नीतीश कुमार ने कहा- JDU धारा 370 हटाये जाने के पक्ष में नहीं

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लोक संवाद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार
लोक संवाद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार

पटना। नीतीश कुमार ने कहा है कि JDU शुरू से ही धारा 370 हटाये जाने के पक्ष में नहीं है। राम मंदिर का निर्माण कोर्ट के निर्णय या सहमति से होना चाहिए। बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने सोमवार को ये बातें कहीं। उन्होंने कहा- हम लोग कामन सिविल कोड को थोपे जाने के पक्ष में भी नहीं हैं। केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने से इनकार के बाद जेडीयू ने चार राज्यों में अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा की है। यानी जेडीयू सिर्फ बिहार में अपने को एनडीए में रखने का पक्षधर है।

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महागठबंधन में शामिल होने के न्यौते पर उन्होंने कहा कि हम न उनकी आलोचनाओं पर ध्यान देते थे और न उस पर ध्यान दे रहे, जो आज वे कह रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव के पहले से ही विरोधियों द्वारा मेरे बारे में कई बातें कही जाती थीं। मैं उस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देता था। चुनाव के दौरान जनता के बीच हम लोगों ने अपनी बातों को रखा। हमने 171 मीटिंग की। जनता ने अपना रिस्पांस दिया और जनता ने उन्हें कहां पहुंचाया, आप सब जानते हैं। मीटिंग करने के बाद और चुनाव परिणाम आने के बाद आप सब के प्रश्नों का मैंने जवाब दिया है। अब इन प्रश्नों का कोई मतलब नहीं है। बिहार की जनता ने काम के आधार पर हम लोगों को अपना समर्थन दिया है। हम लोग चुनाव के बाद फिर से लोगों की सेवा में लग गये हैं।

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उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान भ्रमण के क्रम में जनता के बीच की अन्य समस्याओं की जो जानकारी मिली है, उसके समाधान के लिए भी लगे हैं। मंत्रियों, अधिकारियों के साथ लगातार बैठक कर रहे हैं। हाल ही में विधि व्यवस्था से संबंधित समीक्षा बैठक की गयी है और 25 जून को दोबारा इस संबंध में बैठक होगी।

पिछले वर्ष 800 मिलीमीटर से भी कम वर्षा हुई थी। उसके लिए 22 जिलों के 280 प्रखण्डों को सूखाग्रस्त घोषित कर उन्हें सब्सिडी दी गई थी। फसल सहायता योजना का लाभ भी दिया गया था। इस वर्ष भी वर्षा कम होने की संभावना को देखते हुए इन  सबसे  संबंधित  बैठक  भी  की  गई  है।  हम लोगों  ने  पीने  के  पानी  एवं  सिंचाई  संबंधित समस्याओं पर भी बैठक की है। भू-जल स्तर में कमी होने से पेयजल समस्या हो रही है। इसके समाधान के लिए पुराने चापाकलों की मरम्मत, ज्यादा गहराई तक नये चापाकलों को लगाना और इसके अलावा भी जहां समस्या हो रही है, वहां पानी के टैंकर की व्यवस्था की जा रही है। हर घर नल का जल योजना को भी तेजी से लागू किया जा रहा है। पेयजल सकंट की जहां भी समस्या सामने आती है, अधिकारी उस पर त्वरित कार्रवाई कर रहे हैं। इसके लिए प्रत्येक सप्ताह मुख्य सचिव के स्तर पर बैठक होती है।

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केन्द्र सरकार के मंत्रिमंडल में शामिल नहीं होने से संबंधित प्रश्न का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संबंध में हम पहले ही जवाब दे चुके हैं। कहीं कोई समस्या नहीं है। बिहार के विकास के लिए, बिहार के हित के लिए किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं आयेगी, मुझे ऐसा पूरा भरोसा है। केन्द्र द्वारा पहले ही बहुत योजनाओं को मंजूरी दी गई है। उसका क्रियान्वयन किया जा रहा है। जब भी केन्द्र के प्रतिनिधियों से इन्टरैक्शन होता है, उसका सदुपयोग हम लोग बिहार के हित के लिए करते हैं। नीति आयोग की बैठक में हम लोग बिहार के विकास के संबंध में अपनी बातें रखेंगे।

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विशेष राज्य के दर्जें के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि 14वें वित्त आयोग ने अपने एक वाक्य से इसे खारिज कर दिया था, लेकिन 15वें वित्त आयोग के समक्ष बिहार एनडीए के तीनों घटक दलों ने अपनी बात रखी है। अगले पांच वर्षों में बिहार को विकसित राज्य की श्रेणी में लाने के लिए हम लोग काम करेंगे। हाल ही में जदयू राष्ट्रीय कार्यकारिणी की हुई बैठक के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी सदस्यता अभियान चल रहा है और अक्टूबर से पंचायत स्तर से राष्ट्रीय स्तर तक के प्रतिनिधियों का चयन होना है। जदयू को राष्ट्रीय पार्टी बनाना हम लोगों का लक्ष्य है।

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मुख्यमंत्री  ने  कहा  कि  हम लोगों  की  दिलचस्पी काम  में है। सड़कों  के निर्माण के साथ-साथ अब उसके रख-रखाव के बारे में नियम बना दिये गये हैं। भवनों के निर्माण के साथ-साथ उसका मेनटेंनेंस, फर्नीसिंग का भी नियम बनाया गया है। हाल ही में मुजफ्फरपुर में बच्चों की हो रही मौत के संबंध में पूछे गये प्रश्न का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह गोरखपुर से बरसात के पहले शुरू होता है। इस बीमारी को मस्तिष्क ज्वर के रूप में चिन्ह्ति किया गया था। इसके लिए पहले भी कमिटी बनी थी और उसके बारे में कई सुझाव आये थे। इस संबंध में और जागरूकता फैलाने की जरूरत है, ताकि लोग बच्चों की इस बीमारी से बचाव के लिए उचित देखभाल कर सकें। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई कर रहा है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार ने विस्तारपूर्वक जानकारी दी।

भूमि विवाद के निपटारे से संबंधित प्रश्न का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ब्लाक स्तर पर हर सप्ताह थाना प्रभारी और अंचलाधिकारी की बैठक होती है। अनुमंडल स्तर पर एसडीएम और डीएसपी की और जिला स्तर पर डीएम और एसपी की बैठक होती है। भूमि विवाद के निपटारे के लिए नया सर्वे सेटलमेंट कराया जा रहा है। बंटवारा के आधार पर 100 रूपये में रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है और भी कई प्रक्रियाएं चलाकर भूमि विवाद से संबंधित समस्याओं के समाधान के प्रयास किये जा रहे हैं।

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