पार्टियों में कार्यकर्ताओं के घटने की वजह कहीं वंशवाद तो नहीं!
- सुरेंद्र किशोर
यह खुशी की बात है कि जिस समस्या की ओर मैं लिख-लिख कर वर्षों से लोगों का ध्यान खींचता रहा हूं, उस...
आर्थिक उदारीकरण ने मीडिया हाउस को खुला आकाश दे दिया
अनिल भास्कर
आर्थिक उदारीकरण ने बाजार को विस्तार दिया तो इस विस्तार ने मीडिया हाउसों की ऊंची उड़ान के लिए आसमान खोल दिया। स्थानीय...
सोशल मीडिया पर फेक सूचनाओं से मीडिया के दुरूपयोग का खतरा
महेश खरे
इन दिनों मीडिया में फेक न्यूज की खूब चर्चा हो रही है। फेक न्यूज का मुद्दा सीधे-सीधे मीडिया की विश्वसनीयता से जुड़ा...
जाति के समीकरण पर अब चुनाव जीतना कठिन है
आशुतोष
जाति के समीकरण पर अब चुनाव जीतना कठिन है। भाजपा की यह जीत केवल सवर्णों और बनियों के समर्थन से नहीं हुई है।...
भीड़ में बदल रहा है इक्कीसवीं सदी का भारत
इक्कीसवीं सदी में भारत भीड़ में बदल रहा है। उसकी नागरिकता अगर राष्ट्रीय स्तर पर बहुसंख्यक धर्म, सेना के प्रति समर्पण, काल्पनिक कथाओं व...
ये वोटरों के सामूहिक वार्तालाप का ‘एकल पाठ’ है
‘सामूहिक वार्तालाप का एकल पाठ’ सीरिज में कई पाठ हैं। यानी कई अंश और अलग-अलग शीर्षक। सब एक-दूसरे से जुड़े। सब अपने आप में...
हिंसा के कारण हर साल 80 लाख करोड़ का नुकसान
एक बात की कल्पना कीजिए। यदि केंद्र सरकार अपने प्रत्येक कर्मचारी के वेतन में से हर साल चार हजार रुपए की भी कटौती करने...
राजस्थान में चुनावी हवा का रुख भांपना ज्यादा आसान है
बब्बन सिंह
विधानसभा के होने वाले चुनाव में राजस्थान में हवा का रुख भांपना ज्यादा आसान है। राजस्थान में वसुंधरा सरकार के कई मंत्री...
वीपी सिंह को याद करते हुएः राजा नहीं, फकीर है
वीपी सिंह एक ऐसे प्रधानमंत्री और नेता थे, जिनके लिए लोगों ने ये नारा लगाया- राजा नहीं फ़क़ीर है- भारत की तक़दीर है! वर्तमान...
बांग्ला में लेखन, पर हिन्दी में सर्वाधिक पढ़े गये शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय
पुण्यतिथि पर विशेष
नवीन शर्मा
शरत चंद्र वैसे तो मूल रूप से बांग्ला के उपन्यासकार थे, लेकिन उनकी रचनाओं के अनुवाद हिंदी भाषी लोगों में खासे...




















