NRC, CAA और NPR पर नीतीश इधर या उधर, इंतजार करें खरमास तक

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Nitish Kumar
नीतीश कुमार

पटना। NRC, CAA और NPR के मुद्दे पर नीतीश इधर रहेंगे या उधर जाएंगे, यह बहुत जल्द खरमास खत्म होने के बाद तय हो जाएगा। बिहार की राजनीति को इन दिनों ठंड मार गई है। बात-बेबात बोलते रहने वाले बयान वीर भी शांत बैठे हुए हैं। सीएए, एनआरसी और एनपीआर को लेकर बिहार की सियासत में हाल तक प्याले में तूफान की तरह अचानक जो उबाल आ गया था, उस पर भी आर-पार की बतकही अभी शांत है।

विपक्ष इन मुद्दों पर हमलावर तो था ही, सत्ता पक्ष यानी एनडीए के घटक दलों के बीच भी बयान और बहस का सिलसिला तेज हो गया था। राष्ट्रीय जनता दल की गतविधि भी इन मुद्दों पर अभी ठपप्राय है।

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यह अलग बात है कि खरमास में पोस्टर वार जारी है। राजद ने एक दिन पहले ही बिहार में एनडीए शासन की नाकामियों को लेकर एक और पोस्टर जारी किया है। जेडीयू की ओर से अभी तक 3 पोस्टर जारी किए जा चुके हैं। जेडीयू के पोस्टरों में निशाने पर लालू-राबड़ी शासन के 15 साल की दुरवस्था का जिक्र है तो है राजद ने अपने पोस्टरों में भाजपा और जेडीयू दोनों को लपेटा-घेरा है।

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कयास लगाए जा रहे हैं कि खरमास बाद बिहार की राजनीति पूरी तरह चुनावी मोड में आ जाएगी। बिहार में विधानसभा के चुनाव नवंबर में होने हैं। जेडीयू और आरजेडी की ओर से चुनाव की तैयारियां पहले ही शुरू हो चुकी हैं। लेकिन अभी तक इसमें सबसे रोचक मुकाबला पोस्टरों में लिखे नारे और उनके संदेशों के बीच है।

जेडीयू ने बिहार में फिर से बाजी मारने की पूरी तैयारी की है। सुनियोजित तरीके से जेडीयू अपने सारे काम को अंजाम दे रहा है। नीतीश कुमार जल-जीवन-हरियाली अभियान के बहाने अपनी उपलब्धियां गिनाने-बताने और भविष्य की योजनाओं का संदेश लोगों तक पहुंचाने के काम मे खुद लगे हैं। जिला और प्रखंड स्तर पर भी जेडीयू की बैठकें-सभाएं होती रही हैं।

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देशभर में भूचाल लाने वाले राष्ट्रीय मुद्दों NRC, CAA और NPR पर फिलहाल नीतीश कुमार ने चुप्पी साध ली है, लेकिन उनके विश्वसनीय और निकटस्थ सिपहसालार लोगों ने केंद्र सरकार के फैसलों के खिलाफ बयानबाजी के बहाने मोर्चा खोल लिया है। राजनीतिक विश्लेषक हालात को देखकर भ्रम में हैं कि जेडीयू क्या उसी एनडीए का हिस्सा है, जिसकी सरकार भाजपा के नेतृत्व में केंद्र में और जेडीयू की अगुआई में बिहार में चल रही है। जेडीयू कभी केंद्र सरकार के फैसलों को ना करता है और राज्य सरकार के फैसलों को सही ठहराता है।

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नीतीश की कार्यशैली और उनके राजनीतिक कौशल को जानने वाले यह भी जानते हैं कि जेडीयू भले ही राष्ट्रीय पार्टी है, लेकिन उसके भीतर फैसला सुप्रीमो के तौर पर होता है यानी कुछ भी अंतिम रूप से नीतीश कुमार ही तय करते हैं। इसलिए भाजपा या राजद से जेडीयू के रार-तकरार का तब तक कोई मायने-मकसद नहीं, जब तक नीतीश जी चुप्पी न तोड़ दें। फिलहाल उन्होंने विवादास्पद मुद्दों पर बोलने से बचने का रास्ता यह कह कर निकाल लिया है कि अभी वे जल-जीवन-हरियाली अभियान में व्यस्त हैं।

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