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पाकिस्तानी सेना के जनरल एके नियाजी जब बांग्लादेश युद्ध में हार के बाद सरेंडर कर रहे थे तो वहां मौजूद भीड़ उन्हें मारने पर उतारू थी. भीड़ से बचाने के लिए भारतीय जवानों ने मानव  प्राचीर बना दी.
पाकिस्तानी सेना के जनरल एके नियाजी जब बांग्लादेश युद्ध में हार के बाद सरेंडर कर रहे थे तो वहां मौजूद भीड़ उन्हें मारने पर उतारू थी. भीड़ से बचाने के लिए भारतीय जवानों ने मानव  प्राचीर बना दी. भारतीय सेना के वरिष्ठ अफ़सरों ने नियाज़ी को एक जीप में बैठा कर एक सुरक्षित जगह पहुंचा दिया. लोकनाथ तिवारी  16 दिसंबर...
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को काशी में कहा कि ‘‘भारत में जब भी औरंगजेब पैदा हुआ, तब इस मिट्टी से शिवाजी का भी उदय हुआ.’’
सुरेंद्र किशोर  प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को काशी में कहा कि ‘‘भारत में जब भी औरंगजेब पैदा हुआ, तब इस मिट्टी से शिवाजी का भी उदय हुआ.’’ नरेंद्र मोदी ने औरंगजेब का नाम क्या लिया कि अनेक लोग तिलमिला उठे ! तिलमिलाए लोगों को लगता है कि कहीं इससे आम लोगों के बीच से भी शिवाजी जैसों का...
जुगनू शारदेय चले गये। अपने जमाने के नामी पत्रकार। स्वाभीमानी और संयत. अंतिम दिनों में उनका अकेलापन, उनके जाने से दुखी नहीं करता।
जुगनू शारदेय चले गये। अपने जमाने के नामी पत्रकार। स्वाभीमानी और संयत. अंतिम दिनों में उनका अकेलापन, उनके जाने से दुखी नहीं करता। इसलिए कि अकेलापन आदमी की सबसे बड़ी पीड़ा है। उनके निधन के बाद सोशल मीडिया पर स्मृति शेष टिप्पणियों की भरमार लगी है। पत्रकार और संप्रति फिल्मी दुनिया से सरोकार रखने वाले अविनाश दास उनके बारे में...
बिहार के कई जिलों में भू-जल में यूरेनियम की अधिक मात्रा पायी गयी है। केंद्रीय भूजल बोर्ड ने वर्ष 2019 के दौरान पहली बार अपने मूल्यांकन में यह पाया।
पटना (पीआईबी)। बिहार के कई जिलों में भू-जल में यूरेनियम की अधिक मात्रा पायी गयी है। केंद्रीय भूजल बोर्ड ने वर्ष 2019 के दौरान पहली बार अपने मूल्यांकन में यह पाया। बोर्ड ने बिहार सहित पूरे देश के लिए भूजल में यूरेनियम के संबंध में जल गुणवत्ता का मूल्यांकन किया। इस मूल्यांकन के अनुसार, बिहार के कुछ जिलों सारण,...
सीडीएस विपिन रावत की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत क्या चीन की साजिश थी ? यह सवाल इसलिए कि चीन के दुश्मन ताईवान के सेनाध्यक्ष भी इसी तर्ज पर मारे गये थे।
विपिन रावत की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत क्या चीन की साजिश थी ? यह सवाल इसलिए कि चीन के दुश्मन ताईवान के सेनाध्यक्ष भी इसी तर्ज पर मारे गये थे। वैसे एलटीटीई र आईएसआई की ओर भी शक की सुई जा रही है। मामले की जांच के आदेश दे दिये गये हैं। जांच के बाद भी यह बात स्पष्ट...
