गो सेवा की राजनीति में अब नीतीश कुमार भी कर रहे कदमताल

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  • राणा अमरेश सिंह

पटना। कहते हैं कि सियासत की भाषा कभी सीधी नहीं होती है। जो आप देखते अथवा सुनते हैं, वह कई बार सच से कोसों दूर हो सकता है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ की तरह बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने भी गौ सेवा के प्रति अपनी आस्था जतायी है। नीतीश कुमार को उद्योगपतियों की बैठक में उन्हें गोशाला बनाने का आग्रह करते सुना गया। यद्यपि नीतीश कुमार ने दो महीने पहले ही आवारा पशुओं को पकड़ कर ऊंची कीमत में बेचने का आदेश पटना नगर निगम के अधिकारियों को दिया था। नीतीश के ताजा बयान को सियासी गलियारे में देश भर में चल रही गोसेवा की राजनीति के रूप में देखा जा रहा है।

पटना स्थित सचिवालय में नीतीश कुमार ने उद्योगपतियों के साथ एक बैठक में उन्हें गोसेवा के लिए आगे आने के लिए कहा है। उनहोंने गाय के गोबर व मूत्र का बखान करते हुए उन्हें गोशाला बनाने के लिए आगे आने का आग्रह किया। हालांकि नीतीश कुमार की बात से कई उद्योगपति असहज होते देखे गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि गाय सिर्फ दूध देने के लिए ही लाभकारी नहीं है, बल्कि उसके गोबर और मूत्र भी आर्गेनिक खाद और कीटनाशक तैयार करने के लिए जरूरी है। मैं आप सभी से प्रदेश में गोशाला के निर्माण में सहयोग का अनुरोध करता हूं।

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नीतीश कुमार ने 24 नवंबर 2018 को पटना नगर निगम को आवारा पशुओं को पकड़ कर उनके मालिकों पर जुर्माना लगाने का आदेश दिया था। गो मालिक नहीं सुधरे तो आवारा पशुओं को पकड़ कर ऊंची कीमत देनेवालों को बेच दें। यह यह सबको पता है कि ऊंची कीमत आवारा पशुओं का कौन देदे सकता है। दबे स्वर में इस पर राजनीति भी हुई थी। लोगों ने इसे तुष्टीकरण की राजनीति बताया था।

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हालांकि नीतीश कुमार ने शहर में जल निस्तारण की व्यवस्था के निरीक्षण के दौरान ऐसा निर्देश दिया था। वे शहर में आवारा पशुओं के कारण बढ़ रही दुर्घटनाओं पर चिंता व्यक्त कर रहे थे।

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तीन राज्यों के हालिया विधानसभा चुनाव के दौरान गाय को लेकर खूब राजनीति हुई थी। कांग्रेस सरकार ने भाजपा से भी दो कदम आगे जाकर गोमाता की सेवा हेतु सरकारी गोशाला हर पंचायत में बनाने की घोषणा की थी। सरकार बनने के बाद सीएम कमलनाथ ने गोसेवा में अपनी निजी आस्था जताते हुए अधिकारियों से योजना को जल्द अमली जामा पहनाने का आदेश दिया है।

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