अवसाद और आत्महत्या के बहाने एक इंटर्न लड़की की दिलचस्प कहानी
उमेश चतुर्वेदी
अवसाद और आत्महत्या के बहाने एक इंटर्न लड़की की दिलचस्प कहानी बतायी है वरिष्ठ पत्रकार उनेश चतुर्वेदी ने। लिखा है- कुछ साल...
कोरोना तो जाएगा, चाहे जब जाए, अभी तो इसने तबाही मचा रखी है
कोरोना तो जाएगा, चाहे जब जाए, मगर अभी तो इसने तबाही मचा रखी है। न्यूयार्क से खबर है, मुर्दों के लिए कब्र नहीं हैं।...
बिहार में तन गईं हैं सियासी तलवारें, बस अब वार का है इंतजार
बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के अंदर सब कुछ ठीकठाक नहीं है। हाल के दिनों में कई ऐसे संकेत मिले हैं, जिससे यह...
तू ही सागर है तू ही किनारा… यानी सुलक्षणा पंडित, इक भूली दास्तां
वीर विनोद छाबड़ा
तू ही सागर है तू ही किनारा, ढूँढता है तू किसका सहारा...संकल्प (1975) के इस गाने की गायिका सुलक्षणा पंडित थीं।...
लोकतांत्रिक इतिहास का काला पन्ना है आपातकाल
नवीन शर्मा
लोकतांत्रिक इतिहास का काला पन्ना है आपातकाल। निरंकुश राजतंत्र की तुलना में लोकतंत्र काफी अच्छी व्यवस्था है। यह शासन व्यवस्था को निरंकुश...
हाकी खिलाड़ी ध्यानचंद ने जब हिटलर को करारा जवाब दिया
हाकी खिलाड़ी ध्यानचंद ने जब हिटलर को करारा जवाब दिया, वह काफी रोमांचकारी है। संवाद पढ़कर आप भी बोल उठेंगे वाह, क्या करारा जवाब...
शादी का मतलब यह नहीं कि पत्नी हमेशा शारीरिक संबंध के लिए तैयार हैः...
नयी दिल्ली। शादी का मतलब यह नहीं है कि पत्नी हमेशा शारीरिक संबंध के लिए तैयार बैठी है। शादी के बाद पति-पत्नी दोनों को...
शहीद दिवस पर विशेषः जरा याद करो सरदार भगत सिंह की कुर्बानी
प्रेमकुमार मणि
23 मार्च वह दिन है, जिस रोज भगत सिंह शहीद हुए थे। 28 सितम्बर 1907 को पंजाब सूबे के बांगा में एक...
भगवान शिव सबको इतने नीक क्यों लगते हैं?
शिव क्यों नीक लगते हैं? सोचा कभी कि शिव-भक्त क्यों विष्णु-द्रोही होते हैं? सारे असुर, रावण से लेकर! युगों पूर्व शैव तथा वैष्णव झगड़ते...
रणेन्द्र के उपन्यास- गूंगी रुलाई का कोरस- में भारत की साझा संस्कृति
अमरनाथ
रणेन्द्र के उपन्यास- गूंगी रुलाई का कोरस- को पढ़कर पूरा किया। उपन्याकस ने मन मस्तिष्क पर धाक जमा लिया है। इसमें भारत की...




















