जन्मदिन पर विशेषः फिल्म निर्देशन का महारथी राजकुमार हिरानी

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  • नवीन शर्मा

राजकुमार हिरानी हिंदी सिनेमा के उन सफलतम निर्देशकों में शुमार हैं,  जिनकी सारी फिल्में सुपरहिट रही हैं। उनकी फिल्में मुन्ना भाई एमबीबीएस, लगे रहो मुन्ना भाई, थ्री इडियट्स, पीके और इस साल.आई संजू ने बाक्स आफिस पर कई कीर्तिमान बनाए हैं। उनकी कमाई का ग्राफ किसी भी निर्देशक के ईर्ष्या का कारण हो सकता है। लेकिन उनकी इस सफलता के पीछे असफलता और संघर्ष की लंबी दास्तान छिपी है।

सिंध से नागपुर आए थे पिता

हिरानी परिवार देश के विभाजन के समय भारत आया, उस समय इनके पिता सुरेश हिरानी की आयु मात्र 14 वर्ष थी। नागपुर में उनके पिता ने टाइपिंग इंस्टीट्यूट शुरू किया था। राजकुमार हिरानी की शिक्षा सेंट फ्रांसिस देसलेस हाई स्कूल, नागपुर, महाराष्ट्र से आरम्भ हुई। राजकुमार को कभी अच्छे अंक नहीं प्राप्त होते थे। अतः उन्हें इंजीनियरिंग या मेडिकल में दाखिला नहीं मिला। इसलिए  उन्होंने स्नातक की शिक्षा वाणिज्य में पूर्ण की।

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हीरो बनना चाहते थे

राजकुमार हिरानी भी बंबई जाने हर युवा की  तरह हिन्दी फ़िल्मों में अभिनेता बनना चाहते थे। थियेटर की तरफ उनका रुझान हुआ। एक अभिनेता बनने के लिए अपने बेटे के उत्साह को देखने के बाद, उनके माता-पिता ने राजकुमार के सपने को पूरा करने के लिए हर तरह का संभव प्रयास किया। परिणामस्वरूप, उन्होंने हिरानी को मुंबई के एक प्रतिष्ठित अभिनय स्कूल में भेज दिया। हालांकि, वह स्कूल के माहौल में पूरी तरह से ढल नहीं पाए और कुछ दिनों बाद वापस अपने घर आ गए।

फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट में दाखिला

हिरानी ने फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, पुणे में निर्देशक पाठ्यक्रम के लिए आवेदन किया। हालांकि उनके चयन की संभावना काफी कम थी, क्योंकि निर्देशक पाठ्यक्रम में बहुत से छात्रों ने आवदेन किया था। उन्होंने एक समझौता करते हुए संपादन के पाठ्यक्रम में दाखिला लिया। अंत में हिरानी ने छात्रवृत्ति अर्जित की, जिसकी वजह से उनके पिता के ऊपर उनकी पढ़ाई को ले कर वित्तीय बोझ कम हो गया।

स्नातक होने के बाद, हिरानी ने फिल्म संपादक बनने के लिए कई सालों तक मुंबई में संघर्ष किया। हालांकि उन्हें कोई सफलता नहीं मिली, फिर वह विज्ञापन के क्षेत्र में स्थानांतरित हो गए, जहां उन्होंने धीरे-धीरे खुद को व्यावसायिक विज्ञापनों के निर्देशक के रूप में स्थापित किया। हिरानी ने खुद भी कई विज्ञापनों में भी अभिनय किया।

विधु विनोद चोपड़ा से सीखीं निर्देशन की बारीकियां

1994 में ‘विधु विनोद चोपड़ा की 1942 ए लव स्टोरी’, और 1998 में ‘करीब’ के प्रोमो के लिए काम किया। इसके बाद  2000 में ‘मिशन कश्मीर’ और 2001 में ‘तेरे लिए’ के लिए एडिटिंग की।

