आर्थिक उदारीकरण ने पैकेज तो दिये, पर बाजार के रास्ते ले लिये
आर्थिक उदारीकरण ने आपको वेतन-पैकेज लाख-करोड़ रुपये तो दिये, लेकिन ये पैसे बाजार के रास्ते फिर पूंजीपतियों के पास ही पहुंच गये। इसे कोई...
अरुण कमल गहरे अर्थ में प्रतिबद्ध कवि, बेहतर जीवन की आकुलता
कृपाशंकर चौबे
अरुण कमल गहरे अर्थ में प्रतिबद्ध कवि हैं और उनकी प्रतिबद्धता की जड़ें ठेठ भारतीय आबोहवा और जमीन में हैं। जो सामने...
मलिकाइन के पातीः रांड़ माड़े पर उतान
पांव लागीं मलिकार। कई दिन से राउरा के पाती पठावे के सोचत रहनी हां, बाकिर कवनो मिलते ना रहले हां सन लिखे वाला। आज...
डा. लोहिया का जब पूरे सदन ने खड़े होकर स्वागत किया था
डा. लोहिया का जब पूरे सदन ने खड़े होकर का स्वागत किया था। यह सुन कर आश्चर्य हो सकता है कि तब के प्रधान...
फिल्म समीक्षाः बाला साहेब की तरह ही बेबाक है ठाकरे
नवीन शर्मा
आजकल हिंदी सिनेमा में बायोपिक का दौर चल रहा है। इसकी लेटेस्ट फिल्म है ठाकरे। इसके कुछ हफ्ते पहले ही मनमोहन सिंह...
प्रलेक प्रकाशन की शिनाख्त सीरिज में- ‘कृपाशंकर चौबे एक शिनाख्त’
ओमप्रकाश अश्क
प्रलेक प्रकाशन, मुंबई ने पत्रकार, स्तंभकार, टिप्पणीकार, निबंधकार, साहित्य समालोचक कृपाशंकर चौबे के सृजन और शोध पर 464 पृष्ठों का ग्रंथ अभी-अभी...
‘अहवा’ भगाने की लुकाठी से असमय दीपावली के टोटके तक
'अहवा' भगाने की लुकाठी से असमय दीपावली के टोटके तक की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर डीयू के प्रोफेसर गोपेश्वर सिंह ने एक...
सरकारी सेवाओं से आहिस्ता-आहिस्ता होती जा रही हिन्दी की विदाई
अमरनाथ
सरकारी सेवाओं से मातृभाषाओं खासकर हिन्दी की विदाई होने लगी है। जाहिर है कि ऐसी स्थिति में हिन्दी के प्रति छात्रों का आकर्षण...
बंगाल के नेताओं से सीखें कैसे सादगी से जीया जाता है
बंगाल के नेताओं से सीखें कैसे सादगी से जीया जाता है। किसी को सादगी सीखनी हो तो बंगाल के नेताओं से सीखे। हाल में...
बिहार की पॉलिटिक्स समझनी हो तो जान लें ये बातें
प्रेमकुमार मणि
आगे बढ़ने से पहले बिहार के बारे में हमें कुछ और जान लेना चाहिए। पिछले लगभग सौ साल में बिहार का भूगोल...




















