आर्थिक उदारीकरण ने पैकेज तो दिये, पर बाजार के रास्ते ले लिये
आर्थिक उदारीकरण ने आपको वेतन-पैकेज लाख-करोड़ रुपये तो दिये, लेकिन ये पैसे बाजार के रास्ते फिर पूंजीपतियों के पास ही पहुंच गये। इसे कोई...
कृष्णबिहारी मिश्र की दरवेशी दृष्टि के बारे में बता रहे मृत्युंजय
कृष्णबिहारी मिश्र का प्राण अपने गांव में बसता है। इससे कुछ बचता है तो वह बनारस में बसता है। बनारस में वे अपने बनारस...
IMF की रिपोर्ट ने भारत के लिए जगाई उम्मीद की किरण
संजय पाठक
IMF की रिपोर्ट ने भारत के लिए उम्केमीद की किरण जगाई है। वैसे किरण अभी धुंधली है, लेकिन आने वाले समय में...
भोजपुरी फिल्म ‘काहें पिरीतिया लगवल’ की शूटिंग शुरू
पटना। ऋद्धि फिल्म्स इंटरटेंमेंट प्रस्तुत भोजपुरी फिल्म ‘काहे पिरीतिया लगवल’ की शूटिंग आज से मुंबई में शुरू हो चुकी है। सामाजिक प्रेम कथा पर...
पत्रकारिता यह है, जो ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के संतोष सिंह ने की है
सुरेंद्र किशोर
पत्रकारिता इसे कहते हैं, जो ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के संतोष सिंह ने की है। इंडियन एक्सप्रेस के पत्रकार ने बिहार में कोविड जांच घोटाला...
कोरोना संकट और 20 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक पैकेज
कोरोना संकट को लेकर प्रधानमंत्री द्वारा 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज का किसको क्या फायदा मिलेगा। यह पैसा कहां से आएगा, यह झिज्ञासा...
पुरषोत्तम से हारते नहीं तो गजल गायक नहीं बन पाते जगजीत सिंह
जयंती पर विशेष
नवीन शर्मा
जगजीत सिंह के गजल गायक बनने की कहानी बड़ी ही दिलचस्प है। ये उन दिनों की बात है जब जगजीत...
मार्क्सवाद को समझे बिना हर कोई इसकी आलोचना कर रहा
मार्क्सवाद के दर्शन की आलोचना करने के पहले यह नहीं भूलना चाहिए कि सोवियत रूस और चीन की जनता का भाग्य इसी ने बदला।...
क्वारंटाइन से इतना भय क्यों, यह काला पानी जैसी कोई सजा नहीं है
क्वारंटाइन से कोरोना की बीमारी से बचाव हो सकता है। इससे इतना भय क्यों? यह काला पानी जैसी कोई सजा भी नहीं है। फिर...
इमरजेंसी के इस दौर को कवियों ने भी अपने नजरिये से देखा, खूब रचा
इमरजेंसी 25 जून 1975 को लागू हुई। 21 माह (1975-1977) तक रही। इमरजेंसी के इस दौर को कवियों ने भी अपने नजरिये से देखा...


















