फणीश्वरनाथ रेणु मानवीयता को स्थापित करने के लिए संघर्ष करने वाले लेखक हैं। वे भारतीयता का एक चेहरा हैं। एक अकेली आवाज हैं।

फणीश्वरनाथ रेणु के व्यक्तित्व में विनम्रता स्वाभाविक छंद था

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भारत यायावर  फणीश्वरनाथ रेणु के व्यक्तित्व में विनम्रता और सहजता स्वाभाविक छंद था। उन्हें आक्रोश और गुस्से में देखना दुर्लभ संयोग था। वे मुश्किलों...

अनुसंधानपरक आलोचना-दृष्टि का मार्क्सवादी चेहरा : वीर भारत तलवार

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अमरनाथ वीरभारत तलवार ( 20.9.1947 ) हिन्दी के गंभीर अध्येता, शोधार्थी और आलोचक हैं.  वे चुपचाप अपना काम करने में विश्वास करते हैं. प्रचार...
पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को श्रद्धांजलि

सुषमा जी, आप बहुत याद आएंगी, याद आती रहेंगी सहिष्णु नेता बतौर

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जयशंकर गुप्त सुषमा जी, आप बहुत या आएंगी। याद आती रहेंगी, अपनी सहृदयता, असहमति को सम्मान देनेवाले सहिष्णु नेता के तौर पर भी। ओह,...
सावरकर के नाम से विख्यात विनायक दामोदर सावरकर स्वतंत्रता सेनानी, राजनीतिज्ञ कवि और लेखक भी थे। सावरकर अकेले स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्हें दो-दो बार सजा हुई।

सावरकर को दो-दो बार आजीवन कारावास की सजा मिली

जयंती पर विशेष नवीन शर्मा  सावरकर के नाम से विख्यात विनायक दामोदर सावरकर स्वतंत्रता सेनानी, राजनीतिज्ञ कवि और लेखक भी थे। सावरकर अकेले स्वतंत्रता सेनानी...

बांग्ला में लेखन, पर हिन्दी में सर्वाधिक पढ़े गये शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय

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पुण्यतिथि पर विशेष नवीन शर्मा शरत चंद्र वैसे तो मूल रूप से बांग्ला के उपन्यासकार थे, लेकिन उनकी रचनाओं के अनुवाद हिंदी भाषी लोगों में खासे...
महेंदर मिसिर

अंग्रेजी अर्थव्यवस्था को तबाह करने वाले थे महेंद्र मिसिर

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अनूप नारायण सिंह पटना। अंग्रेजी अर्थव्यवस्था को तबाह करने वाले थे छपरा के महेंद्र मिसिर। उनका जीवन किसी बेहतरीन कहानी की तरह है। एक...

शादी का मतलब यह नहीं कि पत्नी हमेशा शारीरिक संबंध के लिए तैयार हैः...

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नयी दिल्ली। शादी का मतलब यह नहीं है कि पत्नी हमेशा शारीरिक संबंध के लिए तैयार बैठी है। शादी के बाद पति-पत्नी दोनों को...
टीवी चैनेल और अखबार से लोग अब परहेज क्यों करने लगे हैं। सच तो यह है कि क्यों कोई टीवी खोले और प्रायोजित खबरें-तस्वीरें देखे। यही मूल वजह है।

टीवी चैनेल और अखबार से लोग अब परहेज क्यों करने लगे हैं !

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अमित प्रकाश सिंह टीवी चैनेल और अखबार से लोग अब परहेज क्यों करने लगे हैं। सच तो यह है कि क्यों कोई टीवी खोले...
महात्मा गांधी और कस्तूरबाई

तेरह वर्ष की उम्र में हुआ था गांधी जी और कस्तूरबा का विवाह

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राज्यवर्द्धन तेरह वर्ष की आयु में गांधी जी का ब्याह कस्तूरबा से हुआ था। गांधी जी लिखते हैं-"हम भाइयों को तो सिर्फ तैयारियों से...
‘बहुत हुई मंहगाई की मार, अबकी बार मोदी सरकार।।’ नारे पर रीझे भारतीय जनमानस को शायद अब पेट्रोल-डीजल सहित अन्य उपभोक्ता सामग्री में मंहगाई नहीं सताती। इसलिए अभी और मंहगाई के लिए तैयार ही रहें श्रीमान ! यह कह रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार श्याम किशोर चौबे

केंद्रीय राहत पैकेज का सचः पैकेज गया ‘वन’ में, सोचें अपने मन में

श्याम किशोर चौबे केंद्रीय राहत पैकेज गया ‘वन’ में, सोचें अपने मन में। दादी-नानी की कहानियों की तर्ज पर मोदी सरकार द्वारा घोषित कोविड...