झोपड़पट्टी के बच्चों में शिक्षा का अलख जगा रहे मुरली झा

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पटना। इंसान अगर अपनी मंजिल पर पहुंचने के लिए दृढ़ निश्चय कर ले तो उसे मंजिल जरूर मिल जाती है। इस कहावत को सत्य सिद्ध कर दिखाया है मधुबनी के एक छोटे से गांव मधेपुर में साधारण परिवार में जन्मे मुरली झा ने। इन दिनों वह पूरे पटना वासियों के लिए चर्चा का विषय बने हुए हैं। इसकी वजह कुछ और नहीं, बल्कि शिक्षा का अलख है। मुरली भाग-दौड़ भरी जिंदगी में जो पल बचता है, उसे गरीब परिवारों के झुग्गी-झोपड़ियों में रहनेवाले बच्चों को शिक्षित करने में लगा देते हैं।

मुरली का बचपन आम बच्चों की तरह संघर्षों से होकर गुजरा है। वे बताते हैं कि जब गांव के स्कूल में पढ़ने जाते थे तो देखते थे कि बहुत सारे बच्चे मजबूरी में पढ़ने नहीं आ पाते। किसी के पास स्लेट नहीं होती, तो किसी के कपड़े नहीं होते थे। आर्थिक तंगी इतनी थी कि दो जून की रोटी के लिए बच्चों को बीच में पढ़ाई छोड़कर काम करना पड़ता था। कई तरह कि समस्याएं खड़ी हो जाती थीं। फिर भी मुरली उन बच्चों को अपने पॉकेट खर्च से बचाए हुए रुपयों से कुछ हद तक मदद करने की कोशिश करते रहते थे।

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बचपन में गरीबी को इतने करीब से देखने के बाद मुरली के मन में सहायता करने के लिए हर समय ख्याल उत्पन होते रहते थे। L.N.M.U के C.M कॉलेज दरभंगा से M.COM पास करने के बाद जब वे पटना आये तो सबसे पहले गरीब बच्चों को शिक्षित करने का ठान लिया।

पटना में ही उनके मित्र से गायत्री परिवार द्वारा संचालित बाल संस्कार शाला के बारे में जानकारी मिली। मित्र से मिली जानकारी के बाद मुरली को लगा कि उनका मुकाम अब बहुत जल्द मिलने वाला है। जो सोचकर वे मधुबनी से पटना आये थे, वह अब पूरा होते दिखा। इस तरह से मुरली 2013 में गायत्री परिवार से जुड़कर बच्चों को शिक्षित करने में लग गये।

पटना जिले के संपतचक प्रखंड स्थित चैनपुर गांव में मुरली सैकड़ों गरीब तपके के बच्चों को निःशुल्क शिक्षा दे रहे हैं। इतना ही नहीं, जिन बच्चों के पास पठन-पाठन की सामग्री नहीं होती है, वैसे बच्चों को चिन्हित कर सभी जरूरत के सामान वहां फ्री में बांटे जाते हैं। इससे गांव के लोगों में मुरली की छवि काफी लोकप्रिय हो गयी है। लोग इस कार्य को बेहद ही सराह रहे हैं।

मुरली के पिता वरुण झा स्वास्थ्य विभाग के कर्मी हैं, जबकि माता कुशल गृहिणी। वह घर को संभालती हैं। मुरली बताते हैं कि एक समय उनकी जिंदगी में ऐसा भी आया, जब मां रोने लगी। उन्हें किसी ने अफवाह में बता दिया था कि मुरली गायत्री परिवार से जुड़ गया है। अब बाबा हो जायेगा। कभी शादी विवाह नहीं करेगा। जो लोग इससे जुड़ते हैं, वे कुवारे ही रहते हैं। फिर भी मुरली ने हार नहीं मानी। माँ को समझाने के साथ अभी तक लगभग 5 वर्षों से गायत्री परिवार के सच्चे सिपाही के तौर पर कार्यरत हैं।

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मिली जानकारी के अनुसार बाल संस्कार शाला पटना जंक्शन के प्लेटफार्म संख्या 1, राजेंद्र नगर प्लेटफार्म संख्या 1 सहित शहर की कुल 30 जगहों पर नियमित 4:00 बजे से 6:00 बजे तक संचालित होती है।

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