भाजपा को धूल चटाने के लिए यूपी-महाराष्ट्र में गठबंधन का खेल

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  • उत्तर प्रदेशः सपा और बसपा में 37-37 लोस सीटों पर चुनाव लड़ेंगी
  • महाराष्ट्रः एनसीपी व कांग्रेस 20-20 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी
  • बिहारः जनता दल यूनाइटेड व भाजपा 17-17 सीटों पर लड़ेंगे चुनाव

 नई दिल्ली (राणा अमरेश सिंह)। इसी साल होनेवाले लोकसभा चुनाव के लिए काउंट डाउन चालू हो गया है। सियासी दलों ने क्रिकेट के 20-20  मैच के मशहूर फार्मूले को सियासत में भी तेजी से अपनाना शुरू कर दिया लगे हैं। शुक्रवार को बसपा सुप्रीमो मायावती और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बिहार में भाजपा व जदयू के 17-17 सीटों की तरह उत्तर-प्रदेश में 37-37 सीटों  पर चुनाव लड़ने की सहमति बनाई। इसी तरह से  महाराष्ट्र में शरद पवार की नेशनल कांग्रेस पार्ट्री और कांग्रेस ने भी 20-20 सीटों पर लड़ने की सहमति जतायी है।

पिछले दिनों बसपा-सपा गठबंधन को उत्तर प्रदेश के उपचुनाव में मिली जीत ने भाजपा के विरोध में लड़ने का एक फार्मला हासिंल करा दिया। हालांकि इसमें कांग्रेस ने भी अपनी हिस्सेदारी ईमानदारी से निभाई थी। फिर भी सपा-बसपा गठबंधन ने कांग्रेस से दूरी बनाई और दोनों ने सूबे की 80 लोस सीटों में 37-37 सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। दोनों ने रायबरैली व अमेठी सीट पर कांग्रेस का समर्थन का फैसला लिया है। वहीं अजीत सिंह की पार्टी राष्ट्रीय लोकदल के लिए तीन सीटे सुरक्षित की हैं।

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सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव व बसपा सुप्रीमो मायावती के बीच चली डेढ़ घंटे की बैठक में सीट शेयरिंग फार्मूले को अंतिम रूप दिया गया। दोनों दल कहां-कहां से चुनाव लड़ेंगे, इसका भी निर्णय कर लिया गया है। हालांकि इसकी घोषणा नहीं की गई है। सूत्रों की मानें तो नोयडा एरिया, जो महात्माबुद्ध नगर संसदीय क्षेत्रांतर्गत है। यहां से बसपा का उम्मीदवार ताल ठोकेगा।

साल 2014 के लोकसभा चुनाव में सपा को सात सीटों पर जीत मिली थी और 31 स्थानों पर दूसरे स्थान पर थी। वही बसपा को सूबे में एक भी सीट मयस्सर नहीं हुई थी, लेकिन बसपा 34 स्थानों पर दूसरे नंबर पर थी। फिर भी दोनों ने कई दौर की बैठक के बाद आपस में 37-37 सीटें बांटने पर सहमति जताई।

बताया जाता है कि सीटों के बंटवारे में अखिलेश यादव ने काफी लचीला रवैया अपनाया। वह भाजपा को रोकने के लिए मायावती की हर शर्त मानने पर तैयार हो गये हैं।

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महाराष्ट्र में भी भाजपा और शिवसेना को रोकने के लिए शुक्रवार को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस ने संयुक्त युगलबंदी की। सूबे की कुल 48 सीटों में से एनसीपी और कांग्रेस ने 20-20 सीटों पर अपना भाग्य आजमाने का फैसला किया और सहयोगी दलों के लिए 8 सीटें सुरक्षित की हैं। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में एनसीपी ने 21 सीटों पर लड़ कर पांच सीटें हासिंल की थीं। वहीं कांग्रेस ने 26 लोकसभा सीटों पर प्रत्याशी दी थी, लेकिन सफलता मात्र दो सीटों पर मिली थी।

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