पूर्व क्रिकेट कप्तान सौरभ गांगुली हो सकते हैं BJP के उम्मीदवार
डी. कृष्ण राव
कोलकाता। आगामी लोकसभा चुनाव में अब तकरीबन 6 महीने बाकी हैं, लेकिन अभी से पश्चिम बंगाल में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो...
बंगाल में किसान मोर्चा के प्रभारी बने बिहार के रवींद्र रंजन
पटना। भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल में किसान मोर्चा का प्रदेश प्रभार की कमान रवींद्र रंजन को सौंपा है। प्रदेश प्रभारी का प्रभार...
साहब हमारा क्या कसूर, हम आपकी तरह दो पैर वाले जानवर नहीं चार पैर...
आखिर इनका क्या कसूर कि, इस ‘लॉक’ ने इन्हें कर दिया ‘डाउन’
सवाल ये है कि आखिर ये बेजुबान गुहार लगाएं भी तो किससे ?
रांची...
तेलंगाना और छत्तीसगढ़ के बॉर्डर पर फंसे हैं झारखंड के 30 मजदूर
विशद कुमार
रांची। तेलंगाना और छत्तीसगढ़ के बॉर्डर पर तीन दिनों से झारखंड के 30 मजदूर फंसे हैं। सभी गढ़वा जिले के बताये जाते हैं।...
जगजीवन राम, जिन्हें कभी अगड़ों ने दुत्कारा, फिर बाबूजी कह पुकारा
आरा। जगजीवन राम देश की गुलामी का कारण भी जाति प्रथा को मानते थे। आरा क्षेत्र की पहचान उसकी भोजपुरी, कुंवर सिंह और जगजीवन...
खबर का असर : मनपौर के पैक्स अध्यक्ष और बैंक मैनेजर पर FIR
पटना। मधुबनी जिला के बेनीपट्टी प्रखंड स्थित मनपौर पैक्स अध्यक्ष ललन झा और दि रहिका सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के शाखा प्रबंधक अजय कुमार मिश्र...
संसद में 9 और बिहार में 14 प्रतिशत महिलाएं
पटना। आज वर्ल्ड विज़न द्वारा होटल क्लार्क्स इन में आयोजित "परिवार और समुदाय में पुरुषों की देखभाल की भूमिका पर राज्य स्तर पर परामर्श“ के एक सत्र की अध्यक्षताकरते हुए जेंडर रिसोर्से सेंटर के प्रधान सलाहकार आनन्द माधव ने कहा कि इसके लिये यह आवश्यक है कि हर स्तर पर महिलाओं की सहभागिता सुनिश्चित की जाये।हम महिलाओं के लिये निर्णय लेते हैं, लेकिन अगर महिलाएं उस निर्णय लेने की प्रक्रिया में में शामिल नहीं हैं तो इसका कोई मायने नहीं है।
विदित हो कि 389 सदस्यीय संविधान सभा में मात्र 15 महिलाएं ही थीं। यानि 3.88%।आज भी इस स्थिति में बहुत सुधार नहीं हुआ है।हमारे संसद में मात्र 9 प्रतिशत महिलाओं की उपस्थिति है तो हमारे राज्य में 14 प्रतिशत। न्यायपालिका में राष्ट्रीय स्तर पर अगर यह 11 प्रतिशत है तो बिहार में मात्र 6 प्रतिशत। हलांकि पंचायती राज्य व्यवस्था मे 50 % आरक्षण रहने से बिहार मे महिला पंचायत प्रतिनिधियों की संख्या 52 % है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह मात्र 46% है। 42.5% की दर से बाल विवाह में बिहार तो अव्वल है ही।
उन्होंने कहा कि इसका अर्थ यह कदापि नहीं है कि परिवर्तन नही हुआ है या प्रयास नहीं हुआ है।सरकार की कई लाभकारी योजनाएं महिलाओं और बालिकाओं के लिये है।इनमें प्रमुख हैं सायकिल योजना, मुख्यमंत्री नारी शक्ति योजना, मुख्यमंत्री पोशाक योजना, मुख्यमंत्री अक्षर अंचल योजना। आज बिहार में 75% महिलाएं घरेलू निर्णय में सहभागी हैं। जीविका के माध्यम से भी महिलाओं के सशक्तीकरण का कार्य तेज़ी से चल रहा है।पर, इसमें समाज के हर वर्ग के सहयोग की आवश्यकता है।
उद्घाटन सत्र में महिला आयोग की अधयक्ष दिलमनी मिश्रा ने कहा कि आयोग अपने स्तर से महिला सशक्तीकरण के कार्य में लगा हुआ है और काउंसिलिंग के माध्यम से सुधार लाने का प्रयास करता है। सुधा वर्गीस ने कहा कि हमारी मानसिकता ही पुरूष को प्राथमिकता प्रदान करने की है। इसे बदलना आवश्यक होगा। इसके पहले वर्ल्ड विज़न के सत्यप्रकाश प्रमाणिक ने अतिथियों का स्वागत किया।
कार्यक्रम को महिला विकास निगम के प्रभारी प्रोजेक्ट डाइरेकटर रूपेश सिन्हा, यूनीसेफ़ की मोना सिन्हा, औकसफेम की सुष्मिता गोस्वामी, जीविका की अर्चना, वर्ल्ड विज़न की करेन पीटरसन, एलविन, C3 के गुंजन और बिहार विपदा प्रबंधन की मधुबाला ने भी संबोधित किया।
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बेतिया। बेतिया में कांग्रेस के नेता फखरुद्दीन खां की गोली मार कर हत्या कर दी गयी। उन्हें अज्ञात अपराधियों ने शुक्रवार को दोपहर उन्हें...
गाँधी के सपनों का भारत बना रही है केंद्र सरकार: राजीव
पटना। प्रदेश भाजपा प्रवक्ता सह पूर्व विधायक श्री राजीव रंजन ने सभी राज्यवासियों को देश के 71 वें स्वतंत्रता दिवस की बधाई देते हुए...



















