प्रशांत किशोर वायरल आडियो कहीं उनकी रणनीति का हिस्सा तो नहीं?

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प्रशांत किशोर क्या कल से सचमुच बेराजगार हो जाएंगे। क्या उनकी कंपनी आईपैड अब चुनावी रणनीति बनाने का अपना काम छोड़ देगी।
प्रशांत किशोर क्या कल से सचमुच बेराजगार हो जाएंगे। क्या उनकी कंपनी आईपैड अब चुनावी रणनीति बनाने का अपना काम छोड़ देगी।
  • डी. कृष्ण राव

कोलकाता। प्रशांत किशोर उर्फ पीके की बातचीत के वायरल आडियो की हकीकत क्या है? कहीं यह भी उनकी रणनीति का हिस्सा तो नहीं? ममता के वे चुनावी रणनीतिकार हैं। आडियो वायरल होने की टाइमिंग, आडियो के तथ्यों पर पीके की सफाई, इसे लेकर मचे बवाल के बावजूद पूरी बातचीत का आडियो पीके द्वारा जारी नहीं करना, कई तरह के सवालों-अटकलों को जन्म दे रहा है। पीके की अब तक महज यही सफाई आई है कि पूरी बातचीत का आडियो नहीं है। सिर्फ उसके चुनिंदा संपादित अंश भाजपा आईटी सेल के लोगों ने अपने पक्ष में जारी किये हैं। इससे भाजपा को कोई फायदा नहीं होने वाला है। इसके साथ वह अपने ट्वीट की वह बात भी दोहरा रहे हैं कि बंगाल में भाजपा दहाई अंकों से आगे नहीं जाएगी।

प्रशांत किशोर ने क्या कहा है वायरल आडियो में

”प्रधानमंत्री मोदी भगवान जैसे हैं… दलित वोट करीब-करीब एकमुश्त बीजेपी को मिल रहा है… मतुआ वोट तीन चौथाई बीजेपी के पास जा रहा है… पचास से पचपन फीसद हिंदू वोट बीजेपी को मिल रहा है… हिंदी बोलने वाले बीजेपी पर और मोदी पर ज्यादा विश्वास कर रहे हैं… लेफ्ट को मिलने वाला दो तिहाई वोट भी मानकर चल रहा है कि बंगाल में बीजेपी आ रही है…” प्राशंत किशोर उर्फ पीके ने कुछ ऐसी ही बातें कही हैं।

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बंगाल की राजनीति में पिछले 2 सालों में बहुचर्चित नामों में से एक है पीके अर्थात तृणमूल कांग्रेस के चुनावी सलाहकार या रणनीतिकार प्रशांत किशोर।  बंगाल में चौथे चरण के चुनाव के दिन सुबह प्रशांत किशोर के वायरल ऑडियो टेप के संदर्भ में इसके रहस्य को जानने की कोशिश करते हैं। पहला- चैट में प्रशांत किशोर ने ऐसा क्या कह दिया कि पूरे बंगाल में हलचल मच गयी। हालांकि इसकी विस्तृत जानकारी लोगों तक पहुंच चुकी है, लेकिन उसके मुख्य बिंदु को फिर से याद दिलाना चाहेंगे। दूसरा- जिस ऐप के जरिए इस बातचीत की टेप लीक हुई है, उस ऐप के बारे में भी जानना जरूरी है। क्या वह उस ऐप से इतने साधारण या आसानी से बात  लीक हो सकती है। तीसरा सवाल- क्या प्रशांत किशोर को पता नहीं है कि चुनाव के चार चरण बाकी हैं और इस बीच इस तरह की बातचीत अगर लीक हो जाए तो विपक्षी  पार्टी के आईटी सेल में अमित मालवीय जैसे घाघ उसका इस्तेमाल चुनाव को प्रभावित करने के लिए सकते हैं? क्या प्रशांत किशोर इतना कैजुअल हैं? चौथा सवाल- इस टेप को लीक करने से सबसे ज्यादा बेनिफिट किस तक पहुंच सकता है? भाजपा या  प्रशांत किशोर की संस्था आईपैक को?

अगर इन चारों सवालों का जवाब खोजने का प्रयास करते हैं तो इस टेप कांड के वायरल होने का मुख्य उद्देश्य सामने आ जाता है। सबसे पहले  वॉयस चैट की कुछ बातें जानते हैं। वे कह रहे हैं कि बंगाल में  मोदी की लोकप्रियता दीदी से किसी भी हाल में कम नहीं है। बंगाल में 20% लोग मोदी को अपना भगवान मानते हैं। बंगाल में पूरे मतों का ध्रुवीकरण हो चुका है। बंगाल के 50 से 55% हिंदू  के अलावा एससी-एसटी, मतुआ समाज के 75  प्रतिशत लोग भाजपा के पक्ष में हैं। हिन्दी बोलने वाली एक करोड़ की आबादी बीजेपी और मोदी पर भरोसा करती है। बंगाल में भाजपा की सरकार बनती दिख रही है। क्या यह टेप असली है? प्रशांत किशोर ने लोगों के इस सवाल पर भी मुहर लगाते हुए कहा- वैसे टेप तो असली है, लेकिन इस टेप को पूरा सुनना चाहिए। उन्होंने फिर दोहराया कि भाजपा को अब भी सौ से कम सीटें ही मिलेंगी।

