बिहार की वैशाली सीट पर लोजपा बढ़ रही समझौते की ओर

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हाजीपुर। दो कदम तुम बढ़ो, दो कदम हम। आओ गले मिल लें, तलाक की क्या जरूरत?  वैशाली लोकसभा सीट के लिए यही फॉर्मूला एनडीए मैं चरितार्थ होता नजर आ रहा है। मामला वैशाली के सांसद रमा किशोर सिंह उर्फ रामा सिंह से जुड़ा है। वर्षो तक लोजपा सुप्रीमो रामविलास पासवान के अति विश्वसनीय नेता के रूप में रमा किशोर सिंह जुड़े रहे। पिछले लोकसभा चुनाव में वैशाली संसदीय सीट से पार्टी ने उन्हें ठोक बजा कर उम्मीदवार बनाया था। राजनीतिक गलियारे में यह बात चर्चित रही की सांसद रामा सिंह लोजपा सुप्रीमो रामविलास पासवान का बहुत ही सम्मान करते हैं और उनके विचारों से प्रभावित हैं, लेकिन लोजपा संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष व सांसद चिराग पासवान के व्यवहार, विचार और कार्यशैली उन्हें बिलकुल पसंद नहीं और इस कारण पार्टी के कार्यक्रमों, विशेषकर चिराग पासवान के कार्यक्रमों से रमा सिंह ने दूरियां बना कर रखीं।

पिछली बार लोजपा के खाते में सीट जाने के बाद निवर्तमान सांसद सह राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ रघुवंश प्रसाद सिंह का लगातार बयान तब आ रहा था कि लोजपा के पास पहलवान ही नहीं हैं। तब लोजपा राजद के साथ ही थी। चुनाव के समय अचानक बदली परिस्थिति में लोजपा एनडीए का हिस्सा बनी। लोजपा ने डॉ रघुवंश सिंह से मुकाबला करने के लिए बाहुबली के रूप में चर्चित रामा किशोर सिंह उर्फ रामा सिंह को चुनावी अखाड़े में उतारा था और  पूरी मजबूती के साथ डॉ रघुवंश सिंह को पटखनी देकर रमा सिंह ने विजय हासिल की थी।

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उसके बाद अचानक की लोजपा से सांसद रामा सिंह की दूरियां बढ़ने लगीं। पिछले विधानसभा चुनाव के समय सांसद रमा सिंह मुखर होकर सुर्खियां बने। कई मुद्दों पर उन्होंने खुलकर अपने न सिर्फ विचार रखे, बल्कि पार्टी की रणनीतियों का भी विरोध किया था। बताया जाता है कि सांसद रमा सिंह के विरोधी तेवर के कारण ही पिछले विधानसभा चुनाव में लोजपा के प्रदेश अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस राजापाकड़ विधानसभा सीट से चुनावी अखाड़े में नहीं उतर पाये, जबकि पार्टी और लोगों का उन पर बहुत दबाव था। रामा सिंह उसके बाद कभी भी लोजपा के कार्यक्रमों में शामिल नहीं हुए। चाहे पार्टी का स्थापना दिवस या ईद मिलन समारोह अथवा जन्मदिन समारोह हो।

पिछले कई माह से रमा सिंह के बारे में चर्चाएं तेज थीं कि वे अब लोजपा प्रत्याशी बन कर चुनाव नहीं लड़ेंगे, बल्कि महागठबंधन में जाकर आरा या शिवहर से चुनाव लड़ेंगे, लेकिन कहा जाता है कि राजनीति अनिश्चितताओं का खेल है और यहां पल-पल निर्णय बदले जाते हैं और माहौल बदलता है। अब एनडीए में सीट शेयरिंग पर मुहर लगने के बाद जब लोजपा सुप्रीमो रामविलास पासवान के हाजीपुर से चुनाव न लड़ने और राज्यसभा जाने पर मुहर लग गई है तो अचानक हाजीपुर के लिए लोजपा के प्रदेश अध्यक्ष और बिहार सरकार के मंत्री पशुपति कुमार पारस के नाम पर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। साथ ही शुरू हो गयी है कि वैशाली से लोजपा में नाराज चल रहे सांसद रमा सिंह को ही एक बार फिर चुनावी अखाड़े में उतारने की चर्चा।

सूत्र बताते हैं कि इस संबंध में सांसद रमा सिंह की कई मुलाकातें हाल के दिनों में लोजपा सुप्रीमो के साथ हो चुकी हैं। महागठबंधन में रमा सिंह को आरा अथवा शिवहर सीट पर सहमति न बनने की भी चर्चाएं हैं। इसी वजह से रमा सिंह भी वैशाली जिले से ही अब अपना भाग्य आजमाना चाहते हैं। रमा सिंह भाजपा और जदयू के शीर्ष नेतृत्व के संपर्क में भी बताए जाते हैं। लोजपा से टिकट न मिलने की स्थिति में भाजपा अथवा जदयू से वे  प्रत्याशी बनने को प्रयासरत रहे हैं, लेकिन अब चर्चा है कि वैशाली सीट लोजपा के खाते में ही रहेगी और लोजपा अपना प्रत्याशी रमा सिंह को ही बनाने पर सहमति बना रही है।

इसके पीछे बड़ा कारण यह माना जा रहा है कि हाजीपुर संसदीय सीट पर रमा सिंह के समर्थकों की शुरू से ही महत्वपूर्ण भूमिका रही है। सांसद रमा सिंह का घर हाजीपुर संसदीय सीट के ही महनार विधानसभा क्षेत्र में है और वह महनार के विधायक रह चुके हैं। हाजीपुर से चुनावी अखाड़े में उतरने के बाद पशुपति कुमार पारस किसी भी प्रकार का जोखिम उठाना नहीं चाहते हैं। यही कारण है कि लोजपा नेतृत्व के साथ-साथ सांसद रमा सिंह भी तमाम दूरियां और शिकवे शिकायत भूल कर ‘तलाक’ के बदले ‘समझौता’ की रणनीति पर चलने की तैयारी में हैं। इंतजार है लोजपा संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष सांसद चिराग पासवान के निर्णय और घोषणा का।

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