मुन्ना भाई एमबीबीएस से शानदार आगाज

उनका असली सफर 2003 में शुरु हुआ। इस उनके निर्देशन में बनीं पहली फिल्म ‘मुन्नाभाई एमबीबीएस’ आई। संजय दत्त और अरशद वारसी की मुख्य भूमिकाओं वाली इस फिल्म ने कामयाबी के झंडे गाड़ दिए। राजकुमार हिरानी पहली ही फिल्म से छा गए। उनकी इस फिल्म को कई अवार्ड मिले।

लगे रहो मुन्ना भाई

तीन साल बाद 2006 में राजकुमार हिरानी ‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’ का अगला भाग ‘लगे रहो मुन्नाभाई’ लेकर आए। एक बार फिर संजय दत्त और अरशद वारसी की जोड़ी आई और राजकुमार हिरानी ने फिर से जबरदस्त कामयाबी हासिल की। ये फिल्म ‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’ से भी बहुत ज्यादा हिट हुई।

थ्री इडियट्स लाजवाब

इसके बाद राजकुमार हिरानी तीन साल बाद लौटे और साल 2009 में फिल्म ‘थ्री इडियट्स’ लेकर आए। यह फिल्म इंजीनियरिंग कॉलेज के तीन दोस्तों की कहानी थी। लेखक चेतन भगत का कहना था कि यह फिल्म उनके उपन्यास फाइव प्वाइंट सम वन पर आधारित है। यह दावा काफी हद तक सही था। आमिर खान अभिनीत इस फिल्म को हिन्दी सिनेमा की सबसे शानदार फिल्मों में से एक माना जाता है। फिल्म ने कमाई के रिकॉर्ड तोड़े और समीक्षकों ने भी खूब सराहा।

पीके ने मचाया धमाल

थ्री इडियट्स’ के बाद राजकुमार हिरानी ने अपने चाहने वालों को लंबा इंतजार कराया। वो पांच साल के बाद 2014 में ‘पीके’ लेकर आए। यह फिल्म अपनी नई कहानी और नए ट्रीटमेंट की वजह से लोगों को पसंद आई। इस फिल्म में सभी धर्मों के आडंबरों का माखौल उड़ाया गया है। फिल्म ने कमाई के मामले में नए कीर्तिमान स्थापित किए। फिल्म को खूब सराहा गया।

संजू भी ब्लाकबस्टर

इसी साल राजकुमार हिरानी अपनी ही फिल्म के हीरो यानी संजय दत्त की बायोपिक संजू लेकर आए। हालांकि संजय दत्त की इस बायोपिक से राजकुमार हिरानी को थोड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा, लेकिन इस फिल्म ने भी कमाई के कई रिकॉर्ड तोड़े। राजकुमार हिरानी की कामयाबी की गवाही उनके इनाम भी दे रहे हैं। राजकुमार हिरानी 11 फिल्मफेयर अवार्ड जीत चुके हैं।

फिल्मों से कमाई

हिरानी द्वारा निर्देशित पहली फिल्म ‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’ (2003) दुनिया भर में एक सफल फिल्म बन गई। करीब 1 करोड़ रुपये के बजट वाली फिल्म ने घरेलू बाजार से 2.5 करोड़ रुपए संचित किये। उन्होंने अपनी तीन फिल्मों; लगे रहो मुन्ना भाई (2006), थ्री इडीयट्स (2009) और पीके (2014) की सफलता के बाद भी एक निर्देशक के रूप में अपना कार्य जारी रखा। जबकि थ्री इडीयट्स ने उस समय सभी मौजूदा घरेलू और विदेशी संग्रह रिकॉर्ड को तोड़ दिए थे, पीके उसे भी ज्यादा कमाई वाली फिल्म बन गई, जिसने बॉक्स ऑफिस पर 500 करोड़ रुपये से अधिक कमाई की।

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