नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल में बिहार और बंगाल से 3-3 मंत्री बन सकते हैं

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नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में बिहार और बंगाल से 3-3 लोगों को मंत्री बनाये जाने की संभावना है। मोदी मंत्रिमंडर का विस्तार शीघ्र होना है।
नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में बिहार और बंगाल से 3-3 लोगों को मंत्री बनाये जाने की संभावना है। मोदी मंत्रिमंडर का विस्तार शीघ्र होना है।

दिल्ली/ पटना/ कोलकाता। नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में बिहार और बंगाल से 3-3 लोगों को मंत्री बनाये जाने की संभावना है। मोदी मंत्रिमंडर का विस्तार शीघ्र होना है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव और असंतुष्ट लोगों-दलों को काबू में करने के लिए मोदी अपने कैबिनेट में नये मंत्रियों को जगह देकर साधने की कोशिश करेंगे। इस क्रम में बिहार से जेडीयू के 2 मंत्री बनाये जा सकते हैं। लोक जनशक्ति पार्टी को लेकर अभी संशय की स्थिति है, लेकिन उसके कोटे में भी एक सीट मानी जा रही है।

पहली बार कैबिनेट में जेडीयू को एक सीट दी गयी तो नीतीश कुमार ने इनकार कर दिया था। वे अधिक की मांग कर रहे थे। भाजपा का तर्क था कि उसे स्पष्ट बहुमत सिर्फ अपने दल से ही मिल चुका है, इसलिए सहयोगी पार्टियों को सांकेतिक तौर पर एक-एक मंत्री पद दिया जाएगा। अकाली दल और लोक जनशक्ति पार्टी ने स्वीकार भी कर लिया था, लेकिन जेडीयू ने प्रस्ताव मंजूर नहीं किया। नीतीश कुमार ने तो तब यह भी कहा था कि उनकी पार्टी एनडीए में तो रहेगी, लेकिन भविष्य में भी मंत्रिमंडल में शामिल नहीं होगी।

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अब हालात बदल गये हैं। आरजेडी के नेतृत्व वाला महागठबंधन बिहार में एनडीए सामने चुनौती बन कर खड़ा है। नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू भाजपा के मुकाबले कम यानी 43 सीटें लेकर सरकार चला रही है। इसलिए नीतीश कुमार इस बार भाजपा की पेशकश पर ना-नुकुर नहीं करेंगे, इतना तो तय है। भाजपा की मजबूरी यह है कि अगले साल उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव है। विपक्ष एक होने की जुगत में है। ऐसे में भाजपा अपने सहयोगियों को साधने की कोशिश करेगी, ताकि चुनाव में वह यह दिखा सके कि एनडीए भी दमखम से एकजुट है और विपक्ष को धूल चटाने में उसे इससे सहूलियत होगी।

इसी क्रम में भाजपा बंगाल में सांसदों-विधायकों की भगदड़ को देखते हुए बंगाल को भी साधने की तैयारी में है। बंगाल में ऐसे नामों का चयन भाजपा करेगी, जिनके संपर्क और प्रभाव में कई विधायक या सांसद हों। उत्तर प्रदेश में भी भाजपा के भीतर भारी असंतोष है। खासकर योगी सरकार की कार्यशैली को लेकर। बताते हैं कि योगी के खिलाफ भाजपा के तकरीबन 60 फीसद विधायकों ने पार्टी द्वारा भेजे गये पर्यवेक्षक बीएल संतोष को अपनी नाराजगी बता दी थी। कहा तो यह भी जाता है कि योगी को चुनाव के पहले हटाने की भी मांग की गयी। लेकिन ऐन वक्त आरएसएस योगी के समर्थन में आ गया। आरएसएस ने साफ कर दिया कि उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव योगी के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा। इसलिए जातीय समीकरण का ध्यान रखते हुए भाजपा उत्तर प्रदेश से कुछ लोगों को मोदी के मंत्रिमंडल में शामिल करायेगी।

भाजपा को ऐसा करने के लिए कुछ मंत्रियों की छुट्टी भी करनी पड़ सकती है। बिहार से गिरिराज सिंह और अश्विनी चौबे निशाने पर हो सकते हैं। गिरिराज सिंह के हिन्दुत्व पर उग्र तेवर से भाजपा को कई बार शर्मिंदगी का एहसास हुआ है। खासकर बिहार में, जहां वह मुसलमानों को भी साध कर चलने वाले जेडीयू के साथ सरकार में शामिल है। अश्विनी चौबे का परफार्मेंस बढ़िया नहीं माना जा रहा है। हालांकि उनके पक्ष में एक बात अवश्य जाती है कि वह ब्राह्मण समाज से आते हैं और उत्तर प्रदेश में इनदिनों ब्राह्मण भाजपा से नाराज हैं। भाजपा उनकी नाराजगी में पलीता लगाने से बचना चाहेगी, लेकिन गिरिराज सिंह के साथ ऐसी कोई बात नहीं है। इसलिए संभव है कि मोदी मंत्रिमंडल में गिरिराज सिंह पर ही गाज गिरे।

