माया-मुलायम ने 25 साल बाद मंच साझा किया, मांगे वोट

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मैनपुरी में एक मंच पर मायावती, मुलायम और अखिलेश यादव
मैनपुरी में एक मंच पर मायावती, मुलायम और अखिलेश यादव
  • अनुराग शुक्ला

मैनपुरी (उत्तर प्रदेश)। माया-मुलायम ने 25 साल बाद मंच साझा किया, मांगे वोट। मुलायम और मायावती शुक्रवार को 24-25 बरस बाद एक मंच पर आए। मुलायम पर उम्र का असर साफ दिख रहा था। रैली में सबसे पहले मुलायम बोले। उम्र का असर तो है ही, लेकिन फिर भी कनेक्ट करते हुए कहा- धूप में बैठे हो आप लोग, मैं ज्यादा लंबा भाषण नहीं दूंगा। फिर मेरा भाषण तो आप लोग मैनपुरी के गांव-गांव चौराहे तक सुन चुके हो। यहां तो कई वक्ता हैं। बोलने में ज्यादा दिक्कत नहीं थी, लेकिन मुलायम बोलते समय माइक से दूर हो जा रहे थे, सो उनकी आवाज ठीक से नहीं आ रही थी। माइक को लोगों ने एडजस्ट किया, लेकिन बात बनी नहीं।

अखिलेश दोहरी चिंता में थे। जब लोगों को प्रतीक चिन्ह दिए जा रहे थे, उन्होंने इस बात का भी ख्याल रखा कि आकाश आनंद और सतीश मिश्रा को भी प्रतीक चिन्ह मिल जाए। मुलायम की आवाज साफ नहीं आ रही थी तो अखिलेश खुद उठे और कहा- थोड़ा माइक की तरफ होकर बोलिए। बात नहीं बनी तो उन्होंने माइक डाएस से निकाल मुलायम के हाथों में दे दिया। अब मुलायम की आवाज साफ आने लगी थी।

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मुलायम मायावती के बारे में पहले ही कह चुके थे कि हम चौबीस बरस के बाद एक साथ मंच पर आए हैं और इसके लिए मैं मायावती जी का धन्यवाद करता हूं। लेकिन अखिलेश के टोकने पर शायद वो उनका असली मतलब समझ गए। फिर कहा कि मैं मायावती जी का अभिनंदन करता हूँ। ये भी कहा कि मैनपुरी वालो, हमेशा मायावती जी का सम्मान करना। इन्होंने हमेशा मुसीबत में साथ दिया है। हमने भी साथ दिया है, लेकिन इन्होंने ज्यादा साथ दिया है। मुलायम ने यह भी कहा कि वो उनके लिए वोट मांगने आई हैं, ये एहसान वो कभी नहीं भूलेंगे। और फिर अपने को भारी मतों से जिताने की अपील की।

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अखिलेश के चेहरे का तनाव कम होकर मुस्कराहट में बदल गया। फिर बहिन जी आईं। उन्होंने कहा कि मीडिया के बंधु जानना चाहते होंगे कि गेस्ट हाउस हाउस कांड के बाद मैं यहां कैसे हूँ। कहा कि इस प्रश्न का उत्तर मैं पहले भी दे चुकी हूं और कठिन परिस्थितियों में ऐसे निर्णय लेने पड़ते हैं। उन्होंने मुलायम की बड़ी जीत की अपील की और कहा कि श्री मुलायम सिंह असली पिछड़े हैं न कि श्री नरेन्द्र मोदी की तरह नकली पिछड़े हैं, जिन्होंने गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए अपनी उच्च जाति अर्थात अगड़ी जाति को पिछड़ी जाति घोषित कर दिया।

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माया ने ये भी कहा कि श्री मुलायम सिंह ने अपनी सरकारों में सभी वर्गों को साथ लिया। इसके बाद उन्होंने अखिलेश को आमंत्रित किया और कहा कि जल्दी से अपनी बात कह दें, क्योंकि मौसम खराब है और उन लोगों को दूसरे प्रोग्राम में भी जाना है। बहन जी ने जय भीम के साथ जय लोहिया भी बोला, लेकिन अभी वह जय लोहिया बोलते समय उतनी सहज नहीं हुई हैं।

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बहिन जी अगर अपने भाषण के संपादन पर ध्यान दें तो अच्छा रहेगा। मुलायम इस उम्र में भी जितना बोले उसमे दोहराव नहीं था। अखिलेश जब आये तो उनके चेहरे पर सब सकुशल निपट जाने का भाव था। उन्होंने फिर याद दिलाया कि नेता जी ने मायावती जी का सम्मान करने के लिए कहा है और यह एक ऐतिहासिक पल है। भाषण खत्म होने के बाद जय समाजवाद के साथ जय भीम और अम्बेडकर जिंदाबाद के भी नारे लगे। याद आने पर रालोद जिंदाबाद भी हुआ।

अखिलेश कम बोले, लेकिन भीड़ में सबसे ज्यादा उत्साह उन्हीं के भाषण में दिखा। मुलायम की विरासत पूरी तरह अखिलेश को ट्रांसफर हो चुकी है, शिवपाल चचा को बिना मतलब किसी भरम में नहीं रहना चाहिए।

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