नीतीश की पटकनी से मुंह के बल गिरे कुशवाहा, जानिए सच

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पटना। इसे कहते हैं धोबियापाट। नीतीश कुमार ने उनसे पंगा लेने वाले उपेंद्र कुशवाहा को ऐसी पटकनी दी कि राजनीतिक विसात में फिलवक्त कुशवाहा मुंह के बल गिरे हैं। कल तक कुशवाहा इतना तेवर दिखा रहे थे कि उन्होंने भाजपा के लिए कुर्बानी देने की बात की, पर नीतीश के सामने नतमस्तक नहीं होने का वचना भी दोहराया। नीतीश कुमार ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सियासी खेल का माहिर खिलाड़ी फिलवक्त बिहार में उनके अलावा दूसरा कोई नहीं है।

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हाल में उनके एक बयान पर खासा सियासी बवाल मचा कि नीतीश कुमार 2020 चुनाव के बाद मुख्यमंत्री नहीं रहना चाहते। नीतीश कुमार ने रालोसपा के दो विधायकों को अपने पाले में कर लिया है। इससे गुस्साये-तमतमाये कुशवाहा दिल्ली भागे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से अपना दुखड़ा सुनाने। कल तक उन्हें शाह ने समय ही नहीं दिया।

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कुशवाहा दिल्ली रवाना होने से पहले रामविलास पासवान से भी मिलने पहुंचे थे। हालांकियह मुलाकात सीट शेयरिंग के सवाल पर थी। जदयू-भाजपा ने बराबर सीटों पर बिहार में लोकसभा चुनाव लड़ने का फैसला तो कर लिया है, लेकिन किसे कितनी सीटें मिलेंगी, अभी यह फार्मूला आना बाकी है। शायद इसी फार्मूले पर दोनों में बातचीत हुई। अगले ही दिन यह खबर सियासी हलकों में आयी कि रालोसपा के दोनों विधायक जदयू का दामन थामने जा रहे हैं। जाहिर है कि इससे उपेंद्र कुशवाहा की तिलमिलाहट और बढ़ी होगी।

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कुशवाहा के सामने अब दो ही विकल्प हैं। या तो वह मन मार कर भाजपा की कृपा पर एनडीए में बने रहें या आनन-फानन एनडीए को सलाम बोल कर आरजेडी में शामिल हो जायें। आरजेडी उन्हें कई बार न्योता दे चुका है। उनकी तेजस्वी यादव से कुछ ही दिन पहले मुलाकात भी हुई थी। 2014 के लोकसभा चुनाव में कुशवाहा को एनडीए ने जितनी सीटें दी थीं, उतनी या उससे एक-दो सीटें ज्यादा देने में आरजेडी को दिक्कत भी नहीं होगी। उनकी खीर विधि को आरजेडी के पक्ष में माना गया।

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