नहीं जानते तो जान लें सुभाषचंद्र गुप्ता उर्फ मुद्राराक्षस को

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शूद्रों के चित्रकार थे मुद्राराक्षस! एक चित्रकार था- बादलों का चित्रकार! वह ताजिंदगी बादलों का चित्र बनाता रहा- कालेभूरेमटमैले बादलों का। बादलों के चित्र कभी पूरे नहीं हुए। जिंदगी पूरी हो गई।मुद्राराक्षस शूद्रों के चित्रकार थे। वे ताजिंदगी शूद्रों के चित्र बनाते रहे- बदहालफटेहाल , तंगोतबाह शूद्रों का। शूद्रों के चित्र कभी पूरे नहीं हुए। जिंदगी पूरी हो गई ।

मुद्राराक्षस के लिए शूद्र वैसे ही थेजैसे तुलसी के लिए राम। तुलसी ने रामकथा को न जाने कितने रूपों मेंकितनी विधाओं मेंकितने तरीकों से लिखा है! कभी कवित्त मेंकभी सवैया मेंकभी बरवै में और कभी दोहा-चौपाई में-अनेक ।

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मुद्राराक्षस ने भी शूद्रों की कथा को न जाने कितने रूपों मेंकितनी विधाओं मेंकितने तरीकों से लिखा है। कभी नाटकों मेंकभी उपन्यासों मेंकभी संस्मरणों मेंकभी कहानियों में- अनेक। कई-कई कोणों सेशूद्रों के कई-कई चित्र बनाए हैं मुद्राराक्षस ने।

आप मुद्राराक्षस का उपन्यास ” नारकीय ” पढ़ लीजिए। लेखकीय यात्रा के अनुभव का दस्तावेज है ” नारकीय । यशपाल के घर सभी लेखकों को चाय मिलती हैशूद्र लेखक मुद्राराक्षस को नहीं। मुद्राराक्षस के “कालातीत” में भी असाधारण और सबसे अलग संस्मरण दर्ज हैं। कैसे कोई द्विज इतिहास में दाखिल होता है और कैसे किसी शूद्र को इतिहास में दाखिल होने से रोका जाता है?

आप मुद्राराक्षस की ” नई सदी की पहचान-दलित कहानियाँ “पढ़ लीजिए। शूद्र-जीवन केंद्र में है। भूमिका में मुद्राराक्षस ने शूद्रों का जो संक्षिप्त इतिहास लिखा हैवह मनोमस्तिष्क को झकझोर देनेवाला है।

आप मुद्राराक्षस के अनेक निबंध पढ़ लीजिएमिसाल के तौर पर शास्त्र-कुपाठ और स्त्रीअशोक के राष्ट्रीय चिन्हों पर सवालबौद्धों की अयोध्या का प्रश्नज्ञान-विज्ञान और सवर्णभारत और पेरियारबुद्ध केपुनर्पाठ का समय आदि। ये सभी निबंध सबूत हैं कि मुद्राराक्षस शूद्राचार्य थे ।

मुद्राराक्षस की एक पुस्तक है- “धर्म-ग्रंथों का पुनर्पाठ “। वेदों से लेकर शंकराचार्य तक के ग्रंथों का तेज-तर्रार विवेचन-विश्लेषणतर्काश्रित मुहावरे और तथ्यों के प्रति बेबाक दृष्टिकोण!

समझौतापरस्त नहीं थे मुद्राराक्षस। गिरिजाकुमार माथुर से भिड़ गएदिनकर की उर्वशी की खाल उतार लीभगवतीचरण शर्मा को जनसंघी कहाप्रेमचंद को दलितविरोधी का तमगा दियालोहिया को फासिस्ट और अमृतलाल नागर को बेकार उपन्यासकार बताया-चौतरफा मोर्चा खोले थे मुद्राराक्षस।

सामाजिक क्षेत्र में जो काम फुले ने कियाराजनीतिक क्षेत्र में जो काम आंबेडकर ने कियावही काम साहित्य के क्षेत्र में मुद्राराक्षस ने किया। अफसोस कि शूद्र विरोधी आलोचकों की नजर में मुद्राराक्षस सुनार ही रहे!

  • राजेन्द्र प्रसाद सिंह

 

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