मुक्तिबोध को पता था कि रूढ़िवादी राम की राजनीति कर सकते हैं
मुक्तिबोध ने 1950 में ही इस बात को अच्छी तरह ताड़ लिया था कि भारत की सामाजिक रूढ़िवादी ताकतें आने वाले समय में राम...
छठ पर्व के स्त्री विमर्श को समझना चाहिए, यह उन्हीं का पर्व
शंभुनाथ
छठ पर्व एकमात्र ऐसा पर्व है जो स्त्रियों का है। इसमें पुरोहित ब्राह्मणों, पितृसत्ता तथा जाति भेदभाव का कोई स्थान नहीं है। यह...
फटा जींस पहनने का फैशन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसा मुद्दा
अरविन्द पाण्डेय
फटा जींस पहनने की स्वतंत्रता मूलतः अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का ही एक रूप है। पर इसका उपयोग कई बार आदमी को...
लेखक सआदत हसन मंटोः ठंडा गोश्त जैसी कहानियों के बदनाम लेखक
पुण्यतिथि पर संस्मरण
नवीन शर्मा
सआदत हसन मंटो (11 मई 1912-18 जनवरी 1955) उर्दू लेखक थे, जो अपनी लघु कथाओं- बू, खोल दो, ठंडा गोश्त...
BIRTHDAY SPECIAL: आक्रोश का सबसे दमदार चेहरा हैं ओम पुरी
नवीन शर्मा
ओम पुरी हमारे हिंदी सिनेमा के नायब हीरा थे। करीब चालीस साल लंबे फिल्मी सफर में उन्होंने कई यादगार फिल्मों का तोहफा...
चंद्रशेखर की जेल डायरी इमरजेंसी के दौर को समझने का अहम दस्तावेज है
चंद्रशेखर की जेल डायरी में अनेक प्रसंग दर्ज हैं। इमरजेंसी के दौर की शासन व्यवस्था, राजनीतिक गतिविधियों को समझने के लिए यह अहम दस्तावेज...
हरी चीटियाँ जहाँ सपने देखती हैं- फिल्म का संदेश तो समझें
नारायण सिंह
हरी चीटियाँ जहाँ सपने देखती हैं (Where the Green Ants Dream) पश्चिम जर्मनी के वर्नर हरिजोग (Werner Herzog) की यह चर्चित फिल्म...
जयप्रकाश नारायण ने जब रेणु से साहित्यिक सहयोग मांगा
प्रस्तुतिः गोपेश्वर सिंह
जयप्रकाश नारायण (जेपी) ने फणीश्वर नाथ रेणु से एक बार साहित्यिक सहयोग मांगा था। इसके लिए जयप्रकाश जी ने रेणु को...
एक गुमनाम साप्ताहिक ‘महावीर’ का सत्याग्रह अंक, लोकार्पण 26 को
रांची। देश की आजादी में पत्र-पत्रिकाओं ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उस समय के आंदोलन के दस्तावेजीकरण का काम इन पत्र-पत्रिकाओं ने बखूबी किया।...
जब जेनरल मैनेजर पंचोली जी ने अश्क को शो काज नोटिस थमाया
वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश अश्क की प्रस्तावित पुस्तक- मुन्ना मास्टर बने एडिटर- की अगली कड़ी। आपको अगर यह सीरीज पसंद आ रही है तो उनके...




















