मेजर ध्यानचंदः बचपन में खेल में अरुचि, बड़े होने पर हॉकी के जादूगर

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नवीन शर्मा मेजर ध्यानचंद सिंह का फील्ड हॉकी में वही स्थान है, जो फुटबाल में पेले, क्रिकेट में डॉन ब्रेडमैम व बाक्सिंग में मोहम्मद...
भारत यायावर

कसम से तीसरी कसम तक के मायने समझने के लिए इसे पढ़ें

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भारत यायावर कसम क्या है? एक प्रण,एक संकल्प, एक प्रतिज्ञा, एक वचन, एक आत्मसंयम की उद्घोषणा! कुछ लोग बात-बात पर कसम खाते हैं। कुछ...

अच्छे शिक्षकः बैकुण्ठ बाबू के कारण एकमा स्कूल का बड़ा नाम था

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सुरेंद्र किशोर सन् 1963 में बिहार के सारण जिले के एकमा स्थित अलख नारायण सिंह उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य बैकुण्ठ नाथ सिंह को ...
लॉक डाउन- 4 को जारी रखने का फैसला केंद्र सरकार ने किया है। राज्य अपने हिसाब से रेड, आरेंज व ग्रीन जोन का निर्धारण कर सकेंगे।

महंगाई की मापी के लिए लॉक डाउन बेहतर मौका है

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हेमंत, वरिष्ठ पत्रकार महंगाई की मापी के लिए लॉक डाउन बेहतर मौका है। आप घर बैठे चिंता-मग्न रहने का रिस्क उठाने योग्य सुरक्षा से लैस...
अभिनेत्री रेखा

बॉलीवुड की सदाबहार एक्ट्रेस रेखा 65 साल की हुईं

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बॉलीवुड की सदाबहार एक्ट्रेस रेखा आज अपना 65वां जन्मदिन मना रही हैं। अमिताभ बच्चन के साथ रिश्तों को लेकर चर्चित रेखा की उम्र का...

बुद्धिजीवियों के दिलों में अब भी बसते हैं कार्ल मार्क्स

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विगत 16 से 20 जून तक ,पटना में , कार्ल मार्क्स (5 . 5 . 1818 - 14 .3 . 1883 ) के दो...
लाक डाउन में ‘वर्क एट होम’ का नया ‘वायरस’ भविष्य में सस्टेनेबल ग्लोबल कल्चर के नाम से चर्चित होने वाला है। यूं तो कई मित्रों के लिए ‘घर’ आज भी ‘डेरा’ ही होगा। तो आइए महंगाई की मापी की जाये

लाक डाउन में ‘वर्क एट होम’ भविष्य का सस्टेनेबल ग्लोबल कल्चर

हेमंत लाक डाउन में ‘वर्क एट होम’ का नया ‘वायरस’ भविष्य में सस्टेनेबल ग्लोबल कल्चर के नाम से चर्चित होने वाला है। यूं तो...

मलिकाइन के पातीः बाप रे, बिहार में बाग के बाग कुलबांसी

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मलिकाइन के पाती अबकी घसिटउआ मोबाइल पर लिखा के आइल बा। ऊ अपने त ना लिख पवली, बाकिर गांव के कवनो कनिया से लिखवा...
अरुण कमल गहरे अर्थ में प्रतिबद्ध कवि हैं और उनकी प्रतिबद्धता की जड़ें ठेठ भारतीय आबोहवा और जमीन में हैं। जो सामने है, वही उनकी कविता का विषय है।

अरुण कमल गहरे अर्थ में प्रतिबद्ध कवि, बेहतर जीवन की आकुलता 

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कृपाशंकर चौबे अरुण कमल गहरे अर्थ में प्रतिबद्ध कवि हैं और उनकी प्रतिबद्धता की जड़ें ठेठ भारतीय आबोहवा और जमीन में हैं। जो सामने...
कृपाशंकर चौबे डॉ. अम्बेडकर ने चार फरवरी 1956 को साप्ताहिक ‘प्रबुद्ध भारत’ निकाला। हर अंक में पत्रिका के शीर्ष की दूसरी पंक्ति में लिखा होता था- डा. अम्बेडकर द्वारा प्रस्थापित।

डॉ. अम्बेडकर ने ‘प्रबुद्ध भारत’ निकाला और समाज में एकता पर दिया जोर

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कृपाशंकर चौबे डॉ. अम्बेडकर ने चार फरवरी 1956 को साप्ताहिक ‘प्रबुद्ध भारत’ निकाला। हर अंक में पत्रिका के शीर्ष की दूसरी पंक्ति में लिखा...