विपक्ष का बंद जनसमर्थन में फेल, गुंडागर्दी में पास : राजीव

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पटना। भारत बंद में हुई हिंसा पर कांग्रेस तथा राजद को निशाने पर लेते हुए पूर्व विधायक और प्रदेश भाजपा प्रवक्ता श्री राजीव रंजन ने कहा कि जनसमर्थन में यह फेल हो गया, लेकिन गुंडागर्दी और अराजकता में पास माना जायेगा। आज हुए भारत बंद में शामिल दलों ने आन्दोलन के नाम पर जो उत्पात मचाया, उससे उनकी आम जनमानस के प्रति सोच का पता चलता है। उनके उपद्रव से यह साबित हो गया कि सामंतवादी मानसिकता के ये दल कभी भी जनता का भला नहीं सोच सकते और न इनमें कोई बदलाव ही आ सकता है। इन दलों के नेता अपनी ताकत दिखाने में लगे हुए थे।

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उन्होंने कहा कि दलितों और गरीबों के हित की बात करने वाले इनके नेताओं और समर्थकों का प्रकोप आज सबसे ज्यादा गरीबों पर ही टूटा। इस बंद में राजद और कांग्रेस ने हिंसा और उपद्रव के पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। इन्होंने लोगों के मन में जंगलराज के समय की यादें ताजा कर दीं, जब केवल अपनी ताकत दिखाने के लिए ये दोनों दल अक्सर छोटे-छोटे मुद्दों पर बिहार बंद कर दिया करते थे। बंद में सड़कों पर इनके कार्यकर्ता इसी तरह लोगों में खौफ पैदा किया करते थे और जनता डर के मारे घरों में दुबकी रहती थी। हकीकत में भारत बंद को समर्थन देने के बहाने कांग्रेस-राजद और इनके सहयोगियों ने अपनी शक्ति दिखाने की भरपूर कोशिश की थी, लेकिन बिहार की 99% जनता ने इसमें उनका साथ नही दिया, जिससे उनका गुस्सा राहगीरों, गरीबों और मजदूरों पर कहर बन कर टूटा।

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एक तरफ बंद को लेकर इन दलों के समर्थक सड़क पर खुलेआम तांडव करते रहे, तो दूसरी ओर सैकड़ों गाड़ियों, बसों और ट्रेनों में फंसे महिलाओं-बच्चों समेत हजारों यात्री भूख और प्यास से कुलबुलाते रहे। यहाँ तक कि कई जगहों पर तो बंद समर्थकों ने एंबुलेंस में जीवन और मौत से जूझ रहे मरीजों पर तरस नहीं खाया और उन्हें रोके रखा। कई जगहों पर इन दलों के कार्यकर्ताओं ने गरीब फेरीवालों और खोमचेवालों की आजीविका के साधनों को नष्ट कर दिया और उनके ठेलों को आग के हवाले कर दिया। इन दलों के नेता बताएं कि आखिर यह कैसा बंद था, जिसमें इतने व्यापक स्तर पर तोड़-फोड़ और हिंसा हुई?  वह बताएं कि यह विरोध का कौन-सा तरीका है, जिसका शिकार आम जनता होती है? पूरे दिन लोग इनकी हिंसा से त्राहि-त्राहि करते रहे और जनता के दुःख से पूरी तरह बेखबर राजद-कांग्रेस और उनके सहयोगी दलों के कार्यकर्ताओं के लिए बिहार बंद महज मनोरंजन का साधन बना रहा। हकीकत में इन दलों के नेताओं को हुई हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ के लिए पूरे बिहार की जनता से माफ़ी मांगनी चाहिए।

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