अरुण कमल गहरे अर्थ में प्रतिबद्ध कवि, बेहतर जीवन की आकुलता
कृपाशंकर चौबे
अरुण कमल गहरे अर्थ में प्रतिबद्ध कवि हैं और उनकी प्रतिबद्धता की जड़ें ठेठ भारतीय आबोहवा और जमीन में हैं। जो सामने...
पितृपक्ष में कुश की तलाश और इसी बहाने जानें उसका महत्व
कल से पितृ पक्ष है। पितरों का तर्पण कल से शुरू होगा। पितृपक्ष में कुश की जरूरत पड़ती है। शहरों में संकट है। जल्दी...
बांग्ला में लेखन, पर हिन्दी में सर्वाधिक पढ़े गये शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय
पुण्यतिथि पर विशेष
नवीन शर्मा
शरत चंद्र वैसे तो मूल रूप से बांग्ला के उपन्यासकार थे, लेकिन उनकी रचनाओं के अनुवाद हिंदी भाषी लोगों में खासे...
गणेश शंकर विद्यार्थी ने लिखा था- शंख और नमाज ही धर्म नहीं है
गणेश शंकर विद्यार्थी ने कबीरी ढंग से लिखा था, "अजां देने, शंख बजाने, नाक दबाने और नमाज पढ़ने का नाम धर्म नहीं है। शुद्धाचरण...
परस्पर सहयोग में सिर्फ ‘एकेश्वरवाद’ बाधा नहीं है
हेमंत
हिंदू-इस्लाम, हिंदू-ईसाई, इस्लाम-ईसाई के बीच परस्पर सहयोग में सिर्फ ‘एकेश्वरवाद’ बाधा नहीं है, एकेश्वरवाद के साथ मूर्ति पूजा का प्रॉब्लम जुड़ा है! इसका...
घुसपैठ पर ममता बनर्जी 2005 का स्टैंड 2021 में भूल गयी हैं
सुरेंद्र किशोर
घुसपैठ पर ममता बनर्जी का 2005 में जो स्टैंड था, वह ममता 2021 में भूल गयी हैं। किंतु संकेत हैं कि मतदाता...
सईदा खान की ट्रेजिडी भरी दास्तां सुन रूह कांप जाती है
वीर विनोद छाबड़ा
सईदा खान की ट्रेजिडी भरी दास्तां सुन कर रूह कांप जाती है। साठ के सालों में एक्ट्रेस होती थीं, सईदा ख़ान।...
हरिवंश की जीत को राजग की 2019 में कामयाबी का ट्रेलर समझें
दीपक कुमार
विपक्षी दलों के नेता जब एक जगह जमा होकर अपनी एकजुटता की बात करते हैं तो उन्हें भले आनंद आता हो, पर...
राजेंद्र माथुरः हिन्दी पत्रकारिता को नई धार देनेवाले व्यक्ति
प्रवीण बागी
राजेंद्र माथुर, हिन्दी पत्रकारिता को नई धार देनेवाले व्यक्ति की आज जयंती है। वे पत्रकारिता के मेरे गुरु रहे हैं। उनकी छत्रछाया...
अनुसंधानपरक आलोचना-दृष्टि का मार्क्सवादी चेहरा : वीर भारत तलवार
अमरनाथ
वीरभारत तलवार ( 20.9.1947 ) हिन्दी के गंभीर अध्येता, शोधार्थी और आलोचक हैं. वे चुपचाप अपना काम करने में विश्वास करते हैं. प्रचार...




















