इंदिरा गांधीः आपातकाल की प्रणेता

लोकतांत्रिक इतिहास का काला पन्ना है आपातकाल

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नवीन शर्मा लोकतांत्रिक इतिहास का काला पन्ना है आपातकाल। निरंकुश राजतंत्र की तुलना में लोकतंत्र काफी अच्छी व्यवस्था है। यह शासन व्यवस्था को निरंकुश...

बांग्ला में लेखन, पर हिन्दी में सर्वाधिक पढ़े गये शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय

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पुण्यतिथि पर विशेष नवीन शर्मा शरत चंद्र वैसे तो मूल रूप से बांग्ला के उपन्यासकार थे, लेकिन उनकी रचनाओं के अनुवाद हिंदी भाषी लोगों में खासे...
महामारी माने मरीज, मजदूर, मजबूरी, मौत, मदी और महंगाई। महामारी कोरोनावायरस के असर को इन सात शब्दों के जरिये बेहतर ढंग से समझा जा सकता है।

महामारी माने मरीज, मजदूर, मजबूरी, मौत,  मंदी और महंगाई

दीपक कुमार महामारी माने मरीज, मजदूर, मजबूरी, मौत, मदी और महंगाई। महामारी कोरोनावायरस के असर को इन सात शब्दों के जरिये बेहतर ढंग से...
अरुण कमल गहरे अर्थ में प्रतिबद्ध कवि हैं और उनकी प्रतिबद्धता की जड़ें ठेठ भारतीय आबोहवा और जमीन में हैं। जो सामने है, वही उनकी कविता का विषय है।

अरुण कमल गहरे अर्थ में प्रतिबद्ध कवि, बेहतर जीवन की आकुलता 

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कृपाशंकर चौबे अरुण कमल गहरे अर्थ में प्रतिबद्ध कवि हैं और उनकी प्रतिबद्धता की जड़ें ठेठ भारतीय आबोहवा और जमीन में हैं। जो सामने...
सईदा खान

सईदा खान की ट्रेजिडी भरी दास्तां  सुन रूह कांप जाती है

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वीर विनोद छाबड़ा  सईदा खान की ट्रेजिडी भरी दास्तां सुन कर रूह कांप जाती है। साठ के सालों में एक्ट्रेस होती थीं, सईदा ख़ान।...
हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित जीवन रहा है अनंतराम त्रिपाठी का। आज प्रातः साढ़े चार बजे निधन हो गया।

अनंतराम त्रिपाठी का निधन, हिंदी के प्रचार के लिए समर्पित रहे

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कृपाशंकर चौबे अनंतराम त्रिपाठी का निधन हो गया। हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित जीवन रहा है अनंतराम त्रिपाठी का। आज प्रातः साढ़े चार...
फणीश्वरनाथ रेणु मानवीयता को स्थापित करने के लिए संघर्ष करने वाले लेखक हैं। वे भारतीयता का एक चेहरा हैं। एक अकेली आवाज हैं।

फणीश्वरनाथ रेणु के व्यक्तित्व में विनम्रता स्वाभाविक छंद था

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भारत यायावर  फणीश्वरनाथ रेणु के व्यक्तित्व में विनम्रता और सहजता स्वाभाविक छंद था। उन्हें आक्रोश और गुस्से में देखना दुर्लभ संयोग था। वे मुश्किलों...
कुम्हड़ा आमतौौर पर पुरुष ही काटते हैं। साबूत कुम्हड़ा औरतें नहीं कभी नहीं काटतीं। आइए, जानते हैं ऐसा क्यों होता है।

महिलाएं कुम्हड़ा क्‍यों नहीं काटतीं, क्या आप यह जानते हैं? 

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कुम्हड़ा आमतौौर पर पुरुष ही काटते हैं। साबूत कुम्हड़ा औरतें नहीं कभी नहीं काटतीं। आइए, जानते हैं ऐसा क्यों होता है। रामधनी द्विवेदी  इस बार...
लाक डाउन में ‘वर्क एट होम’ का नया ‘वायरस’ भविष्य में सस्टेनेबल ग्लोबल कल्चर के नाम से चर्चित होने वाला है। यूं तो कई मित्रों के लिए ‘घर’ आज भी ‘डेरा’ ही होगा। तो आइए महंगाई की मापी की जाये

लाक डाउन में ‘वर्क एट होम’ भविष्य का सस्टेनेबल ग्लोबल कल्चर

हेमंत लाक डाउन में ‘वर्क एट होम’ का नया ‘वायरस’ भविष्य में सस्टेनेबल ग्लोबल कल्चर के नाम से चर्चित होने वाला है। यूं तो...
वर्ष 1974 की तारीख 5 जून. यही वह दिन था, जब जयप्रकाश नारायण (जेपी) ने पटना के गांधी मैदान में दो शब्दों- संपूर्ण क्रांति का नारा दिया था.

जयप्रकाश जी ने कहा था- आग तो तुम्हारी कुर्सियों के नीचे सुलग रही है

जयप्रकाश जी ने कहा था- आग तो तुम्हारी कुर्सियों के नीचे सुलग रही है। वह तारीख थी 5 जून, 1974। उसी दिन उन्होंने संपूर्ण...