आलोक तोमर की याद: अब यहॉं कोई नहीं है, सिर्फ पत्ते डोलते हैं
आलोक तोमर ने इंडियन एक्सप्रेस घराने के अखबार जनसत्ता के शुरुआती दिनों में अपनी रिपोर्ट से धमाल मचा दिया था। खासकर सिख दंगों की...
आलोक तोमर की यादः जब प्रभाष जोशी ने इस्तीफा मांग लिया
आलोक तोमर को जनसत्ता के प्रधान संपादक प्रभाष जोशी बेहद मानते थे, फिर भी एक मौका ऐसा आया, जब उन्होंने आलोक तोमर से इस्तीफा...
बीजी वर्गीज ने जब इंडियन एक्सप्रेस में आधी तनख्वाह मांगी
बीजी वर्गीज इंडियन एक्सप्रेस के जब संपादक बने तो उन्हें रामनाथ गोयनका ने जो तनख्वाह आफर की, तो उससे आधी तनख्वाह ही बीजी वर्गीज...
हिन्दी पढ़कर कोई करेगा क्या, रोजी-रोटी तो मिलने से रही
संजय कुमार सिंह
हिन्दी पढ़कर कोई करेगा क्या, रोजी-रोटी तो मिलने से रही। वैसे तो मैंने हिन्दी नहीं पढ़ी और विज्ञान का छात्र रहा...
नेताजी सुभाष चंद्र बोस पत्रकार भी थे, न जानते हों तो पढ़ लीजिए
कृपाशंकर चौबे
नेताजी सुभाष चंद्र बोस पत्रकार भी थे। यह बात नयी पीढ़ी के पत्रकारों को शायद मालूम न हो। नेताजी ने साप्ताहिक ‘फारवर्ड...
राहत पैकेज में कोरोना से बाहर निकलकर आगे की सोच दिखती है
श्याम किशोर चौबे
राहत पैकेज में कोरोना संक्रमण काल के दौरान उत्पन्न अप्रत्याशित आर्थिक संकट से उबरने के लिए दूरगामी सोच का स्पष्ट दर्शन...
जन्मदिन विशेषः शहीद ए आजम भगत सिंह को सलाम
नवीन शर्मा
ब्रिटेन से भारत को आजाद कराने में निश्चित रूप से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस तथा इसके नेताओं, खासकर महात्मा गांधी की महत्वपूर्ण भूमिका...
मुगल-ए-आजम भारतीय सिनेमा की पेशानी पर लिखी गई इबारत
मृत्युंजय
मुगल-ए-आजम वह फिल्म थी, जो सबके सर चढ़ कर बोली थी। साठ साल पहले। सन साठ में। महीना था अगस्त। तारीख थी पांच।...
एक अदद वोटर आईडी ने हमारी नागरिकता को संदिग्ध बना दिया!
मिथिलेश कुमार सिंह
साधो! हम इस देश के नागरिक नहीं हैं। होते तो वोट जरूर करते। कुछ नहीं होता तो 'नोटा' बटन ही दबा...
जश्न मनाइए कि आप कोरोना काल के साक्षात गवाह हैं
श्याम किशोर चौबे
जश्न मनाइए कि आप कोरोना काल के साक्षात गवाह हैं। जश्न मनाइए कि शराब की बोतलें लूटने नहीं, किसी भी कीमत में...




















