रेखना मेरी जान : ग्लोबल वार्मिंग की पृष्ठभूमि में खिले प्रेम के फूल
नवीन शर्मा
रतनेश्वर सिंह अपने उपन्यास रेखना मेरी जान ग्लोबल वार्मिंग जैसे अलार्मिंग मुद्दे को प्रमख कथा में गूंथ कर हिंदी भाषी पाठकों को...
जैनेन्द्र कुमार की जीवनी : अनासक्त आस्तिक
प्रेमकुमार मणि
मैं जब युवा था, तब प्रेमचंद और जैनेन्द्र को लेकर मेरे मन में कभी कभार उधेड़-बुन होता था। प्रश्न उठता था कि...
‘मैंने ‘निराला’ की मौत देखी है… अब मैं कविताएं नहीं लिखूंगा’
मिथिलेश कुमार सिंह
'मैंने 'निराला' की मौत देखी है/ भवानी प्रसाद मिश्र को देखा है गीत बेचते/ अब मैं कविताएं नहीं लिखूंगा।' दशकों पहले...
प्रधान संपादक हरिवंश जी ने प्रभात खबर में कहां-कहां नहीं घुमाया
वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश अश्क के संस्मरणों पर आधारित प्रस्तावित पुस्तक- मुन्ना मास्टर बने एडिटर- की धारावाहिक कड़ी
तीन राज्य, पांच शहर और नौ तबादले। पत्रकारिता...
और इस तरह प्रभात खबर के कार्यकारी संपादक बने ओमप्रकाश अश्क
ओमप्रकाश अश्क ने अपने कार्यकारी संपादक बनने की रोचक कहानी आत्मकथा पर आधारित अपनी प्रस्तावित पुस्तक- मुन्ना मास्टर बने एडिटर- में बतायी है। कैसे...
और आखिरकार कारोबार खबर की अकाल मौत हो गयी
पत्रकार ओमप्रकाश अश्क की प्रस्तावित पुस्तक- मुन्ना मास्टर बने एडिटर- की अगली कड़ी पेश है। यह उस दौर की बात है, जब श्री अश्क...
रवि यज्ञसेनी की 2 कविताएं- पापा अब परदेश न जाना/ अब ना जाओ दूर...
रवि यज्ञसेनी
पापा अब परदेश ना जाना
हम रूखा-सूखा खा लेंगे।
दूर हुए अपने गाँवो से,
दूर खेत-खलिहानों से,
दूर तीज-त्योहार हुए,
और बासंती मेलों से।
पापा मेरी फिक्र ना...
ओमप्रकाश अश्कः सामाजिक सरोकार में सराबोर एक पत्रकार
वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश अश्क ने पत्रकारिता में रहते हुए समाज सेवा में भी बड़ी भूमिका निभाई है। कोलकाता में उनके सामाजिक सरोकारों का जिक्र...
कबीर की कविता हाय-हाय और हाहाकार वाली कविता नहीं है
कबीर ज्ञान और प्रेम के कवि थे। उनकी कविता हाय-हाय और हाहाकार वाली कविता नहीं है, उल्लास की कविता है। वह दिन-रात रोना-बिसूरना नहीं...
राजमहल की पहाड़ियों में सबसे पहले जन्म हुआ था मानव का
दुमका। पुरातत्त्वविद् पंडित अनूप कुमार वाजपेयी द्वारा लिखित विश्व की प्राचीनतम सभ्यता नामक शोध पुस्तक का दुमका के जनसम्पर्क विभाग सभागार में प्रयास फाउंडेशन फार टोटल डेवलपमेंट...



















