समरस होना ही समर्थ या सामर्थ्यवान भारत की पहचान है। समरसता से मिली ताकत के कारण ही भारत जगत गुरु कहलाया और यही ताकत उसे और आगे ले जाएगी।

समरस होना ही समर्थ या सामर्थ्यवान भारत की पहचान है

ओमप्रकाश अश्क समरस होना ही समर्थ या सामर्थ्यवान भारत की पहचान है। समरसता से मिली ताकत के कारण ही भारत जगत गुरु कहलाया और...
सेनारी जनसंहार के न्यायिक फैसला अब सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा है। 22 साल बाद पटना हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलट दिया।

सेनारी जनसंहार का न्यायिक फैसला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा

सेनारी जनसंहार का न्यायिक फैसला अब सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा है। 22 साल बाद पटना हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलट...
राम मनोहर लोहिया गैर कांग्रेसवाद के आधारस्तंभ थे। स्वतंत्र भारत की राजनीति और चिंतन धारा पर उनका गहरा असर था।

डा. लोहिया का जब पूरे सदन ने खड़े होकर स्वागत किया था

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डा. लोहिया का जब पूरे सदन ने खड़े होकर का स्वागत किया था। यह सुन कर आश्चर्य हो सकता है कि तब के प्रधान...

अर्से बाद लोकसभा की कार्यवाही 20 जुलाई को खूब चली

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अर्से बाद 20 जुलाई को लोकसभा चली और खूब चली। सुबह 11 बजे से आधी रात तक चली । भोजनावकाश भी नहीं हुआ। ऐसा...

कहां गइल मोर गांव रे, बता रहे वरिष्ठ पत्रकार शेषनारायण सिंह

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 शेष नारायण सिंह  1975 में जब मैंने संत तुलसीदास डिग्री  कालेज, कादीपुर (सुल्तानपुर) की प्राध्यापक की नौकरी छोडी थी तो एक महत्वपूर्ण फैक्टर यह...

केंद्र सरकार ने सरकारी कर्मियों-पेंशनरों का 2 प्रतिशत DA बढ़ाया

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केंद्रीय कर्मचारियों को अब 9 फीसदी महंगाई भत्ता, 48 लाख कर्मचारी और 61 लाख पेंशनर्स को फायदा  नयी दिल्ली। लोकसभा का आसन्न चुनाव ज्यादातर आम लोगों...
देशबंधु के संपादक ललित सुरजन नहीं रहे। ललित सुरजन पत्रकारिता और सर्वोच्च इंसानी मान्यताओं के अजातशत्रु थे। ललित सुरजन जी  चले गए।

देशबंधु के संपादक ललित सुरजन नहीं रहे, एक अजात शत्रु का जाना

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शेष नारायण सिंह देशबंधु के संपादक ललित सुरजन नहीं रहे। ललित सुरजन पत्रकारिता और सर्वोच्च इंसानी मान्यताओं के अजातशत्रु थे। वे पत्रकारिता के अजातशत्रु...

जयंती पर विशेषः तमस में उजियारे का नाम भीष्म साहनी

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नवीन शर्मा भीष्म साहनी हिंदी साहित्यकारों में विशिष्ट स्थानीय रखते हैं। सात अगस्त 1915 को रावलपिंडी में इनका जन्म हुआ था। वे हिन्दी फ़िल्मों...
फणीश्वरनाथ रेणु का कथा संसार दो भिन्न भारतीय स्‍वरूपों के बीच खड़ा है। प्रेमचंद के बाद फणीश्‍वर नाथ रेणु को आंचलिक कथाकार माना गया है।

साहित्य अकादेमी पर फणीश्वरनाथ रेणु के विचार जानिए! 

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भारत यायावर  साहित्य अकादेमी पर फणीश्वरनाथ रेणु के स्पष्ट विचार थे। 1973 में साहित्य अकादेमी का उन्हें सदस्य बनाया गया था। उन्होंने अनुभव के...
कोयल का आवाज में बसंत गाता है। सरसों के पीले फूलों की गंध से बसंत महकता है। आम के मंजर की मादक गंध किसे न भाती।

कोयल, बसंत में अब तुम्हारे कूकने का बेसब्री से इंतज़ार है !

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कोयल का आवाज में बसंत गाता है। सरसों के पीले फूलों की गंध से बसंत महकता है। आम के मंजर की मादक गंध किसे...