गांधीजी ने जब बकरे की बलि रोकने पर लोगों को विवश कर दिया
निराला
गांधीजी ने बकरे की बलि रोकने पर लोगों को विवश कर धर्म की शिक्षा दी थी। चंपारण सत्याग्रह के दिनों की बात है।...
लोकतांत्रिक इतिहास का काला पन्ना है आपातकाल
नवीन शर्मा
लोकतांत्रिक इतिहास का काला पन्ना है आपातकाल। निरंकुश राजतंत्र की तुलना में लोकतंत्र काफी अच्छी व्यवस्था है। यह शासन व्यवस्था को निरंकुश...
फणीश्वरनाथ रेणु की जीवनी और अशोक वाजपेयी की प्रेरणा
फणीश्वरनाथ रेणु की जीवनी का दायित्व अशोक वाजपेयी ने 2016 में मुझे दिया। मैंने खोज की अनवरत साधना की। लम्बी-लम्बी यात्राएँ कीं। और रेणु की जीवनी...
महामारी माने मरीज, मजदूर, मजबूरी, मौत, मंदी और महंगाई
दीपक कुमार
महामारी माने मरीज, मजदूर, मजबूरी, मौत, मदी और महंगाई। महामारी कोरोनावायरस के असर को इन सात शब्दों के जरिये बेहतर ढंग से...
अरुण कमल गहरे अर्थ में प्रतिबद्ध कवि, बेहतर जीवन की आकुलता
कृपाशंकर चौबे
अरुण कमल गहरे अर्थ में प्रतिबद्ध कवि हैं और उनकी प्रतिबद्धता की जड़ें ठेठ भारतीय आबोहवा और जमीन में हैं। जो सामने...
20 लाख शब्द लिख चुके हैं पत्रकार व शिक्षक बी.के. मिश्र
सुरेंद्र किशोर
कोई व्यक्ति लगातार 47 साल से मुख्य धारा की पत्रकारिता में हो और उसके लेखन को लेकर कभी कोई विवाद न हो,तो...
सईदा खान की ट्रेजिडी भरी दास्तां सुन रूह कांप जाती है
वीर विनोद छाबड़ा
सईदा खान की ट्रेजिडी भरी दास्तां सुन कर रूह कांप जाती है। साठ के सालों में एक्ट्रेस होती थीं, सईदा ख़ान।...
अनंतराम त्रिपाठी का निधन, हिंदी के प्रचार के लिए समर्पित रहे
कृपाशंकर चौबे
अनंतराम त्रिपाठी का निधन हो गया। हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित जीवन रहा है अनंतराम त्रिपाठी का। आज प्रातः साढ़े चार...
फणीश्वरनाथ रेणु के व्यक्तित्व में विनम्रता स्वाभाविक छंद था
भारत यायावर
फणीश्वरनाथ रेणु के व्यक्तित्व में विनम्रता और सहजता स्वाभाविक छंद था। उन्हें आक्रोश और गुस्से में देखना दुर्लभ संयोग था। वे मुश्किलों...
महिलाएं कुम्हड़ा क्यों नहीं काटतीं, क्या आप यह जानते हैं?
कुम्हड़ा आमतौौर पर पुरुष ही काटते हैं। साबूत कुम्हड़ा औरतें नहीं कभी नहीं काटतीं। आइए, जानते हैं ऐसा क्यों होता है।
रामधनी द्विवेदी
इस बार...




















