पिछड़ा-अतिपिछड़ा वर्ग एकजुटता के लिए बेचैन है : राजीव रंजन

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पटना। राजगीर में रविवार को आयोजित हुए पिछड़ा-अतिपिछड़ा महासम्मेलन में लोगों के हुए भारी जुटान को उनकी एकता का प्रतीक बताते हुए प्रदेश भाजपा प्रवक्ता सह पूर्व विधायक श्री राजीव रंजन ने कहा, कल भारी बारिश के बावजूद राजगीर में हुए महासम्मेलन में जिले के कोने-कोने से उमड़ी हजारों लोगों की भीड़ से एक बात साबित हो गयी कि पिछड़ा-अतिपिछड़ा समाज के लोग अपने समाज की भलाई, विकास और आपसी एकजुटता के लिए किस कदर व्याकुल हैं। सम्मेलन में पूरे समाज के सामने भी यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुआ कि पिछड़ा-अतिपिछड़ा समाज एक परिवार है, अत: इन्हें खुद को पिछड़ों का मसीहा बताने वाले फाइव-स्टार नेताओं के फैलाए जात-पात के चक्रव्यूह से बचते हुए, एकजुट रह समाज के विकास के लिए कार्य करते रहना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यह यथार्थ है कि इस समाज के युवाओं में केन्द्रीय योजनाओं की समुचित जानकारी नहीं रहने के कारण इस समाज के युवाओं, महिलाओं, किसानों  और अन्य लोगों का उतना विकास नहीं हो पाया है, जितना होना चाहिए था। इसकी सबसे बड़ी वजह वही लोग हैं, जो इस समाज के स्वयंघोषित नेता बने हुए हैं। ये लोग चाहते ही नहीं कि पिछड़ा समाज आगे बढ़े। इन्हें डर रहता है कि अगर इस समाज में जागरूकता आ गयी तो यह समाज उनका दाना-पानी तक बंद करवा देगा। इसीलिए ये लोग इनके विकास की बात तो करते हैं, लेकिन अंदर ही अंदर इस समाज को पीछे रखने की साजिश भी रचते रहते हैं।

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श्री रंजना ने चेतावनी दी कि ऐसे लोग समझ लें कि पिछड़े-अतिपिछड़े समाज को एकजुट करने के लिए अब हम लोग बिहार के कोने-कोने तक जाने वाले हैं और इनकी किसी भी साजिश को पिछड़ा समाज के सहयोग से कामयाब नहीं होने देंगे। आज देश के प्रधानमंत्री तथा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष दोनों ही अतिपिछड़े समाज से आते हैं, जो इस समाज का दुख-दर्द अच्छे से समझते हैं। इसीलिए भाजपा निरंतर इस समाज की आवाज विभिन्न मोर्चों से उठाती रहती है।

अभी हाल ही में भाजपा के प्रयासों से लोकसभा में पिछड़ा-अतिपिछड़ा आयोग से संबंधित बिल पास होना इसका सबसे बड़ा सबूत है। ज्ञातव्य हो कि 1955 से ही लगातार मांग के बाद भी यह बिल अभी तक लंबित था।

श्री रंजन ने आगे कहा, आज केंद्र की योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने के लिए पिछड़ा-अतिपिछडा समाज को हर हाल में एकजुट होना चाहिए और पुराने ढर्रे की जात-पात की राजनीति को त्यागते हुए देश में हो रहे विकास का भागीदार बनना चाहिए। साथ ही इन्हें पिछड़ों के तथाकथित नेताओं के लच्छेदार और भावनात्मक भाषणों से बचना चाहिए, जिन्होंने अपनी बातों में फंसा कर इस समाज का आज तक उपयोग किया है। हकीकत में पिछड़ा समाज कोटा नहीं, बल्कि विकास का प्रत्यक्ष सहभागी बनना चाहता है और भाजपा उन्हें उनका यह हक दिलाने के लिए पूरी तरह कृतसंकल्पित है।

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