र पाण्डेय को जानिए, कौन थे
अनय यानी प्रो. कृष्ण चन्द्र पाण्डेय। हिन्दी के एक प्रतिष्ठित व्यंग्य-लेखक, साहित्यकार और पत्रकार, जो पाठकों के बीच अनय नाम से परिचित थे। ‘तीसरा विभाजन’...
राम मनोहर लोहिया विश्व पत्रकारिता पर सजग दृष्टि रखते थे
कृपाशंकर चौबे
राम मनोहर लोहिया ऐसे राजनेता थे, जिन्होंने समाजवाद की स्थापना के अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए पत्रकारिता को भी उपकरण...
शहीद दिवस पर विशेषः जरा याद करो सरदार भगत सिंह की कुर्बानी
प्रेमकुमार मणि
23 मार्च वह दिन है, जिस रोज भगत सिंह शहीद हुए थे। 28 सितम्बर 1907 को पंजाब सूबे के बांगा में एक...
नोबल विजेता अभिजीत बनर्जी व चेतन भगत के अजोब तर्क!
सुरेंद्र किशोर
नोबल विजेता अभिजीत बनर्जी और अब चेतन भगत! ये दोनों बुद्धिजीवी चाहते हैं कि भारत सरकार भ्रष्टाचार पर कोई कार्रवाई ही न...
भारतीय कम्युनिस्टों की बड़ी जमात हमले के वक्त चीन के साथ थी
सुरेंद्र किशोर
भारतीय कम्युनिस्टों की एक बड़ी जमात ने 1962 में इस देश (भारत) पर जब चीन ने हमला हुआ तो चीन का साथ...
प्राण की बलि भले न हो, पर मानसिक बलि ले रहा ME TOO अभियान
आयातित विदेशी सामान आदमी के पास रहे तो वह इतराता-इठलाता है। समाज में रौब दिखाता है। लेकिन विदेश में जन्म लेकर जब MEE TOO...
मोरारजी देसाई खुद का बैठकखाना यानी घर नहीं बनवा सके थे
मोरारजी देसाई की पुण्यतिथि पर
सुरेंद्र किशोर
मोरारजी देसाई खुद का बैठकखाना यानी घर नहीं बनवा सके थे, क्योंकि वेतन के पैसों से घर बनाना...
और अविनाश जी की हो गई विदाई, अश्क को मिली पटना की कमान
वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश अश्क का पटना आगमन 1997 के मध्य में हुआ और अगले पड़ाव की ओर वह जून 1999 में प्रस्थान कर गये।...
मलिकाइन के पाती- भइल बियाह मोर, कर ब का
पावं लागीं मलिकार। दसईं (दशहरा) बीतल, बीस दिन बाद देवराई (दीपावली) आ ओकरा बाद छठ के संगे तेवहार के सीजन ओरा जाई। ए मलिकार,...
राजनीति का नाम सुनते ही अब घिन्न क्यों आती है
राजनीति का नाम सुनते ही अब घिन्न आती है। लेकिन नयी पीढ़ी भले अनजान हो, सच यह है कि राजनीति में पहले ऐसे लोग भी हुए...




















