विपक्ष की भूमिका बदल गयी है, अच्छे की भी आलोचना
विपक्ष की भूमिका अब पहले जैसी नहीं। पूरी तरह बदल गयी है। सत्ता पक्ष के हर फैसले की आलोचना करना विपक्ष की भूमिका में...
अशोक वाजपेयी ने न सिर्फ संस्थाएं खड़ी कीं, बल्कि खुद में एक संस्था थे
अशोक वाजपेयी ने न सिर्फ संस्थाएं खड़ी कीं, बल्कि वे खुद में एक संस्था थे। बहुलता को बचाने और बढ़ाने का निरंतर यत्न किया।...
फिल्म समीक्षाः बाला साहेब की तरह ही बेबाक है ठाकरे
नवीन शर्मा
आजकल हिंदी सिनेमा में बायोपिक का दौर चल रहा है। इसकी लेटेस्ट फिल्म है ठाकरे। इसके कुछ हफ्ते पहले ही मनमोहन सिंह...
शून्य की ओर बढ़ते बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार
वैसे राजनीति में किसी के बारे में अगर कह दिया जाए की फलां शून्य की ओर बढ़ रहा है तो लोग अनायास ही उसके...
सवाल राम का नहीं, राम की कथा का सवाल है
नरेंद्र अनिकेत
अयोध्या में राम मंदिर के सवाल पर कई बार उबाल आ चुका है। अदालत भी इस सवाल में उलझी हुई है। लेकिन...
बेरोजगारी की मार से त्रस्त हैं देशभर के पत्रकार
लोकनाथ तिवारी
की रे किछू काजेर संधान पेली, छ मास धोरे घोरे बंदी होये पोड़े आची। (क्या रे कोई काम काज खोजा, छह महीने...
डॉ. अम्बेडकर ने ‘प्रबुद्ध भारत’ निकाला और समाज में एकता पर दिया जोर
कृपाशंकर चौबे
डॉ. अम्बेडकर ने चार फरवरी 1956 को साप्ताहिक ‘प्रबुद्ध भारत’ निकाला। हर अंक में पत्रिका के शीर्ष की दूसरी पंक्ति में लिखा...
कोरोना का खतरा- कहीं श्रम सस्ता होगा तो कहीं श्रमिक बंधक बनेंगे
कोरोना का खतरा दिख रहा है। इससे कहीं श्रम सस्ता होगा तो कहीं श्रमिक बंधक बनने को विवश होंगे। कोरोना के कारण लाक डाउन...
मलिकाइन के पातीः दारू छूटल, झगड़ा-लफड़ा ओराइल
पावं लागीं मलिकार! रउरा त एकदमे गुलर के फूल हो गइल बानी। ना कवनो पाती आ न कवनो सनेशा। पइसवा बैरी त रउरा के...
भारतीय भाषाओं की प्रतिष्ठा के अथक सेनानी थे बलदेव बंशी
भारतीय भाषाओं को प्रतिष्ठा दिलाने के अथक सेनानी रहे हैं बलदेव बंशी। यूपीएससी की परीक्षाओं में भारतीय भाषाओं को उन्होंने हक दिलाया। आइए, जानते...




















