'दुखाँ दी कटोरी : सुखाँ दा छल्ला'- प्रो. रूपा सिंह की अद्भुत कहानी है।

‘दुखाँ दी कटोरी : सुखाँ दा छल्ला’- प्रो. रूपा सिंह की अद्भुत कथा-यात्रा

'दुखाँ दी कटोरी : सुखाँ दा छल्ला'- प्रो. रूपा सिंह की अद्भुत कहानी है। इस कहानी के बहाने प्रो. मंगला रानी ने रूपा के...

नहीं जानते तो जान लें सुभाषचंद्र गुप्ता उर्फ मुद्राराक्षस को

शूद्रों के चित्रकार थे मुद्राराक्षस! एक चित्रकार था- बादलों का चित्रकार! वह ताजिंदगी बादलों का चित्र बनाता रहा- काले, भूरे, मटमैले बादलों का। बादलों के चित्र कभी...

राजकिशोर को लोगों ने दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि

वरिष्ठ पत्रकार राजकिशोर निधन पर साहित्यकारों, पत्रकारों, प्राध्यापकों ने अलग-अलग तरीके से भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। पेश हैं उनके उद्गार, जो सोशल मीडिया...
यथार्थवादी उपन्यास, ’मैला आंचल’ और ‘परती परिकथा’ जैसे उपन्यासों में लोकजीवन की अनुपम छटा चित्रित करने वाले कथाकार फणीश्वरनाथ रेणु हैं।

यथार्थवादी उपन्यास हैं ’मैला आंचल’ और ‘परती परिकथा’

राजेंद्र वर्मा यथार्थवादी उपन्यास, ’मैला आंचल’ और ‘परती परिकथा’ जैसे उपन्यासों में लोकजीवन की अनुपम छटा चित्रित करने वाले कथाकार फणीश्वरनाथ रेणु हैं। 4.03.1921...
कबीर ज्ञान और प्रेम के कवि थे। उनकी कविता हाय-हाय और हाहाकार  वाली कविता नहीं है, उल्लास की कविता है। वह दिन-रात रोना-बिसूरना नहीं जानते।

कबीर की कविता हाय-हाय और हाहाकार वाली कविता नहीं है

कबीर ज्ञान और प्रेम के कवि थे। उनकी कविता हाय-हाय और हाहाकार  वाली कविता नहीं है, उल्लास की कविता है। वह दिन-रात रोना-बिसूरना नहीं...
ओमप्रकाश अश्क

और इस तरह प्रभात खबर के कार्यकारी संपादक बने ओमप्रकाश अश्क

ओमप्रकाश अश्क ने अपने कार्यकारी संपादक बनने की रोचक कहानी आत्मकथा पर आधारित अपनी प्रस्तावित पुस्तक- मुन्ना मास्टर बने एडिटर- में बतायी है। कैसे...
बांग्ला उपन्यास की यात्रा उन्नीसवीं शती के उत्तरार्द्ध में आरंभ हुई। बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय से बांग्ला उपन्यास को जीवन मिला था।

बांग्ला उपन्यास की यात्रा उन्नीसवीं शती के उत्तरार्द्ध में आरंभ हुई

कृपाशंकर चौबे बांग्ला उपन्यास की यात्रा उन्नीसवीं शती के उत्तरार्द्ध में आरंभ हुई। बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय से बांग्ला उपन्यास को जीवन मिला था। उनके उपन्यास...
फणीश्वरनाथ रेणु  बहुत कम उम्र से ही रामवृक्ष बेनीपुरी के व्यक्तित्व से काफी प्रभावित थे। वे स्कूली उम्र से 'जनता 'साप्ताहिक के पाठक बन गये थे।

रेणु बहुत कम उम्र से ही बेनीपुरी के व्यक्तित्व से प्रभावित थे

भारत यायावर  रेणु बहुत कम उम्र से ही रामवृक्ष बेनीपुरी के व्यक्तित्व से काफी प्रभावित थे। वे स्कूली उम्र से 'जनता 'साप्ताहिक के पाठक...
मलिकाइन के पाती

साहित्य में सावन का आनंद देखिए नरेश मेहता की नजर से

मित्रो! आज दूसरा सप्तक के कवि के रूप में विख्यात और मालवा निवासी श्री नरेश मेहता के एक काव्यमय गद्य से आपको परिचय करवा...
‘चमारों की गली’ कविता में कवि अदम गोंडवी ने उनके हालात का वर्णन किया है। इसे साहित्यिक जमात अपने अपने नजरिए से देखता-आंकता है।  

‘चमारों की गली’ कविता और समकालीन यथार्थ…….

‘चमारों की गली’ कविता में कवि अदम गोंडवी ने उनके हालात का वर्णन किया है। इसे साहित्यिक जमात अपने अपने नजरिए से देखता-आंकता है।   ...