प्रवासी मजदूरों को बीच मंझधार में छोड़ना महंगा पड़ेगा। बता रहीं हैं पल्लवी प्रकाश

प्रवासी मजदूरों को बीच मंझधार में छोड़ना महंगा पड़ेगा

पल्लवी प्रकाश प्रवासी मजदूरों को बीच मंझधार में जिस तरह से सबने छोड़ दिया गया है, वह हम सबको बहुत महंगा पड़ेगा। उनके यागदान...
डॉ. अंबेडकर के संपादन में निकले पाक्षिक ‘समता’ में सावरकर के उस पक्ष को तरजीह दी गयी है, जिसमें उन्होंने रोटी-बेटी के संबंध का समर्थन किया है।

बाबा साहब ने भांप लिया था कि भावी भारत का स्वरूप कैसा होगा

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बाबा साहब भीमराव अंबेदकर ने भांप लिया था कि भावी भारत का स्वरूप कैसा होगा। तभी तो उन्होंने कहा था- जातिभेद और धर्मभेद तो...
लीला चिटणीस

फिल्मों में माताओं की माता की पहचान थी लीला चिटणीस की 

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वीर विनोद छाबड़ा  फिल्मों में माताओं की माता की पहचान थी लीला चिटणीस की। एक झोंपड़ीनुमा मकान में खाट पर लेटी मरियल-सी खांसती हुई...
जननायक कर्पूरी ठाकुर का आज जन्मदिन है। कर्पूरी ठाकुर सही मायने में जननायक थे। गरीबों-दलितों के उत्थान के लिए उन्होंने जो किया, वह नहीं भूलेगा।

कर्पूरी ठाकुर में जातीय कटुता की कभी धमक नहीं सुनाई दी

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कर्पूरी ठाकुर में जातीय कटुता ने कभी धमक नहीं दी। यहां तक कि आरण लागू करने पर सवर्णों की गालियां उन्होंने सुनीं, पर पलट...

पवन सिंह की दरियादिली,  111 रुपये में फिल्म बॉस साइन की

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भोजपुरी सिनेमा के पावर स्टार पवन सिंह ने दरियादिली दिखाते हुए अपने बड़े भाई समान फिल्म मेकर प्रेम राय की अगली फिल्म बॉस मात्र...

दिवाली से पहले 2 नवंबर को रिलीज होगी फिल्म ‘लीरा द सोलमेट’

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पटना। कालजय मूवीज के बैनर तले बनी हिंदी फिल्म ‘लीरा द सोलमेट’ दिवाली से पहले 2 नवंबर को पूरे भारत में एक साथ 700...

बंदूक व कलम की जुगलबंदी का नाम है मन्मथनाथ गुप्त

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जयंती पर विशेष नवीन शर्मा आमतौर पर बंदूक व कलम को दो विपरीत ध्रुव मानी जाती हैं। इन दोनों से ही तालमेल बना कर जिस...

द स्लीपिंग ब्यूटीः दो साल की बच्ची की सौ साल पुरानी लाश

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आज गूगल पर सर्च के दौरान एक ऐसी तस्वीर मिली जिसे देखकर देर तक ठिठका रह गया। तस्वीर सोई हुई एक छोटी बच्ची की...
उपेंद्रनाथ अश्क न सिर्फ सशक्त साहित्यकार थे, बल्कि एक सही संपादक भी थे। संपादन भी सिखाते थे उपेंद्रनाथ अश्क। प्रो. कृपाशंकर चौबे को उन्होंने कई पत्र लिखे थे। (दायें प्रो. कृपाशंकर चौबे और बायें उपेंद्रनाथ अश्क)

उपेंद्रनाथ अश्क न सिर्फ साहित्यकार थे, बल्कि एक संपादक भी थे

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उपेंद्रनाथ अश्क न सिर्फ सशक्त साहित्यकार थे, बल्कि एक सही संपादक भी थे। संपादन भी सिखाते थे उपेंद्रनाथ अश्क। प्रो. कृपाशंकर चौबे को उन्होंने...
केंद्र सरकार के हालिया एक फैसले से निजी क्षेत्र के कामगारों पर ‘कोरोना’ संकट का खतरा मंडरा रहा है। केंद्र सरकार ने डीए की किश्तें रोकने का फैसला किया है।

केंद्र के डीए रोकने के फैसले से निजी क्षेत्र के कामगारों पर मंडराता खतरा

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केंद्र सरकार के हालिया एक फैसले से निजी क्षेत्र के कामगारों पर ‘कोरोना’ संकट का खतरा मंडरा रहा है। केंद्र सरकार ने डीए की...