बर्थडे स्पेशलः हिस्ट्री में फेल, पर पीरियड फिल्मों में पास हुए गोवारिकर

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नवीन शर्मा  लगान फिल्म में  भुवन बने आमिर खान अधिकतर लोगों को जरूर याद होंगे। भले ही इस बेहतरीन फिल्म के डायरेक्टर आशुतोष गोवारिकर...

कहां गइल मोर गांव रे, बता रहे वरिष्ठ पत्रकार शेषनारायण सिंह

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 शेष नारायण सिंह  1975 में जब मैंने संत तुलसीदास डिग्री  कालेज, कादीपुर (सुल्तानपुर) की प्राध्यापक की नौकरी छोडी थी तो एक महत्वपूर्ण फैक्टर यह...
लव जेहाद और लव मैरेज के फर्क को समझिए, तब विरोध कीजिए। लव जेहाद पर इनदिनों देश में घमासान मचा हुआ है। विपक्ष के कई दल इसके खिलाफ हैं।

लव जेहाद और लव मैरेज के फर्क को समझिए, तब विरोध कीजिए 

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लव जेहाद और लव मैरेज के फर्क को समझिए, तब विरोध कीजिए। लव जेहाद पर इनदिनों देश में घमासान मचा हुआ है। विपक्ष के...
पी.एफ.आई. (पापुलर फ्रंट आफ इंडिया) पर नजर रखिए। उसके प्रकट और छिपे इरादों को समझिए। इसकी वजह समझा रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र किशोर।

पी.एफ.आई. पर अब इस देश को अपना रुख तय करना होगा

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सुरेंद्र किशोर पी.एफ.आई. (पापुलर फ्रंट आफ इंडिया) पर नजर रखिए। उसके प्रकट और छिपे इरादों को समझिए। इसकी वजह समझा रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार...
कला की दुनिया में गणेश की पाइन बहुआयामी कलाकृतियां रही हैं। भारत उनकी सर्जनात्मक कृतियों पर गर्व महसूस करता है।

कला की दुनिया में गणेश पाइन की कलाकृतियां बहुआयामी रही हैं

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कृपाशंकर चौबे कला की दुनिया में गणेश की पाइन बहुआयामी कलाकृतियां रही हैं। भारत उनकी सर्जनात्मक कृतियों पर गर्व महसूस करता है। भारत जिन...
अभिनेत्री नाजिमा

मुझे रात-दिन ये ख्याल है, वो नजर से मुझको गिरा न दे…

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वीर विनोद छाबड़ा   मुझे रात-दिन ये ख्याल है, वो नजर से मुझको गिरा न दे...अभिनेत्री नाजिमा का यह गीत जिसने भी सुना होगा, उसे...
मोटूरि सत्यनारायण आगरा में केंद्रीय हिदी संस्थान को भाषायी प्रयोजनीयता के केन्द्र के रूप में विकसित करना चाह रहे थे।

मोटूरि सत्यनारायण उत्तर-दक्षिण भाषा-सेतु के वास्तुकार थे

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मोटूरि सत्यनारायण आगरा में केंद्रीय हिदी संस्थान को भाषायी प्रयोजनीयता के केन्द्र के रूप में विकसित करना चाह रहे थे। वे प्रयोजनमूलक हिंदी आंदोलन...
कोयल का आवाज में बसंत गाता है। सरसों के पीले फूलों की गंध से बसंत महकता है। आम के मंजर की मादक गंध किसे न भाती।

कोयल, बसंत में अब तुम्हारे कूकने का बेसब्री से इंतज़ार है !

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कोयल का आवाज में बसंत गाता है। सरसों के पीले फूलों की गंध से बसंत महकता है। आम के मंजर की मादक गंध किसे...
फणीश्वरनाथ रेणु मानवीयता को स्थापित करने के लिए संघर्ष करने वाले लेखक हैं। वे भारतीयता का एक चेहरा हैं। एक अकेली आवाज हैं।

रेणु का उपन्यास ‘मैला आँचल’ जब चम्बल के डाकुओं तक पहुंचा

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भारत यायावर  रेणु का उपन्यास 'मैला आँचल' अपने प्रकाशन के बाद धीरे-धीरे फैलता ही जा रहा था, लेकिन यह चम्बल घाटी में डाकुओं के...
25 जून भारतीय राजनीति में एक उल्लेखनीय तारीख है। इसी रोज 1975 में, तत्कालीन इंदिरा सरकार ने इमरजेंसी लगाई थी। दरअसल वह आपातकाल नहीं, आतंककाल था।

वह सिर्फ आपातकाल नहीं, सबसे बड़ा आतंककाल भी था

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प्रेमकुमार मणि  25 जून भारतीय राजनीति में एक उल्लेखनीय तारीख है। इसी रोज 1975 में, तत्कालीन इंदिरा सरकार ने इमरजेंसी लगाई थी। दरअसल वह...