दू आंख से सरकार ना चलेले ए सुशासन बाबू!

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पावं लागी मलिकार। रउरा त मने मन रिसियाइल-खिसियाइल होखेब कि केतना दिन से हम रउरा के पाती ना पठवनी। सांच के आंच कइसन। रउरा...
मंगला अनुजा पत्रकारिता की अप्रतिम अध्येता हैं। साहित्य का संस्कार मंगला अनुजा को विरासत में मिला। उनके पिता श्री कृष्णहरि पचौरी साहित्यकार थे।

मंगला अनुजा पत्रकारिता की अप्रतिम अध्येता, इनके बारे में जानिए

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मंगला अनुजा पत्रकारिता की अप्रतिम अध्येता हैं। साहित्य का संस्कार मंगला अनुजा को विरासत में मिला। उनके पिता श्री कृष्णहरि पचौरी साहित्यकार थे। मंगला अनुजा के...

10 महीनों में 1.2 करोड़ नौकरियां हुईं सृजित, सदमे में विपक्ष: राजीव

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पटना। पिछले 10 महीनों में देश में 1.2 करोड़ नौकरियों के सृजन का दावा करते हुए प्रदेश भाजपा प्रवक्ता सह पूर्व विधायक राजीव रंजन...

8 दिसंबर जन्मदिन पर विशेषः चने चबा कर अभिनेता बने धर्मेंद्र

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नवीन शर्मा हिंदी सिनेमा में  एंग्रीयंगमैन अमिताभ बच्चन का विक्की भले ही ज्यादा दिनों तक चला हो, पर कई वर्षों तक हीमैन धर्मेन्द्र का भी...

25 जून 1975 की आधी रात हुई थी आपातकाल की घोषणा

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लगभग 43 साल पहले देश में 25 जून 1975 की आधी रात को आपातकाल की घोषणा की गई थी। । जो 21 मार्च 1977...
महात्मा गांधी

महात्मा गांधी के जितने प्रशंसक हैं, उससे कम आलोचक भी नहीं

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महात्मा गांधी के जितने प्रशंसक हैं, उससे कम आलोचक भी नहीं। कल तक बड़ी तादाद वैसे लोगों की थी, जो महात्मा गांधी के हत्यारे...
फिल्म अभिनेत्री माला सिन्हा

कभी परदे पर धूम मचाने वाली अभिनेत्रियों में शुमार थीं माला सिन्हा

वीर विनोद छाबड़ा  कभी परदे पर धूम मचाने वाली अभिनेत्रियों में माला सिन्हा का नाम बड़े चाव से लिया जाता था। उन्होंने खुद को...
लेखक गुंजन ज्ञानेंद्र सिन्हा लंबे समय तक एसआर रामनुजन के साथ काम कर चुके हैं

ईनाडू मीडिया के डायरेक्टर रहे एसआर रामानुजन के बारे में जानिए

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ईनाडू मीडिया समूह के डायरेक्टर रहे एसआर रामानुजन के की कार्यशैली के बारे में उनके साथ काम कर चुके गुंजन ज्ञानेंद्र सिन्हा ने फेसबुक...

धर्मा प्रोडक्शन के संस्थापक थे करण जौहर के पिता यश जौहर

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नवीन शर्मा धर्मा प्रोडक्शन के संस्थापक थे करण जौहर के पिता यश जौहर। करण जौहर के धर्मा प्रोडक्शन हाउस ने एक से बढ़ कर...
महामारी माने मरीज, मजदूर, मजबूरी, मौत, मदी और महंगाई। महामारी कोरोनावायरस के असर को इन सात शब्दों के जरिये बेहतर ढंग से समझा जा सकता है।

महामारी माने मरीज, मजदूर, मजबूरी, मौत,  मंदी और महंगाई

दीपक कुमार महामारी माने मरीज, मजदूर, मजबूरी, मौत, मदी और महंगाई। महामारी कोरोनावायरस के असर को इन सात शब्दों के जरिये बेहतर ढंग से...