बच्चियां बन रही दरिंदगी का शिकार

रेप..रेप..रेप, मासूम बच्चियां बन रही दरिंदगी का शिकार

0
रेप..रेप..रेप, मासूम बच्चियां बन रही दरिंदगी का शिकार। देश के कई हिस्सों से मासूम बच्चियों से रेप और उनकी हत्या के मामलों पर सोशल...

झारखंड में तेजी से विकसित हो रही है नयी शैली की बैद्यनाथ पेंटिंग

0
डॉ आरके नीरद वरिष्ठ पत्रकार अौर जनजातीय जीवन-संस्कृति के गहरे जानकार हैं। झारखंड की कला-संस्कृति पर प्रायः ढाई दशकों से काम कर रहे हैं।...

जयंती पर विशेषः ओशो आधुनिक युग का  विद्रोही संन्यासी

0
नवीन शर्मा आचार्य रजनीश जो बाद में ओशो के नाम से जाने जाते हैं, वे आधुनिक भारत की सबसे चर्चित और और विवादास्पद आध्यात्मिक...

उसे मत मारो ओशो के निजी सचिव आनंद शीला की दास्तान

0
नवीन शर्मा ओशो रजनीश की पूर्व निजी सचिव मां आनंद शीला ने अपने संस्मरण ‘उसे मत मारो, भगवान रजनीश के साथ मेरे जीवन की...

मैथिली ठाकुर के गीत 99 साल तक रेडियो पर सुनाई देंगे

0
अनूप नारायण सिंह पटना। सोशल मीडिया पर एक दुबली-पतली लड़की मैथिली गीत लाइव गा रही थी। अपना मैथिली से कोई खास वास्ता नहीं, फिर...
राहत पैकेज में कितनी राहत! लाक डाउन-3 के अंत समय में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 5.94 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज-2 का ब्यौरा पेश किया। इसे विस्तार से समझा रहे वरिष्ठ पत्रकार श्याम किशोर चौबे

कोरोना का खतरा- कहीं श्रम सस्ता होगा तो कहीं श्रमिक बंधक बनेंगे

कोरोना का खतरा दिख रहा है। इससे कहीं श्रम सस्ता होगा तो कहीं श्रमिक बंधक बनने को विवश होंगे। कोरोना के कारण लाक डाउन...
चंद्रा पांडेय के नाम से मशहूर डॉ. चंद्रकला पांडेय के व्यक्तित्व के एक नहीं, अनेक रूप हैं। कइयों के लिए वे कवयित्री हैं तो कुछ के लिए अनुवादक।

चंद्रा पांडेय के बारे में विष्णुकांत शास्त्री ने क्या कहा था, इसे जान लीजिए

कृपाशंकर चौबे चंद्रा पांडेय के नाम से मशहूर डॉ. चंद्रकला पांडेय के व्यक्तित्व के एक नहीं, अनेक रूप हैं। कइयों के लिए वे कवयित्री...
जायरा वसीम

हिन्दी फिल्मों की अभिनेत्री जायरा वसीम का डर!

ध्रुव गुप्त कश्मीर से आने वाली हिन्दी फिल्मों की अभिनेत्री जायरा वसीम का फिल्म छोड़ने का फैसला उनका व्यक्तिगत फैसला है, जिसका सम्मान किया...

जन्मदिन पर विशेषः वाह जाकिर हुसैन, बोलिए जनाब!

0
नवीन शर्मा  जिन दिनों अपने देश में सिर्फ दूरदर्शन ही एकमात्र टीवी चैनल हुआ करता था। उस दौरान टीवी पर ताजमहल चायपत्ती का एक विज्ञापन...
डॉ. अम्बेडकर ने 3 अप्रैल 1927 को मराठी पाक्षिक ‘बहिष्कृत भारत’ निकाला। वह पाक्षिक वर्ष 1929 तक यानी दो साल तक लगातार निकलता रहा।

डॉ. भीमराव अम्बेडकर का ‘बहिष्कृत भारत’ और उनकी पत्रकारिता

0
कृपाशंकर चौबे डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने 3 अप्रैल 1927 को मराठी पाक्षिक ‘बहिष्कृत भारत’ निकाला। वह पाक्षिक वर्ष 1929 तक यानी दो साल तक...