98 करोड़ में बिकी शहर और पहाड़ की जमीन, बिकेगा डालमियानगर भी

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डामियानगर (बिहार)। बिहार के एशिया प्रसिद्ध कारखानों वाले रोहतास उद्योग समूह की शहर और पहाड़ की 54 एकड़ जमीन 98 करोड़ रुपये में बिक चुकी है। कोई दस साल पहले औद्योगिक उपनगर डालमियानगर में स्थित इस उद्योग समूह का 219 एकड़ में विस्तृत कारखाना 141 करोड़ रुपये में, करीब 500 एकड़ का बांक फार्म 18 करोड़ रुपये में और 80 एकड़ का सूअरा हवाईअड्डा 17 करोड़ रुपये में 20वी सदी के ही बाजार भाव पर बेचे गए थे। पूरा डालमियानगर को भी धीरे-धीरे बेचे जाने की तैयारी हो रही है, जिसके लिए इसके मौजूदा बाजार-भाव का मूल्यांकन कराया जा रहा है। रोहतास उद्योग समूह की बच रही संपत्ति में अभी भी 220 एकड़ में आवासीयपरिसर, 10 एकड़ से अधिक बंद चीनी मिल (माडल स्कूल के पूरब), 10 एकड़ से अधिक में लाइट रेलवे कालोनी, लाइट रेलवे वर्कशाप की जमीन तथा नासरीगंज औरनौहट्टा में दफ्तर, मकान और स्टेशन की जमीन शामिल हैं। डेहरी-रोहतास लाइट रेलवे कंपनी भी 1984 में बंद कर दी गयी। रोहतास इंडस्ट्रीज लिमिटेड डालमियानगर की ही अनुषंगी उपक्रम थी।

डालमियानगर स्थित रोहतास इंडस्ट्रीज लिमिटेड में 1984 में तालाबंदी कर दी गई थी, जिससे इस उद्योगसमूह और इसके अनुषंगी उपक्रमों के 20 हजार से अधिक स्थायी, अस्थायी कर्मचारी और आपूर्तिकर्ताओं के परिवार बेरोजगार-कर्जदार हो गए थे। रोहतास उद्योग समूह की बंदी का प्रभाव इस पर परोक्ष-अपरोक्ष रूप से आश्रितसमूचे डालमियानगर (औद्योगिक उपनगर), डेहरी-आन-सोन के बाजार-कारोबार के साथ रोहतास, औरंगाबाद, पलामू और अन्य जिलों के 30 हजार से अधिक परिवारों परविश्वयुद्ध के समय जापान पर गिराए गए परमाणु बमों की तरह हुआ, जिनकी तीन पीढिय़ां आर्थिक कंगाली झेलते हुए बर्बाद हुईं।

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स्थायी कर्मचारियों को तो उनकी उम्र 60 साल पूरा होने तक उनके वेतन का एकमुश्त भुगतान बतौर लाभांश (क्षतिपूर्ति) कर दिया गया, मगर अस्थायी कर्मचारियों, आपूर्तिकर्ताओं को उनके दावों के बावजूद कोई भुगतान नहीं हुआ है। कोर्ट के समक्ष इनके भुगतान का मामला आफिशियल लिक्विडेटर की ओर से नहीं रखा गया है और न ही कोर्ट ने इनके मामले में अभी स्वसंज्ञान लिया है। पहले बेचे गए काराखाना परिसर, जमीन आदि से मिले पैसों से करीब 250 करोड़ रुपये के कर्मचारियों के बकाए, वित्तीय और सरकारी संस्थानों के कर्ज के भुगतान किए जा चुके हैं।

