बंगाल में सीबीआई की अति सक्रियता से बीजेपी की किरकिरी हो रही है

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बंगाल में सीबीआई (CBI) की अति सक्रियता से बीजेपी (BJP) की किरकिरी हो रही है। एक ही मामले कुछ को छोड़ कुछ पर एक्शन संदेह पैदा करता है।
बंगाल में सीबीआई (CBI) की अति सक्रियता से बीजेपी (BJP) की किरकिरी हो रही है। एक ही मामले कुछ को छोड़ कुछ पर एक्शन संदेह पैदा करता है।
  • ओमप्रकाश अश्क

बंगाल में सीबीआई (CBI) की अति सक्रियता से बीजेपी (BJP) की किरकिरी हो रही है। एक ही मामले में कुछ को छोड़ कुछ पर एक्शन संदेह पैदा करता है। जिस नारदा स्टिंग (Narada Sting) मामले में सीबीआई ने ममता कैबिनेट के दो मंत्रियों- फिरहाद हाकिम और सुब्रत मुखर्जी के साथ दो अन्य- विधायक मदन मित्र और पूर्व मेयर शोभन चटर्जी को आज गिरफ्तार किया, अफरातफरी में मामले की वर्चुली सुनवाई हुई और सीबीआई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया, उससे टीएमसी में नाराजगी स्वाभाविक है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तो सीबीआई (CBI) दफ्तर निजाम पैलेस पहुंच कर 6 घंटे तक इस मांग को लेकर जमी रहीं कि उनको भी गिरफ्तार किया जाये। आम आदमी भी चुनाव में बीजेपी (BJP) के पराजय के बाद सीबीआई की सक्रियता को संदेह की नजर से देख रहा है। इस आग में घी का काम कर रहे हैं राज्यपाल जगदीप धनखड़। सीबीआई के एक्शन के बाद उन्होंने धड़ाधड़ ट्वीट कर ममता बनर्जी सरकार पर गंभीर आरोप लगाये। उन्होंने चेतावनी दी कि बंगाल में संपूर्ण अराजकता है। पुलिस की चुप्पी और संवैधानिक मैकेनिज्म के फेल होने के नतीजे क्या होते हैं, बंगाल सरकार को इसका भान होना चाहिए। सीधा संकेत राष्ट्रपति शासन की ओर है।

राज्यपाल के इस ट्वीट की वजह यह रही कि टीएमसी नेताओं की गिरफ्तारी के बाद सीबीआई मुख्यालय को टीएमसी समर्थकों ने घेरा और पथराव किया। राजभवन के नार्थ गेट पर धरना दिया। राज्यभर में उपद्रव हो रहा है। राज्यपाल ने कहा कि मिनट दर मिनट राज्य के हालात खराब होते जा रहे हैं। इसका संकेत साफ है कि बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने की कोशिश हो रही है। अकेले राज्यपाल ही इसके कारक हों, ऐसा नहीं हो सकता। जाहिर सी बात है कि केंद्र के इशारे के बगैर वह कुछ कर नहीं सकते। लोग आरोप भी लगा रहे हैं कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की सोची-समझी रणनीति है। टीएमसी ने इसी आरोप के साथ पुलिस कमिश्नर को चिट्ठी भेजी है।

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राज्यपाल ने हाल ही में चुनाव बाद की हिंसा में मारे गये या घर छोड़ कर पलायन कर गये लोगों से कूचबिहार, शीतलकुची, नंदीग्राम जाकर मुलाकात की। वह असम भाग कर गये लोगों से भी मिलने पहुंचे। इस क्रम में उन्होंने गंभीर आरोप भी लगाये कि बंगाल में जबरन धर्मांतरण कराया जा रहा है। संवैधानिक पद पर बैठ कोई आदमी हवा में आरोप नहीं लगा सकता। अगर ऐसा करता है तो इसका मतलब हुआ कि वह अपनी संवैधानिक मर्यादा भूल चुका है। इसलिए ऐसे आरोप की किसी बड़ी एजेंसी से जांच करायी जानी चाहिए। आरोप सही होने पर बंगाल सरकार के खिलाफ एक्शन लिया जाये तो कोई गलत बात नहीं होगी। लेकिन आरोप निराधार होने पर बंगाल से मौजूदा राज्यपाल को विदा कर देना चाहिए।

आश्चर्य की बात है कि जिन आरोपों में आज दो मंत्रियों, एक विधायक और एक पूर्व मेयर की गिरफ्तारी हुई है, उसी मामले में बंगाल में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी और राज्यसभा की सांसदी छोड़ विधायक बने मुकुल राय भी आरोपी हैं। लोगों बीजेपी के प्रति अगर गुस्सा है तो इसे स्वाभाविक मानना चाहिए। इसलिए कि दो को क्यों छोड़ दिया गया। इसलिए कि वे बीजेपी में हैं।

दरअसल बीजेपी एक तीर से कई निशाने लगा रही है। अव्वल तो उसने संकेत दे दिया है कि दागी लोगों की खैर नहीं। दूसरा, बीजेपी के उन नेताओं को भी इशारा है, जिनका मन टीएमसी का रुख करने के लिए डोल रहा होगा। यानी बीजेपी में भगदड़ न हो। साथ ही चुनाव बाद की हिंसा से हतोत्साहित बीजेपी कार्यकर्ताओं को संदेश देना कि हमारे हाथ बंधे नहीं हैं। हम कभी भी कुछ भी कर सकते हैं। पता नहीं, बीजेपी इसमें कितना कामयाब हो पायेगी, लेकिन फिलहाल तो उसकी किरकिरी हो रही है।

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