जानिए क्यों चर्चा में है प्रिंस सिंह राजपूत की फिल्म इंडियन विराज

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5 अक्टूबर को हुई है फिल्म रिलीज पहले दिन ही मिली बंपर ओपनिंग पटना। कश्मीर में पत्थरबाजी की घटना पर आधारित भोजपुरी फिल्म इंडियन...

फाइटर संदीप सिंह के जज्बे की दास्तान सुनाती है सूरमा

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आज भले ही क्रिकेट हमारे देश का सबसे लोकप्रिय खेल बन गया है, लेकिन हमारा राष्ट्रीय खेल तो हॉकी ही है। हॉकी में भारत...
भारत में घुसपैठ की समस्या (प्रतीकात्मक तस्वीर) पर बहसः आधुनिक राजनीति

आधुनिक राजनीति इसे ही कहते हैं, जिसमें देश कहीं नहीं है

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आधुनिक राजनीति इसे ही कहते हैं, जिसमें देश कहीं नहीं है। बांग्लादेशी घुसैठ की समस्या आज नासूर बनी है और इसके निदान की कोशिश...
चौरीचौरा कांड के शताब्दी वर्ष पर वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अरविंद पांडेय ने एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखी है, लेकिन इसके मायने काफी प्रासंगिक हैं।

चौरीचौरा कांड के शताब्दी वर्ष पर आईपीएस अरविंद पांडेय की टिप्पणी

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चौरीचौरा कांड के शताब्दी वर्ष पर वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अरविंद पांडेय ने एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखी है, लेकिन इसके मायने काफी प्रासंगिक हैं। उन्होंने...
25 जून भारतीय राजनीति में एक उल्लेखनीय तारीख है। इसी रोज 1975 में, तत्कालीन इंदिरा सरकार ने इमरजेंसी लगाई थी। दरअसल वह आपातकाल नहीं, आतंककाल था।

कांग्रेस ने भी किया था बांग्लादेश विजय का चुनावी इस्तेमाल!

सुरेंद्र किशोर पुलावामा कांड के बाद बालाकोट में भारतीय वायुसेना ने जब सर्जिकल स्ट्राइक की तो भाजपा ने इसे चल रहे लोकसभा चुनाव में...
मुगल-ए-आजम वह फिल्म थी, जो सबके सर चढ़ कर बोली थी। साठ साल पहले। सन साठ में। महीना था अगस्त। तारीख थी पांच। रिलीज हुई थी यह फिल्म।

मुगल-ए-आजम भारतीय सिनेमा की पेशानी पर लिखी गई इबारत

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मृत्युंजय मुगल-ए-आजम वह फिल्म थी, जो सबके सर चढ़ कर बोली थी। साठ साल पहले। सन साठ में। महीना था अगस्त। तारीख थी पांच।...

मलिकाइन के पाती- देवी-देवता के पावर खतम हो गइल का मलिकार!

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पावं लागीं मलिकार। काल्ह सांझे से मन अइसन छउंछियाइल बा कि भर रात नीन ना आइल। फजीर होत रउरा के पाती लिखवावे बइठ गइल...
जुगनू शारदेय चले गये। अपने जमाने के नामी पत्रकार। स्वाभीमानी और संयत. अंतिम दिनों में उनका अकेलापन, उनके जाने से दुखी नहीं करता।

जुगनू शारदेय नहीं रहे, सोशल मीडिया पर छायी निधन की सूचना

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जुगनू शारदेय चले गये। अपने जमाने के नामी पत्रकार। स्वाभीमानी और संयत. अंतिम दिनों में उनका अकेलापन, उनके जाने से दुखी नहीं करता। इसलिए...
लेखक निशिकांत ठाकुर दैनिक जागरण में नरेंद्र मोहन के साथ वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके हैं

अखबार की ‘साख’ से कभी मत खेलना, कहते थे नरेंद्र मोहन

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निशिकांत ठाकुर अखबार की ‘साख’ से कभी मत खेलना। यह नसीहत अक्सर ‘दैनिक जागरण’ के प्रधान संपादक स्व. नरेंद्र मोहन जी सहकर्मियों को दिया...

भाजपा की हालत- दुविधा में दोनों गए, माया मिली न राम

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विजय झा कमोबेश यही स्थिति आज भाजपा की है। भाजपा ने लगातार नए Vote Bank की तलाश में अपने स्थायी Vote Bank- सवर्णों को...