मलिकाइन के पाती- धन मधे कठवत, सिंगार मधे काजर

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पावं लागीं मलिकार। रउरा त सुनलहीं होखब मलिकार, हमनी इहां एगो कहाउत लोग कहेला- धन मधे कठवत, सिंगार मधे काजर। अपना देस पर ई कहाउत एकदमे ठीक बइठत बा। रउरा के त हम बतइबे करी ले कि खबर के बारे में हमार गेयान पांड़े बाबा के खबर कागज ह। उहां के रोज भोरे दुआर पर बइठकी लगाइले। गांव के कई लोग जुटेला। खबर पढ़-पढ़ के उहां का समझाई ले। उहां के एक दिन बतावत रहनी कि लालू जी के एगो बा के नामे 29 साल के उमिर में एतना संपत हो गइल बा कि ओतना केहू जिनगी भर खटला के बादो ना कमा सकेला। एक दिन त बतावत रहनी कि कवनो सरकारी किरानी के घर से करोड़न के संपत मिलल। हमरा त तबे से ई बुझाये लागल रहे कि मुखिया जवन आदमी आदमी बन जाता, ऊ छहे महीना में बड़की मोटर गाड़ी कीन लेता। साहेब-सुबहा त अपना इहां नइखन, बाकिर दोसरा जगहा के साहेब लोग के खबर सुने के मिलेला। अलगे-अलगे शहर में कई-कई गो मकान, गाड़ी। पांड़े बाब त बतावत रहनी कि साहेब लोग आ नेता लोग के घरे देह पीछे गाड़ी होला।

नेता लोग कहेला कि अफसर ओह लोगिन के बात ना सुने ले सन। अपना मन के करे ले सन। हम त सुनले बानी मलिकार कि एमएलए-एमपी बनते अफसर साहेब लोग के अइसन खुश करे में लाग जाले सन कि ओह लोग मुंह बंद हो जाला। गाड़ी, घर, रंगाई-पोताई, कुर्सी-टेबुल, गाड़ी, सब कुल अफसर लोग इंतजाम क देला नेता लोग खातिर। ओह बेरा अफसर ठीक रहेले सन, बाकिर पाबलिक के काम परला पर नेता लोग कहेला कि अफसर बाते नइखन सुनत बाड़े सन। एकर शिकायत नेता लोग अपना भाषन में बराबर करेला।

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ए मलिकार, हमरा त आज ले ना बुझाइल कि लोग एतना लोभी-लालची कइसे हो गइल। गांधी बाबा के बारे में रउरे नू एक बेर बतावत रहनी कि चंदा के पइसा में चार आना कम हो गइल त गांधी बाबा अपना मेहरारू से रात भर ना बतियवले। भोजनो ना कइल लोग दुनू परानी। बाद में मालूम भइल कि चार आना पइसा गांधी बाबा कहीं खरच कइले रहनी। कहे के मतलब मलिकार कि एह देश में अइसनो नेता रहले कि चार आना पइसा खातिर खाइल-पीयल तेयाग देव लोग आ एह घरी के नेता लोग बा कि केतना संपत बना लीहल जाव, सगरी फिकिर एही खातिर ऊ लोग के रहत बा।

रउर त जानते होखब मलिकार, बिहार में एगो मोदी जी बाड़े। ऊ रोज-रोज लालू जी के खानदान के संपत के हिसाब गिनावत रहे ले। सुन-सुन के लागेला मलिकार कि पाबलिक के पइसा के अइसन डकैती कहीं सुने के शायदे मिलत होई। लालू जी त गोरू के चारा खा गइले। बेटा लोग के नाम पर संपत खड़ा दिहले कि सात पुश्त ले खइलो पर ऊ ना ओराई। आज उनकरा घर के जवन हाल बा मलिकार, ऊ केहू से छिपल नइखे। बुढ़उती में उनकरा जेल में जांत पीसे के परत बा। बेटा के बियाह अइसन बेमन से भइल कि एने बियाह भइल आ ओने तलाक होखे लागल। कवना काम के ई संपत मलिकार, जब चैन के नीन ना सूत पावे आदमी।

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नून-रोटी खाइल नीमन बा मलिकार। भर दिन जांगर ठेंठा के आदमी चैन से सौंस खींचत सुत त जाला। लोगवा का ई ना जाने ला मलिकार कि सब एही जा रह जाये के बा। कुछऊ संगे नइखे जाये के। तब का हाय-हाय कइले रहेला लोग। हमनिये के ठीक बा मलिकार। धन मधे कठवत बा ता सिंगार मधे काजर से काम चल जाला। रउरा अबही ले पाक-साफ रह गइनी। देखब, बुढ़ौती में अइसन कवनो गलती ना हो जाव, जवना से बाल-बच्चा के आगे तकलीफ होखे।

राउरे, मलिकाइन

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