हार नहीं मानूंगा…कहने वाले अटल जी आखिरकार मौत से हार गये

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नयी दिल्ली। हार नहीं मानूंगा…कहने वाले अटल जी लड़ते-लड़ते मौत से हार गये। एम्स ताजा बुलेटिन के मुताबिक उनकी मौत की आज पुष्टि कर दी गयी। एक युग का अंत हो गया। हार नहीं मानूंगा- कहने वाले अटल बिहारी वाजपेयी आखिरकार आज हार गये। इंडिया टीवी ने ब्रेकिंग न्यूज में लिखा- पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की निधन।

भाजपा ने अपने सारे कार्यक्रम रद्द कर दिये हैं। पक्ष-विपक्ष के कई नेता और मुख्यमंत्री अंतिम दर्शन के लिए पहुंच गये हैं। भाजपा, शासित राज्यों के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, योगी आदित्यनाथ के अलावा बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, दिल्ली के अरविंद केजरीवाल, जम्मू कश्मीर के पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी जैसे तमाम राजनीति के दिग्गज एम्स पहुंचे थे।

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राजनीति के गलियारे में अटल जी का ओजस्वी भाषण और गम्भीर लेखन अपना एक विशेष स्थान रखता है। उनकी एक आवाज पर सभी कार्यकर्ता एकजुट होकर देशहित के लिये कार्य करने के लिये तत्पर रहते थे। उनके भाषण किसी चुम्बक के समान हैं, जिसको सुनने के लिये लोगों का हुजूम बरबस ही उनकी तरफ खिंचा आता था।  विरोधी पक्ष भी अटल जी के धारा प्रवाह और तेजस्वी भाषण का कायल रहा है।

अटल जी के भाषण, शालीनता और शब्दों की गरिमा का अद्भुत मिश्रण है। उनकी वाणी ऐसी मोहनी थी कि लोग उनका प्रसन्नतापूवर्क अनुगमन करने लगते थे।  जब सदन में अंग्रेजी छायी रहती थी, तब आदरणीय अटल जी की धारा प्रवाह प्रांजल भाषा सबको पसंद आती थी। जब अटल जी बोलते थे तो नेहरू जी भी उनके भाषण को बहुत ध्यान से सुनते थे। प्रारंभ से ही अटल जी के भाषण की सभी सांसद प्रशंसा करते थे। अटल जी के भाषणों में विद्यमान काव्यात्मक शैली और तर्कपूर्ण विवेचन ने सभी को आकृष्ट किया।

भारत और नेपाल के बीच उत्पन्न मनोमानिल्य को दूर करते हुए अटल जी ने  अपने भाषण में संवेदना पूर्ण स्वर में कहा था- ‘दुनिया में कोई देश इतना निकट नही हो सकते, जितने की भारत और नेपाल हैं। इतिहास ने, भूगोल ने, संस्कृति ने, धर्म ने, नदियों ने हमें आपस में बाँधा है।’

सांसद के रूप में अटल जी आरंभ से ही अपने भाषणों की तैयारी बङी गंभीरता के साथ करते थे। उन्होने सदन में कभी भी एक शब्द अनर्गल नहीं कहा। 23 मार्च 1992 को लोकसभा में उनके विचार पूर्ण और तर्क संगत भाषण को देश के सभी हिस्सों में सराहा गया। बेरोजगारी का जिक्र करते हुए अटल जी ने कहा कि, बढती हुई बेरोजगारी का क्या होगा, रोजगार देने में छोटे उद्योग अहम भूमिका अदा करते हैं किन्तु वे भी बीमार हो रहे हैं। लाखों छोटे उद्योग बंद हैं। कोई उनकी चिंता करने वाला नही है। उसमें कई लोगों की पूंजी फंसी है और उसमें काम करने वालों को दूसरी जगह रोजगार नही मिल रहा।

बिहार के सीएम नीतीश ने शोक जतायाः बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अटल जी के निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि अटल जी का निधन देश के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

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