लेखक गुंजन ज्ञानेंद्र सिन्हा लंबे समय तक एसआर रामनुजन के साथ काम कर चुके हैं

ईनाडू मीडिया के डायरेक्टर रहे एसआर रामानुजन के बारे में जानिए

0
ईनाडू मीडिया समूह के डायरेक्टर रहे एसआर रामानुजन के की कार्यशैली के बारे में उनके साथ काम कर चुके गुंजन ज्ञानेंद्र सिन्हा ने फेसबुक...

मारीशस  के लोग मानते हैं- भोजपुरी हिंदी की माता है

0
राजेश श्रीवास्तव मॉरीशस में हुए मेरे दोनों व्याख्यानों में मैंने रामकथा को गलत तरह से प्रचारित किये जाने का विरोध किया। संसार के बहुत ...
Rajeev Ranjan BJP Prawakta

आपसी स्वार्थ के कारण महागठबंधन में छिड़ी हुई है महाभारत: राजीव रंजन

0
महागठबंधन में छिड़ी हुई है महाभारत केवल आपसी स्वार्थ के कारण पटना : महागठबंधन में फैली दरार का कारण घटक दलों के स्वार्थ को बताते...

इदिरा गांधी को टिकट देने के विरोध में जब एंटोनी ने सीएम पद छोड़ा

0
सुरेंद्र किशोर इंदिरा गांधी को टिकट देने के फैसले के विरोध में केरल के मुख्यमंत्री रहे ए.के. एंटोनी ने अपने पद से इस्तीफ दे...
कोरोना संकट से निपटने में लगे लोगों के उत्सहवर्द्धन के लिए थाली बजाओ अभियान में शामिल बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी (फाइल फोटो)

नरेंद्र मोदी के आह्वान पर घंटा बजा, पर किसके वास्ते?

0
के. विक्रम राव नरेंद्र मोदी के आह्वान पर भारत ने आज (22 मार्च 2020) संध्या पांच बजे ताली बजाई, थाली पीटी, घंटी घनघनाई और...
लेखक निशिकांत ठाकुर दैनिक जागरण में नरेंद्र मोहन के साथ वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके हैं

अखबार की ‘साख’ से कभी मत खेलना, कहते थे नरेंद्र मोहन

0
निशिकांत ठाकुर अखबार की ‘साख’ से कभी मत खेलना। यह नसीहत अक्सर ‘दैनिक जागरण’ के प्रधान संपादक स्व. नरेंद्र मोहन जी सहकर्मियों को दिया...
यह स्वीकार करना कि शैबाल गुप्ता नहीं रहे, मेरे लिए कितना दुखद है, कैसे कहूँ। दशकों से हम मित्र रहे। इतनी यादें और संस्मरण हैं, जिन्हें लिखना मुश्किल होगा।

शैबाल गुप्ता का जाना बिहार के लिए अपूरणीय क्षति !

0
प्रेमकुमार मणि शैबाल गुप्ता का जाना बिहार के लिए अपूरणीय क्षति है! यह स्वीकार करना कि शैबाल गुप्ता नहीं रहे, मेरे लिए कितना दुखद...

सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर के जन्मदिन पर विशेष

0
नवीन शर्मा 1947 में हमारे देश को दो बेशकीमती उपहार मिले। पहला तो आप सब जानते ही हैं, देश अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त...

मलिकाइन के पातीः ना रही बांस, ना बाजी बंसुरी

0
पावं लागीं मलिकार! काली माई के किरपा से सब केहू इहवां ठीक बा, बरम बाबा से निहोरा बा जे रउरो ठीक रहीं। ए मलिकार, ई...
के. विक्रम राव, वरिष्ठ पत्रकार

पुलिस की छवि अभी भी सामान्यतः जनमित्र वाली बनी नहीं

0
के विक्रम राव  पुलिस की छवि अभी भी सामान्यतः जनमित्र वाली बनी नहीं। हालांकि ब्रिटिश राज के खात्मे के सात दशक बीत गये। फिर...