कमल की चाह में ललन पासवान, करेंगे अपने इरादे का खुलासा

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  • राणा अमरेश सिंह

पटना। रालोसपा के बागी विधायक ललन पासवान सासाराम लोकसभा क्षेत्र से भाजपा टिकट पर चुनाव लड़ना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि वे जल्दी ही इसका खुलासा कर देंगे। फिलहाल सासाराम संसदीय सीट के सांसद छेदी पासवान हैं। छेदी पासवान पहली बार भाजपा से सांसद बने हैं।  भाजपा के सीटिंग सांसद होने के कारण पार्टी हाई कमान ललन पासवान की शर्तो पर असमंजस में है। ललन पासवान का गृह क्षेत्र सासाराम ही है और वे चेनारी से दूसरी बार विधायक चुने गए हैं। पहली बार वे नीतीश कुमार की पार्टी जदयू से विधानसभा पहुंचे थे।

रालोसपा के मात्र दो विधायक सुधांशु शेखर और ललन पासवान हैं। जब रालोसपा मुखिया उपेंद्र कुशवाहा राजग छोड़ कर महागठबंधन में शामिल हुए तो दोनों विधायकों ने उनका साथ देने से इंकार कर दिया और राजग में बने रहने का निर्णय लिया।

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सुधांशु शेखर का जद (यू) में जाने का रास्ता साफ हो गया था, लेकिन विधायक ललन पासवान की इच्छा रोड़ा बन गई। ललन पासवान के साथ के बिना उनकी बात नहीं बनेगी। उधर, ललन ने साफ कर दिया है कि वह एनडीए में बने रहेंगे, लेकिन भाजपा में जायेंगे। चूंकि सासाराम लोकसभा सीट भाजपा के कोटे में है, इसलिए यह तय तब होगा, जब सासाराम लोकसभा सीट लड़ाने का उन्हें अश्वासन मिलेगा। पासवान ने अरुण कुमार को छोड़ कर आये दूसरे साथियों को भी एडजस्ट करने की मांग रखी है।

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दरअसल चेनारी विधायक ललन पासवान और सुधांशु शेखर की सदस्यता तकनीकी तौर पर रालोसपा से ही जुड़ी है। ऐसे में विधानसभा में रालोसपा के दो विधायक हैं, एक चेनारी के ललन और दूसरे हरलाखी के सुधांशु। लिहाजा अगर सुधांशु शेखर अकेले जदयू में जाते हैं तो उनकी विधायकी खतरे में पड़ सकती है। विधानसभा चुनाव में अभी देरी है, ऐसे में इस्तीफा देने से न तो शेखर को लाभ होगा और न उनको साथ लेने वाली पार्टी जदयू को ही।

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