सुधांशु शेखर की कविता- कब निकलेगा समाधान प्रिये !

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सुधांशु शेखर इस लॉक डाउन के चंगुल से कब निकलेगा समाधान प्रिये ! तुम लॉक डाउन की बढ़ती डेट मैं वस्तु का घटता दाम प्रिये ! तुम ग्रीन...

एमलिन बोदरा की सादरी भाषा में लिखी कविताएं……

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उत्तर बंगाल के चाय बागानों में नयी रचनात्मक पौध खड़ी हो रही है। इसमें एमलिन बोदरा एक खास नाम है। एमलिन कविताएं लिखती हैं।...

रवि यज्ञसेनी की 2 कविताएं- पापा अब परदेश न जाना/ अब ना जाओ दूर...

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रवि यज्ञसेनी पापा अब परदेश ना जाना हम रूखा-सूखा खा लेंगे। दूर हुए अपने गाँवो से, दूर खेत-खलिहानों से, दूर तीज-त्योहार हुए, और बासंती मेलों से। पापा मेरी फिक्र ना...