पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को श्रद्धांजलि

सुषमा जी, आप बहुत याद आएंगी, याद आती रहेंगी सहिष्णु नेता बतौर

0
जयशंकर गुप्त सुषमा जी, आप बहुत या आएंगी। याद आती रहेंगी, अपनी सहृदयता, असहमति को सम्मान देनेवाले सहिष्णु नेता के तौर पर भी। ओह,...

20 लाख शब्द लिख चुके हैं पत्रकार व शिक्षक बी.के. मिश्र

0
सुरेंद्र किशोर   कोई व्यक्ति लगातार 47 साल से मुख्य धारा की पत्रकारिता में हो और उसके  लेखन को लेकर कभी कोई विवाद न हो,तो...
कोयल का आवाज में बसंत गाता है। सरसों के पीले फूलों की गंध से बसंत महकता है। आम के मंजर की मादक गंध किसे न भाती।

कोयल, बसंत में अब तुम्हारे कूकने का बेसब्री से इंतज़ार है !

0
कोयल का आवाज में बसंत गाता है। सरसों के पीले फूलों की गंध से बसंत महकता है। आम के मंजर की मादक गंध किसे...

विनम्र श्रद्धांजलिः जब कुलदीप नैयर साहब गेट फांद गए थे

0
बिपेंद्र कुमार बात दशकों पुरानी है। साल याद नहीं। कुलदीप नैयर साहब पटना किसी कार्यक्रम में आये थे। गांधी संग्रहालय में ठहरे थे। रात...
राजद्रोह पर पुलिस को 1962 में आये एक फैसले को पढ़ लेना चाहिए। अफजल की फांसी की बरसी पर जेएनयू में राष्ट्र विरोधी नारे लगे तो यह चर्चा में आया

राजद्रोह पर 1962 का सुप्रीम कोर्ट का निर्णय पुलिस अफसर पढ़ लें

0
राजद्रोह पर पुलिस को 1962 में आये एक फैसले को पढ़ लेना चाहिए। अफजल गुरु को फांसी होने के बाद जेएनयू में उसकी बरसी...
जेपी को चंद्रशेखर की चिट्ठी

जेपी मूवमेंट में विपक्षी नेताओं की भीड़ से सशंकित थे चंद्रशेखर

0
जयप्रकाश के आंदोलन (जेपी मूवमेंट) में लगातार विपक्षी नेताओं और युवाओं का साथ मिलता गया. इससे जयप्रकाश आंदोलन के सेनानी उत्साहित थे, लेकिन चंद्रशेखर...
कांधार कांड

कांधार कांड को ले भाजपा पर लांछन लगा रहे राहुल गांधी

0
के. विक्रम राव, वरिष्ठ पत्रकार पुलवामा के खलनायक क्रूर आतंकी मोहम्मद अजहर मसूद को सुरक्षित कंधार तक पहुँचाने का राष्ट्रघातक गुनाह तो अटल-नीत भाजपा...
ओमप्रकाश अश्क

और अविनाश जी की हो गई विदाई, अश्क को मिली पटना की कमान

0
वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश अश्क का पटना आगमन 1997 के मध्य में हुआ और अगले पड़ाव की ओर वह जून 1999 में प्रस्थान कर गये।...
अम्फान और निसर्ग जैसी आपदा तो झांकी है, बड़े खतरे अभी बाकी हैं। आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि पर्यावरण का क्षरण मानव समाज के अस्तित्व के लिए खतरा बन रहा है।

अम्फान और निसर्ग जैसी आपदा तो झांकी है, बड़े खतरे अभी बाकी हैं

अम्फान और निसर्ग जैसी आपदा तो झांकी है, बड़े खतरे अभी बाकी हैं। आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि पर्यावरण का क्षरण...
कृषि कानून के विरोध को पश्चिम बंगाल के अकाल के परिप्रेक्ष्य में देखने की जरूरत है। अकाल में भूख से 30 लाख लोगों की तड़प-तड़प कर मौत हुई थी।

दो मजदूरों की जान जाने के बाद भी नहीं खुली हनुमान चीनी मिल

0
बिहार के 89% लोग गाँव में रहते हैं और 70% लोग कृषि के कमाई पर ही निर्भर हैं। उपजाऊ मिट्टी और भरपूर पानी होने...