इंदिरा गांधीः आपातकाल की प्रणेता

लोकतांत्रिक इतिहास का काला पन्ना है आपातकाल

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नवीन शर्मा लोकतांत्रिक इतिहास का काला पन्ना है आपातकाल। निरंकुश राजतंत्र की तुलना में लोकतंत्र काफी अच्छी व्यवस्था है। यह शासन व्यवस्था को निरंकुश...

25 जून 1975 की आधी रात हुई थी आपातकाल की घोषणा

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लगभग 43 साल पहले देश में 25 जून 1975 की आधी रात को आपातकाल की घोषणा की गई थी। । जो 21 मार्च 1977...

रेवती नक्षत्र में शरद पूर्णिमा बुधवार को, लक्ष्मी पूजें, धन पाएं

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आश्विन माह के पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन से शरद ऋतु  का आरंभ भी माना गया है।...
जयपाल सिंह मुंडा को भारतीय जनजातियों और झारखंड आंदोलन की पहली ईंट और आदिवासी नायकों के तौर पर देखा जाता है। उन्हें मरङ गोमके के तौर पर जाना जाता है।

जयपाल सिंह मुंडा के बारे में जानें, आदिवासी नायकों की मजबूत कड़ी थे

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विशद कुमार जयपाल सिंह मुंडा को भारतीय जनजातियों और झारखंड आंदोलन की पहली ईंट और आदिवासी नायकों के तौर पर देखा जाता है। उन्हें...

डेढ़ सौ साल बाद दलित टोले में मैट्रिक पास हुई कोमल

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घोघा। मैट्रिक की परीक्षा का परिणाम आते ही घोघा स्थित महादलित टोला के लोग झूम उठे। डेढ़ सौ साल बाद टोला की बिटिया कोमल...
बिहार में इलेक्शन भले खत्म हो गया, लेकिन सियासी गर्मी अब भी बरकरार है। बिहार में राज्यसभा की एक सीट पर चुनाव होना है। एलजेपी नेता रामविलास पासवान के निधन से यह सीट खाली हुई है।

रामविलास पासवान सामाजिक समरसता के अग्रदूत थे 

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रामविलास पासवान आज पंचतत्व में विलीन हो गये, लेकिन कई लोगों को कई यादें छोड़ गये हैं। कोई उनकी सज्जनता तो कई लोग उनकी...

बिहार में सीटों के बंटवारे पर एनडीए के घटक दलों में जुबानी जंग

पटना। बिहार में फिलवक्त की राजनीति सीटों के तालमेल में उलझा है। एनडीए के घटक दलों- जदयू, रालोसपा और लोजपा की मांग पिछली जीती...
फटा जींस पहनने की स्वतंत्रता मूलतः अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का ही एक रूप है। पर इसका उपयोग कई बार आदमी को हास्यास्पद बना देता है।

फटी जीन्स से टुकुर टुकुर ताक रही है बौद्धिकों की वैचारिक समृद्धि

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फटी जीन्स पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ का बयान क्या आया, देश में प्रगतिशील बौद्धिक समाज फट पड़ा है। महिलाएं भी पीछे नहीं हैं।...
टीवी चैनेल और अखबार से लोग अब परहेज क्यों करने लगे हैं। सच तो यह है कि क्यों कोई टीवी खोले और प्रायोजित खबरें-तस्वीरें देखे। यही मूल वजह है।

टीवी चैनेल और अखबार से लोग अब परहेज क्यों करने लगे हैं !

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अमित प्रकाश सिंह टीवी चैनेल और अखबार से लोग अब परहेज क्यों करने लगे हैं। सच तो यह है कि क्यों कोई टीवी खोले...
‘बहुत हुई मंहगाई की मार, अबकी बार मोदी सरकार।।’ नारे पर रीझे भारतीय जनमानस को शायद अब पेट्रोल-डीजल सहित अन्य उपभोक्ता सामग्री में मंहगाई नहीं सताती। इसलिए अभी और मंहगाई के लिए तैयार ही रहें श्रीमान ! यह कह रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार श्याम किशोर चौबे

केंद्रीय राहत पैकेज का सचः पैकेज गया ‘वन’ में, सोचें अपने मन में

श्याम किशोर चौबे केंद्रीय राहत पैकेज गया ‘वन’ में, सोचें अपने मन में। दादी-नानी की कहानियों की तर्ज पर मोदी सरकार द्वारा घोषित कोविड...