जन्मदिन पर विशेषः वाह जाकिर हुसैन, बोलिए जनाब!
नवीन शर्मा
जिन दिनों अपने देश में सिर्फ दूरदर्शन ही एकमात्र टीवी चैनल हुआ करता था। उस दौरान टीवी पर ताजमहल चायपत्ती का एक विज्ञापन...
फाइटर संदीप सिंह के जज्बे की दास्तान सुनाती है सूरमा
आज भले ही क्रिकेट हमारे देश का सबसे लोकप्रिय खेल बन गया है, लेकिन हमारा राष्ट्रीय खेल तो हॉकी ही है। हॉकी में भारत...
रेणु का उपन्यास ‘मैला आँचल’ जब चम्बल के डाकुओं तक पहुंचा
भारत यायावर
रेणु का उपन्यास 'मैला आँचल' अपने प्रकाशन के बाद धीरे-धीरे फैलता ही जा रहा था, लेकिन यह चम्बल घाटी में डाकुओं के...
भाजपा ने पीडीपी का साथ छोड़ अच्छा काम किया है
जम्मू-कश्मीर में आखिरकार भाजपा और पीडीपी का बेमेल गठबंधन खत्म हो गया। बिना विचारे जो करै, सो पाछे पछताय- वाली कहावत चरितार्थ हुई। अव्वल तो...
तू ही सागर है तू ही किनारा… यानी सुलक्षणा पंडित, इक भूली दास्तां
वीर विनोद छाबड़ा
तू ही सागर है तू ही किनारा, ढूँढता है तू किसका सहारा...संकल्प (1975) के इस गाने की गायिका सुलक्षणा पंडित थीं।...
राम मनोहर लोहिया विश्व पत्रकारिता पर सजग दृष्टि रखते थे
कृपाशंकर चौबे
राम मनोहर लोहिया ऐसे राजनेता थे, जिन्होंने समाजवाद की स्थापना के अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए पत्रकारिता को भी उपकरण...
आधुनिक राजनीति इसे ही कहते हैं, जिसमें देश कहीं नहीं है
आधुनिक राजनीति इसे ही कहते हैं, जिसमें देश कहीं नहीं है। बांग्लादेशी घुसैठ की समस्या आज नासूर बनी है और इसके निदान की कोशिश...
कोरोना संक्रमण शहरों से बढ़ा अब गांवों की ओर……
डॉ. संतोष मानव
कोरोना संक्रमण शहरों से अगर गांवों तक पहुंच गया, तो क्या होगा? हाहाकार और क्या? इस हाहाकार के लक्ष्ण दिखने भी...
कोरोना के बहाने बिदेेसिया की याद- अंखियां से दिन भर गिरे लोर ढर-ढर
कोरोना के बहाने बिदेसिया और इसके रचनाकार भिखारी ठाकुर को लेखक ने कुछ इस तरह याद किया है- अंखियां से दिन भर गिरे लोर...
भारतीय कम्युनिस्टों की बड़ी जमात हमले के वक्त चीन के साथ थी
सुरेंद्र किशोर
भारतीय कम्युनिस्टों की एक बड़ी जमात ने 1962 में इस देश (भारत) पर जब चीन ने हमला हुआ तो चीन का साथ...




















