मुजफ्फरपुर बालिका यौन शोषण मामले की CBI जांच को नीतीश तैयार

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पटना। मुजफ्फरपुर बालिका गृह में बहुत ही घृणित घटना घटी है और पुलिस द्वारा मुस्तैदी से इसकी जांच की जा रही है। सरकार निष्पक्ष जांच के लिए प्रतिबद्ध है, किन्तु एक भ्रम का वातावरण बनाया जा रहा है। भ्रम का वातावरण नहीं रहे, इसलिए मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और प्रधान सचिव (गृह) को तत्काल इस सम्पूर्ण मामले को सीबीआई को सौंपने का निर्देश दिया है।

सबूत के साथ दाखिल हुई चार्जशीट

इधर मुजफ्फरपुर कोर्ट में इस मामले की चार्जशीट गुरुवार को दाखिल कर दी गयी। पॉक्सो की विशेष अदालत में 10 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गयी है। मामले की जांच अधिकारी महिला थाना की थानाध्यक्ष ज्योति कुमारी ने चार्जशीट दाखिल की है।

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चार्जशीट में मेडिकल रिपोर्ट को भी लगाया गया है। मेडिकल रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि की बात कही बतायी जाती है। आरोप पत्र में सभी आरोपियों पर लगे आरोपों के खिलाफ सबूत भी दाखिल किये गये हैं। एसएसपी हरप्रीत कौर के निर्देश पर बुधवार को आईओ ज्योति कुमारी और अन्य पुलिस अधिकारियों ने चार्जशीट तैयार की थी। 3, 5 और 24 जून को इस मामले में गिरफ्तारियां हुई थीं।

मामले का खुलासा होने के बाद 30 मई को साहू रोड स्थित बालिका गृह से लड़कियों को मोकामा, पटना और मधुबनी शिफ्ट कर दिया गया था। समाज कल्याण विभाग के सहायक निदेशक दिवेश कुमार शर्मा ने 31 मई को मुजफ्फरपुर के महिला थाने में एफआईआर दर्ज करायी थी। इसमें सेवा संकल्प व विकास समिति को आरोपित किया गया था।

पुलिस ने 3 जून को बालिका गृह के मकान मालिक सह संचालक ब्रजेश ठाकुर, अधीक्षक इंदू देवी, किरण कुमारी, नेहा कुमारी, मंजू देवी, चंदा देवी, हेमा मसीह और मीनू देवी को गिरफ्तार किया था। 5 जून को सीडब्ल्यूसी के सदस्य विकास कुमार और 24 जून को सीपीओ रवि रौशन को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।

NHRC ने कहा- फेल हो गयी सरकार

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मामले का संज्ञान लेते हुए बिहार के मुख्य सचिव और डीजीपी से तत्काल रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने साफ कहा है कि बिहार में सरकार और प्रशासन अपने रक्षा गृह में रह रहीं लड़कियों की इज्जत बचाने में फेल हो गये।

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आयोग ने मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर स्वत: संज्ञान लिया है। आयोग ने बिहार के मुख्य सचिव और डीजीपी को भेजे पत्र में कहा है कि रक्षा गृह को लड़कियों को सुरक्षा देने के लिए बनाया गया था। यह कल्पना से परे है कि वहीं लड़कियों के साथ इस तरह की हैवानियत हुई। यह बेहद गंभीर बात है कि इस घटना में सरकारी अधिकारियों और रक्षा गृह के संचालकों की संलिप्तता सामने आ रही है।

आयोग ने भेजी सवालों की सूची

मानवाधिकार आयोग ने राज्य सरकार को सवालों की जो सूची भेज कर मुख्य सचिव व डीजीपी से पखवाड़े भर में जवाब देने को कहा है। आयोग के सवाल-

  1. क्या राज्य सरकार के समाज कल्याण विभाग ने मुजफ्फरपुर रक्षा गृह चलाने की अनुमति दी थी। अगर अनुमति दी गयी थी तो उसकी निगरानी के क्या इंतजाम किये गये थे। निगरानी के इंतजाम थे तो ऐसी घटना कैसे हुई।
  2. क्या पीड़ित लड़कियों में से कोई अनुसूचित जाति या जनजाति से है। कोई लड़की इस तबके से आती है तो क्या पुलिस ने SC/ST एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। राज्य सरकार ने SC/ST एक्ट के तहत पीड़ित लड़कियों की क्या आर्थिक मदद की है।
  3. क्या इस घटना में किसी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता उजागर हुई है। अगर ऐसा है तो सरकार ने क्या कदम उठाये हैं।

 

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