अभाविप की बैठक में झारखंड में भी NRC को जरूरी माना गया

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रांची। आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद रांची महानगर द्वारा बांग्लादेशी घुसपैठ: राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा एवं समाधान  विषय पर केंद्रीय पुस्तकालय स्थित शहीद स्मृति सभागार में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में मुख्य अतिथि रांची विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ रमेश कुमार पांडेय, विशिष्ट अतिथि राजमहल विधायक सह अ.भा.वि.प. के पूर्व कार्यकर्ता श्री अनंत ओझा, मुख्य वक्ता अभाविप के प्रादेशिक विश्वविद्यालय कार्य प्रमुख श्री श्रीहरि बोरिकर, महानगर अध्यक्ष डॉक्टर पंपा सेन विश्वास, महानगर मंत्री श्री कृष्णा मिश्रा एवं एशियन योगा चैम्पियनशिप की स्वर्ण पदक विजेता संतोषी गुप्ता उपस्थित रहीं।

कार्यक्रम में विषय प्रवेश कराते हुए अभाविप के प्रांत संगठन मंत्री श्री याज्ञवल्क्य शुक्ला ने कहा कि आज हमारे देश में आतंकवाद, नक्सलवाद, गौ हत्या आदि विकट समस्याओं का केंद्र बांग्लादेश से आए हुए घुसपैठिए हैं। उनके द्वारा देश की अखंडता को तोड़ने के लिए इस तरह का प्रयास चल रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि झारखंड मे जल्द से जल्द NRC लागू किया जाए।

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विशिष्ट अतिथि श्री अनंत ओझा ने कहा कि बांग्लादेशी घुसपैठिए झारखंड को भी दूषित करने का कार्य मुख्य रूप से साहेबगंज, पाकुड, चतरा, हजारीबाग, जमशेदपुर में कर रहे हैं। उन्होंने बतलाया पाकुड जिले में पूर्व में रामपुर पंचायत होता था, लेकिन बांग्लादेशी घुसपैठियों के आने से उस पंचायत का नामोनिशान नहीं मिलता है। उन्होंने बताया कि बांग्लादेशी घुसपैठिए समाज की भोली-भाली आदिवासी जनजातियों के लड़के-लड़कियों को अपने माया जाल में फंसाकर उनसे विवाह करते हैं और उनके जल, जंगल और जमीन को हड़पने का कुकृत्य कर अपने आप को भारत देश का निवासी बता रहे हैं। यह सब कार्य सुनियोजित षड्यंत्र के द्वारा किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि बांग्लादेशी घुसपैठियों के कारण ही रोजगार से संबंधित समस्याओं का भी सामना अपने राज्य एवं देश की युवा तरुणाई को करना पड़ रहा है। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जमशेदपुर के आजाद नगर, रांची के निर्माण उद्योग में अधिक मात्रा में बांग्लादेशी घुसपैठिए अपनी पहचान छुपाकर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने आवाहन किया इस मुद्दे को राजनीतिक रंग ना देते हुए देश की समस्या समझते हुए एनआरसी को लागू होने दिया जाए।

मुख्य अतिथि डा. रमेश कुमार ने कहा कि इस मुद्दे को लेकर समाज को जागरूक करने के लिए विशेष जन आंदोलन की भी आवश्यकता है। यह एक गंभीर विषय है, जो 70- 80 के दशक में जो जिले बांग्लादेश की सीमा से सटे हुए हैं, वहां से प्रारंभ हुआ और घुसपैठिए पूरे देश में विभिन्न स्थानों पर रह कर देश विरोधी कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा पर किसी तरह का भी कंप्रोमाइज सरकार को नहीं करना चाहिए और समाज के लोगों को भी सरकार का साथ देना चाहिए।

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