देश संक्रमण काल से गुजर रहा है, कांग्रेस ने सरकार को कोसा

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पटना के लाल बाग में धरना पर बैठे लोगों को संबोधित करते कांग्रेस के बिहार प्रदेश अध्यक्ष डा. मदन मोहन झा
पटना के लाल बाग में धरना पर बैठे लोगों को संबोधित करते कांग्रेस के बिहार प्रदेश अध्यक्ष डा. मदन मोहन झा

पटना। देश संक्रमण काल से गुजर रहा है। सत्ताधारी नेतृत्व दिशाहीन हो ऐसे कार्यों को अंजाम दे रहा है, जिससे पूरा देश गुमराह हो रहा है। किसी को देश की फिक्र नहीं। बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष डा. मदन मोहन झा ने लाल बाग़ (पटना साइंस कॉलेज के सामने) धरने पर बैठे लोगों को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं।

उन्होंने कहा कि देश की बुनियादी समस्याओं से आम जनता का ध्यान हटा कर ऐसे मुद्दों पर केंद्रित किया जा रहा है, जिससे वोट का ध्रुवीकरण हो और इसका लाभ सत्तासीन लोगों को मिले। हम अंग्रेज़ों के बारे में सुना करते थे कि फूट डालो और राज करो उनकी नीति थी, पर वर्तमान सरकार उससे दो क़दम आगे है।

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पूरे देश को आज सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून, राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर एवं राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर दो भागों में बाँट दिया है। NPR, CAA एवं NRC हमारे संविधान की आत्मा को खंडित करते हैं। यह संविधान के विरुद्ध है। संविधान की धारा 14 एवं 15 का पूर्णरूपेण उल्लंघन है।

डा. झा ने कहा कि हमारे पास आधार कार्ड है, मतदाता पहचान पत्र है, ड्राइविंग लाइसेंस है, कई के पास बीपीएल कार्ड हैं, पासपोर्ट है, फिर ये नया जनसंख्या रजिस्टर एक छलावा के अतिरिक्त कुछ नहीं है। हमें यह क़तई स्वीकार नहीं है और हम अंतिम दम तक इसके लिये लड़ेंगे। हम ध्रुवीकरण की राजनीति नहीं करते और ना ही हम तुष्टीकरण की राजनीति करते हैं। हम समावेशी राजनीति के पक्षधर हैं। ऑल इनक्लूसिव पॉलिटिक्स ही हमारा धर्म है। हम उसी का पालन करते हैं। कांग्रेस पार्टी सभी धर्म, संप्रदाय, एवं वर्ग के विकास में विश्वास करती है।

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हम आपसे यह कहना चाहते हैं कि हमें कोई गुमराह नहीं कर सकता। आज जीडीपी अपने सबसे निचले पायदान पर है, बेरोज़गारों की फ़ौज बढ़ती चली रही है, किसान आत्महत्या कर रहे हैं, व्यापारी रो रहें हैं, छात्रों के उपर हमले हो रहे, पर किसे इसकी परवाह है। शिक्षकों को अनुदान नहीं मिल रहा, वेतन कहीं तो मिल ही नहीं रहा और कहीं बहुत देर से मिल रहा है। शिक्षक- शिक्षक में भेदभाव बरता जा रहा है, वित्त रहित और नियोजित शिक्षक आज सड़क पर खड़े हैं। पर किसको फ़ुरसत है इस ओर देखने की। बस उनका चेहरा चमकता रहे, उन्हें जनता की इन समस्याओं से क्या लेना-देना। सत्तारूढ दल बस अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने में लगे हैं।

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