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लोक का सांस्कृतिक पक्ष हमेशा से संवादधर्मी रहा है। भारतीय समाज के परिप्रेक्ष्य में देखें तो तीन संस्कृतियाँ मूलतः देखने को मिलती हैं।
लोक संवाद करता है। उसके अपने तरीक़े हैं। आप किताबी ज्ञान के ज़रिए उससे संवाद स्थापित नहीं कर सकते। उससे संवाद करने के लिए उसके बीच जाना होगा। उसके लहजे में ही उससे संवाद संभव है। उत्सवों को बचाइए! लोक से संवाद का यह सबसे उत्तम माध्यम है। दीपक कुमार लोक का सांस्कृतिक पक्ष हमेशा से संवादधर्मी रहा है। भारतीय...
कंगना रनौत पर चारों तरफ से हमले जारी हैं। उन्हें कोई पागल कह रहा है। कोई सांप्रदायिक कह रहा है। कोई देशद्रोही कह रहा है। उन्हें कोई बेवकूफ कह रहा है, कोई जेलों में डालने के लिए कह रहा है।
कंगना रनौत पर चारों तरफ से हमले जारी हैं। उन्हें कोई पागल कह रहा है। कोई सांप्रदायिक कह रहा है। कोई देशद्रोही कह रहा है। उन्हें कोई बेवकूफ कह रहा है, कोई जेलों में डालने के लिए कह रहा है। उनसे कोई पदमश्री का पुरस्कार वापस लेने की मांग कर रहा है। ‘ये आजादी झूठी है‘ की थाप पर...
छठ पर्व एकमात्र ऐसा पर्व है जो स्त्रियों का है। इसमें पुरोहित ब्राह्मणों, पितृसत्ता तथा जाति भेदभाव का कोई स्थान नहीं है।
शंभुनाथ छठ पर्व एकमात्र ऐसा पर्व है जो स्त्रियों का है। इसमें पुरोहित ब्राह्मणों, पितृसत्ता तथा जाति भेदभाव का कोई स्थान नहीं है। यह ऐसी पूजा है जो खुद की जाती है। इसमें ब्राह्मण पुजारी नहीं होता। छठ के दिन नदियों, झीलों, सरोवरों के किनारे जैसे मेला लग जाता है। हर तरफ स्त्रियां ही स्त्रियां और उनके केंद्र में...
YUVA हजारीबाग में बिरहोर समुदाय के लोगों को जागरुकत करने के साथ-साथ कर रहा टीकाकरण
हज़ारीबाग हज़ारीबाग ज़िले के बिरहोर जनजातीय समुदाय के लोगों को कोविड-19 टीकाकरण के लिए जागरूक किया गया। गिव इंडिया के सहयोग से YUVA (युवा, Youths Union for Voluntary Action) इस कार्य में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस दौरान बिरहोर जनजातीय समुदाय के लोगों को वाहन एवं राहत सामग्री प्रदान कर उप-स्वस्थ्य केंद्र खीरगाओं हज़ारीबाग ले जाया गया। इस अभियान के तहत...
पद्मश्री डॉ. कृष्णबिहारी मिश्र का प्राण अपने गांव में बसता है। इससे कुछ बचता है तो वह बनारस में  बसता है। बनारस में वे अपने बनारस का पता ढूंढते हैं और गांव में अपने गांव का पता।
कृष्णबिहारी मिश्र का प्राण अपने गांव में बसता है। इससे कुछ बचता है तो वह बनारस में  बसता है। बनारस में वे अपने बनारस का पता ढूंढते हैं और गांव में अपने गांव का पता। न उन्हें बनारस मिलता है न ही गांव।  मृत्युंजय लेखक तीन तरह के होते हैं। एक वे जो लिखते हैं, मगर लेखक नहीं होते। दूसरे...
गांधी के बारे में सभी बात करते हैं। उनके गुणों का बखान करते हैं। पर, गांधी के निर्माण में उनकी अर्धांगिनी कस्तूर बाई के त्याग, सांाजिक आंदोलनों में सहभागिता भूल जाते हैं।
गांधी के बारे में सभी बात करते हैं। उनके गुणों का बखान करते हैं। पर, गांधी के निर्माण में उनकी अर्धांगिनी कस्तूर बाई के त्याग, सामाजिक आंदोलनों में सहभागिता भूल जाते हैं। वरिष्ठ राजनीतिक चिंतक प्रेमकुमार मणि ने कस्तूर बाई यानी क्सतूरबा या बा के बारे में विस्तार से चर्चा की है। प्रेमकुमार मणि  1983 में मैंने आठ ऑस्कर पुरस्कारों...
महात्मा गांधी को नमन। उनका स्मरण महज 02 अक्तूबर (जन्मदिन) या 30 जनवरी (पुण्यतिथि) तक के लिए ही नहीं है। उनका दर्शन जीवन के पल-पल की जरूरत बन चुका है।
हरिवंश गांधी को नमन। उनका स्मरण महज 02 अक्तूबर (जन्मदिन) या 30 जनवरी (पुण्यतिथि) तक के लिए ही नहीं है। उनका दर्शन जीवन के पल-पल की जरूरत बन चुका है। आज सिर्फ भारत नहीं, बल्कि दुनिया के सामने पर्यावरणीय असंतुलन, प्रकृति के लय की लड़खड़ाहट, मनुष्य के भोग-लालच और अनियंत्रित इंद्रिय भूख, आधुनिक सभ्यता-संस्कृति के सामने उत्पन्न गंभीर चुनौतियां...
विश्वविद्यालय शिक्षक चयन आयोग के गठन की है जरूरत
देश के सभी विश्वविद्यालयों में सभी शिक्षकों के लिए यूजीसी का एक समान वेतनमान लागू है. यूजीसी ने शिक्षकों के चयन के लिए एक समान योग्यता सुनिश्चित कर रखा है जिसका अनुपालन भी सख्ती से किया जाता है. देश भर के सभी विश्वविद्यालयों से मिलने वाली उपाधियाँ भी सभी जगह समान रूप से मान्य होती हैं. किन्तु शिक्षकों की चयन-...
झारखंड में ग्रामीण अर्थव्यवस्था का रथ राज्य की डेढ़ लाख उद्यमी महिलाएं खींच रही हैं। झारखंड के सीएम हेमन्त सोरेन के विजन को इससे बल मिल रहा है।
रांची। झारखंड में ग्रामीण अर्थव्यवस्था का रथ राज्य की डेढ़ लाख उद्यमी महिलाएं खींच रही हैं। झारखंड के सीएम हेमन्त सोरेन के विजन को इससे बल मिल रहा है। झारखंड को विकास के राजपथ पर दौड़ाने के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के विजन को ये महिलाएं अमली जामा पहना रही हैं। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ग्रामीण महिलाओं को आजीविका से...
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार फिर से ‘जनता के दरबार में मुख्यमंत्री’ कार्यक्रम की शुरुआत आज से की। 5.5 घंटे से ज्यादा देर तक सीएम ने फरियाद सुनी।
पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार फिर से ‘जनता के दरबार में मुख्यमंत्री’ कार्यक्रम की शुरुआत आज से की। 5.5 घंटे से ज्यादा देर तक सीएम ने फरियाद सुनी। जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम में राज्य के विभिन्न जिलों से पहुंचे 146 लोगों की समस्याओं को नीतीश कुमार ने सुना और संबंधित विभागों के अधिकारियों को समाधान के...