बांग्ला में लेखन, पर हिन्दी में सर्वाधिक पढ़े गये शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय
पुण्यतिथि पर विशेष
नवीन शर्मा
शरत चंद्र वैसे तो मूल रूप से बांग्ला के उपन्यासकार थे, लेकिन उनकी रचनाओं के अनुवाद हिंदी भाषी लोगों में खासे...
कबीर की कविता हाय-हाय और हाहाकार वाली कविता नहीं है
कबीर ज्ञान और प्रेम के कवि थे। उनकी कविता हाय-हाय और हाहाकार वाली कविता नहीं है, उल्लास की कविता है। वह दिन-रात रोना-बिसूरना नहीं...
उसे मत मारो ओशो के निजी सचिव आनंद शीला की दास्तान
नवीन शर्मा
ओशो रजनीश की पूर्व निजी सचिव मां आनंद शीला ने अपने संस्मरण ‘उसे मत मारो, भगवान रजनीश के साथ मेरे जीवन की...
प्रेमचंद के अद्वितीय व्याख्याता : कमल किशोर गोयनका
अमरनाथ
बुलंदशहर (उ.प्र.) के एक व्यवसायी परिवार में जन्मे और जाकिर हुसेन कॉलेज (साँध्य), दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रहे कमल किशोर गोयनका (11.10.1938 )...
अलका सरावगी के उपन्यास ‘कुलभूषण का नाम दर्ज़ कीजिये’- पर ममता कालिया की टिप्पणी
अलका सरावगी के उपन्यास 'कुलभूषण का नाम दर्ज़ कीजिये'- पर वरिष्ठ साहित्यकार ममता कालिया ने अपनी बेबाक टिप्पणी दर्ज की है। सीधे कहें तो...
प्रेमचंद और फणीश्वरनाथ रेणु महज गंवई कथाकार नहीं
प्रेमचंद और फणीश्वरनाथ रेणु गांव और शहर दोनों के कथाकार हैं। इन्हें सिर्फ गांव में ही सिमटा देना एक साजिश है, इनके साथ न्याय...
वासंतिक मौसम के मद्देनजर खास- निराला : एक याद या विषाद!
के. विक्रम राव
वसन्त पंचमी मतलब वाणी पुत्र कवि निराला की सालगाँठ। कौन सी थी? बहस अभी जारी रहेगी। निराला किस सदी के थे?...
अब न आते हैं खत लिख कर, थोड़ा लिखना अधिक समझना
मिथिलेश कुमार सिंह
आदमी बहुत आगे बढ़ चुका है। चांद, सूरज, मंगल, अमंगल- जाने कितने ग्रह-उपग्रह उसके रडार पर हैं। सूरज और चांद और...
‘गीत कभी गाता हूँ मैं, गीत कभी गाता मुझको’ के बहाने वीरेंद्र की याद
'गीत कभी गाता हूँ मैं, गीत कभी गाता मुझको' के बहाने गीतकार वीरेंद्र जी को याद किया है वरिष्ठ पत्रकार-साहित्यकार हरीश पाठक ने। इसी...
नहीं जानते तो जान लें सुभाषचंद्र गुप्ता उर्फ मुद्राराक्षस को
शूद्रों के चित्रकार थे मुद्राराक्षस! एक चित्रकार था- बादलों का चित्रकार! वह ताजिंदगी बादलों का चित्र बनाता रहा- काले, भूरे, मटमैले बादलों का। बादलों के चित्र कभी...



















