फणीश्वरनाथ रेणु मानवीयता को स्थापित करने के लिए संघर्ष करने वाले लेखक हैं। वे भारतीयता का एक चेहरा हैं। एक अकेली आवाज हैं।

फणीश्वरनाथ रेणु के व्यक्तित्व में विनम्रता स्वाभाविक छंद था

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भारत यायावर  फणीश्वरनाथ रेणु के व्यक्तित्व में विनम्रता और सहजता स्वाभाविक छंद था। उन्हें आक्रोश और गुस्से में देखना दुर्लभ संयोग था। वे मुश्किलों...
महेंदर मिसिर

अंग्रेजी अर्थव्यवस्था को तबाह करने वाले थे महेंद्र मिसिर

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अनूप नारायण सिंह पटना। अंग्रेजी अर्थव्यवस्था को तबाह करने वाले थे छपरा के महेंद्र मिसिर। उनका जीवन किसी बेहतरीन कहानी की तरह है। एक...

गिरिराज ने दी सलाह, अब तो तीर्थ यात्रा पर निकल जाएं मुख्यमंत्री नीतीश

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Patna/ Begusarai : बिहार जदयू और राजद के बीच सीएम पद को लेकर जो खींचतान मचा है। उसपर भाजपा की भी पैनी नजर है।...

मेजर ध्यानचंदः बचपन में खेल में अरुचि, बड़े होने पर हॉकी के जादूगर

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नवीन शर्मा मेजर ध्यानचंद सिंह का फील्ड हॉकी में वही स्थान है, जो फुटबाल में पेले, क्रिकेट में डॉन ब्रेडमैम व बाक्सिंग में मोहम्मद...
हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित जीवन रहा है अनंतराम त्रिपाठी का। आज प्रातः साढ़े चार बजे निधन हो गया।

अनंतराम त्रिपाठी का निधन, हिंदी के प्रचार के लिए समर्पित रहे

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कृपाशंकर चौबे अनंतराम त्रिपाठी का निधन हो गया। हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित जीवन रहा है अनंतराम त्रिपाठी का। आज प्रातः साढ़े चार...
सूर्यकांत त्रिपाठी निराला

वासंतिक मौसम के मद्देनजर खास- निराला : एक याद या विषाद!

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के. विक्रम राव वसन्त पंचमी मतलब वाणी पुत्र कवि निराला की सालगाँठ। कौन सी थी?  बहस अभी जारी रहेगी। निराला किस सदी के थे?...
एक्नटर जीर हुसैन

भोजपुरी की पहली फिल्म- ‘गंगा मैया तोहे पियरी चढ़इबो’

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वीर विनोद छाबड़ा   भोजपुरी की पहली फिल्म 'गंगा मैया तोहे पिहरी चढ़इबो' के पीछे जिनका हाथ था, वह थे नजीर हुसैन। भोजपुरी सिनेमा के...

विश्वनाथ प्रताप सिंह वही नहीं थे, जैसे अब दिखते हैं

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वीपी सिंह वही नहीं थे, जैसे अब दिखते हैं...लेकिन इस बदलाव में एक अच्छाई है...एक राजनीतिक सूत्र है... पिछले दिनों योगी आदित्यनाथ सरकार पर इधर...
बाउल सम्राट पद्मश्री पूर्णचंद्र दास ने कहा था- बड़े बाउल गायकों के साथ बाउल संगीत काफी कुछ खत्म हो गया है। तीन-चार घराने हैं जो अब भी वीरभूम में हैं।

बाउल गायकों के साथ बाउल संगीत भी अब काफी कुछ खत्म हो गया है

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बाउल सम्राट पद्मश्री पूर्णचंद्र दास ने कहा था- बड़े बाउल गायकों के साथ बाउल संगीत काफी कुछ खत्म हो गया है। तीन-चार घराने हैं...
वर्ष 1974 की तारीख 5 जून. यही वह दिन था, जब जयप्रकाश नारायण (जेपी) ने पटना के गांधी मैदान में दो शब्दों- संपूर्ण क्रांति का नारा दिया था.

संपूर्ण क्रांति- जेपी के दो शब्दों से बदल गयी थी देश की सियासी तस्वीर

ओमप्रकाश अश्क वर्ष 1974 की तारीख 5 जून. यही वह दिन था, जब जयप्रकाश नारायण (जेपी) ने पटना के गांधी मैदान में दो शब्दों-...