गुलजारी लाल नंदा को तो नयी पीढ़ी अब भूल ही गयी होगी !
गुलजारी लाल नंदा को तो नयी पीढ़ी अब भूल ही गयी होगी। देश में दो ऐसे मौके आये, जब उन्हें कार्यवाहक प्रधानमंत्री का दायित्व...
लाकडाउन 4 के साथ ही कारखानों से धुआं उठा, पर कामगारों का टोटा
लाकडाउन 4 के साथ ही कारखानों से धुआं उठने लगा है, पर कामगारों का अकाल भी दिखने लगा है। उधर हाईवे पर दरिद्र भारत...
इतिहास के आईने में बिहारः सुगांव डायनेस्टी और विद्यापति
लेखक-पत्रकार संजय ठाकुर की अप्रकाशित इतिहास की पुस्तक- विद्यापति और सुगांव (अतीत के आईने में चम्पारण) का एक अंश
पूर्वी चम्पारण जिला के सुगौली प्रखंड के ...
गांव छोड़ब नहीं, जंगल छोड़ब नहीं, मायं माटी छोड़ब नहीं..
गांव छोड़ब नहीं, जंगल छोड़ब नहीं, मायं माटी छोड़ब नहीं...कोरोना डायरी की आठवीं कड़ी में हम उस संकल्प की बात करेंगे, जिसका मूल स्वर...
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर एक यात्रा प्रसंग और 4 महिला पात्र
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर यह निजी यह यात्रा प्रसंग बरबस याद आ गया। इसलिए कि इस कहानी में चार महिला पात्रों का जिक्र है।...
मलिकाइन के पाती- देवी-देवता के पावर खतम हो गइल का मलिकार!
पावं लागीं मलिकार। काल्ह सांझे से मन अइसन छउंछियाइल बा कि भर रात नीन ना आइल। फजीर होत रउरा के पाती लिखवावे बइठ गइल...
लारेंस फरलेंग्टी की की मौत पर शहर में मातम मना…
लारेंस फरलेंग्टी ने 101 साल की उम्र में भी कविता लिखी। उन्हें युद्ध से नफरत थी। मानवता से मुहब्बत के आदी थी। बुढ़ापे में...
केंद्रीय राहत पैकेज का सचः पैकेज गया ‘वन’ में, सोचें अपने मन में
श्याम किशोर चौबे
केंद्रीय राहत पैकेज गया ‘वन’ में, सोचें अपने मन में। दादी-नानी की कहानियों की तर्ज पर मोदी सरकार द्वारा घोषित कोविड...
कोरोना! अब तो जब तक जीना है, तेरी शमशीरें और हमारा सीना है
डा. संतोष मानव
कोरोना! अब तो जब तक जीना है, तेरी शमशीरें और हमारा सीना है। 42 घरों वाले इस कवर्ड कैंपस में वीरानगी...
लेखक सआदत हसन मंटोः ठंडा गोश्त जैसी कहानियों के बदनाम लेखक
पुण्यतिथि पर संस्मरण
नवीन शर्मा
सआदत हसन मंटो (11 मई 1912-18 जनवरी 1955) उर्दू लेखक थे, जो अपनी लघु कथाओं- बू, खोल दो, ठंडा गोश्त...



















