कला की दुनिया में गणेश की पाइन बहुआयामी कलाकृतियां रही हैं। भारत उनकी सर्जनात्मक कृतियों पर गर्व महसूस करता है।

कला की दुनिया में गणेश पाइन की कलाकृतियां बहुआयामी रही हैं

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कृपाशंकर चौबे कला की दुनिया में गणेश की पाइन बहुआयामी कलाकृतियां रही हैं। भारत उनकी सर्जनात्मक कृतियों पर गर्व महसूस करता है। भारत जिन...
विनोद खन्ना

विनोद खन्ना कद-काठी से अमिताभ बच्चन पर भारी पड़ते थे

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नवीन शर्मा विनोद खन्ना अपने दौर के सबसे स्मार्ट और हैंडसम अभिनेता रहे हैं। अभिनय में भले ही अमिताभ उन पर भारी पड़ते हों,...

कोर्ट का फैसला कारगर हो पायेगा केजरीवाल के रहते?

सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर आम आदमी पार्टी की सरकार चाहे जितने भी दावे करे, लेकिन यह फैसला उलझन बढ़ाने वाला है। मसलन...
वर्ष 1974 की तारीख 5 जून. यही वह दिन था, जब जयप्रकाश नारायण (जेपी) ने पटना के गांधी मैदान में दो शब्दों- संपूर्ण क्रांति का नारा दिया था.

जयप्रकाश नारायण ने जब इंटरव्यू में कहा- मुझे कौन पूछता है!

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जयप्रकाश नारायण (जेपी) अपने आखिरी दिनों में काफी उदास थे। केंद्र व राज्य में जनता पार्टी की सरकारें बनने के बाद अपने साक्षात्कार में...

बिहार NDA में हो गया सीट बंटवारा, JDU 14 और BJP 20 पर लड़ेंगे

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पटना। जदयू की कार्यकारिणी की बैठक के दिन नीतीश कुमार ने बताया था कि सीटों का बंटवारा हो चुका है, समय आने पर इसकी...
अनय यानी प्रो. कृष्ण चन्द्र पाण्डेय ने अवकाश के बाद इसी प्रेसिडेंसी कालेज में अध्यापन किया। हिन्दी के एक प्रतिष्ठित व्यंग्य-लेखक, साहित्यकार और पत्रकार, जो पाठकों के बीच अनय नाम से परिचित थे।

अनय यानी प्रो. कृष्ण चन्द्र पाण्डेय को जानिए, कौन थे

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अनय यानी प्रो. कृष्ण चन्द्र पाण्डेय। हिन्दी के एक प्रतिष्ठित व्यंग्य-लेखक, साहित्यकार और पत्रकार, जो पाठकों के बीच अनय नाम से परिचित थे। ‘तीसरा विभाजन’...
कोरोना की पहुंच पेट के बाहर तक ही नहीं रही, पैठ अंदर तक हो गई है। कोरोना साथ लिए आ रहे हैं शिशु। ऐसे में सहज सवाल- कौन है कोरोना से सुरक्षित? पढ़िए, कोरोना डायरी की इक्कीसवीं किस्त वरिष्ठ पत्रकार डॉ. संतोष मानव की कलम से।

महाराष्ट्र के औरंगाबाद की घटना और रवि, रणवीर व जमलो की याद

महाराष्ट्र के औरंगाबाद से अल्लसुबह दिल दहला देने वाली खबर आई। मालगाड़ी ने 15 मजदूरों की जान ले ली। सभी रेल पटरी पर सोये...
राम मनोहर लोहिया

राम मनोहर लोहिया जनसंघ के राष्ट्रवाद को पसंद करते थे

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राम मनोहर लोहिया जनसंघ के प्रखर राष्ट्रवाद को पसंद करते थे, पर शर्तों के साथ। वे जनसंघ के प्रखर राष्ट्रवाद  को पसंद करते थे।...
आर्थिक उदारीकरण ने आपको वेतन-पैकेज लाख-करोड़ रुपये तो दिये, लेकिन ये पैसे बाजार के रास्ते फिर पूंजीपतियों के पास ही पहुंच गये। इसे कोई नहीं समझा।

मार्क्सवाद को समझे बिना हर कोई इसकी आलोचना कर रहा 

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मार्क्सवाद के दर्शन की आलोचना करने के पहले यह नहीं भूलना चाहिए कि सोवियत रूस और चीन की जनता का भाग्य इसी ने बदला।...
महात्मा गांधी को नमन। उनका स्मरण महज 02 अक्तूबर (जन्मदिन) या 30 जनवरी (पुण्यतिथि) तक के लिए ही नहीं है। उनका दर्शन जीवन के पल-पल की जरूरत बन चुका है।

गांधी का चिंतन-सोच और जीवन पद्धति ही हमारा मार्गदर्शक  है

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हरिवंश गांधी को नमन। उनका स्मरण महज 02 अक्तूबर (जन्मदिन) या 30 जनवरी (पुण्यतिथि) तक के लिए ही नहीं है। उनका दर्शन जीवन के...