राष्ट्र-चिंतन: सलमान और अल्वी ही कांग्रेस की असली पहचान हैं- विष्णुगुप्त
दुनिया में कोई भी पार्टी बहुसंख्यक आबादी और समाज को खारिज कर, अपमानित कर, खिल्ली उड़ाकर सत्ता में बैठ नहीं सकती। ऐसा उदाहरण यूरोप और अमेरिका में भी नहीं मिलता जहां पर लोकतंत्र को बहुत ही व्यावहारिक, उदारवाद और अल्पसंख्यक हित वाला माना जाता है। फिर भी यूरोप और अमेरिका की राजनीति चर्च और ईसायत की खिल्ली उड़ाने का...
पटना के सिन्हा लाइब्रेरी वाले सच्चिदानंद सिन्हा का नाम क्या आपने सुना है ? मुझे बिहार की कुछ चुनिंदा विभूतियों के प्रति अतीव सम्मान है। उनमें एक हैं सच्चिदानंद सिन्हा।
प्रेमकुमार मणि  पटना के सिन्हा लाइब्रेरी वाले सच्चिदानंद सिन्हा का नाम क्या आपने सुना है ? मुझे बिहार की कुछ चुनिंदा विभूतियों के प्रति अतीव सम्मान है। उनमें एक हैं सच्चिदानंद सिन्हा। संभव है, आप उन्हें जानते हों; नहीं भी जानते हों। मुझे अधिक विश्वास है कि नयी पीढ़ी उनके बारे में कुछ नहीं जानती। यह मेरे लिए अत्यंत...
ओशो ने कहा था- निंदा रस का धंधा है तुम्हारी पत्रकारिता। पत्रकारों की दृष्टि ही मिथ्या हो जाती है। उनके धंधे का मतलब ही यह है कि जनता जो चाहती है, वह लाओ खोजबीन कर।
ओशो ने प्रवचन में कहा था- निंदा रस का धंधा है तुम्हारी पत्रकारिता। पत्रकारों की दृष्टि ही मिथ्या हो जाती है। उनके धंधे का मतलब ही यह है कि जनता जो चाहती है, वह लाओ खोजबीन कर। पढ़ें, पत्रकारिता पर ओशो के प्रवचन का प्रमुख अंशः तुम्हारे अखबार निंदा से भरे होते हैं। तुम अखबार पढ़ते ही इसीलिए हो कि...
मुक्तिबोध ने 1950 में ही इस बात को अच्छी तरह ताड़ लिया था कि भारत की सामाजिक रूढ़िवादी ताकतें आने वाले समय में राम की राजनीति कर सकती हैं।
मुक्तिबोध ने 1950 में ही इस बात को अच्छी तरह ताड़ लिया था कि भारत की सामाजिक रूढ़िवादी ताकतें आने वाले समय में राम की राजनीति कर सकती हैं। 1950 के दशक में जब प्रगतिशील रामविलास शर्मा भक्तिकालीन  कवि तुलसीदास की सामाजिक रूढ़िवादिता पर मार्क्सवाद का पलोथन लगा रहे थे  और समाजवादी लोहिया 'रामायण मेला' आयोजित कर रहे थे;...
अंधभक्ति में उड़ेले गये विचार को लिबरल लोग कंगना राणावत का ज्ञान मानने का हठ कर रहे हैं। वह 1947 को इग्नोर कहां कर रही। वह तो आजादी की व्याख्या कर रही है। जैसे टुकड़े-टुकड़े गैंग को इस देश से आजादी चाहिए।
अंधभक्ति में उड़ेले गये विचार को लिबरल लोग कंगना राणावत का ज्ञान मानने का हठ कर रहे हैं। वह 1947 को इग्नोर कहां कर रही। वह तो आजादी की व्याख्या कर रही है। जैसे टुकड़े-टुकड़े गैंग को इस देश से आजादी चाहिए। उसी तरह उसे भी लगता है कि देश पहली बार 2014 में तुष्टीकरण के जाल से बाहर...