25 जून भारतीय राजनीति में एक उल्लेखनीय तारीख है। इसी रोज 1975 में, तत्कालीन इंदिरा सरकार ने इमरजेंसी लगाई थी। दरअसल वह आपातकाल नहीं, आतंककाल था।

वह सिर्फ आपातकाल नहीं, सबसे बड़ा आतंककाल भी था

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प्रेमकुमार मणि  25 जून भारतीय राजनीति में एक उल्लेखनीय तारीख है। इसी रोज 1975 में, तत्कालीन इंदिरा सरकार ने इमरजेंसी लगाई थी। दरअसल वह...
विनोद खन्ना

विनोद खन्ना कद-काठी से अमिताभ बच्चन पर भारी पड़ते थे

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नवीन शर्मा विनोद खन्ना अपने दौर के सबसे स्मार्ट और हैंडसम अभिनेता रहे हैं। अभिनय में भले ही अमिताभ उन पर भारी पड़ते हों,...

प्रलेक प्रकाशन की शिनाख्त सीरिज में- ‘कृपाशंकर चौबे एक शिनाख्त’

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ओमप्रकाश अश्क प्रलेक प्रकाशन, मुंबई ने पत्रकार, स्तंभकार, टिप्पणीकार, निबंधकार, साहित्य समालोचक कृपाशंकर चौबे के सृजन और शोध पर 464 पृष्ठों का ग्रंथ अभी-अभी...

रेखा के जन्मदिन 10 अक्तूबर पर विशेष- इन आँखों की मस्ती के…

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नवीन शर्मा उमराव जान फिल्म में रेखा पर फिल्माया गया यह गीत उन पर एकदम फिट बैठता है। वे हिंदी सिनेमा की उन चंद...
राम मनोहर लोहिया गैर कांग्रेसवाद के आधारस्तंभ थे। स्वतंत्र भारत की राजनीति और चिंतन धारा पर उनका गहरा असर था।

डा. लोहिया का जब पूरे सदन ने खड़े होकर स्वागत किया था

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डा. लोहिया का जब पूरे सदन ने खड़े होकर का स्वागत किया था। यह सुन कर आश्चर्य हो सकता है कि तब के प्रधान...

जब हालैंड में अनिल जनविजय किताबें चुराते पकड़े गये

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जब अमस्टर्डम में अनिल जनविजय किताबें चुराते पकड़े गये। यह रोचक प्रसंग अनिल जनविजय ने अपने फेसबुक वाल पर लिखा है। दुकानदार ने चोरी...
विपक्ष की भूमिका अब पहले जैसी नहीं। पूरी तरह बदल गयी है। सत्ता पक्ष के हर फैसले की आलोचना करना विपक्ष की भूमिका में शामिल हो गया है।

विपक्ष की भूमिका बदल गयी है, अच्छे की भी आलोचना

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विपक्ष की भूमिका अब पहले जैसी नहीं। पूरी तरह बदल गयी है। सत्ता पक्ष के हर फैसले की आलोचना करना विपक्ष की भूमिका में...

भोजपुरी फिल्‍म ‘काहें पिरीतिया लगवल’  की शूटिंग शुरू

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पटना। ऋद्धि फिल्‍म्‍स इंटरटेंमेंट प्रस्‍तुत भोजपुरी फिल्‍म ‘काहे पिरीतिया लगवल’ की शूटिंग आज से मुंबई में शुरू हो चुकी है। सामाजिक प्रेम कथा पर...
इंदिरा गांधीः आपातकाल की प्रणेता

लोकतांत्रिक इतिहास का काला पन्ना है आपातकाल

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नवीन शर्मा लोकतांत्रिक इतिहास का काला पन्ना है आपातकाल। निरंकुश राजतंत्र की तुलना में लोकतंत्र काफी अच्छी व्यवस्था है। यह शासन व्यवस्था को निरंकुश...
फणीश्वरनाथ रेणु का कथा संसार दो भिन्न भारतीय स्‍वरूपों के बीच खड़ा है। प्रेमचंद के बाद फणीश्‍वर नाथ रेणु को आंचलिक कथाकार माना गया है।

साहित्य अकादेमी पर फणीश्वरनाथ रेणु के विचार जानिए! 

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भारत यायावर  साहित्य अकादेमी पर फणीश्वरनाथ रेणु के स्पष्ट विचार थे। 1973 में साहित्य अकादेमी का उन्हें सदस्य बनाया गया था। उन्होंने अनुभव के...