अब सवाल यह उठता है कि क्या पीके तृणमूल कांग्रेस के एक आम  आम कार्यकर्ता हैं, जिनकी बातों का कोई असर नहीं होगा। इसका जवाब होगा- नहीं। वह तृणमूल कांग्रेस के रणनीतिकार हैं। उनेके एक-एक शब्द का लोग मतलब निकालते हैं। वह यह भलीभांति जानते हैं कि जहां भाजपा के पक्ष में उनकी इतनी सारी बातें टेप के जरिये बंगाल में पसर गयीं, उसमें वह यह भी जोड़ सकते थे कि भाजपा को सौ से अधिक सीटें नहीं मिलेंगी। अब सवाल उठता है  कि प्रशांत किशोर इतने बड़े चुनावी रणनीतिकार होने के बावजूद, जब चुनाव के चार चरण बाकी हैं, ऐसी बातें कैजुअली कैसे कह सकते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ये सब बातें उन्होंने जान-बूझकर ही कही हैं।

अब दूसरे सवाल का जवाब ढूंढने की कोशिश करते हैं। प्रशांत किशोर का आडियो जिस ऐप के जरिए वायरल हुआ है, उसका नाम है- क्लब हाउस। वर्ष 2020 के में इस ऐप को मार्केट में लांच किया गया था। यह कोई आम ऐप नहीं है, जो कोई भी डाउनलोड करे और चैट करना स्टार्ट कर दे। IOS- 9  फोन में भी चैट करना संभव नहीं है। अर्थात मार्केट में एप्पल जैसे फोन में  इसका इस्तेमाल हो सकता है। इसमें आपको सदस्य बनने के लिए किसी  अन्य व्यक्ति, जिसका इसमें अकाउंट हो, वह अगर आपको  आमंत्रित करता है तो आपकी सदस्यता स्वीकार हो सकती है। इसमें एक शर्त है कि क्लब हाउस के मेंबर बातचीत को रिकॉर्ड नहीं कर सकते। अगर रिकॉर्डिंग कर भी लेते हैं तो इसे गैरकानूनी माना जाएगा।

अगर किसी ऐप में इतनी कठिन  शर्त लगी हो, वहां से बातचीत लीक होने की कोई संभावना ही नहीं है। आखिर वहां से बातचीत लीक कैसे हुई? अगर कंपनी करती है तो उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठ सकता है और कंपनी ऐसा काम नहीं करेगी।  कोई भाजपा समर्थक इस बात को रिकॉर्ड कर मीडिया तक इसलिए लाया होगा, ताकि अगले चार चरण के चुनाव में भाजपा को इस ऑडियो क्लिप का माइलेज मिल सके? राजनीतिक जानकार यह भी सवाल उठा रहे हैं कि  क्या पीके और उनके लोग किसी भी तरह  इस टेप को  लीक करा सकते हैं। अगर करा सकते हैं तो क्यों?

बंगाल के राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रशांत किशोर इतने कैजुअल नहीं हैं। वह यह भी जानते हैं कि अगर किसी भी तरह उनकी यह बातचीत बाहर आती है तो अगले चार चरणों का चुनाव बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। अब सवाल उठता है कि इस तरह की बातचीत चुनाव के बीच में इतना रिस्क लेकर प्रशांत ने क्यों किया?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हो सकता है कि उनके लोग ही इस बातचीत को वायरल किए हों, ताकि आईपैक की गुडविल को मार्केट में बरकरार  रखा जा सके? क्योंकि पहले प्रशांत किशोर कह चुके थे कि भाजपा अगर डबल डिजिट पार करती है तो वह काम करना छोड़ देंगे। अगर 2  मई के बाद नतीजा भाजपा के पक्ष में जाता है तो उनका पूरा गुडविल दांव पर लग जाएगा। इस तरह की बातचीत को  वायरल कर वह बचना चाहते हों कि पहले जो कहा था, वह उस समय की परिस्थिति थी। बदली परिस्थिति में उन्होंने पहले ही बता दिया था। इसलिए कि नतीजा भाजपा के पक्ष में जाता है तो  वह सफाई के तौर पर कहेंगे कि हमको पहले ही पता चल गया था कि भाजपा जीत रही है। चार चरणों के चुनाव के बाद ही उन्हें इसका अंदाज लग गया था। इसीलिए हमने खुलकर नहीं कहा, लेकिन इशारों-इशारों में बता दिया था। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पीके अर्थात प्रशांत किशोर ने अपनी कंपनी आईपैड का गुडविल बचाने के लिए सोच-समझ कर यह चाल चली है।

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