भगवा वस्त्रधारी माधवकांत मिश्र के साथ नागेंद्र प्रताप

एक स्वामी जो मेरा कभी संपादक हुआ करता था यानी माधवकांत मिश्र

नागेंद्र प्रताप एक ऐसा स्वामी जो मेरा कभी सम्पादक हुआ करता था यानी माधवकांत मिश्र। वह कोई और नहीं, बल्कि अपने जमाने के मशहूर...
आलोक तोमर अपनी पत्नी को बेहद प्यार करते थे। शादी से पहले सुप्रिया के प्रति उनके प्रेम के कई किस्से हैं। आलोक तोमर के ऐसे किस्से सामने आये हैं।

आलोक तोमर को कुछ इस तरह याद किया हरीश पाठक ने

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आलोक तोमर का जन्मदिन 27 दिसंबर को था। उनके जन्मदिन पर वरिष्ठ कहानीकार हरीश पाठक ने टिप्पणी लिखी। आलोक तोमर अब नहीं रहे। लेकिन...
गणेश शंकर विद्यार्थी ने कबीरी ढंग से लिखा था, "अजां देने, शंख बजाने, नाक दबाने और नमाज पढ़ने का नाम धर्म नहीं है।

हिंदी पत्रकारिता के पितामह गणेश शंकर विद्यार्थी ने दी थी सीख

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प्रवीण बागी हिंदी पत्रकारिता के पितामह गणेश शंकर विद्यार्थी ने अपने अखबार प्रताप के पहले अंक में पत्रकारिता की अवधारणा प्रस्तुत की थी। वह...
अभिनेत्री नाजिमा

मुझे रात-दिन ये ख्याल है, वो नजर से मुझको गिरा न दे…

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वीर विनोद छाबड़ा   मुझे रात-दिन ये ख्याल है, वो नजर से मुझको गिरा न दे...अभिनेत्री नाजिमा का यह गीत जिसने भी सुना होगा, उसे...

प्रवासियों के प्रति अस्पृश्यता को याद रखेगा इतिहास…..

सुशील मिश्रा प्रवासियों के प्रति अस्पृश्यता को इतिहास भी याद रखेगा। सड़कों पर प्रवासियों के प्रति जो अस्पृश्यता दिख रही, उसकी कल्पना प्रवासियों ने...
कुम्हड़ा आमतौौर पर पुरुष ही काटते हैं। साबूत कुम्हड़ा औरतें नहीं कभी नहीं काटतीं। आइए, जानते हैं ऐसा क्यों होता है।

महिलाएं कुम्हड़ा क्‍यों नहीं काटतीं, क्या आप यह जानते हैं? 

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कुम्हड़ा आमतौौर पर पुरुष ही काटते हैं। साबूत कुम्हड़ा औरतें नहीं कभी नहीं काटतीं। आइए, जानते हैं ऐसा क्यों होता है। रामधनी द्विवेदी  इस बार...
अखबारों में छपी यह खबर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गयी है

सोशल मीडिया पर घूम रहीं ऐसी खबरें चकित करती हैं!

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गोपेश्वर सिंह सोशल मीडिया पर अखबारों की यह खबर घूम रही है कि बिहार के पूर्व डीजीपी अभयानंद भूमिहार जाति के 100 निर्धन बच्चों...

बंदूक व कलम की जुगलबंदी का नाम है मन्मथनाथ गुप्त

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जयंती पर विशेष नवीन शर्मा आमतौर पर बंदूक व कलम को दो विपरीत ध्रुव मानी जाती हैं। इन दोनों से ही तालमेल बना कर जिस...
रामदेव शुक्ल व्याख्यात्मक आलोचना के अंतिम स्तंभ हैं। ‘बिहारी- सतसई का पुनर्पाठ’ उनकी नवीनतम प्रकाशित आलोचना-कृति है। वे अच्छे कथाकार भी हैं।

रामदेव शुक्लः व्याख्यात्मक आलोचना के अंतिम स्तंभ

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रामदेव शुक्ल व्याख्यात्मक आलोचना के अंतिम स्तंभ हैं। ‘बिहारी- सतसई का पुनर्पाठ’ उनकी नवीनतम प्रकाशित आलोचना-कृति है। वे अच्छे कथाकार भी हैं। ‘बिहारी- सतसई...

मोतिहारी में पैदा हुए थे मशहूर विदेशी लेखक जार्ज ओरवेल

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21 जनवरी पुण्यतिथि पर विशेष नवीन शर्मा विश्व साहित्य में अंग्रेजी के प्रसिद्ध उपन्यास 1984 व एनिमल फार्म विशिष्ट स्थान रखते हैं। इन कालजयी किताबों...