भीड़ में बदल रहा है इक्कीसवीं सदी का भारत

इक्कीसवीं सदी में भारत भीड़ में बदल रहा है। उसकी नागरिकता अगर राष्ट्रीय स्तर पर बहुसंख्यक धर्म, सेना के प्रति समर्पण, काल्पनिक कथाओं व...

योग मानव स्वास्थ्य की दिशा में सकारात्मक नजरिया है

0
21 जून को ‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’ के रूप में घोषित है। 11 दिसंबर 2014 - यूनाइटेड नेशंस की आम सभा ने भारत द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए 21 जून...
हिन्दी के लिए लड़ने वाला सबसे बड़ा योद्धा : महात्मा गाँधी

हिन्दी के लिए लड़ने वाला सबसे बड़ा योद्धा : महात्मा गाँधी

0
2 अक्टूबर को जन्मदिन पर विशेष अमरनाथ हिन्दी के आन्दोलन को गाँधी जी ने आजादी के आन्दोलन से जोड़ दिया था। उनका ख्याल था कि...
अयोध्या में राम मंदिर के लिए ट्रस्ट का एलान

सवाल राम का नहीं, राम की कथा का सवाल है

0
नरेंद्र अनिकेत अयोध्‍या में राम मंदिर के सवाल पर कई बार उबाल आ चुका है। अदालत भी इस सवाल में उलझी हुई है। लेकिन...

फिल्म समीक्षाः बैंडिट क्वीन की याद दिलाती है पान सिंह तोमर

0
नवीन शर्मा पान सिंह तोमर फिल्म कई मायनों में देखने योग्य है। सबसे पहली बात तो यह एक सच्ची घटना पर आधारित है। उसके...
इंदिरा गांधीः आपातकाल की प्रणेता

लोकतांत्रिक इतिहास का काला पन्ना है आपातकाल

0
नवीन शर्मा लोकतांत्रिक इतिहास का काला पन्ना है आपातकाल। निरंकुश राजतंत्र की तुलना में लोकतंत्र काफी अच्छी व्यवस्था है। यह शासन व्यवस्था को निरंकुश...

SC/ST मुद्दे पर विपक्ष को धकिया कर आगे निकल गयी भाजपा

0
डा. राजेंद्र 2019 की तस्वीर कुछ-कुछ साफ होने लगी है। सुप्रीम कोर्ट ने अचानक ही एससी-एसटी ऐक्ट के विरुद्ध फैसला नहीं सुना दिया था!...
प्रभात खबर बिकने को तैयाार था। खरीदारों का हुजूम भी उमड़ा था। आखिरकार सौदा दैनिक जागरण की कंपनी के साथ तय हुआ, पर बिकने से प्रभात खबर बच गया। बता रहे हैं ओमप्रकाश अश्क

प्रभात खबर जब बिकते-बिकते बचा, जानिए पूरी कहानी

0
प्रभात खबर बिकने को तैयाार था। खरीदारों का हुजूम भी उमड़ा था। आखिरकार सौदा दैनिक जागरण की कंपनी के साथ तय हुआ, पर बिकने...
‘बहुत हुई मंहगाई की मार, अबकी बार मोदी सरकार।।’ नारे पर रीझे भारतीय जनमानस को शायद अब पेट्रोल-डीजल सहित अन्य उपभोक्ता सामग्री में मंहगाई नहीं सताती। इसलिए अभी और मंहगाई के लिए तैयार ही रहें श्रीमान ! यह कह रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार श्याम किशोर चौबे

मध्य वर्ग पर पड़ी है कोरोना की असल मार, समझिए कैसे….

श्याम किशोर चौबे मध्य वर्ग पर कोरोना की असल मार पड़ी है। यह वर्ग सर्वाधिक बदहाल है। गरीबों को बचाने और अमीरों को उबारने...
अज्ञेय और रेणु के संबंध कितने मधुर थे, इसे कई प्रसंगों का जिक्र कर वरिष्ठ साहित्यकार भारत यायावर ने बताने-समझाने की कोशिश की है।

अज्ञेय और रेणु के संबंध कितने मधुर थे, समझें इस आलेख से

0
अज्ञेय और रेणु के संबंध कितने मधुर थे, इसे कई प्रसंगों का जिक्र कर वरिष्ठ साहित्यकार भारत यायावर ने बताने-समझाने की कोशिश की है।...