गांधी का चिंतन-सोच और जीवन पद्धति ही हमारा मार्गदर्शक है
हरिवंश
गांधी को नमन। उनका स्मरण महज 02 अक्तूबर (जन्मदिन) या 30 जनवरी (पुण्यतिथि) तक के लिए ही नहीं है। उनका दर्शन जीवन के...
दिल्ली में अब नहीं सुहाती मेट्रो की सवारी, पिछले साल के मुकाबले पांच लाख...
आठ माह पहले दिल्ली मेट्रो में लोगों की आवाजाही रवाँ-दवाँ चल रही थी, मगर बेतहाशा बढ़े किराये ने लोगों की रफ़्तार पर ब्रेक लगा दी। वजह, बसों के मुक़ाबले...
कोरोना की राजनीति और राजनीति का कोरोनाकरण
कोरोना बंदी के 62 दिन बाद भी न कोरोना थमा और न इस पर राजनीति। कोरोना जान लेने पर तुला है और राजनीतिकों को...
मलिकाइन के पाती- जइसन देवता, ओइसन पूजा
पावं लागीं मलिकार। हम एतना जल्दी पाती पठावे ना चाहत रहनी हां, बाकिर मन खौंजिया गइल रहल हा। एही से तीने दिन बाद पाती...
गांधीजी ने जब बकरे की बलि रोकने पर लोगों को विवश कर दिया
निराला
गांधीजी ने बकरे की बलि रोकने पर लोगों को विवश कर धर्म की शिक्षा दी थी। चंपारण सत्याग्रह के दिनों की बात है।...
सात्विक बंधन ही सही अर्थ में रक्षा बंधन हैः श्रीश्री रविशंकर
रक्षाबंधन एक ऐसा बंधन है, जो आपको बचाता है। कुछ उच्चतम के साथ आपका बंधन होने की वजह से आप बच जाते हो। जीवन...
शैबाल गुप्ता का जाना बिहार के लिए अपूरणीय क्षति !
प्रेमकुमार मणि
शैबाल गुप्ता का जाना बिहार के लिए अपूरणीय क्षति है! यह स्वीकार करना कि शैबाल गुप्ता नहीं रहे, मेरे लिए कितना दुखद...
केंद्रीय राहत पैकेज का सचः पैकेज गया ‘वन’ में, सोचें अपने मन में
श्याम किशोर चौबे
केंद्रीय राहत पैकेज गया ‘वन’ में, सोचें अपने मन में। दादी-नानी की कहानियों की तर्ज पर मोदी सरकार द्वारा घोषित कोविड...
कोरोना काल में किसिम किसिम के विधायक, महापौर और पार्षद !
कोरोना काल में किसिम किसिम के विधायक, महापौर और पार्षद के दर्शन हुए। कोई वर्तमान से अतीत की ओर लौटता दिखा तो कुछ ने...
मुक्तिबोध को पता था कि रूढ़िवादी राम की राजनीति कर सकते हैं
मुक्तिबोध ने 1950 में ही इस बात को अच्छी तरह ताड़ लिया था कि भारत की सामाजिक रूढ़िवादी ताकतें आने वाले समय में राम...



















