पांक्तेय भाषाविद्, ख्यातिलब्ध साहित्यशिल्पी और कृती सम्पादक पंडित विद्यानिवास मिश्र (1926-2005) की स्मृति में उनके जन्म दिन नमन(14 जनवरी) के अवसर पर नमन!

पांक्तेय भाषाविद विद्यानिवास मिश्र का समारोहपूर्वक स्मरण

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कृपाशंकर चौबे पांक्तेय भाषाविद्, ख्यातिलब्ध साहित्यशिल्पी और कृती सम्पादक पंडित विद्यानिवास मिश्र (1926-2005) की स्मृति में उनके जन्मदिन के अवसर पर नमन! उनकी केंद्रीय...

अभिनेत्री शिविका दीवान को भाने लगी हैं भोजपुरी फिल्में

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अनूप नारायण सिंह पटना। भोजपुरी सिनेमा का वर्तमान दौर तेजी से बदल रहा है और उस बदलाव में प्रतिभा संपन्न और खूबसूरत अभिनेत्रियों का...

जयंती पर नमनः अदभुत अविस्मरणीय अब्दुल कलाम

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नवीन शर्मा एपीजे अब्दुल कलाम सबसे यूनिक किस्म के राष्ट्रपति थे। रामेश्वर के छोटे से शहर के एक साधारण से मुस्लिम परिवार में जन्में...
लीला चिटणीस

फिल्मों में माताओं की माता की पहचान थी लीला चिटणीस की 

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वीर विनोद छाबड़ा  फिल्मों में माताओं की माता की पहचान थी लीला चिटणीस की। एक झोंपड़ीनुमा मकान में खाट पर लेटी मरियल-सी खांसती हुई...

बर्थ डे स्पेशलः मैं पल दो पल का शायर हूं के कलमकार साहिर

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नवीन शर्मा अमिताभ बच्चन की फिल्म कभी-कभी का गीत मैं पल दो पल का शायर हूं हम में से कई लोग गुनगुनाते हैं। यह...
डा. राम मनोहर लोहिया ने संदेश दिया- ‘‘बिजली की तरह कौंधो और सूरज की तरह स्थायी हो जाओ।’’ 1967 की गैर कांग्रेसी सरकारों को उन्होंने यही संदेश दिया था।

डा. राम मनोहर लोहिया का संदेश- ‘‘बिजली की तरह कौंधो

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सुरेंद्र किशोर डा. राम मनोहर लोहिया ने संदेश दिया- ‘‘बिजली की तरह कौंधो और सूरज की तरह स्थायी हो जाओ।’’ 1967 की गैर कांग्रेसी...

बर्थडे स्पेशलः जावेद अख्तर, शब्दों की जादूगरी वाली शख्सियत

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नवीन शर्मा जावेद अख्तर का जन्म 17 जनवरी 1945 को ग्वालियर में हुआ था। उनके पिता जानिसार अख्तर प्रसिद्ध प्रगतिशील कवि और माता सफिया अख्तर मशहूर उर्दू लेखिका तथा शिक्षिका थीं।...
बाबू कुँवर सिंह तेगवा बहादुर के विजयोत्सव का याद करने का दिन है 23 अप्रैल। वीर कुंवर सिंह के विजय की अनकही-अनसुनी कहानी पढ़िए।

बाबू कुँवर सिंह तेगवा बहादुर के विजयोत्सव को याद करने का दिन

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सुरेंद्र किशोर बाबू कुँवर सिंह तेगवा बहादुर के विजयोत्सव का याद करने का दिन है 23 अप्रैल। वीर कुंवर सिंह के विजय की अनकही-अनसुनी...
साहित्यकारों में आपसी सौहार्द का प्रतीक है, फणीश्वर नाथ रेणु व सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय का संबंध

साहित्यकारों में आपसी सौहार्द का प्रतीक है, अज्ञेय व रेणु का संबंध

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साहित्यकारों में आपसी सौहार्द्र का प्रतीक है, अज्ञेय और रेणु का यह संबंध। फणीश्वर नाथ रेणु के प्रति अज्ञेय के मन में काफी सम्मान...

बेरोजगारी की मार से त्रस्त हैं देशभर के पत्रकार

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लोकनाथ तिवारी की रे किछू काजेर संधान पेली, छ मास धोरे घोरे बंदी होये पोड़े आची। (क्या रे कोई काम काज खोजा, छह महीने...