RJD सवर्णों को साधने में जुटा, भूराबाल से किया किनारा

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तेजस्वी यादव
तेजस्वी यादव

पटना। बिहार फिलहाल दलित-पिछड़े और सवर्ण राजनीति के घनचक्कर में फंसा है। दलितों के प्रति लगभग सभी दलों का झुकाव हाल के दिनों में बढ़ा है। खासकर एससी-एसटी ऐक्ट में संशोधन कर एनडीए ने दलितों के प्रति दरियादिली दिखाई है। अब राष्ट्रीय जनता दल नीत बिहार में बना महागठबंधन सवर्णों को आकर्षित करने की फिराक में है। आरजेड़ी की मंगलवार को हुई बैठक का लब्बोलुआब यही है।

पूर्व उपमुख्यमंत्री और राजद के नेता तेजस्वी यादव की अगुवाई में राबड़ी देवी के निवास पर राजद के वरिष्ठ नेताओं की मंगलवार को बैठक हुई। बैठक के बाद तेजस्वी ने साफ किया उनकी पार्टी सवर्णों के प्रति न्याय की पक्षधर है। पत्रकारों के सवाल पर उन्होंने इस बात से इनकार किया कि भूराबाल का नारा उनके पिता लालू प्रसाद ने दिया था। बाद में राजद प्रवक्ता और राज्यसभा सदस्य मनोज झा ने कहा कि सवर्णों के आरक्षण की बात संविधान के दायरे में नहीं आती, इसलिए इस पर कुछ कहना उचित नहीं, लेकिन सवर्णों में आर्थिक रूप से कमजोर लोग हैं। उनके बारे में सोचना चाहिए।

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मालूम हो कि लालू-राबड़ी के शासन के वक्त विपक्ष द्वारा यह बात जोरदार तरीके से कही जाती थी कि राजद सवर्ण विरोधी है और इसके नेता लालू प्रसाद ने भूराबाल (भूमिहार, राजपूत, ब्राह्मण, लाला) साफ करो का नारा दिया है। हालांकि उनके इस तरह के किसी आह्वान या बयान के कोई सबूत नहीं मिलते। लालू ने अलबत्ता एमवाई (मुसलिम-यादव) समीकरण की बात जरूर कही थी, जो अभी तक राजद की ताकत है और दबंगता से राजद इस समीकरण को दोहराते रहता है।

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भूराबाल वाले कथित नारे की सच्चाई भी सतह पर कभी नहीं दिखी। लालू के साथ जगदानंद सिंह, प्रभुनाथ सिंह और रघुवंश प्रसाद सिंह जैसे कद्दावर राजपूत नेता तब भी थे और आज भी बने हुए हैं। शिवानंद तिवारी जैसे ब्राह्मण नेता भी बीच के कुछ समय को छोड़ दें तो आज तक बने हुए हैं।

बहरहाल सवर्णों के प्रति राजद का प्रेम अनायास ही नहीं है। सारे दलों में दलित-पिछड़े वोटरों को आकर्षित करने की होड़ लगी है। सवर्णों के साथ कोई खड़ा नहीं दिखता। राजद का फंडा यह है कि बिहार में एमवाई समीकरण के 30 प्रतिशत वोट तो उसके हैं ही, अगर अगड़ों की हमदर्दी राजद ने जीत ली तो बिहार में मिशन 2019 ही नहीं, 2020 भी फतह करना आसान हो जाएगा।

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