UNLOCK प्रक्रिया में ढिलाई के हो सकते हैं घातक परिणाम

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UNLOCK प्रक्रिया में ढिलाई के हो सकते हैं घातक परिणाम। बता रही हैं बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान की राजस्थान स्टेट की ब्रांड अंबेस्डर अनुपमा सोनी
UNLOCK प्रक्रिया में ढिलाई के हो सकते हैं घातक परिणाम। बता रही हैं बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान की राजस्थान स्टेट की ब्रांड अंबेस्डर अनुपमा सोनी
  • अनुपमा सोनी

UNLOCK प्रक्रिया में ढिलाई के हो सकते हैं घातक परिणाम। इसलिए आवश्यक है कि UNLOCK प्रक्रिया में ढिलाई बरतने से हम परहेज करें। सीधे कहें तो और सतर्कता जरूरी है। एक दशक पूर्व साल  2009 में स्वाइन फ्लू ने दुनिया में दस्तक दी थी, जिसका दंश दुनिया के 179 देशों ने झेला था। फिर एक नई वैश्विक महामारी कोरोना ने दुनिया भर में अपना आतंक फैलाया है। एच1एन1 से दस गुना अधिक शक्तिशाली इस कोरोना वायरस (कोविड-19) ने दुनिया भर के 200 से अधिक देशों को गंभीर रूप से घेर लिया है।

कोरोना ने दुनिया भर के चिकित्सकों और वैज्ञानिकों को हैरत में डाल रखा है। इस घातक वायरस को कंट्रोल करने के लिए दुनियाभर के डॉक्टर्स वैक्सीन खोजने में लगे है, लेकिन वैक्सीन की सफलता तो दूर अभी तक इसके पूरे लक्षणों की भी खोज नही हो सकी है। भारत में लगातार संक्रमितों का ग्राफ बढ़ रहा है। इससे निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशव्यापी लॉकडाउन को ठोस तरीके से लागू करते  हुए देश की जनता को इसका अनुसरण करने की बात कही।

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हालांकि शुरूआती दिनों में लोगों को प्रशासन के द्वारा सख्ती से लॉकडाउन का पालन करवाया गया लेकिन अब ना इसमें सख्ती दिख रही है ना ही प्रशासन लोगों को घरों में कैद करने में पूरी तरह कामयाब हो सका है। हाल ही में शराब वितरण को लेकर पूर्व में लग रहे कयासों पर लोगों ने पूरी तरह पानी फेर दिया। सैकड़ों की तादाद में लोग एकजुट हुए और लॉकडाउन को ठेंगा दिखाते हुए प्रशासन से  ही आँख मिचोली कर गए। सरकार के फैसले के आगे बेबस पुलिस प्रशासन ने भी ये मंजर अपनी आँखों से देखा और भीड़ को अनियंत्रित तरीके से महज एक मीटर दूर रहकर शराब लेने की नसीहत देती रही।

जानकारी के मुताबिक एक दिन में अकेले राजस्थान में 59 करोड़ की शराब खरीदी गई, लेकिन करीब महीने भर से चल रहे ऑपरेशन लॉकडाउन को लोगों ने महसूस तक नहीं किया। देश के कई हिस्सों में लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग का जमकर मखौल उडाया गया।

फिलहाल लॉकडाउन हटा लिया गया है साथ ही अनलॉक पूरे देश में शुरू हो गया है, लेकिन बात अगर इसके घातक परिणामों की करें तो हाल ही में अकेले राजस्थान में राज्य के सबसे अधिक मरीजों का आंकड़ा एक ही दिन में पूरा हो गया। ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकस साइंसेज(एम्स) के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कोविड-19 को अभी वृहद स्तर पर फैलने की बात कही है। इसके अलावा डब्ल्यूएचओ के अध्यक्ष डॉक्टर टेडरोज गेब्रेयेसोस ने भी इस महामारी के परिणामों को आने वाले समय में अधिक घातक होने की बात कही है।

हालांकि पूर्व में प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों को स्वास्थ्य संगठन ने सराहा था लेकिन साथ ही चेताया भी था कि अब देखना यह है कि अगर लॉकडाउन में गंभीरता नहीं बरती गई तो परिणाम बेहद गंभीर स्थिती में पहुंच सकते है। इसके लिए जरूरी है कि अल्टरनेटिव लॉकडाउन या फिर अनलॉक  प्रक्रिया को गंभीरता से अपनाया जाएं। ताकि काफी हद तक परिणाम बेहतर स्थिती में पहुंच सके।

दूसरी तरफ अनियमित और अनिश्चित स्क्रीनिंग होने की वजह से संक्रमण का खतरा लगातार बढ रहा है। अकेले राजस्थान के 30 जिलों के शहरी और ग्रामीण परिवेश में संक्रमण अपने पांव पसार रहा है । यहां तक की स्क्रीनिंग और सेनेटाइजेशन का कार्य अभी तक ग्रामीण इलाकों में हुआ भी नही। प्रशासन ने महज शहरी इलाकों में ही कोरोना प्रभावित लोगों को अपनी कार्यशैली में शामिल किया बल्कि  ग्रामीण इलाके इससे अछूते रह गए। कम्युनिटी स्प्रीडिंग होने की वजह से कोविड का खतरा अब और बढ़ गया है। राज्य के अधिकांश जिलों से सटे हुए ग्रामीण इलाकों में लोग अब बेखौफ नजर आने लगे है। जरूरत का सामान लेने के लिए घर से बाहर निकल रहे लोग अब बिना किसी डर के सोशल डिस्टेंसिंग का मजाक बना रहे है।

ऐसे में बिना दूसरे व्यक्ति से एक मीटर की दूरी रखे हुए लोग घरेलू सामान खरीद रहे है जो खतरे से खाली नही है। यहां तक की लोग सेनेटाइजेशन और मास्क का इस्तेमाल भी नहीं कर रहे है। हालांकि कोरोना का दुनिया में पैर पसारने से पूर्व लोगों की सुरक्षा के लिए और बेहतर नीतियां बनाने के लिए कई देशों ने मांग उठाई थी, यहां तक कि हाल ही में जर्मनी के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी एंड हाइजीन के  वैज्ञानिक डॉ सुचरित भाकडी ने जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल को एक खुला पत्र लिखकर कोविड 19 के संक्रमण से हर क्षेत्र विशेष को उभारने के उपायों पर जल्द से जल्द दोबारा विचार करने की बात कही थी। इसके अलावा उन्होंने कहा कि इस घबराहट के दौर में मजबूत कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि लोगों में अधिक से अधिक जागरूकता आए और वे इस गंभीर बीमारी से खुद की रक्षा करें।

शुरुआती दौर में जनता कर्फ्यू का लोगों ने पालन किया था लेकिन अब उस तरह का कोई और वैकल्पिक माध्यम सरकार नहीं खोज रही है। संक्रिमतों के बढ़ते ग्राफ को रोकने के लिए जरूरी है कि सरकार ठोस नीतियां बनाकर अनलॉक को सफल बनाएं।

(लेखिका बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान की राजस्थान स्टेट की ब्रांड एम्बेसडरहैं)

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