बिहार से जेडीयू कोटे में 2 लोगों को मंत्री बनाये जाने की बात है। ये कौन होंगे, इसका फैसला तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को करना है, लेकिन माना जा रहा है कि आरसीपी सिंह नीतीश कुमार की पहली पसंद होंगे। दूसरी पसंद के तौर पर ललन सिंह का नाम आ रहा है। लोक जनशक्ति पार्टी से रामविलास पासवान मंत्री बने थे, लेकिन निधन के बाद उनके बेटे चिराग पासवान को मंत्रिमंडल में जगह मिल पायेगी, इस पर संदेह है। भाजपा की भले ही उनके प्रति हमदर्दी हो, लेकिन जेडीयू उनसे खार खाये बैठा है। हालांकि मंत्रिमंडल में किसी को लेना या न लेना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विशेषाधिकार है। जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह ने कल मंत्रिमंडल में चिराग पासवान को शामिल करने के सवाल पर कहा भी था कि इस बारे में वे कुछ नहीं कह सकते। लोजपा में विभाजन की ताजा घटना ने इस आशंका को बल दिया है कि चिराग पासवान से भाजपा परहेज भी कर सकती है।

बीजेपी का संकट यह है कि उसे यूपी चुनाव के लिए एक दलित चेहरा चाहिए। चिराग पासवान चूंकि रामविलास पासवान के बेटे हैं और पिता के रहते उन्हें लोजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया गया था, इसलिए उनकी पहचान राष्ट्रीय स्तर पर बन गयी है। लोजपा के कुल 6 में 4 सांसदों को लेकर अलग हुए उनके चाचा के पास सर्वाधिक संख्या तो है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर चिराग जैसी उनकी कोई पहचान नहीं है। संभव है कि लोजपा को एनडीए में बनाये रखते हुए भाजपा थोड़ा और इंतजार करने को कहे और यूपी विधानसभा चुनाव में दलित नेता के रूप में उनका इस्तेमाल करे। इस बीच जेडीयू की नाराजगी भी कम हो जाएगी। अगर जेडीयू ने जिद नहीं की तो चिराग भी मंत्री बन सकते हैं।

जिस जेडीयू ने मंत्रिमंडल में एक सीट लेने से इनकार कर दिया था और उसके नेता नीतीश कुमार ने साफ किया था कि भविष्य में भी जेडीयू केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल नहीं होगा, इस बार उसी की ओर से यह बात उठ रही है कि एनडीए में होने के नाते मंत्रिमंडल में उसका हक तो बनता ही है। यह बात भी किसी सामान्य नेता-प्रवक्ता ने नहीं, बल्कि राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह ने कही है। इसलिए यह माना जाना चाहिए कि जेडीयू को एक से अधिक मंत्री का आफर मिलने के बाद ही यह बात आरसीपी सिंह की जुबान से निकली होगी। यानी इस बार नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में जेडीयू के मंत्री भी दिख सकते हैं।

बंगाल से भी 2-3 लोगों को नरेंद्र मोदी कैबिनेट में मंत्री बनाया जा सकता है। पिछले हफ्ते बंगाल के हालात पर चर्चा के लिए 4 नेताओं को भाजपा ने दिल्ली तलब किया था। उनमें 3 सांसद और नेता प्रतिपक्ष थे। माना जा रहा है कि भाजपा को इन पर अधिक भरोसा है और ये जनाधार वाले नेता भी हैं। ममता बनर्जी को हराने वाले नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने गृह मंत्री अमित शाह, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की, जबकि सांसद सिर्फ जेपी नड्डा और अमित शाह से ही मिल पाये। शुभेंदु अधिकारी को भाजपा ने बंगाल में बीजेपी का अलख जगाये रखने के काम में लगा दिया है। जिन 3 सांसदों को दिल्ली बुलाया गया था, उनमें उत्तर बंगाल के निशीथ अधिकारी, लाल माटी वाले बंगाल के इलाके से आने वाले सौमित्र खान और बंगाल में हिन्दीभाषियों का चेहरा माने जाने वाले अर्जुन सिंह शामिल हैं। संभव है कि तीनों को मंत्रिमंडल में जगह दी जाये, जिससे बंगाल के लोगों में भरोसा जगे कि भाजपा प्रतिकूल परिस्थितियों में भी उनके साथ है।

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