सुशील मोदी गलत बयान दे रहे हैं, आनंद माधव का आरोप

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आनंद माधव
आनंद माधव

पटना। सुशील मोदी गलत बयान दे रहे हैं। नेहरू के बारे में उनकी टिप्पणी का इतिहास से कोई लेना-देना नही है। इससे बहुत ही दुख होता है। जब कोई बिना इतिहास की जानकारी रखे अपने स्वार्थ सिद्धि के लिये भड़काऊ एवं गलत बयान जारी करता है तो दुख स्वाभाविक है। सूशील मोदी जी का बयान कुछ ऐसा ही है। उनका बयान कई अखबारों में छपा है। यह कहना है मैनिफ़ेस्टो कमिटी एवं रिसर्च विभाग, बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के चेयरमैन आनन्द माधव का।

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उन्होंने कहा कि कश्मीर मुद्दे पर सोशल मीडिया पर भी एक तबका पंडित जवाहरलाल नेहरू को दोष देने का कोई मौका नहीं छोड़ता, लेकिन इतिहास में वे खांचे भी बने हैं, जो बताते हैं कि नेहरू कश्मीर को लेकर कितना सटीक और दूरगामी सोच रहे थे। तत्कालीन गृह मंत्री और उप प्रधानमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने अगर नेहरू जी की मानी होती तो न तो कश्मीर पर कबायली हमला होता और न आज इन हालात का हम सामना करते।

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कश्मीर पर कबायली हमले के एक महीने पहले 27 सितंबर 1947 को पंडित नेहरू ने सरदार पटेल को पत्र लिखकर आगाह किया, लेकिन पटेल इसे अमल में नहीं ला पाए। नवजीवन प्रकाशन मंदिर के ‘सरदार पटेल चुना हुआ पत्र व्यवहार’ भाग एक में ये पत्र प्रकाशित हुए हैं। इसके खास अंश कुछ इस तरह से हैं :

  1. कश्मीरकी परिस्थिति खतरनाक है और बिगड़ रही है। मुस्लिम लीग पंजाब में और उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत में काफी बड़ी संख्या में कश्मीर राज्य में घुसने की तैयारी में है।
  2. शीतकालके समय कश्मीर का संबंध बाकी भारत से कट जाएगा। मैं समझता हूं कि पाकिस्तान की व्यूह रचना अभी कश्मीर में चुपके से घुस जाने की है और आगामी शीत ऋतु के कारण कश्मीर कम, ज्यादा हिंदुस्तान से कट जाये तब बड़ी सैनिक कार्रवाई करने की है।
  3. मुझेसंदेह है कि महाराजा और उनके राज्य की सेनाएं लोक सहायता के बिना स्वयं ही इस स्थिति का सामना कर सकेंगे।
  4. शेख अब्दुल्ला और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं को जेल से मुक्त कर दिया जाए, उनसे मित्रता साधने का प्रयत्न किया जाए, उनका सहयोग मांगाजाए, उसके बाद भारतीय संघ में मिलने की घोषणा की जाए। एक बार कश्मीर राज्य भारत से जुड़ जाए तो फिर पाकिस्तान के लिए भारतीय संघर्ष में आए बिना अधिकृत रूप में या अनधिकृत रूप में कश्मीर पर आक्रमण करना बहुत कठिन हो जाएगा।
  5. शेख अब्दुल्ला पाकिस्तान से अलग रहने को बड़े उत्सुक हैं और सलाह-मशविरे के लिए हम पर बहुत आधार रखते हैं।
  6. आजकी उलझी हुई स्थिति में क्या होगा, इसकी गारंटी कोई नहीं ले सकता। परंतु मैंने जो रास्ता सुझाया है, वह मुझे ज्यादा से ज्यादा समझदारी भरा लगता है और उसका कोई परिणाम निकलने की ज्यादा से ज्यादा संभावना है। परंतु महत्व की बात यह है कि इसमें विलंब नहीं होना चाहिए। इसमें समय के महत्व को भुलाया नहीं जा सकता, अगर विलंब किया गया तो शीतकाल के आगमन से हम कश्मीर से पूरी तरह कट जाएंगे।
  7. आपकी सलाह स्वाभाविक रूप से महाराज पर काफी असर डालेगी। मुझे आशा है कि आप इस मामले में कोई ऐसा कदम उठाएंगे, जिससे घटनाओंकी गति बढ़े और वे सही दिशा में मोड़ लें। नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ सही व्यवहार किया जाए, तो वह हमारे लिए बड़े लाभ की साबित हो सकती है। इस लाभ को खोना बड़ा दुखद होगा। शेख अब्दुल्ला ने बार-बार इस बात का आश्वासन दिया है कि वे सहयोग करना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि वे मेरी सलाह के अनुसार काम करेंगे।
  8. मैं एक बार और कहूंगा कि इस मामले में समय का बहुत बड़ा महत्व है और सब बातें इस ढंग से की जानी चाहिए कि शेख अब्दुल्ला के सहयोग से काश्मीर जल्दी से जल्दी भारतीय संघ में जुड़ जाए।
  9. लेकिन सरदार समय रहते नेहरू की सलाह पर अमल नहीं कर पाए और अक्तूबर 1947 के आखिरी हफ्ते में कश्मीर पर कबायली हमला हो गया। नेहरू जी और कश्मीर के राजा हरि सिंह के बीच हुआ पत्राचार भी एक बेबाक़ सच आपके सामने रखता है, सच से किसी को मतलब हो तब न।

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