पद्मश्री डॉ. कृष्णबिहारी मिश्र का प्राण अपने गांव में बसता है। इससे कुछ बचता है तो वह बनारस में  बसता है। बनारस में वे अपने बनारस का पता ढूंढते हैं और गांव में अपने गांव का पता।

कृष्णबिहारी मिश्र की दरवेशी दृष्टि के बारे में बता रहे मृत्युंजय

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कृष्णबिहारी मिश्र का प्राण अपने गांव में बसता है। इससे कुछ बचता है तो वह बनारस में  बसता है। बनारस में वे अपने बनारस...
कोरोना के इस दौर में जहां बहुत कुछ थम-सा गया है, वहीं राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित फिल्म 'बसंत का वज्रनाद' जल्दी ही आ रहे हैं।

कोरोना के दौर में श्रीराम डाल्टन की फिल्म ‘बसंत का वज्रनाद’

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कोरोना के इस दौर में जहां बहुत कुछ थम-सा गया है, वहीं राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित श्रीराम डाल्टन अपनी फिल्म 'बसंत का वज्रनाद' लेकर...

NITISH के संग नाश्ते पर बैठे SHAH, रात का खाना भी साथ

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पटना। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह एक दिन के बिहार दौरे पर गुरुवार को पटना पहुंचे। कल वह रांची में थे। वहां से चार्टर्ड...
बीजी वर्गीज इंडियन एक्सप्रेस के जब संपादक बने तो उन्हें रामनाथ गोयनका ने जो तनख्वाह आफर की, उससे आधी तनख्वाह ही वर्गीज ने मांगी।

बीजी वर्गीज ने जब इंडियन एक्सप्रेस में आधी तनख्वाह मांगी

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बीजी वर्गीज इंडियन एक्सप्रेस के जब संपादक बने तो उन्हें रामनाथ गोयनका ने जो तनख्वाह आफर की, तो उससे आधी तनख्वाह ही बीजी वर्गीज...
लाक डाउन में ‘वर्क एट होम’ का नया ‘वायरस’ भविष्य में सस्टेनेबल ग्लोबल कल्चर के नाम से चर्चित होने वाला है। यूं तो कई मित्रों के लिए ‘घर’ आज भी ‘डेरा’ ही होगा। तो आइए महंगाई की मापी की जाये

लाक डाउन में ‘वर्क एट होम’ भविष्य का सस्टेनेबल ग्लोबल कल्चर

हेमंत लाक डाउन में ‘वर्क एट होम’ का नया ‘वायरस’ भविष्य में सस्टेनेबल ग्लोबल कल्चर के नाम से चर्चित होने वाला है। यूं तो...

हिंदी सिनेमा के सदाबहार हीरो देव आनंद के इन बातो को जानते है

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सदाबहार हीरो देव आनंद के जन्मदिन पर विशेष सार्थक समय डेस्क : वैसे तो हिंदी सिनेमा में एक से बढ कर एक हैंडसम और स्मार्ट...

नवरात्र पर विशेषः जगदम्बा मंदिर, जहां होती हैं भक्तों की मुरादें पूरी

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लखीसराय। बड़हिया का विख्यात मां बाला त्रिपुरसुन्दरी जगदम्बा मंदिर श्रद्धालुओं के आस्था और विश्वास का केन्द्र बना हुआ है। ऐसी मान्यता है कि मां...
डॉ. अम्बेडकर ने 3 अप्रैल 1927 को मराठी पाक्षिक ‘बहिष्कृत भारत’ निकाला। वह पाक्षिक वर्ष 1929 तक यानी दो साल तक लगातार निकलता रहा।

डॉ. भीमराव अम्बेडकर का ‘बहिष्कृत भारत’ और उनकी पत्रकारिता

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कृपाशंकर चौबे डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने 3 अप्रैल 1927 को मराठी पाक्षिक ‘बहिष्कृत भारत’ निकाला। वह पाक्षिक वर्ष 1929 तक यानी दो साल तक...
सरकारी सेवाओं से मातृभाषाओं खासकर हिन्दी की विदाई होने लगी है। जाहिर है कि ऐसी स्थिति में हिन्दी के प्रति छात्रों का आकर्षण घटेगा। नौकरी न मिले तो फिर हिन्दी कोई पढ़े क्यों।

सरकारी सेवाओं से आहिस्ता-आहिस्ता होती जा रही हिन्दी की विदाई

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अमरनाथ सरकारी सेवाओं से मातृभाषाओं खासकर हिन्दी की विदाई होने लगी है। जाहिर है कि ऐसी स्थिति में हिन्दी के प्रति छात्रों का आकर्षण...

उसे मत मारो ओशो के निजी सचिव आनंद शीला की दास्तान

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नवीन शर्मा ओशो रजनीश की पूर्व निजी सचिव मां आनंद शीला ने अपने संस्मरण ‘उसे मत मारो, भगवान रजनीश के साथ मेरे जीवन की...