बेसहारा बच्चों की आखों में सतरंगी सपने संजो रही हेमंत सरकार

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झारखंड स्वास्थ्य सेवा के मार्च 2022 तक सेवानिवृत होने वाले चिकित्सकों को राज्य सरकार ने सेवा अवधि में विस्तार करने का निर्णय लिया है।
झारखंड स्वास्थ्य सेवा के मार्च 2022 तक सेवानिवृत होने वाले चिकित्सकों को राज्य सरकार ने सेवा अवधि में विस्तार करने का निर्णय लिया है।

रांची। बेसहारा बच्चों की आखों में हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार सतरंगी सपने संजो रही है। झारखंड के बेसहारा बच्चे अब इंद्रधनुषी सपने संजो रहे हैं। प्रकाश और लालमणि (बदला हुआ नाम) बेसहारा बच्चे हैं। इनकी आखों में अब इन्द्रधनुषी सपने सज रहे हैं। प्रकाश पढ़ाई के साथ-साथ अच्छा डांस भी करता है। लालमणि पढ़ाई कर अधिकारी बनना चाहती है। कहती है- जो मेरे साथ गुजरा, वो किसी अन्य के साथ ना गुजरे। जरा यह भी जानिए कि कौन हैं प्रकाश और लालमणि?

राजधानी रांची की सड़कों पर अक्सर भीख मांगते, खिलौना बेचते, कचरा चुनते या  फुटपाथों पर रात गुजारते बच्चे नजर आते हैं। या तो ये बेसहारा हैं या इनके अभिभावक नशे के आदी होते हैं। उनमें से ही ये दो नाम हैं, जिन्हें सरकार का सहयोग मिला और इनकी जिन्दगी संवरने लगी। ऐसे सभी बच्चों को बेहतर जिन्दगी देने के लिये राज्य सरकार ने रेनबो होम्स नामक संस्था के साथ एमओयू किया है, जो बेसहारा बच्चों के लिए काम करती है। सरकार के सहयोग से रेनबो होम्स ने रांची में दो शेल्टर होम शुरू किए है। एक लड़कियों के लिए और एक लड़कों के लिए, जहां लालमणि और प्रकाश जैसे बेसहारा बच्चों को बेहतर जीवन प्रदान करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

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नशे का आदी था प्रकाश, भीख मांगती थी लालमणि 

प्रकाश एक प्रतिभाशाली छात्र था। पर गलत संगत की वजह से उसे नशीली दवाओं की लत लग गई। इन दवाओं से उसकी जिंदगी खराब हो गई थी। वह नशीली दवाओं को लेने के लिए इधर-उधर भटकता रहता था। नशे के सेवन के बाद फुटपाथ पर ही सो जाता था। जब प्रशासन को प्रकाश के बारे में जानकारी मिली तो उसकी मदद के लिए प्रयास शुरू किए गए। रेनबो के सदस्यों की सहायता से प्रकाश को बरियातू स्थित रेनबो लाया गया। उसके शरीर की जांच कराई गई। जांच में प्रकाश के शरीर का वजन कम होने के अतिरिक्त अन्य गतिविधियां सामान्य थीं। उसके अतीत को जानने पर पता चला कि उसका पिता नशे के आदी हैं। वे अपने परिवार की देखभाल नहीं कर सकते। ऐसे में प्रकाश भी नशे की चपेट में आ गया।प्रकाश को इस दलदल से निकलने में रेनबो उसका साथी बना। अब प्रकाश रेनबो होम को ही अपना घर मनाता है। जबकि लालमणि रांची के पहाड़ी मंदिर के सामने भीख मांगती थी। रेनबो होम्स की लीड मैनेजर चंपा ने बताया कि लालमणि के पिता हर शाम उससे ड्रग्स खरीदने के लिए सारे पैसे छीन लेते थे। लालमणि को रेनबो होम लाया गया। जहां लालमणि सरकार के सहयोग से  अधिकारी बनने के लिये सभी जतन  कर रही है।

हर संभव सुविधा बच्चों को दी जा रही है

हेमंत सरकार ने इन बच्चों को इस तेज गति वाली दुनिया का सामना करने के लिए उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने में जुटी है। इनके लिए पौष्टिक फूड चार्ट तैयार किए जाते हैं। भोजन की उपलब्धता के साथ-साथ हर बच्चे की स्वच्छता की भी देखभाल की जाती है। हर त्योहार के लिए कार्यक्रम आयोजित होते हैं। नृत्य प्रतियोगिता, पेंटिंग या गायन गतिविधियों में बच्चे भाग लेते हैं। इससे उनके आत्मविश्वास क्षमता में सुधार करने में मदद मिलती है। ऐसे केंद्रों के संचालन के लिए सरकार ने फंड मुहैया कराया है। रेनबो होम्स को बिजली और पानी की आपूर्ति,  वॉशरूम जैसी सभी बुनियादी सुविधाओं से पूर्ण किया गया है। ड्रॉप आउट बच्चों को राज्य सरकार द्वारा संचालित ब्रिज कोर्स योजना की सुविधा मिल रही है।

सरकार ने संक्रमण काल में रखा विशेष ध्यान 

मार्च 2020 के दौरान जब राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन लगाया गया तो रांची जिला प्रशासन ने रेनबो होम्स को आवश्यक खाद्य आपूर्ति के साथ ही साथ चॉकलेट, नूडल्स पैकेट, बिस्कुट इत्यादि उपलब्ध कराए। हाल ही में मिशन 1 मिलियन स्माइल की एक पहल के तहत, जिला प्रशासन ने दोनों रेनबो होम्स के बच्चों के बीच मोजे, कंबल, टोपियां जैसे गर्म कपड़े वितरित किए । लड़कियों के बीच मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए केंद्र में सैनिटरी नैपकिन भी प्रदान किए गए। इस तरह आखों में कई सपने लिए सड़कों पर घूमते ऐसे बच्चों के लिये हेमंत सरकार की यह योजना सही मायने में बच्चों को इन्द्रधनुषी सपने संजोने और उसे पूरा करने के लिए आत्म विश्वास का संचार कर रही है।

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