अच्युतानंद मिश्र का हिन्दी पत्रकारिता में अवदान असाधारण है
कृपाशंकर चौबे
अच्युतानंद मिश्र का हिंदी पत्रकारिता में पिछले पांच दशकों का अवदान असाधारण है। इस दौरान हिन्दी पत्रकारिता में उनकी धाक और साख...
तेरह वर्ष की उम्र में हुआ था गांधी जी और कस्तूरबा का विवाह
राज्यवर्द्धन
तेरह वर्ष की आयु में गांधी जी का ब्याह कस्तूरबा से हुआ था। गांधी जी लिखते हैं-"हम भाइयों को तो सिर्फ तैयारियों से...
तू ही सागर है तू ही किनारा… यानी सुलक्षणा पंडित, इक भूली दास्तां
वीर विनोद छाबड़ा
तू ही सागर है तू ही किनारा, ढूँढता है तू किसका सहारा...संकल्प (1975) के इस गाने की गायिका सुलक्षणा पंडित थीं।...
गांव छोड़ब नहीं, जंगल छोड़ब नहीं, मायं माटी छोड़ब नहीं..
गांव छोड़ब नहीं, जंगल छोड़ब नहीं, मायं माटी छोड़ब नहीं...कोरोना डायरी की आठवीं कड़ी में हम उस संकल्प की बात करेंगे, जिसका मूल स्वर...
अनय यानी प्रो. कृष्ण चन्द्र पाण्डेय को जानिए, कौन थे
अनय यानी प्रो. कृष्ण चन्द्र पाण्डेय। हिन्दी के एक प्रतिष्ठित व्यंग्य-लेखक, साहित्यकार और पत्रकार, जो पाठकों के बीच अनय नाम से परिचित थे। ‘तीसरा विभाजन’...
फणीश्वर नाथ रेणु ने कथा की अलग प्रणाली विकसित की
फणीश्वर नाथ रेणु कथा की नैरेटिव या आख्यानक पद्धति के साथ नाटकीयता का समन्वय कर विरासत को कायम रखते हुए कथा की अलग प्रणाली...
गांधीजी ने जब बकरे की बलि रोकने पर लोगों को विवश कर दिया
निराला
गांधीजी ने बकरे की बलि रोकने पर लोगों को विवश कर धर्म की शिक्षा दी थी। चंपारण सत्याग्रह के दिनों की बात है।...
इंटर फेल भी अब कर सकेंगे ग्रेज्युएशन, इग्नू दे रहा मौका
पटना। ग्रेज्युएशन तक की पढ़ाई हर छात्र की इच्छा होती है। कई बार इंटर पास नहीं करने के कारण ऐसे छात्रों की मनोकामना पूरी नहीं...
राम मनोहर लोहिया विश्व पत्रकारिता पर सजग दृष्टि रखते थे
कृपाशंकर चौबे
राम मनोहर लोहिया ऐसे राजनेता थे, जिन्होंने समाजवाद की स्थापना के अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए पत्रकारिता को भी उपकरण...
हिन्दी पढ़कर कोई करेगा क्या, रोजी-रोटी तो मिलने से रही
संजय कुमार सिंह
हिन्दी पढ़कर कोई करेगा क्या, रोजी-रोटी तो मिलने से रही। वैसे तो मैंने हिन्दी नहीं पढ़ी और विज्ञान का छात्र रहा...



















