बंगाल में 11 साल सीएम रहे बुद्धदेव, फिर भी न बंगला है न कार

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पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य
पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य

कोलकाता। बंगाल में 11 साल मुख्यमंत्री रहे बुद्धदेव भट्टाचार्य के पास न अपना बंगला है और न कार। 1977 से 2011 तक पश्चिम बंगाल में वह मुख्यमंत्री रहे। सत्ता में रहे कम्युनिस्ट नेताओं की सादगी और सरलता उनकी पूंजी है। ऐसा राजनीति में आमतौर पर अब दुर्लभ है। आजकल जितना बड़ा नेता, उतनी ही अकूत उसकी संपत्ति। संपत्ति के आधार पर ही अब नेताओं के छोटे-बड़े होने की औकात का आकलन भी निकाला जाता है।

पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य इनदिनों अस्वस्थ हैं
पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य इनदिनों अस्वस्थ हैं

राजनीति में चरित्र, ईमानदारी, सहजता और सरलता आज विलोपित वस्तु हो गई है। आम आदमी का विश्वास इन्हीं कारणों से राजनीति से अब उठता जा रहा है। आम आदमी की यह मान्यता हो गई है की धनवान ही राजनीति की पकवान खा सकते हैं। सामान्य कार्यकर्ता की तो कोई पूछ ही नहीं रह गयी है। पर राजनीतिज्ञों की इसी जमात में कुछ ऐसे चेहरे हैं या पहले भी रहे हैं, जो उम्मीद की लौ जगाए हुए हैं। राजनीति के ऐसे ही रत्नों की तलाश के क्रम में बुद्धदेव  का भी नाम आता है।

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बुद्धदेव भट्टाचार्य की पत्नी-बेटी पब्लिक ट्रांसपोर्ट से यात्रा करती रही हैं। तब भी, जब वे मुख्यमंत्री थे और उसके बाद भी जब वे निवर्तमान हैं। फिलवक्त बुद्धदेव बीमार चल रहे हैं और पार्टी की मदद से उनका उपचार भी हो रहा है। सीएम रहते बुद्धदेव बेहद सहज तरीके से अपनी जिंदगी जीते रहे हैं। चाहे वे सत्ता में रहें या सत्ता के बाहर, उन पर न कोई आपराधिक मामला दर्ज हुआ और न भ्रष्टाचार का कोई आरोप ही लगा। साल 2000 से 2011 तक वे मुख्यमंत्री रहे।

अत्यंत साधारण परिवार में श्री भट्टाचार्य का जन्म 1 मार्च 1944 को हुआ था। वे यादवपुर विधानसभा क्षेत्र से 24 साल तक लगातार विधायक चुने जाते रहे। वर्ष 2011 के विधानसभा चुनाव में उनके सीएम कार्यकाल में मुख्य सचिव रहे मनीष गुप्त ने उन्हें पराजित किया था। पार्टी के फुल टाइमर कार्यकर्ता रहे बुद्धदेव को मंत्री रहते जो वेतन मिलता था, उसे वह पार्टी को दे देते थे। पार्टी उन्हें परिवार चलाने का खर्च देती थी। आज भी उनके परिवार का खर्च पार्टी के दिए पैसे से ही चलता है।

पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य इनदिनों अस्वस्थ हैं

पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य इनदिनों अस्वस्थ हैंमुख्यमंत्री रहते बुद्धदेव ने आलीशान सरकारी बंगला लेने से मना कर दिया था। उन्होंने कोलकाता के पार्क एवेन्यू में कम आय वाले लोगों के लिए बने यानी लो इनकम ग्रुप के आवंटित सरकारी क्वार्टर में रहना पसंद किया। सीएम रहते निजी काम के लिए सरकारी गाड़ी का इस्तेमाल न तो उनकी पत्नी ने किया और न बेटी ने। मेट्रो या बस का सफर उन्होंने पसंद किया। मुख्यमंत्री बनने के पहले बुद्धदेव जिस घर में रहते थे, मुख्यमंत्री बनने के बाद से अब तक उन्होंने उसी घर को अपना माना है।

सत्ता से हटने के बाद भी पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में मिलने वाली सुविधा उन्होंने नहीं ली। सरकारी वाहन ठुकरा दिया। मकान नहीं रहने के बावजूद उनकी सबसे बड़ी पूंजी साफ-सुथरी छवि है। कभी किसी घोटाले में या गड़बड़ी में उनका नाम नहीं आया। 2009-10 के पुराने आंकड़े देखें तो उनकी कुल संपत्ति एक लाख 290 रुपये थी। यह तब का वक्त है, जब 10 साल मुख्यमंत्री के पद पर गुजारने के बाद 2011 में वे निवर्तमान हुए थे। उनके पास जो कुल संपत्ति थी, उसमें नकद के रूप में महज ₹5000 थे। किसी बैंक में उनका अकाउंट भी नहीं था।

आज कई पूर्व मुख्यमंत्री निवर्तमान होने के बावजूद सरकारी बंगले छोड़ने को तैयार नहीं। अदालतों को इसके लिए हिदायत देनी पड़ रही है। अखिलेश यादव पर सीएम का बंगला छोड़ते एसी और फर्नीचर उठा ले जाने का भी आरोप लगा। ऐसे में बुद्धदेव भट्टाचार्य का आचरण राजनीतिक शुचिता का सर्वोत्कृष्ट उदाहरण है।

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