गांव छोड़ब नहीं, जंगल छोड़ब नहीं, मायं माटी छोड़ब नहीं...कोरोना डायरी की आठवीं कड़ी में हम उस संकल्प की बात करेंगे, जिसका मूल स्वर यही होता है।

गांव छोड़ब नहीं, जंगल छोड़ब नहीं, मायं माटी छोड़ब नहीं..

गांव छोड़ब नहीं, जंगल छोड़ब नहीं, मायं माटी छोड़ब नहीं...कोरोना डायरी की आठवीं कड़ी में हम उस संकल्प की बात करेंगे, जिसका मूल स्वर...

शहादत दिवस पर नमनः साहसी और प्रेरक चंद्रशेखर आजाद

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नवीन शर्मा भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में सबसे अधिक प्रभावशाली क्रांतिकारियों में चंद्रशेखर आजाद को गिना जाता है। उनका जन्म 23 जुलाई ...

बिहार में तन गईं हैं सियासी तलवारें, बस अब वार का है इंतजार

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बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के अंदर सब कुछ ठीकठाक नहीं है। हाल के दिनों में कई ऐसे संकेत मिले हैं, जिससे यह...
हरिवंश, राज्यसभा के उपसभापति

हरिवंश जी ने जब खुशी-खुशी विदा किया प्रभात खबर से

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हरिबंश नारायण सिंह उर्फ पत्रकार से राज्यसभा के उपसभापति कर तक सफर करने वाले हरिवंश जी के बारे में इतना कुछ मित्रों ने लिखा...
कोरोना की पहुंच पेट के बाहर तक ही नहीं रही, पैठ अंदर तक हो गई है। कोरोना साथ लिए आ रहे हैं शिशु। ऐसे में सहज सवाल- कौन है कोरोना से सुरक्षित? पढ़िए, कोरोना डायरी की इक्कीसवीं किस्त वरिष्ठ पत्रकार डॉ. संतोष मानव की कलम से।

कोरोना काल में किसिम किसिम के विधायक, महापौर और पार्षद !

कोरोना काल में किसिम किसिम के विधायक, महापौर और पार्षद के दर्शन हुए। कोई वर्तमान से अतीत की ओर लौटता दिखा तो कुछ ने...

SC/ST मुद्दे पर विपक्ष को धकिया कर आगे निकल गयी भाजपा

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डा. राजेंद्र 2019 की तस्वीर कुछ-कुछ साफ होने लगी है। सुप्रीम कोर्ट ने अचानक ही एससी-एसटी ऐक्ट के विरुद्ध फैसला नहीं सुना दिया था!...

1984 के सिख विरोधी दंगों पर यकीनन राहुल गांधी का बयान बचकाना

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जयशंकर गुप्त आज लिखना तो भाई-बहन के पवित्र रिश्ते, रक्षाबंधन के बारे में चाह रहा था, लेकिन 1984 के सिख विरोधी दंगों के बारे...

मलिकाइन के पातीः पोखरा में मछरी, नौ-नौ कुटिया बखरा

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पावं लागीं मलिकार। पाती में तनिका देर हो गइल। जानते बानी बरखा-बूनी के सीजन चलता। कवनो लिखनीहार ना भेंटात रहले हां सन। हार-पाछ के...

केंद्र सरकार ने सरकारी कर्मियों-पेंशनरों का 2 प्रतिशत DA बढ़ाया

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केंद्रीय कर्मचारियों को अब 9 फीसदी महंगाई भत्ता, 48 लाख कर्मचारी और 61 लाख पेंशनर्स को फायदा  नयी दिल्ली। लोकसभा का आसन्न चुनाव ज्यादातर आम लोगों...
फटा जींस पहनने की स्वतंत्रता मूलतः अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का ही एक रूप है। पर इसका उपयोग कई बार आदमी को हास्यास्पद बना देता है।

फटी जीन्स से टुकुर टुकुर ताक रही है बौद्धिकों की वैचारिक समृद्धि

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फटी जीन्स पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ का बयान क्या आया, देश में प्रगतिशील बौद्धिक समाज फट पड़ा है। महिलाएं भी पीछे नहीं हैं।...