रणेन्द्र के उपन्यास- गूंगी रुलाई का कोरस- में भारत की साझा संस्कृति
अमरनाथ
रणेन्द्र के उपन्यास- गूंगी रुलाई का कोरस- को पढ़कर पूरा किया। उपन्याकस ने मन मस्तिष्क पर धाक जमा लिया है। इसमें भारत की...
कामराज ने दो बार पीएम का पद ठुकराया, मरे तो सौ रुपये पास थे
प्रेमकुमार मणि
एक नेता, जो न हिंदी जानता है, और न अंग्रेजी। जिसने बस छठी कक्षा तक की पढ़ाई की हुई है और भारत...
अचानक और इतना बड़ा फैसला क्या नागपुर के इशारे पर लिया गया
यह सही से जांच का विषय है कि कश्मीर में समर्थन वापसी की "मास्टर की" किसके पास थी? नागपुर के पास, या फिर "7 लोक कल्याण मार्ग " के पास? खबर...
प्रोड्यूसर सिद्धार्थ मल्होत्रा को पर्दे पर सशक्त महिलाओं का चित्रण करना है पसंद
पर्दे पर सशक्त महिलाओं का चित्रण करना है मुझे पसंद
सार्थक समय डेस्क : क्रियेटर-प्रोड्यूसर सिद्धार्थ मल्होत्रा की दृष्टि हर उस प्रोजेक्ट पर रहती है,...
भारतीय भाषाओं की प्रतिष्ठा के अथक सेनानी थे बलदेव बंशी
भारतीय भाषाओं को प्रतिष्ठा दिलाने के अथक सेनानी रहे हैं बलदेव बंशी। यूपीएससी की परीक्षाओं में भारतीय भाषाओं को उन्होंने हक दिलाया। आइए, जानते...
बर्थ डे स्पेशलः मैं पल दो पल का शायर हूं के कलमकार साहिर
नवीन शर्मा
अमिताभ बच्चन की फिल्म कभी-कभी का गीत मैं पल दो पल का शायर हूं हम में से कई लोग गुनगुनाते हैं। यह...
पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा की परंपरा दशकों पुरानी है
पश्चिम बंगाल में राजनीतिक, हिंसा की परंपरा दशकों पुरानी है। क्या 1975 में जेपी पर हमलावर भीड़ में ममता बनर्जी भी शामिल थीं? जेपी...
कोरोना काल में किसिम किसिम के विधायक, महापौर और पार्षद !
कोरोना काल में किसिम किसिम के विधायक, महापौर और पार्षद के दर्शन हुए। कोई वर्तमान से अतीत की ओर लौटता दिखा तो कुछ ने...
पीडीपी से भाजपा के मोह भंग का गणित समझिए
जम्मू और कश्मीर की सियासत का इशारा कहीं और है, आइये इसको समझने का प्रयास करें।
मोदी ने आज से लगभग 6 महीने पहले एक देश एक चुनाव को...
राहत पैकेज में कोरोना से बाहर निकलकर आगे की सोच दिखती है
श्याम किशोर चौबे
राहत पैकेज में कोरोना संक्रमण काल के दौरान उत्पन्न अप्रत्याशित आर्थिक संकट से उबरने के लिए दूरगामी सोच का स्पष्ट दर्शन...




















