मलिकाइन के पाती- घर के लात नीमन, बाहर के सतावल बाउर

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पावं लागीं मलिकार। एने तनी अझुरा गइनी हां मलिकार, लड़िकन के बर-बेमारी में, एही से टाइम पर पाती ना लिखवा पवनी। अब नन्हका ठीक...
डॉ. अंबेडकर के संपादन में निकले पाक्षिक ‘समता’ में सावरकर के उस पक्ष को तरजीह दी गयी है, जिसमें उन्होंने रोटी-बेटी के संबंध का समर्थन किया है।

डॉ. अंबेडकर के पाक्षिक ‘समता’ में सावरकर के विचारों का समर्थन

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डॉ. अंबेडकर के संपादन में निकले पाक्षिक ‘समता’ में सावरकर के उस पक्ष को तरजीह दी गयी है, जिसमें उन्होंने रोटी-बेटी के संबंध का...
पी.एफ.आई. (पापुलर फ्रंट आफ इंडिया) पर नजर रखिए। उसके प्रकट और छिपे इरादों को समझिए। इसकी वजह समझा रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र किशोर।

पी.एफ.आई. पर अब इस देश को अपना रुख तय करना होगा

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सुरेंद्र किशोर पी.एफ.आई. (पापुलर फ्रंट आफ इंडिया) पर नजर रखिए। उसके प्रकट और छिपे इरादों को समझिए। इसकी वजह समझा रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार...
महात्मा गांधी और कस्तूरबाई

तेरह वर्ष की उम्र में हुआ था गांधी जी और कस्तूरबा का विवाह

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राज्यवर्द्धन तेरह वर्ष की आयु में गांधी जी का ब्याह कस्तूरबा से हुआ था। गांधी जी लिखते हैं-"हम भाइयों को तो सिर्फ तैयारियों से...
पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर को याद करते हुए। बलिया से उठा, बुलन्दी छू गया। ठेठ, खुद्दार, गंवई अक्स, खादी की सादगी में मुस्कुराता चेहरा। अब नही दिखेगा।

पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर को उनकी पुण्यतिथि पर याद करते हुए

Chanchal Bhu पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर को याद करते हुए। बलिया से उठा, बुलन्दी छू गया। ठेठ, खुद्दार, गंवई अक्स, खादी की सादगी में मुस्कुराता...

हिंदी सिनेमा को साहित्य से जोडऩेवाली कड़ी बिमल राय

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भारतीय सिनेमा को उत्कृष्ट ऊंचाई पर ले जाने वाले प्रारंभिक निर्देशकों में बिमल रॉय सबसे अव्वल माने जाते हैं। 12 जुलाई, 1909 में बांग्लादेश...

पवन सिंह की दरियादिली,  111 रुपये में फिल्म बॉस साइन की

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भोजपुरी सिनेमा के पावर स्टार पवन सिंह ने दरियादिली दिखाते हुए अपने बड़े भाई समान फिल्म मेकर प्रेम राय की अगली फिल्म बॉस मात्र...
राष्ट्रद्रोह पर 1962 में सुप्रीम कोर्ट का एक महत्पूर्ण निर्णय आया था, जिसमें कहा गया कि राष्ट्रद्रोह उसे माना जाएगा, जिससे समाज में हिंसा फैले।

राष्ट्रद्रोह पर 1962 में सुप्रीम कोर्ट का एक महत्वपूर्ण निर्णय

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राष्ट्रद्रोह पर 1962 में सुप्रीम कोर्ट का एक महत्पूर्ण निर्णय आया था, जिसमें कहा गया कि राष्ट्रद्रोह उसे माना जाएगा, जिससे समाज में हिंसा...
ओशो ने कहा था- निंदा रस का धंधा है तुम्हारी पत्रकारिता। पत्रकारों की दृष्टि ही मिथ्या हो जाती है। उनके धंधे का मतलब ही यह है कि जनता जो चाहती है, वह लाओ खोजबीन कर।

ओशो ने प्रवचन में कहा था- निंदा रस का धंधा है तुम्हारी पत्रकारिता 

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ओशो ने प्रवचन में कहा था- निंदा रस का धंधा है तुम्हारी पत्रकारिता। पत्रकारों की दृष्टि ही मिथ्या हो जाती है। उनके धंधे का...

नवाबी अंदाज में ‘मुगलई’ व ‘लखनवी’ व्यंजनों का तड़का लगेगा इस फूड फेस्टिवल में

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15 दिनों तक चलने वाले 'अवधी फूड फेस्टिवल' की शुरुआत 1 सितम्बर से पटना: राजधानी पटना में पहली बार 'अवधी फूड फेस्टिवल' का आयोजन बड़े...