अरुण कमल गहरे अर्थ में प्रतिबद्ध कवि, बेहतर जीवन की आकुलता
कृपाशंकर चौबे
अरुण कमल गहरे अर्थ में प्रतिबद्ध कवि हैं और उनकी प्रतिबद्धता की जड़ें ठेठ भारतीय आबोहवा और जमीन में हैं। जो सामने...
जाति-व्यवस्था की भारत से समाप्ति असंभव है, इसकी वजह जानिए
जाति-व्यवस्था की भारत से समाप्ति असंभव है, क्योंकि हमारा धर्म राम, कृष्ण और अन्य असंख्य देवताओं पर टिका हुआ है। जाति रहेगी और इस पर चर्चा...
महाराणा प्रताप ने घास की रोटी खाई, पर अकबर की अधीनता कबूल नहीं की….पुण्यतिथि...
मध्यकाल के इतिहास लेखन के बारे में नेहरू युग के कम्युनिस्ट इतिहासकारों ने नये इतिहास लेखकों को यह निदेश दिया था कि महाराणा प्रताप...
तेरह वर्ष की उम्र में हुआ था गांधी जी और कस्तूरबा का विवाह
राज्यवर्द्धन
तेरह वर्ष की आयु में गांधी जी का ब्याह कस्तूरबा से हुआ था। गांधी जी लिखते हैं-"हम भाइयों को तो सिर्फ तैयारियों से...
अनय यानी प्रो. कृष्ण चन्द्र पाण्डेय को जानिए, कौन थे
अनय यानी प्रो. कृष्ण चन्द्र पाण्डेय। हिन्दी के एक प्रतिष्ठित व्यंग्य-लेखक, साहित्यकार और पत्रकार, जो पाठकों के बीच अनय नाम से परिचित थे। ‘तीसरा विभाजन’...
गांधीजी ने जब बकरे की बलि रोकने पर लोगों को विवश कर दिया
निराला
गांधीजी ने बकरे की बलि रोकने पर लोगों को विवश कर धर्म की शिक्षा दी थी। चंपारण सत्याग्रह के दिनों की बात है।...
गांधी जी ने पत्रकार के रूप में भी कुछ अलग प्रयोग किये
शेष नारायण सिंह
गांधी जी को पत्रकार के रूप में तो पूरी दुनिया जानती है, उस विषय पर बातें भी बहुत हुई हैं। गांधी...
राजेंद्र माथुर मानते थे, लिखना बदलाव की जमीन तैयार करता है
मिथिलेश कुमार सिंह
पिछले कुछ दिनों से प्रभाष जोशी बनाम राजेंद्र माथुर पर बड़ी गंभीर चर्चा में अपने कुछ साथी मसरूफ हैं। किसी को...
परस्पर सहयोग में सिर्फ ‘एकेश्वरवाद’ बाधा नहीं है
हेमंत
हिंदू-इस्लाम, हिंदू-ईसाई, इस्लाम-ईसाई के बीच परस्पर सहयोग में सिर्फ ‘एकेश्वरवाद’ बाधा नहीं है, एकेश्वरवाद के साथ मूर्ति पूजा का प्रॉब्लम जुड़ा है! इसका...
डॉ. भीमराव अम्बेडकर का ‘बहिष्कृत भारत’ और उनकी पत्रकारिता
कृपाशंकर चौबे
डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने 3 अप्रैल 1927 को मराठी पाक्षिक ‘बहिष्कृत भारत’ निकाला। वह पाक्षिक वर्ष 1929 तक यानी दो साल तक...




















