कोरोना संकट में छिपा है संस्कार और संयमित जीवन शैली का संदेश
कोरोना संकट ही नहीं, संस्कार और संयमित जीवन शैली का संदेश लेकर भी आया है। संकट के साथ अवसर के अनेक द्वार भी खुलते...
आपातकाल में कर्पूरी ठाकुर का नेपाल में रहा अज्ञातवास
सुरेंद्र किशोर
आपातकाल में कर्पूरी ठाकुर की नेपाल में उपस्थिति को लेकर भारत सरकार चिंतित थी। भारत सरकार ने नेपाल सरकार से कहा कि...
इतिहास के आईने में बिहारः सुगांव डायनेस्टी और विद्यापति
लेखक-पत्रकार संजय ठाकुर की अप्रकाशित इतिहास की पुस्तक- विद्यापति और सुगांव (अतीत के आईने में चम्पारण) का एक अंश
पूर्वी चम्पारण जिला के सुगौली प्रखंड के ...
जयप्रकाश नारायण ने जब इंटरव्यू में कहा- मुझे कौन पूछता है!
जयप्रकाश नारायण (जेपी) अपने आखिरी दिनों में काफी उदास थे। केंद्र व राज्य में जनता पार्टी की सरकारें बनने के बाद अपने साक्षात्कार में...
रेणु का उपन्यास ‘मैला आँचल’ जब चम्बल के डाकुओं तक पहुंचा
भारत यायावर
रेणु का उपन्यास 'मैला आँचल' अपने प्रकाशन के बाद धीरे-धीरे फैलता ही जा रहा था, लेकिन यह चम्बल घाटी में डाकुओं के...
पाहन ला देवहु दस रुपया, नहीं दिया तो जान पर आफत आ गयी
मंगलेश तिवारी मुफलिस
पाहन ला देवहु, दस रूपया। नहीं दिया तो जान पर आफत आ गयी। किसी तरह 50 रुपये दंड और 100 रुपये...
पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर को उनकी पुण्यतिथि पर याद करते हुए
Chanchal Bhu
पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर को याद करते हुए। बलिया से उठा, बुलन्दी छू गया। ठेठ, खुद्दार, गंवई अक्स, खादी की सादगी में मुस्कुराता...
मलिकाइन के पातीः बाप रे, बिहार में बाग के बाग कुलबांसी
मलिकाइन के पाती अबकी घसिटउआ मोबाइल पर लिखा के आइल बा। ऊ अपने त ना लिख पवली, बाकिर गांव के कवनो कनिया से लिखवा...
मुक्तिबोध को पता था कि रूढ़िवादी राम की राजनीति कर सकते हैं
मुक्तिबोध ने 1950 में ही इस बात को अच्छी तरह ताड़ लिया था कि भारत की सामाजिक रूढ़िवादी ताकतें आने वाले समय में राम...
शहर बदलते ही क्यों बदल जाती है हमारी तमीज और तहजीब
नागेन्द्र प्रताप
शहर या मुल्क बदलते ही हमारे तहजीब और तमीज बदल जाती है। ऐसा क्यों होता है, बता रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार नागेंद्र...




















