प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर दीप जलाने से कोरोना का वायरस मरेगा या नहीं, पर ऐसे आयोजन की आलोचना से भी वायरस नहीं मरेगा।

‘अहवा’ भगाने की लुकाठी से असमय दीपावली के टोटके तक

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'अहवा' भगाने की लुकाठी से असमय दीपावली के टोटके तक की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर डीयू के प्रोफेसर गोपेश्वर सिंह ने एक...
मुंबई में हरे वृक्षों का संहार रुक गया, उच्चतम न्यायालय की पहल से

मुंबई में हरे वृक्षों का संहार रुक गया, आभार उच्चतम न्यायालय का

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के. विक्रम राव  मुंबई में हरे वृक्षों का संहार रुक गया, आभार उच्चतम न्यायालय का। वर्ना छब्बीस हजार जानों पर आरे कालोनी में आरी...

विज्ञान की नजर में भारतीय भाषाएं और सर्वांगीण स्वास्थ्य

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डॉ. मनोहर भण्डारी पढ़ने में यह अटपटा और अविश्वसनीय लगेगा कि भारतीय भाषाएं पढ़ने से सर्वांगीण स्वास्थ्य का क्या कोई नाता भी हो...
सोनिया गांधी विज्ञापन बंद करने की बात कह फंस गयी हैं। कोरोना को देखते हुए खर्च में कटौती की सलाह सरकार को दी है। इसमें विज्ञापन बंद करने का भी सुझाव है।

सोनिया गांधी विज्ञापन बंद करने की बात कह फंस गयीं

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सोनिया गांधी विज्ञापन बंद करने की बात कह फंस गयी हैं। कोरोना के संक्रमण को देखते हुए खर्च में कटौती की सलाह सरकार को...

AMIT शाह के दौरे में NDA के घटक दलों को कुछ नहीं मिला

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पटना। अमित शाह के एक दिवसीय बिहार दौरे का हासिल उनके खाते में तो जबरदस्त ढंग से जाता दिख रहा है, लेकिन भाजपा के...
महात्मा गांधी

महात्मा गांधी के जितने प्रशंसक हैं, उससे कम आलोचक भी नहीं

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महात्मा गांधी के जितने प्रशंसक हैं, उससे कम आलोचक भी नहीं। कल तक बड़ी तादाद वैसे लोगों की थी, जो महात्मा गांधी के हत्यारे...

जयंती पर विशेष- हीरो से भी ज्यादा पैसे लेते थे खलनायक प्राण 

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नवीन शर्मा हिंदी सिनेमा के सौ साल से लंबे इतिहास में वैसे तो दर्जनों खलनायक हुए हैं। उनमें से प्राण एक खास स्थान रखते...
बेरोजगारी पर बहस नयी नहीं, लेकिन सेन्टर फ़ॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी (सीएमआईई) की ताजा रिपोर्ट ने बहस को नया जीवन दे दिया है।

मीडिया की स्वतंत्रता के मामले में भारत की हालत शर्मनाक !

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मीडिया के हालात पर वरिष्ठ पत्रकार अनिल भास्कर ने संजीदा टिप्पणी की है। मीडिया की स्वतंत्रता के मामले में भारत की हालत शर्मनाक है।...

भीड़ में बदल रहा है इक्कीसवीं सदी का भारत

इक्कीसवीं सदी में भारत भीड़ में बदल रहा है। उसकी नागरिकता अगर राष्ट्रीय स्तर पर बहुसंख्यक धर्म, सेना के प्रति समर्पण, काल्पनिक कथाओं व...
पं. अच्युतानंद मिश्र जब ‘जनसत्ता’ के संपादक थे तो वे महाश्वेता देवी से स्तंभ लिखवाते थे। महाश्वेता जी बांग्ला में लिखकर देतीं।

पं. अच्युतानंद मिश्र, जनसत्ता और महाश्वेता देवी का स्तंभ

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कृपाशंकर चौबे पं. अच्युतानंद मिश्र जब ‘जनसत्ता’ के संपादक थे तो वे महाश्वेता देवी से स्तंभ लिखवाते थे। महाश्वेता जी बांग्ला में लिखकर देतीं।...