लालू से मुलाकात के बाद मांझी की हालत भी कुशवाहा जैसी दिखी

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कोआडिनेशन कमिटी करेगी सीट शेयरिंग की घोषणा, खरमास बाद बैठक के आसार

  •  राणा अमरेश सिंह

रांची। बिहार का सियासी अखाड़ा बने रांची के रिम्स में आज लगातार तीसरे शनिवार को राजद सुप्रीमो लालू यादव का दरबार दोपहर 12.13 में सज गया। इस बार मुलाकाती थे हिन्दुस्तान आवाम पार्टी (हम) के मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी। करीब डेढ़ घंटे की मुलाकात के बाद मांझी ने मीडिया से लालू यादव की तबीयत की चर्चा पहले की और बाद में बताया कि कोआर्डिनेशन कमिटी की बैठक के बाद महागठबंधन में सीट शेयरिंग की घोषणा की जायेगी। हालांकि एक मंजे व सर्वजातीय नेता की पहचान बनाने वाले जीतन राम मांझी के चेहरे पर आत्मसंतुष्टि की रेखा नहीं दिखी।

बदलते समीकरणों के बीच रांची में राजद सुप्रीमो लालू यादव और जीतन राम मांझी की मुलाकात से कुछ खबरें आने की अपेक्षा थी। लेकिन राजनीति के धुरंधर लालू यादव से मुलाकात होने पर किसी घटक दल के मुंह में अपनी नहीं, बल्कि लालू यादव की बातें सुनने को मिलती रही हैं। लालू यादव बहुत ही कूटनीतिक तरीके में घटक दल के नेताओं को नरेंद्र मोदी का भय दिखा कर एकजुटता बनाने की प्राथमिकता पर बल देते हैं। खरमास के बाद सभी घटक दलों को मिलजुल कर सीट शेयरिंग सलटाने का आश्वासन देते हैं।

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लालू यादव मिलने आये व्यक्ति से बैठक में फिर अपनी सेहत की नाजुक स्थिति का दर्द बयां करते हैं। फिर सब कुछ भावनात्मक हो जाने पर सीटों को मिलजुल कर सलटा लेने की बात कहते हैं। जिस पर घटक दल के नेता को अपनी सहमति जताना मजबूरी होती है। हालांकि घंटे भर की बंद कमरे में मांझी ने लालू यादव मुलाकात के बाद विदा लेने से पहले अपनी दावेदारी को रिमाइंड करा दिया। जीतन मांझी इसके पूर्व दिसंबर के प्रथम सप्ताह में लालू यादव से मिले थे।

मुलाकात के बाद माना जाता है घटक दल अपनी सीटों की दावेदारी का खुलासा करेंगे। पिछले शनिवार को रालोसपा मुखिया उपेंद्र कुशवाहा और वीआईपी पार्टी के अध्यक्ष मुकेश सहनी ने लालू यादव से मुलाकात की थी। लेकिन दोनों ने सीटों का खुलासा नहीं किया था। खबर है कि लालू यादव ने मुकेश सहनी की प्रशंसा की थी और उन्हें संतुष्ट भी किया था। इसलिए मुकेश सहनी के पटना में अगले दिन “मछली भात खाकर महागठबंधन को जिताना है” वाले पोस्टर व बैऩर कई जगह देखे गए थे।

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पिछले दिनों जीतन राम मांझी ने मीडिया से उपेंद्र कुशवाहा से कम सीट स्वीकार करने से मना करने की बात कही थी। उन्होंने दलित जिला अध्यक्षों को वैकल्पिक रास्ता बनाए रखने का परामर्श दिया था।

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