काशी विश्वनाथ मंदिर के गायनाचार्य के निष्कासन का मुद्दा गरमाया

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  • हरेन्द्र शुक्ला 

वाराणसी।  सावन के पहले सोमवार को श्रृंगार आरती के समय 24 वर्षो से लगातार बाबा श्रीकाशी विश्वनाथ जी को स्वरांजलि दे रहे गायनाचार्य पं राधिका रंजन तिवारी को जबरन उनकी सेवा से वंचित किये जाने की घटना अखबारो में प्रकाशित होने के बाद मंदिर प्रशासन बौखलाहट में है। खासकर मुख्य कार्यपालक अधिकारी आपे से बाहर होते जा रहे हैं।

पर्याप्त प्रमाणों के बावजूद मंदिर प्रशासन मातहतों की गलती पर खेद व्यक्त करने की जगह इस पूरे प्रकरण को झुठलाने की चेष्टा कर रहा है। इस संबंध में मंदिर प्रशासन ने बकायदा एक विज्ञप्ति जारी की है। विज्ञप्ति में पत्रकारों की विश्वसनीयता पर ही सवाल खड़े कर दिये गये हैं।

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मुख्य कार्यपालक अधिकारी के हस्ताक्षर से जारी विज्ञप्ति में प्रयोग की गई भाषा भी आपत्तिजनक है। उन्होंने पत्रकारों को तथाकथित का संबोधन देकर अपमानित किया है। बताते चलें कि बाबा दरबार में 24 वर्षो से मंगला आरती में भजन गाकर बाबा को जगाने वाले पं राधिका रंजन तिवारी ने मंदिर प्रशासन पर यह आरोप लगाया है कि उन्हें भजन गाने से वहां मौजूद कर्मचारियों ने मना कर दिया था। लिहाजा पं राधिका ने 12 सौ रुपये का टिकट लेकर बाबा को भजन सुनाया और लौट गये।

इस आशय की खबर अखबारों में छपी। इस बीच पीड़ित गायनाचार्य पं राधिका रंजन तिवारी ने शनिवार को फिर अपने आरोप को दोहराया और इस मामले में मंदिर प्रशासन को पूर्वाग्रहों से बचते हुए सच को तलाशने का आग्रह किया।

इस संबंध में बाबा श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विशाल सिंह का कहना है कि वे लगातार गायनाचार्य पं राधिका रंजन तिवारी से सम्पर्क करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि उनकी बातें सुनी जा सकें। उनसे संपर्क के लिए लगातार प्रयास जारी है। श्रीकाशी विश्वनाथ न्यास परिषद के अध्यक्ष डा अशोक द्विवेदी इन दिनों शहर से बाहर हैं। मोबाइल फोन से संपर्क करने पर उन्होंने कहा कि मामला उनके संज्ञान में अभी नहीं आया है, लेकिन न्यास परिषद की बैठक में यदि मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने यह मुद्दा लाया तो इस पर अवश्य चर्चा होगी।

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