कृपाशंकर चौबे

चंद्रकांत देवताले बड़े आत्मीय स्वभाव के विशिष्ट कवि थे

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बड़े आत्मीय थे चंद्रकांत देवताले। हिंदी के विशिष्ट कवि होने के बावजूद अत्यंत सरल मानुष थे। चंद्रकांत देवताले जी। 7 नवंबर को उनकी जयंती...

नहीं रहे नीरजः आंसू जब सम्मानित होंगे, मुझको याद किया जाएगा !

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ध्रुव गुप्त हिंदी के महाकवि गोपाल दास नीरज का देहावसान हिंदी गीतों के एक युग का अंत है। 93 साल की उम्र एक...

मारीशस  के लोग मानते हैं- भोजपुरी हिंदी की माता है

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राजेश श्रीवास्तव मॉरीशस में हुए मेरे दोनों व्याख्यानों में मैंने रामकथा को गलत तरह से प्रचारित किये जाने का विरोध किया। संसार के बहुत ...

राजमहल की पहाड़ियों में सबसे पहले जन्म हुआ था मानव का

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दुमका। पुरातत्त्वविद् पंडित अनूप कुमार वाजपेयी द्वारा लिखित विश्व की प्राचीनतम सभ्यता नामक शोध पुस्तक का दुमका के जनसम्पर्क विभाग सभागार में प्रयास फाउंडेशन फार टोटल डेवलपमेंट...

रेखना मेरी जान : ग्लोबल वार्मिंग की पृष्ठभूमि में खिले प्रेम के फूल

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नवीन शर्मा रतनेश्वर सिंह अपने उपन्यास रेखना मेरी जान ग्लोबल वार्मिंग जैसे अलार्मिंग मुद्दे को प्रमख कथा में गूंथ कर हिंदी भाषी पाठकों को...

नहीं जानते तो जान लें सुभाषचंद्र गुप्ता उर्फ मुद्राराक्षस को

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शूद्रों के चित्रकार थे मुद्राराक्षस! एक चित्रकार था- बादलों का चित्रकार! वह ताजिंदगी बादलों का चित्र बनाता रहा- काले, भूरे, मटमैले बादलों का। बादलों के चित्र कभी...
सूर्यकांत त्रिपाठी निराला

इतनी कहियो जायिः निराला ने लिख दिया- बांधो न नाव इस ठांव बंधु

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मिथिलेश कुमार सिंह महाप्राण निराला को जिन कुछेक गीतों ने हिंदी में पूरी ताकत से स्थापित किया और उन्हें दाखिल दफ्तर होने से बचा...
प्रेमचंद और फणीश्वरनाथ रेणु  गांव और शहर दोनों के कथाकार हैं। इन्हें सिर्फ गांव में ही सिमटा देना एक साजिश है, इनके साथ न्याय नहीं। न प्रेमचंद सिर्फ लमही के कथाकार हैं और न रेणु सिर्फ औराही हिंगना के। ये भारतीय कथाकार हैं। इन्हें इसी रूप में जानना तथा मानना उचित है।

प्रेमचंद और फणीश्वरनाथ रेणु महज गंवई कथाकार नहीं

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प्रेमचंद और फणीश्वरनाथ रेणु  गांव और शहर दोनों के कथाकार हैं। इन्हें सिर्फ गांव में ही सिमटा देना एक साजिश है, इनके साथ न्याय...
फणीश्वरनाथ रेणु  बहुत कम उम्र से ही रामवृक्ष बेनीपुरी के व्यक्तित्व से काफी प्रभावित थे। वे स्कूली उम्र से 'जनता 'साप्ताहिक के पाठक बन गये थे।

रेणु बहुत कम उम्र से ही बेनीपुरी के व्यक्तित्व से प्रभावित थे

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भारत यायावर  रेणु बहुत कम उम्र से ही रामवृक्ष बेनीपुरी के व्यक्तित्व से काफी प्रभावित थे। वे स्कूली उम्र से 'जनता 'साप्ताहिक के पाठक...
ओमप्रकाश अश्क

ओमप्रकाश अश्क की पुस्तक- मुन्ना मास्टर बने एडिटर

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आप अब तक पढ़ते रहे हैं ओमप्रकाश अश्क की पुस्तक के अंश। आज समग्र रूप से उसे हम दे रहे हैं  जीवन में कई बार...