राम जी ने भाजपा को बनाया तो कहीं बिगाड़ भी न दें सारा खेल

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नाजुक मोड़ पर एनडीए, राम मंदिर को ले कभी लोजपा की धमकी, तो कभी जदयू की सफाई

पटना। लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के नेता चिराग पासवान ने फिर भाजपा को नसीहत दे डाली। उन्होंने कहा कि भाजपा अपने सहयोगियों की लभी चिंता करे। एनडीए से तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) के उपेंद्र कुशवाहा के साथ छोड़ने के बाद चिराग ने एनडीए को नाजुक मोड़ पर खड़ा माना है। उनकी चिंता है कि जल्द से जल्द सीटों और चुनाव क्षेत्रों का बंटवारा नहीं किया गया तो इसका बुरा असर पड़ सकता है। इसे चिराग की दबी जुबान धमकी भी मानना चाहिए। अयोध्या में राम मंदिर के लिए अध्यादेश पर भी बिहार एनडीए के दो प्रमुख घटक दल- जदयू और लोजपा पहले से ही चेतावनी दे रहे हैं। इनका कहना है कि राम मंदिर भाजपा का एजेंडा हो सकता है, एनडीए का नहीं।

राम विलास पासवान और चिराग पासवान पहली बार टेढ़ी बोली नहीं बोल रहे। इससे पहले दोनों यह बात कह चुके हैं रां मंदिर पर भाजपा अध्यादेश लाती है, तो वे उसके पक्ष में नहीं होंगे। इसलिए एनडीए के एजेंडे में राम मंदिर का मामला शामिल ही नहीं है। अलबत्ता यह भाजपा का एजेंडा हो सकता है।

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इधर एनडीए के साथ दोबारा गलबहियां डालने वाले जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के नेता प्रशांत किशोर और आरसीपी सिंह ने पहले ही यह साफ कर दिया अध्यदादेश के सवाल पर जदयू किसी भी कीमत पर भाजपा का साथ नहीं देगा। जदयू का मानना है कि राम मंदिर का मामला कोर्ट में हैं। कोर्ट से ही जो निर्णय होगा, उसे मानने के लिए पार्टी बाध्य हो सकती है, लेकिन कोर्ट से इतर किसी भी कदम पर जदयू भाजपा का साथ नहीं देगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का भी मानना यही है। यानी राम मंदिर पर अध्यादेश के पक्ष में लोजपा और जदयू नहीं हैं।

उपेंद्र कुशवाहा ने भी एनडीए छोड़ने के पहले कई बार यह बात दोहरायी कि मंदिर-मसजिद बनवाना सरकार का काम नहीं है। सरकार को करने के लिए और ढेर सारे काम पड़े हैं। उनकी आवाज नक्कारखाने में तूती की तरह किसी ने नहीं सुनी। हालात इतने नाजुक हो गये कि उन्हें एनडीए से अपने को अलग करना पड़ा। यह अलग बात है कि एनडीए छोड़ने के उनके फैसले पर उनके ही सांसदों और विधायकों ने उनका साथ नहीं दिया है। चंद्रबाबू नायडू तो पहले ही विशेष राज्य की मांग के सवाल पर एनडीए को किनारे कर चुके हैं।

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अंधेरे में परछाई भी साथ छोड़ देती है। तीन राज्यों में भाजपा की हार ने उसकी हालत पतली कर दी है। साथी दल आंखें तरेरने लगे हैं। उधर उसके अपने सांसद राम मंदिर के लिए अध्यादेश लाने पर अड़े हुए हैं। भाजपा से करीबी संबंधों वाले साधु-संत भी अध्यादेश के लिए भाजपा पर दबाव डाल रहे हैं।

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