रघुवंश के बयान ने महागठबंधन के घटक दलों में मचा दी है खलबली

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कुशवाहा ने कहा- बिना वजन के नेता हैं रघुवंश, माझी बोले- तब अकेले 40 सीटों पर लड़े राजद

पटना। राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह द्वारा महागठबंधन के छोटे दलों को कामन सिंबल, कामन मिनिमम प्रोग्राम और कामन प्लेटफार्म पर चुनाव लड़ने की सलाह से घटक दल भड़क गए हैं। रालोसपा मुखिया उपेंद्र कुशवाहा और पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने रघुवंश सिंह पर तंज कसे हैं। कुशवाहा ने उन्हें बिना वजन का नेता बताया। वहीं जीतन राम मांझी ने राजद को स्वयं सभी 40 सीटों पर लड़ कर जीत सुनिश्चित करने की सलाह दी है। दरअसल राजद को अंदेशा है कि 2019 लोकसभा चुनाव के बाद छोटे-छोटे दल 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव के समय अलग हो सकते हैं। इसे राजद के बैनर तले एकजुट करने की रणनीति के रूप में समझा जा सकता है।

महागठबंधन में शामिल हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि आरजेडी में रघुवंश प्रसाद सिंह की बातों का कोई अर्थ नहीं है। उन्होंने इसे पूरी तरह से बेमानी नीति बताया। उन्हें घटक दलों से नई तरह की सौदेबाजी करने से दूरी बनाने की सलाह दी। कुशवाहा ने बताया कि राजद अध्यक्ष की ओर से अगर इस तरह का प्रस्ताव आता है तो उस पर नए सिरे से मंथन किया जायेगा। रघुवंश प्रसाद सिंह ने महागठबंधन के घटक दलों को सौदेबाजी नहीं करने की नसीहत देते हुए कहा था कि लक्ष्य देखें और जीतने वाले कैंडिडेट ही सीट मांगें।

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रघुवंश प्रसाद सिंह के बयान से हम पार्टी के अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने राजद को स्वयं बिहार की 40 लोकसभा सीटों पर लड़ने की नसीहत दी। जाहिर है कि जीतन राम मांझी महागठबंधन को लेकर पिछले हफ्ते से असहज महसूस कर रहे हैं। उन्होंने सभी दलित प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्षों को चुनाव की तैयारी में जुट जाने को कहा है।

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2020  में होने वाले बिहार विधान सभा चुनाव को लेकर जीतन राम मांझी ने कहा कि अगर हमारे समाज के 70 विधायक जीत कर आते हैं, तो सीएम दलित ही बनेगा। उन्होंने तेजस्वी यादव को संभावित सीएम मानने से इंकार किया। इनका यह बयान रघुवंश प्रसाद सिंह के उस बयान की प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा ररहा है।

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