भारतीय भाषाओं को प्रतिष्ठा दिलाने के अथक सेनानी रहे हैं बलदेव बंशी। यूपीएससी की परीक्षाओं में भारतीय भाषाओं को उन्होंने हक दिलाया।

भारतीय भाषाओं की प्रतिष्ठा के अथक सेनानी थे बलदेव बंशी

0
भारतीय भाषाओं को प्रतिष्ठा दिलाने के अथक सेनानी रहे हैं बलदेव बंशी। यूपीएससी की परीक्षाओं में भारतीय भाषाओं को उन्होंने हक दिलाया। आइए, जानते...
दाउद इब्राहिम ने बिहार में भी अपने लोगों के माध्यम से तीन दशक पहले धाक जमाने की कोशिश की थी

दाउद इब्राहिम का आदमी तब बिहार से राज्यसभा पहुंच जाता

0
दाउद इब्राहिम ने अपने आदमी को बिहार से राज्यसभा भेजने की कोशिश की थी। वह भी तकरीबन तीन दशक पहले। यानी राजनीति को धंधा...

31 अक्टूबर को पूरे दिन पुष्य नक्षत्र, खरीदारी के लिए शुभ

0
पटना। पुष्य का अर्थ होता है पोषण, ऊर्जा और शक्ति प्रदान करने वाला, यह शुभ एवं कल्याणकारी होता है। कार्तिक कृष्ण अष्टमी 31 अक्टूबर...
भारत यायावर

रेणु का है अंदाज-ए-बयां और के रचनाकार हैं भारत यायावर 

0
गौरीशंकर सिंह "रेणु का है अंदाज-ए-बयाँ और" पूर्णिया में आरएन शॉ चौक से सटे लालमणि पुस्तक भंडार में दिखी। मेरी नजर एक पुस्तक पर...
Lockdown की मियाद 3 मई तक बढ़ा दी गयी है। कोरोना की लड़ाई में अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। हफ्ते भर लाकडाउन की सख्ती से पालन कराया जाएगा।

नरेंद्र मोदी का सही कदम, सांसद फंड से राजनीति में शुचिता असंभव

0
नरेंद्र मोदी का सांसद फंड खत्म करने का फैसला सही है। वैसे यह प्रावधान अभी दो साल के लिए के है, पर स्थायी बन...

बहुत घूमे संसार में, एक बार ठहर कर देखें बिहार मेंः प्रमोद कुमार

0
पटना। मलेशिया और बिहार की सांस्कृतिक एकता को प्रदर्शित करने एवं राज्य के पर्यटन स्थलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से  बिहार के पर्यटन...

अच्छे शिक्षकः बैकुण्ठ बाबू के कारण एकमा स्कूल का बड़ा नाम था

0
सुरेंद्र किशोर सन् 1963 में बिहार के सारण जिले के एकमा स्थित अलख नारायण सिंह उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य बैकुण्ठ नाथ सिंह को ...

IPP बैंक से बैंकिंग सेक्टर में होगी नये युग की शुरुआतः भाजपा 

0
पटना। केंद्र सरकार द्वारा शुरू किए गए इंडियन पोस्ट पेमेंट बैंक से वितीय समावेशन के क्षेत्र में क्रांति आने का दावा करते हुए प्रदेश...
सरकारी सेवाओं से मातृभाषाओं खासकर हिन्दी की विदाई होने लगी है। जाहिर है कि ऐसी स्थिति में हिन्दी के प्रति छात्रों का आकर्षण घटेगा। नौकरी न मिले तो फिर हिन्दी कोई पढ़े क्यों।

सरकारी सेवाओं से आहिस्ता-आहिस्ता होती जा रही हिन्दी की विदाई

0
अमरनाथ सरकारी सेवाओं से मातृभाषाओं खासकर हिन्दी की विदाई होने लगी है। जाहिर है कि ऐसी स्थिति में हिन्दी के प्रति छात्रों का आकर्षण...
अम्फान और निसर्ग जैसी आपदा तो झांकी है, बड़े खतरे अभी बाकी हैं। आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि पर्यावरण का क्षरण मानव समाज के अस्तित्व के लिए खतरा बन रहा है।

अम्फान और निसर्ग जैसी आपदा तो झांकी है, बड़े खतरे अभी बाकी हैं

अम्फान और निसर्ग जैसी आपदा तो झांकी है, बड़े खतरे अभी बाकी हैं। आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि पर्यावरण का क्षरण...