शराबबंदी से पिछडों और दलितों के जीवन में आया बदलाव: राजीव

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पटना। बिहार में जारी शराबबंदी से राज्य में एक मूक क्रांति की शुरुआत होने की बात कहते हुए प्रदेश भाजपा प्रवक्ता सह पूर्व विधायक श्री राजीव रंजन ने इसका सबसे अधिक फायदा पिछड़े और दलित समाज के लोगों को होने की बात कही। उन्होंने कहा कि बिहार के विकास को अपना राजनीतिक उद्देश्य मानने वाली एनडीए सरकार ने अपने शासनकाल में आम जनता की तकलीफों को काफी नजदीक से देखा और समझा है। यही वजह है कि अभी तक के अपने शासनकाल में सरकार ने समाज के उन अछूते पक्षों पर भी काम किया है, जिनके बारे में राजद-कांग्रेस की सरकार में सोचा तक नहीं जाता था। बिहार की दशा-दिशा सुधारने की इसी कड़ी में सरकार ने प्रदेश में शराबबंदी का साहसिक निर्णय लिया, जिससे आज प्रदेश में रहने वाले लोगों की जिंदगी में एक क्रांतिकारी बदलाव आया है। के पक्ष में राबबंदी ऐतिहासिक मानव श्रृंखला में लाखों लोग शामिल हुए थे।

उन्होंने कहा कि नशामुक्ति की तरफ उठाए गए इस ठोस कदम का सबसे अधिक फायदा प्रदेश के पिछड़ों, दलितों तथा अन्य गरीब व कम आय वाले लोगों को हुआ है। याद करें शराब सेवन के चलते पहले समाज में क्या हालत थी। लोग दिन भर कड़ी मेहनत करके पैसे कमाते थे और शाम में अपनी गाढ़ी कमाई का बहुत बड़ा हिस्सा शराब में लोग बर्बाद कर देते थे। घर का माहौल तनावपूर्ण रहता था। महिलाओं  और  बच्चों  की  स्थिति  घर  में  काफी  खराब  रहती  थी,  लेकिन शराबबंदी के बाद स्थितियों में काफी बदलाव आया है, जिसकी तस्दीक आंकड़े भी करते हैं।

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आंकड़ों को देखें तो बिहार में शराबबंदी से पहले लोग जहां भोजन पर हर हफ्ते महज 1005 रुपए खर्च करते थे, जबकि शराबबंदी के बाद 1331 रुपए खर्च कर रहे हैं। शराबबंदी के बाद 43 फीसदी पुरुष खेती पर ज्यादा समय देने लगे हैं, वहीं 84 फीसदी महिलाओं को ज्यादा बचत हो रही है और उनकी आय में बढ़ोतरी हुई है। राज्य सरकार द्वारा इस भीषण कुरीति पर किए जा रहे निरंतर प्रहार को आज आम जनता भी देख और सराह रही है।

याद करें पिछले वर्ष शराबबंदी के पक्ष में 21 जनवरी 2016 को मानव श्रृंखला बनी थी, जिसमें राज्य की आबादी का लगभग एक तिहाई हिस्सा यानी करीब चार करोड़ लोग शामिल हुए थे। इसमें हर आयु  वर्ग  के  लोग शामिल  हुए  थे।  इसने  दुनिया  में  एक  इतिहास कायम  किया। इस ऐतिहासिक मानव  श्रृंखला  में  सभी  जाति,  सभी  धर्म एवं सभी वर्गों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया था जो साफ़ दिखाता है कि शराबबंदी के पक्ष में पूर्ण जनमत है।

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