दू आंख से सरकार ना चलेले ए सुशासन बाबू!

0
पावं लागी मलिकार। रउरा त मने मन रिसियाइल-खिसियाइल होखेब कि केतना दिन से हम रउरा के पाती ना पठवनी। सांच के आंच कइसन। रउरा...

मलिकाइन के पातीः जइसन करनी, ओइसन भरनी

पांव लागीं, मलिकार! विसवास बा कि रउरा नीक-निरोग होखेब। काली माई के रोजे सांझ-सबेरे गोहराइले रउरा खातिर। ए मलिकार, रउरा से एगो बात जाने...

मलिकाइन के पाती- घर के लात नीमन, बाहर के सतावल बाउर

0
पावं लागीं मलिकार। एने तनी अझुरा गइनी हां मलिकार, लड़िकन के बर-बेमारी में, एही से टाइम पर पाती ना लिखवा पवनी। अब नन्हका ठीक...
चीन ने सोवियत संघ की सहमति के बाद ही 1962 में भारत पर हमला किया था। अगर जवाहरलाल नेहरू लंबी जिंदगी जीते तो भारत की विदेश नीति ही बदल जाती।

चीन से युद्ध के बाद नेहरू लंबी जिंदगी जीते तो विदेश नीति बदल जाती

सुरेंद्र किशोर चीन ने सोवियत संघ की सहमति के बाद ही 1962 में भारत पर हमला किया था। अगर जवाहरलाल नेहरू लंबी जिंदगी जीते...

25 जून 1975 की आधी रात हुई थी आपातकाल की घोषणा

0
लगभग 43 साल पहले देश में 25 जून 1975 की आधी रात को आपातकाल की घोषणा की गई थी। । जो 21 मार्च 1977...
आपातकाल-पीड़ित लोगबाग हर साल इमरजेंसी की वर्षगांठ मनाते हैं। मनाना जरूरी भी है। क्योंकि 25 जून  1975 को इमरजेंसी लगाकर पूरे देश को एक बड़े जेलखाना में बदल दिया गया था। 23 मार्च 1977 को ही इसे समाप्त किया जा सका था, जब लोकसभा के आम चुनाव के बाद मोरारजी देसाई की सरकार बनी।

इमरजेंसी में बड़े नेताओं, साहित्यकारों, पत्रकारों को यातनाएं भी दी गयीं

0
इमरजेंसी के दौरान बड़े नेताओं, साहित्यकारों, पत्रकारों को जेलों में ठूंस दिया गया। उन्हें कई तरह की शारीरिक और मानसिक यातनाएं दी गयीं। यह...

जन्मदिन पर विशेषः संभावनाओं से भरपूर अभिनेत्री कोंकणा सेन शर्मा

0
नवीन शर्मा कोंकणा सेन शर्मा नैन नक्श से भले ही साधारण दिखती हों पर वे असाधारण क्षमताओं से भरपूर अभिनेत्री हैं। उन्हें दो...

कहां गइल मोर गांव रे, बता रहे वरिष्ठ पत्रकार शेषनारायण सिंह

0
 शेष नारायण सिंह  1975 में जब मैंने संत तुलसीदास डिग्री  कालेज, कादीपुर (सुल्तानपुर) की प्राध्यापक की नौकरी छोडी थी तो एक महत्वपूर्ण फैक्टर यह...
Corporate की मदद के बिना राजनीति असंभव है

धीरू भाई अंबानी और चंद्रशेखर जब कलकत्ता में एक होटल में गुपचुप मिले, जानिए...

0
सच बात यही है कि कोई दल/ नेता कितना भी कॉर्पोरेट के खिलाफ बोल ले, कम्युनिस्ट पार्टियों को छोड़कर हर दल को उद्योगपतियों से...
ओमप्रकाश अश्क

जब प्रभात खबर के संपादकीय में कंप्यूटर सीखना अनिवार्य किया

0
वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश अश्क की, संस्मरणों पर आधारित प्रस्तावित पुस्तक- मुन्ना मास्टर बने एडिटर- की धारावाहिक कड़ी लगातार आप पढ़ रहे हैं। इस पर...