यूपी असेंबली चुनाव के पहले हो सकता है बंगाल और यूपी का विभाजन

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यूपी असेंबली चुनाव के पहले ही बंगाल और उत्तर प्रदेश का विभाजन हो सकता है। उत्तर प्रदेश में दो और बंगाल में तीन राज्य बनाने की तैयारी है।
यूपी असेंबली चुनाव के पहले ही बंगाल और उत्तर प्रदेश का विभाजन हो सकता है। उत्तर प्रदेश में दो और बंगाल में तीन राज्य बनाने की तैयारी है।
  • प्रवीण सिंह

दिल्ली। यूपी असेंबली चुनाव के पहले ही बंगाल और उत्तर प्रदेश का विभाजन हो सकता है। उत्तर प्रदेश में दो और बंगाल में तीन राज्य बनाने की तैयारी है। हालांकि अभी इसकी योजना आरंभिक स्तर पर है, इसलिए इसमें फेर-बदल भी हो सकता है। दोनों राज्यों में भाजपा की पकड़ मजबूत बनाने के लिए यह योजना बनायी गयी है। संवैधानिक मामलों के जानकार मानते हैं कि इसके लिए राज्य सरकारों की अनुमति या सहमति आवश्यक नहीं है। यह केंद्र सरकार का विशेषाधिकार है। पहले भी बिहार से अलग कर झारखंड, यूपी से अलग कर उत्तराखंड और मध्य प्रदेश से काट कर छत्तीसगढ़ राज्य बनाये गये। उस वक्त केंद्र सरकार ने राज्यों की सहमति नहीं ली थी।

यूपी के बंटवारे की बात इसलिए हो रही है कि पूर्वांचल में हिन्दुत्व के प्रबल समर्थक योगी आदित्यनाथ की अच्छी पकड़ है। यूपी में इनदिनों योगी आदित्यनाथ को लेकर विवाद चल रहा है। भाजपा के ज्यादातर विधायक योगी आदित्यनाथ के विरोध में हैं, लेकिन पूर्वांचल में हिन्दू वोटर पर अपनी मजबूत पकड़ के कारण योगी का कोई विकल्प फिलहाल भाजपा को नहीं देख रहा है। भाजपा को यह भी मालूम है कि गोरखपुर में योगी की मर्जी के खिलाफ जब बीजेपी ने उम्मीदवार उतारा तो वहां उसे मुंह की खानी पड़ी थी।

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बीएल संतोष को यूपी भेज कर नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने योगी के बारे में रायशुमारी करायी। रिपोर्ट योगी के प्रतिकूल थी। पाया गया कि 60 फीसदी से अधिक विधायक योगी की कार्यशैली से नाराज हैं। फिर प्रदेश प्रभारी ने अपनी रिपोर्ट दी। सब कुछ योगी के खिलाफ था और सरकार व संगठन में केंद्रीय नेतृत्व बदलाव की तैयारी कर रहा था। इसी बीच आरएसएस ने दखल दी। मोहन भागवत समेत संघ के वरिष्ठ लोग लखनऊ पहुंचे। आखिरकार दो दिनों के मंथन के बाद संघ ने संकेत दे दिया कि योगी के नेतृत्व में ही अगला यूपी असेंबली चुनाव लड़ा जाएगा। इसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और केंद्र सरकार के बीच टकराव के रूप में भी देखा जा रहा है।

संघ योगी की ताकत को जानता है और स्वीकार करता है कि अब भी उनकी पकड़ हिन्दुओं में बनी हुई है। बताया तो यह भी जाता है कि संघ ने बंगाल में आशातीत सफलता न मिलते देख मोदी-शाह पर भरोसा छोड़ दिया है। अब मोदी की छवि जिताऊ नेता की नहीं रह गयी है। इसीलिए संघ ने साफ कर दिया है कि अब होने वाले विधानसभा चुनावों में मुख्यमंत्री का चेहरा ही सामने होगा। अब तक होता यह रहा है कि नरेंद्र मोदी के चेहरे पर विधानसबाओं के चुनाव लड़े जाते रहे हैं। महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड और बंगाल में मोदी का चेहरा काम नहीं आया। इसलिए अब विधानसभा चुनावों में मोदी को आगे नहीं किया जाएगा।

बंगाल को भी तीन हिस्सों में बांट कर भाजपा ममता बनर्जी को कमजोर करने की तैयारी में है। पहाड़ी अंचल में भाजपा की पैठ मजबूत है, इसलिए उसे एक राज्य बनाया जाना है। मुसलिम बहुल आबादी वाले जिलों को मिला कर केंद्र शासित प्रदेश बनाने की योजना है, ताकि सत्ता केंद्र के पास रहे और वह अपने हिसाब से कश्मीर की तरह हैंडल कर सके। बचे हिस्से को ममता के लिए चोड़ा जाएगा, जहां भाजपा को उम्मीद है कि थोड़ी और मेहनत के बाद बाजी उसके हाथ में आ सकती है।

बंगाल के साथ यूपी को बांट कर भाजपा अपना मकसद साधने में भी कामयाब हो जाएगी और इस तोहमत से भी बच जाएगी कि राजनीतिक दुर्भावना से उसे यह काम किया है। योगी आदित्यनाथ कल से ही दिल्ली में हैं। कल केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से उनकी मुलाकात हुई थी। आज प्रधानमंत्री से वे मिले। मुद्दा यूपी विधानसबा चुनाव ही था, लेकिन समझा जाता है कि विभाजन की नयी रणनीति पर भी बात हुई होगी।

दरअसल यूपी के पंचायत चुनाव में समाजवादी पार्टी और बसपा को जिस तरह कामयाबी मिली है, उससे भाजपा के कान खड़े हो गये हैं। विकास दुबे एनकाउंटर के बाद ब्राह्मणों में भीतर ही भीतर नाराजगी है। मुसलिम वोटर तो वैसे ही भाजपा से शाश्वत नाराजगी रखते हैं। ऐसे में संघ संकटमोचक बन कर सामने आया है। संघ ने यह भी सलाह दी है कि मुसलमानों में भी विश्वास जगाने की जरूरत है। इसलिए यूपी असेंबली चुनाव में सीटों के बंटवारे में इस बार मुसलमानों को भी भाजपा टिकट दे तो कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी। संगठन और मंत्रिमंडल विस्तार के जरिये दूसरी जातियों को भी भाजपा साधने की कोशिश करेगी।

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