हाईकोर्ट की पहल पर जिला जज की बेटी को आजादी मिली

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पटना। पटना हाईकोर्ट ने आद एक रोचक मामले में दिलचस्प फैसला सुनाया। बिहार के एक जिला जज ने अपनी वयस्क बेटी की स्वतंत्रता पर बंदिश लगा दी थी। हाईकोर्ट ने लड़ी काबयान सुनने के बाद उसके पक्ष में फैसला दिया। चाणक्या ला यूनिवर्सिटी की छाथ्र रही उस लड़की को ला कालेज के रजिस्ट्रार 15 दिनों तक उसे गेस्टहाउस में रखेंगे और उसका कुशल क्षेम पूछते रहेंगे। गेस्ट हाउस में उसके रहने खाने के अलावा स्वतंत्र रूप से शहर में घूमने, परिचितों से मिलने की आजादी होगी।

अगले 15 दिनों तक पीड़िता को चाणक्य लॉ यूनिवर्सिटी के गेस्ट हाउस में रहने और पटना शहर में घूमने-फिरने और अपने मनचाहे व्यक्ति से भेंट-मुलाकात करने की सुविधा देने का आदेश हाईकोर्ट ने लॉ यूनिवर्सिटी के निबन्धक को दिया है। साथ ही प्रत्येक दिन निबन्धक को उक्त लड़की से भेंट कर उसका कुशलक्षेम भी जानने का आदेश दिया गया है। मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश राजेन्द्र मेनन एवं न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए उक्त आदेश दिए। पूरी सुनवाई मुख्य न्यायाधीश के बंद चेंबर में हुई। सुनवाई के दौरान पीड़िता एवं उसके माता-पिता भी मौजूद थे। कोर्ट से पूछने पर लड़की ने बताया कि वह बालिग है और उसकी जन्मतिथि 28 सितंबर, 1993 है। उसने 5 वर्षीय लॉ स्नातक की पढ़ाई चाणक्य लॉ यूनिवर्सिटी से साल 2016 में पूरी की।

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वह अपनी मर्जी से जिस लड़के से शादी करना चाह रही है वह उसके माता-पिता को पसंद नहीं इसलिए वह अपने मां-पिता के साथ रहने में सहज महसूस नहीं करती। लड़की के इन कथनों और परिस्थितियों के मद्देनजर हाईकोर्ट ने उक्त आदेश दिया। मामले की अगली सुनवाई 12 जुलाई की दोपहर को होगी। अपने तीन पन्नों के आदेश में मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने इस पूरे मामले में मीडिया के रवैये पर नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए मीडिया को आगाह किया है कि मामले की खबर छापते वक्त लड़की एवं उसके माता-पिता या परिजन का नाम नहीं आना चाहिए या ऐसी कोई बात नहीं छपनी चाहिए जिससे लड़की या उसके माता-पिता की बदनामी हो। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश कक्ष में लीगल रिपोर्टरों के जाने पर भी पाबन्दी लगा दी गयी थी।

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