हाकी खिलाड़ी ध्यानचंद ने जब हिटलर को करारा जवाब दिया, उसे काफी रोमांचकारी है। संवाद पढ़कर आप भी बोल उठेंगे वाह, क्या करारा जवाब दिया !

हाकी खिलाड़ी ध्यानचंद ने जब हिटलर को करारा जवाब दिया

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हाकी खिलाड़ी ध्यानचंद ने जब हिटलर को करारा जवाब दिया, वह काफी रोमांचकारी है। संवाद पढ़कर आप भी बोल उठेंगे वाह, क्या करारा जवाब...
25 जून भारतीय राजनीति में एक उल्लेखनीय तारीख है। इसी रोज 1975 में, तत्कालीन इंदिरा सरकार ने इमरजेंसी लगाई थी। दरअसल वह आपातकाल नहीं, आतंककाल था।

वह सिर्फ आपातकाल नहीं, सबसे बड़ा आतंककाल भी था

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प्रेमकुमार मणि  25 जून भारतीय राजनीति में एक उल्लेखनीय तारीख है। इसी रोज 1975 में, तत्कालीन इंदिरा सरकार ने इमरजेंसी लगाई थी। दरअसल वह...

जन्मदिन पर विशेष- अंकुर से गॉडमदर तक शबाना का शानदार सफर

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नवीन शर्मा शबाना आजमी हिंदी सिनेमा की सबसे बेहतरीन अभिनेत्रियों में से एक हैं। शबाना ने 1973 में निर्देशक श्याम बेनेगल की क्लासिक फिल्म...
जेपी को चंद्रशेखर की चिट्ठी

जेपी मूवमेंट में विपक्षी नेताओं की भीड़ से सशंकित थे चंद्रशेखर

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जयप्रकाश के आंदोलन (जेपी मूवमेंट) में लगातार विपक्षी नेताओं और युवाओं का साथ मिलता गया. इससे जयप्रकाश आंदोलन के सेनानी उत्साहित थे, लेकिन चंद्रशेखर...
वर्ष 1974 की तारीख 5 जून. यही वह दिन था, जब जयप्रकाश नारायण (जेपी) ने पटना के गांधी मैदान में दो शब्दों- संपूर्ण क्रांति का नारा दिया था.

जयप्रकाश नारायण ने जब रेणु से साहित्यिक सहयोग मांगा

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प्रस्तुतिः गोपेश्वर सिंह जयप्रकाश नारायण (जेपी) ने फणीश्वर नाथ रेणु से एक बार साहित्यिक सहयोग मांगा था। इसके लिए जयप्रकाश जी ने रेणु को...
बिहार

बिहार की पॉलिटिक्स पर प्रेमकुमार मणि की बेबाक टिप्पणी

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लोकसभा चुनावों के अब कुछ ही महीने शेष हैं। स्वाभाविक है राजनीतिक चर्चाएं तेज होंगी। हो भी रही हैं। चौक-चौराहों, दफ्तरों से लेकर घरेलू...

पीडीपी से भाजपा के मोह भंग का गणित समझिए

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जम्मू और कश्मीर की सियासत का इशारा कहीं और है, आइये इसको समझने का प्रयास करें। मोदी ने आज से लगभग 6 महीने पहले एक देश एक चुनाव को...

तन्हाई ने ताउम्र साथ नहीं छोड़ा चर्चित अभिनेत्री नादिरा का

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वीर विनोद छाबड़ा  तन्हाई ने ताउम्र साथ नहीं छोड़ा अपने जमाने की चर्चित अभिनेत्री नादिरा का। औरत जब मोहब्बत में पड़ती है तो ढेर...

20 लाख शब्द लिख चुके हैं पत्रकार व शिक्षक बी.के. मिश्र

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सुरेंद्र किशोर   कोई व्यक्ति लगातार 47 साल से मुख्य धारा की पत्रकारिता में हो और उसके  लेखन को लेकर कभी कोई विवाद न हो,तो...
ओशो ने कहा था- निंदा रस का धंधा है तुम्हारी पत्रकारिता। पत्रकारों की दृष्टि ही मिथ्या हो जाती है। उनके धंधे का मतलब ही यह है कि जनता जो चाहती है, वह लाओ खोजबीन कर।

ओशो ने प्रवचन में कहा था- निंदा रस का धंधा है तुम्हारी पत्रकारिता 

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ओशो ने प्रवचन में कहा था- निंदा रस का धंधा है तुम्हारी पत्रकारिता। पत्रकारों की दृष्टि ही मिथ्या हो जाती है। उनके धंधे का...