कन्हैया कुमार के लिए महागठबंधन में बेगूसराय की सीट कन्फर्म नहीं

0
165
  • राणा अमरेश सिंह

पटना। बेगूसराय लोकसभा क्षेत्र से किस्मत आजमाने के लिए बेताब जेएनयू वाले कन्हैया कुमार का महागठबंधन में बर्थ कन्फर्म नहीं है। पहले इसकी संभावना प्रबल थी, लेकिन हाल ही में बसपा के साथ राजद की नजदीकी ने इस पर सवाल खड़े कर दिये हैं। राजद नेता तेजस्वी से मुलाकात के वक्त मायावती ने बिहार में एक सीट पर बसपा के चुनाव लड़ने की इच्छा जतायी थी। ऐसे में पहले से ही सीट शेयरिंग को लेकर महागठबंधन में मची मारामारी में राजद को बेगूसराय सीट पर अपनी दावेदारी छोड़नी संभव नहीं दिखती। माना यह जा रहा है कि बदले हालात में युवा नेता व भाजपा विरोधी धारदार भाषण देने वाले जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार को राजद समर्थन नहीं दे सकता है। हालांकि राजद ने अभी तक इसकी घोषणा आधिकारिक तौर पर नहीं की है। यह अलग बात है कि पिछले साल सितंबर माह में कन्हैया कुमार को भाकपा से बेगूसराय से महागठबंधन का उम्मीदवार बनाने की बात सियासी जगत में आई थी। वैसे उम्मीद की किरण अब भी इसलिए बची है कि महागठबंधन के किसी घटक दल ने इस पर अपना बयान अभी तक नहीं दिया है।

सीट शेयरिंग के पेंच से परेशान राजद बेगूसराय सीट पर अपनी दावेदारी को पुख्ता मानता है और महागठबंधन का प्रत्याशी देने के मूड में है। कन्हैया कुमार को  महागठबंधन का उम्मीदवार बनाने को लेकर राजद संशय की स्थिति में है। सूत्रों के मुताबिक राजद बेगूसराय की सीट पर ज्यादा मजबूत है, इसलिए यह सीट किसी और को देना नहीं चाहता है। हालांकि बेगूसराय लोकसभा क्षेत्र में भाकपा का भी काफी दबदबा माना जाता है। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में बेगूसराय से भाजपा के भोला सिंह विजयी हुए थे। उनका निधन नवंबर 2018 में लंबी बीमारी के कारण हो गया।  राजद इस सीट को  भाकपा प्रभावित होने के बावजूद कन्हैया के लिए छोड़ने के मूड में नहीं है।

- Advertisement -

यह भी पढ़ेंः झारखंड के 80 हजार छोटे व्यापारी अब जीएसटी नहीं भरेंगे

यह भी पढ़ेंः बिलखती बहन ने भाई को मुखाग्नि देकर तोड़ी समाज की बेड़ियां

सूत्रों की मानें तो  राजद किसी भी सीट से कन्हैया को उम्मीदवार बनाने के पक्ष में नहीं है। वहीं, राजद बिहार में बीएसपी के साथ गठबंधन कर सकता है। बीएसपी का एक कैंडिडेट बिहार में महागठबंधन से चुनाव लड़ सकता है। राजनीतिक गलियारों में चल रही खबरों के अनुसार तेजस्वी के साथ मुलाकात में मायावती इस बात का जिक्र भी कर चुकी हैं। उत्तर प्रदेश और बिहार के आसपास वाले क्षेत्रों में बसपा का प्रभाव माना जाता है। इन क्षेत्रों से  बसपा के विधायक कई बार चुने भी गए हैं।

यह भी पढ़ेंः नौकरी खोज रहे हैं तो आयें बिहार, परिवहन में नौकरी की भरमार

कांग्रेस के अलावा भी महागठबंधन में बहुत सारे दल हैं। उपेंद्र कुशवाहा की रालोसपा, जीतन राम मांझी का हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (हम), शरद यादव का लोकतांत्रिक जनता दल, अरुण कुमार की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी, मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी, भाकपा, माकपा और माले भी भाजपा के खिलाफ महागठबंधन के साथ हैं। सबको खुश रखना राजद के नेतृत्व वाले महागठबंधन के लिए बड़ी चुनौती बन गयी है।

यह भी पढ़ेंः वैशाली में डॉ. रघुवंश से मुकाबले के लिए NDA में प्रत्याशी की तलाश

- Advertisement -