वर्ष 1974 की तारीख 5 जून. यही वह दिन था, जब जयप्रकाश नारायण (जेपी) ने पटना के गांधी मैदान में दो शब्दों- संपूर्ण क्रांति का नारा दिया था.

संपूर्ण क्रांति- जेपी के दो शब्दों से बदल गयी थी देश की सियासी तस्वीर

ओमप्रकाश अश्क वर्ष 1974 की तारीख 5 जून. यही वह दिन था, जब जयप्रकाश नारायण (जेपी) ने पटना के गांधी मैदान में दो शब्दों-...

एक अदद वोटर आईडी ने हमारी नागरिकता को संदिग्ध बना दिया!

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मिथिलेश कुमार सिंह साधो! हम इस देश के नागरिक नहीं हैं। होते तो वोट जरूर करते। कुछ नहीं होता तो 'नोटा' बटन ही दबा...
बिहार में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या 5,175 हो गयी है। पिछले 24 घंटे में कोरोना के 203 नये पॉजिटिव मामले सामने आये हैं।

कोरोना डायरी- (4) कोरोना काल नहीं, इसे द्रोहकाल कहिए जनाब !

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डा. संतोष मानव कोरोना डायरी का चौथा भाग पढ़ेः यह सिर्फ कोरोना काल नहीं है। यह द्रोहकाल भी है। ध्यान से देखिए, हर घर...
जेपी को चंद्रशेखर की चिट्ठी

जेपी मूवमेंट में विपक्षी नेताओं की भीड़ से सशंकित थे चंद्रशेखर

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जयप्रकाश के आंदोलन (जेपी मूवमेंट) में लगातार विपक्षी नेताओं और युवाओं का साथ मिलता गया. इससे जयप्रकाश आंदोलन के सेनानी उत्साहित थे, लेकिन चंद्रशेखर...

भाजपा ने पीडीपी का साथ छोड़ अच्छा काम किया है

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जम्मू-कश्मीर में आखिरकार भाजपा और पीडीपी का बेमेल गठबंधन खत्म हो गया। बिना विचारे जो करै, सो पाछे पछताय- वाली कहावत चरितार्थ हुई। अव्वल तो...
बीजी वर्गीज इंडियन एक्सप्रेस के जब संपादक बने तो उन्हें रामनाथ गोयनका ने जो तनख्वाह आफर की, उससे आधी तनख्वाह ही वर्गीज ने मांगी।

बीजी वर्गीज ने जब इंडियन एक्सप्रेस में आधी तनख्वाह मांगी

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बीजी वर्गीज इंडियन एक्सप्रेस के जब संपादक बने तो उन्हें रामनाथ गोयनका ने जो तनख्वाह आफर की, तो उससे आधी तनख्वाह ही बीजी वर्गीज...
राष्ट्रद्रोह पर 1962 में सुप्रीम कोर्ट का एक महत्पूर्ण निर्णय आया था, जिसमें कहा गया कि राष्ट्रद्रोह उसे माना जाएगा, जिससे समाज में हिंसा फैले।

राष्ट्रद्रोह पर 1962 में सुप्रीम कोर्ट का एक महत्वपूर्ण निर्णय

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राष्ट्रद्रोह पर 1962 में सुप्रीम कोर्ट का एक महत्पूर्ण निर्णय आया था, जिसमें कहा गया कि राष्ट्रद्रोह उसे माना जाएगा, जिससे समाज में हिंसा...

प्रवासियों के प्रति अस्पृश्यता को याद रखेगा इतिहास…..

सुशील मिश्रा प्रवासियों के प्रति अस्पृश्यता को इतिहास भी याद रखेगा। सड़कों पर प्रवासियों के प्रति जो अस्पृश्यता दिख रही, उसकी कल्पना प्रवासियों ने...
जश्न मनाइए कि आप कोरोना काल के साक्षात गवाह हैं। जश्न मनाइए कि शराब की बोतलें लूटने नहीं, किसी भी कीमत में खरीदने के लिए आप पुलिस की गालियां-लाठियां खाने को भी तैयार-तत्पर हैं।

जश्न मनाइए कि आप कोरोना काल के साक्षात गवाह हैं

श्याम किशोर  चौबे जश्न मनाइए कि आप कोरोना काल के साक्षात गवाह हैं। जश्न मनाइए कि शराब की बोतलें लूटने नहीं, किसी भी कीमत में...
आर्थिक उदारीकरण ने बाजार को विस्तार दिया तो इस विस्तार ने मीडिया हाउसों की ऊंची उड़ान के लिए आसमान खोल दिया। स्थानीय संस्करण शुरू हुए।

मीडिया हाउस प्रधानमंत्री की अपील के बाद भी संवेदना नहीं दिखा रहे !

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जरूरी संसाधन तक नहीं दिए रिपोर्टर-कैमरामैन को ट्रांसफर कर नौकरी छोड़ने का बना रहे हैं ये दबाव मीडिया हाउस प्रधानमंत्री की अपील के बाद...