कहानी शबाना की जीवन की

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कहानी जीवन की सार्थक समय डेस्क : शबाना ऊर्दू के मशहूर शायर कैफी आजमी की बेटी हैं। उनकी माँ शौकत आजमी भी थिएटर की आर्टिस्ट...

हिंदी दिवस के बहाने कुछ खरी-खरी

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पटना : भारतेंदु जी की कविता का एक वाक्य है निज भाषा उन्नति अहे.. इसी में किसी भी भाषा के महत्व का मर्म छिपा...

नोटबंदी से और मजबूत हुई अर्थव्यवस्था, भ्रम न फैलाए विपक्ष: भाजपा 

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पटना। नोटबंदी से भारतीय अर्थव्यवस्था के और मजबूत होने का दावा करते हुए भाजपा प्रदेश प्रवक्ता सह पूर्व विधायक श्री राजीव रंजन ने इस...

डाउनलोड स्पीड में फिर Jio 4जी अव्वल : TRAI

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एयरटेल ,वोडाफोन-आइडिया से तीन गुना ज्यादा स्पीड जियो की सार्थक समय डेस्क : दूरसंचार नियामक TRAI द्वारा अगस्त माह के लिए प्रकाशित औसत 4G डाउनलोड...

शादी का मतलब यह नहीं कि पत्नी हमेशा शारीरिक संबंध के लिए तैयार हैः...

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नयी दिल्ली। शादी का मतलब यह नहीं है कि पत्नी हमेशा शारीरिक संबंध के लिए तैयार बैठी है। शादी के बाद पति-पत्नी दोनों को...

योग मानव स्वास्थ्य की दिशा में सकारात्मक नजरिया है

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21 जून को ‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’ के रूप में घोषित है। 11 दिसंबर 2014 - यूनाइटेड नेशंस की आम सभा ने भारत द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए 21 जून...

भाजपा को अब ज्ञान की घुट्टी पिलाने लगे सहयोगी दल जदयू-लोजपा

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नयी दिल्ली। कहते हैं कि संकट आने पर साथी भी मुंह फेरने लगते हैं। तीन भाजपाशासित राज्यों में भाजपा की हार क्या हुई, अब...
प्रेमकुमार मणि

तीसरा फ्रंट फिलहाल संभव नहीं, चुनाव बाद बन सकती गुंजाइश

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प्रेमकुमार मणि मैंने पहले बतलाया है कि 2015 के विधानसभा चुनाव में एनडीए और महागठबंधन के बीच वोटों का हिसाब क्या था। एनडीए यानी...
समरस होना ही समर्थ या सामर्थ्यवान भारत की पहचान है। समरसता से मिली ताकत के कारण ही भारत जगत गुरु कहलाया और यही ताकत उसे और आगे ले जाएगी।

असम राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर के आंकड़ों पर घमासान

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सुरेंद्र किशोर असम में नागरिकता के मुद्दे पर उल्फा का आंदोलन सर्वविदित है। भाजपा ने सरकार बनते ही राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर तैयार कराने की...
नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में चलने वाली भाजपा सरकार के पिछले सात वर्षों के कार्यकाल में देश के अंदर तनाव और टकराव बढ़ा है। सांप्रदायिक तनाव तो बढ़ा है। कह रहे हैं आरजेडी के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी

नीतीश कुमार के पास अब रास्ता नहीं, अकेले चल कर भी पिछड़ जायेंगे

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बिहार की राजनीति में अकेले चल पाना उनके लिए मुमकिन नहीं है. अब तक के अपने राजनीतिक जीवन में दो मर्तबा अकेले चले हैं....