रोहतास उद्योग समूह का 219 एकड़ कारखाना परिसर भारतीय रेल (पूर्व-मध्य रेलवे) ने 141 करोड़ रुपये में, 500 एकड़ बांक फार्म 18 करोड़ रुपये में और 80 एकड़ सूअरा अड्डा 17 करोड़ रुपये में बेचे गए थे। इनके अलावा डालमियानगर आवासीय परिसर के 28 बंगले-क्वार्टर और झारखंड में डालटनगंज की जमीन भी बेची गई थी।
कंपनी ज (पटना हाईकोर्ट) के आदेश से पटना स्थिति आफिशियल लिक्विडेटर हिमांशु शंकर की ओर से पटना के समाचारपत्र में नवम्बर में डेहरी-आन-सोन में वार्ड-19 में स्टेशन रोड के दक्षिण (सब्जी मंडी के निकट) की 790.35 डिस्मिल जमीन (आरक्षित कीमत 58.32 करोड़ रुपये), वार्ड-19 में जक्खी बिगहा कैनाल रोड में लाइट रेलवे बंगला नं.-एक परिसर की 83.29 डिस्मिल जमीन (आरक्षित कीमत 6.23 लाख रुपये), वार्ड-19 कैनाल रोड जक्की बिगहा में लाइट रेलवे वर्कशाप वर्कशाप परिसर की 330 डिस्मिल जमीन (आरक्षित कीमत 26.40 करोड़ रुपये), वार्ड-19 में लाइट रेलवे वर्कशाप के उत्तर और पश्चिम की 280.70 डिस्मिल जमीन (आरक्षित कीमत 19.649 करोड़ रुपये), रोहतास प्रखंड में उचैला ग्रामपंचायत रोहतास फोर्ट लाइट रेलवे स्टेशन की 1666.88 एकड जमीन, भवन (आरक्षित कीमत 10.60 करोड़ रुपये) के लिए सेल-नोटिस निकाली गई थी। इन प्लाटों (जमीन) के लिए क्रमश: पांच करोड़ 82 लाख 24 हजार 500 रुपये, 62 लाख 30 हजार 300 रुपये, दो करोड़ 64 लाख रुपये, एक करोड़ 96 लाख 49 हजार रुपये और एक करोड़ छह लाख चार हजार 47 रुपये की जमानत राशि निर्धारित की गई थी।

डालमियानगर स्थित रोहतास इंडस्ट्रीज काम्पलेक्स के कार्यालय प्रभारी एआर वर्मा ने पूछे जाने पर बताया कि डेहरी-डालमियानगर नगर परिषद के वार्ड-19 में स्थितडेहरी-रोहतास लाइट रेलवे की सब्जी मंडी से दक्षिण जक्खी बिगहा रोड तक आठ एकड जमीन 58.5 करोड़ रुपये में डेहरी-आन-सोन के वीरेन्द्र सिंह ने खरीदी है। डेहरी-आन-सोन में जक्खी बिगहा रोड स्थित लाइट रेलवे वर्कशाप की 3.30 एकड़ जमीन 26.40 करोड़ रुपये में और जक्खी बिगहा रोड में लाइट रेलवे बंगला नं. एक की करीब80 डिस्मिल जमीन भी 6.80 करोड़ रुपये में डेहरी-आन-सोन के ललन सिंह ने खरीदी है, जबकि डालमियानगर से 40 किलोमीटर दूर रोहतास प्रखंड अंतर्गत कोडिय़ारी पहाड़ क्षेत्र की रोहतास इंडस्ट्रीज लिमिटेड की 37 एकड़ जमीन सासाराम के उपेन्द्र सिंह ने 2.5 करोड़ रुपये में और रोहतास प्रखंड में ही उचैला स्थित लाइट रेलवे स्टेशन की 5.4 एकड़ जमीन डेहरी-आन-सोन के संजय पासवान ने 3.90 करोड़ रुपये में खरीदी है। क्या पैसे रोहतास उद्योग समूह के खाते में आ गए हैं, यह पूछने पर श्री वर्मा ने जानकारी दी कि इसके लिए खरीदारों को दो महीने (चार फरवरी तक) का समय दिया गया है।

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एआर वर्मा के अनुसार, रोहतास उद्योग समूह के 1995 में समापन (लिक्विडेशन) में डाल दिए जाने के समय तक बिजली विभाग ने करीब 60 करोड़ रुपये और बिक्री कर विभाग ने 12 करोड़ रुपये का दावा कर रखा था, जिसके निष्पादन का मामला हाई कोर्ट (कंपनी जज) के न्यायालय में विचाराधीन है। इधर, 1984 में रोहतास उद्योगसमूह प्रबंधन द्वारा तालाबंदी की जाने और फिर 1995 में हाईकोर्ट द्वारा लिक्विडेशन (समापन) में डाले जाने तक कर्मचारियों के करीब दो सौ नए दावे आए हैं, जिनके लाभांश (क्षतिपूर्ति) भुगतान के मामले को कोर्ट के समक्ष रखे जाने की प्रक्रिया जारी है।
रिपोर्ट : कृष्ण किसलयतस्वीर : निशान्त राज

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