आंध्र प्रदेश से आयीं मछलियां खाने से कैंसर का खतरा

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पटना। आमतौर पर यह माना जाता है कि मछली खाने से दिल और डायबिटीज जैसी बीमारियों में लाभ पहुंचता है। मछली के तेल से विटामिन वाली दवाइयां भी बिकती हैं। मांसाहारी बीमारों को डाक्टर सलाह देते हैं कि रेड मीट मत खाइए, मछली खा सकते हैं। ताजा सूचनाएं बताती हैं कि डाक्टरों की सलाह पर कहीं की मछली मत खाइए। दक्षिण भारत से आईं मछलियों को तो हाथ मत लगाइए। लंबे समय तक इन मढलियों को सड़ने से बचाने के लिए जिस केमिकल का इस्तेमाल मछली उत्पादक करते हैं, उससे कैंसर का खतरा है। बिहार सरकार ने तो आनन-फानन में इस पर प्रतिबंध भी लगा दिया है, लेकिन सच्चाई यह है कि अब भी आंध्रप्रदेश से मछलियां आ रही हैं और बाजार में धड़ल्ले से बिक रही हैं।आंध्र प्रदेश से आने वाली मछलियों पर कैंसर जैसा रोग पैदा करने वाला खतरकनाक केमिकल Formalin पाया गया है। बिहार में लिए गए 86 नमूनों में से 25 में यह केमिकल मिला है

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वरिष्ठ पत्रकार कन्हैया भेलारी ने अपने फेसबुक वाल पर टाइम्स आफ इंडिया की एक खबर के हवाले से पोस्ट डाला है। उन्होंने लिखा है- टाइम्स आफ इंडिया ने बेहद अच्छी जानकारी दी है। खबर के अनुसार आंध्र प्रदेश से आनेवाली मछलियों में जांच के बाद कैंसर जैसा रोग पैदा करने वाले खतरकनाक केमिकल Formalin पाया गया है। बिहार में लिए गए 86 नमूनों में से 25 में यह केमिकल मिला है।

बाप रे बाप। हर फिस प्रेमी के पेट में जीवन में कम से कम 10 क्विंटल तेलगू फिस तो ढ़ुक ही गया होगा। भयानक खबर के बाद संकल्प लेने का समय है कि अब हम लेाग आंध्र प्रदेश की और मछली पेट में नहीं ढुकने देंगे।

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वैसे फिस प्रेमियों को घबराने की जरूरत नहीं है। संबन्धित विभाग के अनुसार बिहार में हर साल 6.42 लाख मीट्रिक टन फिस की खपत है। हम 5.10 मीट्रिक टन पैदा करते हैं। सरकार सीरियस हो जाए तो हम अगले कुछ वर्षों में रिकार्ड प्रोडक्शन करने लगेंगे।

दी टेलीग्राफ के संजीव कुमार वर्मा के अनुसार राज्य में 93000 हेक्टर तालाब, 9000 हेक्टर झील, 9.41 हेक्टर चौर हैं, जो साल में 6 से 7 महीने तक अनयुज्ड पड़े रहते हैं। इसका सार्थक उपयोग सरकार द्वारा किया जा सकता है और मछली का उत्पादन बढ़ाया जा सकता है।

बहरहाल, फिसरी विभाग के एक पदाधिकारी ने बताया कि आंन्ध्र प्रदेश से आने वाली मछलियों पर बैन लगाने का सुझाव सबसे पहले 2012 में तब के मंत्री गिरिराज सिंह ने हाई लेबेल बैठक में दिया था। अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका, क्योंकि  अमल से पहले ही बीजेपी और नीतीश कुमार का रिश्ता टूट गया। सिंह साहब कुर्सी विहीन हो गए।

हालांकि मछली व्यवसायी संघ, कृषि उत्पादन बाजार समिति के अध्यक्ष अनुज कुमार ने कहा है कि आंध्र प्रदेश की मछलियों पर बिहार में रोक की बात महज अफवाह है। वहां की मछलियों पर फार्मोलिन का लेप नहीं चढ़ाया जाता है। उनकी बातों को सच मानें तो स्वास्थ्यमंत्री मंगल पांडेय और पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के मंत्री पशुपति नाथ पारस ने प्रतिबंध की बात से इनकार किया है।

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