महिलाएं कुम्हड़ा क्यों नहीं काटतीं, क्या आप यह जानते हैं?
कुम्हड़ा आमतौौर पर पुरुष ही काटते हैं। साबूत कुम्हड़ा औरतें नहीं कभी नहीं काटतीं। आइए, जानते हैं ऐसा क्यों होता है।
रामधनी द्विवेदी
इस बार...
भारत की एक लड़की की होती है हर बात सच, जानिये कैसे
भारत की एक लड़की की होती है हर बात सच, जानिये कैसे। वह जो कुछ कहती है, वह अमूमन सच हो जाया करता है।...
बिहार में मैं अपना अगला जन्म लूंगा, कह रहे पत्रकार शंभुनाथ शुक्ल
शंभूनाथ शुक्ल
बिहार में मैं अपना अगला जन्म लूंगा, क्योंकि बिहार के लोग बड़े मोहिल होते हैं। आदमी-औरतें सभी। पिछले वर्ष पटना प्रवास में...
फणीश्वरनाथ रेणु की जीवनी और अशोक वाजपेयी की प्रेरणा
फणीश्वरनाथ रेणु की जीवनी का दायित्व अशोक वाजपेयी ने 2016 में मुझे दिया। मैंने खोज की अनवरत साधना की। लम्बी-लम्बी यात्राएँ कीं। और रेणु की जीवनी...
भोजपुरी की पहली फिल्म- ‘गंगा मैया तोहे पियरी चढ़इबो’
वीर विनोद छाबड़ा
भोजपुरी की पहली फिल्म 'गंगा मैया तोहे पिहरी चढ़इबो' के पीछे जिनका हाथ था, वह थे नजीर हुसैन। भोजपुरी सिनेमा के...
भगवान शिव सबको इतने नीक क्यों लगते हैं?
शिव क्यों नीक लगते हैं? सोचा कभी कि शिव-भक्त क्यों विष्णु-द्रोही होते हैं? सारे असुर, रावण से लेकर! युगों पूर्व शैव तथा वैष्णव झगड़ते...
आपसी स्वार्थ के कारण महागठबंधन में छिड़ी हुई है महाभारत: राजीव रंजन
महागठबंधन में छिड़ी हुई है महाभारत केवल आपसी स्वार्थ के कारण
पटना : महागठबंधन में फैली दरार का कारण घटक दलों के स्वार्थ को बताते...
डॉ. अंबेडकर के पाक्षिक ‘समता’ में सावरकर के विचारों का समर्थन
डॉ. अंबेडकर के संपादन में निकले पाक्षिक ‘समता’ में सावरकर के उस पक्ष को तरजीह दी गयी है, जिसमें उन्होंने रोटी-बेटी के संबंध का...
रामदेव शुक्लः व्याख्यात्मक आलोचना के अंतिम स्तंभ
रामदेव शुक्ल व्याख्यात्मक आलोचना के अंतिम स्तंभ हैं। ‘बिहारी- सतसई का पुनर्पाठ’ उनकी नवीनतम प्रकाशित आलोचना-कृति है। वे अच्छे कथाकार भी हैं। ‘बिहारी- सतसई...
साहिब बीवी और गुलाम जैसी फिलों के गानों ने मशहूर किया गीता को
वीर विनोद छाबड़ा
मेरा सुंदर सपना बीत गया...(दो भाई), तदबीर से बिगड़ी हुई तदबीर बना ले...(बाज़ी), आज सजन मोहे अंग लगा ले...(प्यासा), जाने क्या...




















