कुमार जगदलवी की कविता- लड़ो या मरो………

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कुमार जगदलवी सामने खतरा था मैं उससे लड़ सकता था मगर ज़ेहन ने कहा काहे को लड़ना लड़ने पर जोखिम है बेहतर है कि मैं रास्ता बदल लूं मैंने रास्ता बदल...

प्रफुल्ला मिंज की कविताएं…..

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आज जिस कवि को हम आपके समक्ष लेकर आए हैं, उसकी कविताओं का रंग चाय के रंग में घुला हुआ है। उत्तर बंगाल के...

उदीयमान कवि दीपक कुमार की दो कविताएं

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दीप प्रकाश की कविताएं 1. सूर्य! जिसकी आंखों के सामने आकार लिया धरती ने। जिसकी किरणों से जीवन का संचार हुआ। वो सूर्य! आज भी वैसे ही रोज उगता और ढलता है, जैसा पहले...