गुलजारी लाल नंदी को तो नयी पीढ़ी अब भूल ही गयी होगी

गुलजारी लाल नंदा को तो नयी पीढ़ी अब भूल ही गयी होगी !

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गुलजारी लाल नंदा को तो नयी पीढ़ी अब भूल ही गयी होगी। देश में दो ऐसे मौके आये, जब उन्हें कार्यवाहक प्रधानमंत्री का दायित्व...
महात्मा गांधी

महात्मा गांधी ने हर कालखंड में तानाशाही को चुनौती दी

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शेष नारायण सिंह महात्मा गांधी ने हर कालखंड में तानाशाही को चुनौती दी। यह रामबाण की तरह असरदार भी रहा है। गांधीजी ने चंपारण में...
गांधीजी ने बकरे की बलि रोकने पर लोगों को विवश कर धर्म की शिक्षा दी थी। चंपारण सत्याग्रह के दिनों की बात है। गांधीजी वहीं एक गांव में रुके हुए थे।

गांधीजी ने जब बकरे की बलि रोकने पर लोगों को विवश कर दिया

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निराला गांधीजी ने बकरे की बलि रोकने पर लोगों को विवश कर धर्म की शिक्षा दी थी। चंपारण सत्याग्रह के दिनों की बात है।...
रामनिरंजन परिमलेन्दु

रामनिरंजन परिमलेन्दुः अनुसंधानपरक आलोचना का अन्यतम योद्धा

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डॉ. अमरनाथ पुरानी पीढ़ी के गिने चुने महान अनुसंधानकर्ताओं की तरह नि:स्वार्थ भाव सेएकान्त साधना करने वालेअनुसंधानपरक आलोचना के अन्यतम  योद्धा रामनिरंजन परिमलेन्दु (25.8.1934-29.9.2020)...
सटीक भविष्यवाणी करने वाली लड़की

भारत की एक लड़की की होती है हर बात सच, जानिये कैसे

भारत की एक लड़की की होती है हर बात सच, जानिये कैसे। वह जो कुछ कहती है, वह अमूमन सच हो जाया करता है।...
डॉ. अम्बेडकर ने 3 अप्रैल 1927 को मराठी पाक्षिक ‘बहिष्कृत भारत’ निकाला। वह पाक्षिक वर्ष 1929 तक यानी दो साल तक लगातार निकलता रहा।

डॉ. भीमराव अम्बेडकर का ‘बहिष्कृत भारत’ और उनकी पत्रकारिता

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कृपाशंकर चौबे डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने 3 अप्रैल 1927 को मराठी पाक्षिक ‘बहिष्कृत भारत’ निकाला। वह पाक्षिक वर्ष 1929 तक यानी दो साल तक...
रामदेव शुक्ल व्याख्यात्मक आलोचना के अंतिम स्तंभ हैं। ‘बिहारी- सतसई का पुनर्पाठ’ उनकी नवीनतम प्रकाशित आलोचना-कृति है। वे अच्छे कथाकार भी हैं।

रामदेव शुक्लः व्याख्यात्मक आलोचना के अंतिम स्तंभ

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रामदेव शुक्ल व्याख्यात्मक आलोचना के अंतिम स्तंभ हैं। ‘बिहारी- सतसई का पुनर्पाठ’ उनकी नवीनतम प्रकाशित आलोचना-कृति है। वे अच्छे कथाकार भी हैं। ‘बिहारी- सतसई...
‘हिन्दोस्थान’ अखबार में हिन्दी, उर्दू और अंग्रेजी खबरें साथ छपती थीं। यह अभिनव प्रयोग था। हिन्दी से शुरू होकर बाद में यह बदलाव देखने को मिला।

‘हिन्दोस्थान’ अखबार में हिन्दी, उर्दू और अंग्रेजी खबरें एक साथ

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‘हिन्दोस्थान’ अखबार में हिन्दी, उर्दू और अंग्रेजी खबरें साथ छपती थीं। यह अभिनव प्रयोग था। हिन्दी से शुरू होकर बाद में यह बदलाव देखने...
नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)

नरेंद्र मोदी पर नाराजगी का कारण अब जाकर समझ में आया

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सुरेंद्र किशोर नरेंद्र मोदी से अलप्संख्यक तबके की नाराजगी का पता अब जाकर चल रहा है। अल्पसंख्यकों का जेहादी तबका नरेंद्र मोदी पर ही...

डेढ़ सौ साल बाद दलित टोले में मैट्रिक पास हुई कोमल

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घोघा। मैट्रिक की परीक्षा का परिणाम आते ही घोघा स्थित महादलित टोला के लोग झूम उठे। डेढ़ सौ साल बाद टोला की बिटिया कोमल...